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	<title>Women Success Story Archives - The CSR Journal</title>
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	<title>Women Success Story Archives - The CSR Journal</title>
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	<item>
		<title>लोन चुकाने की कहानी ने बदल दी महिला की जिंदगी, अब लौट रही है भारत</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/woman-pays-education-loan-after-studying-in-america-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Yadav Jyoti]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 02:21:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Women Success Story]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>-एक 24 वर्षीय महिला की कहानी इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस महिला ने जब केवल 20 साल की उम्र में अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का निर्णय लिया, तो उनके लिए यह एक नया और चुनौतीपूर्ण सफर था। अमेरिका में पढ़ाई करने के दौरान उन्होंने न केवल शिक्षा के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>-एक 24 वर्षीय महिला की कहानी इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस महिला ने जब केवल 20 साल की उम्र में अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का निर्णय लिया, तो उनके लिए यह एक नया और चुनौतीपूर्ण सफर था। अमेरिका में पढ़ाई करने के दौरान उन्होंने न केवल शिक्षा के लिए लोन लिया, बल्कि उस लोन को चुकाने में भी सफलता पाई।</h5>
<h2>न्यूयॉर्क में मिली नौकरी से लोन चुकाने का सफर</h2>
<h5>महिला ने बताया कि न्यूयॉर्क में अपनी डिग्री पूरी करने के बाद उन्हें एक अच्छी नौकरी मिली। इस नौकरी की मदद से उन्होंने न केवल अपने लोन का भुगतान किया, बल्कि अपने सपनों की यात्राएँ भी कीं। उन्होंने अपनी कमाई से दस देशों की यात्रा की, जिसमें यूरोप, एशिया और अमेरिका के विभिन्न खूबसूरत शहर शामिल हैं।</h5>
<h2>लोन चुकाने में आई मुश्किलें</h2>
<h5>महिला ने बताया कि लोन चुकाने में शुरुआत में कुछ मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने साहस और मेहनत से सभी बाधाओं को पार किया। वह अपनी आय को सही तरीके से मैनेज कर पाईं और अंततः केवल छह महीने में 45 लाख रुपए का लोन चुका दिया। यह उनके लिए एक बड़ा करिश्मा था।</h5>
<h2>सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी</h2>
<h5>महिला की यह प्रेरणादायक कहानी सोशल मीडिया पर लोगों को काफी प्रेरित कर रही है। कई लोग उनके जज्बे की तारीफ कर रहे हैं और इसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरणा के रूप में ले रहे हैं। उन्होंने साबित किया कि अगर मन में ठान लो तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।</h5>
<h2>अब भारत लौटने की योजना</h2>
<h5>अब वह अमेरिका से भारत लौटने की योजना बना रही हैं। उनका मानना है कि वे अपने अनुभवों को साझा कर औरों को भी प्रेरित कर सकती हैं। उन्होंने कहा है कि वह अपने देश में कुछ नया करना चाहती हैं और अन्य युवाओं को अपने लक्ष्यों को पाने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।</h5>
<h2>महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण</h2>
<h5>यह कहानी न केवल व्यक्तिगत सफलता की है, बल्कि यह उन सभी महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा है जो अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। यह बताता है कि कड़ी मेहनत और लगन से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। अब यह महिला भारत लौटकर औरों को प्रेरित करने के लिए तैयार है।</h5>
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		<title>वेंडिंग मशीन से निकला घर जैसा खाना &#8211; फ़ूड ATM मशीन ‘दालचीनी’ की सक्सेस स्टोरी ! </title>
		<link>https://thecsrjournal.in/prarna-kalra-turned-machine-into-kitchen-inspiring-journey-daalchini-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Dec 2025 04:47:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[empowering women]]></category>
		<category><![CDATA[Food ATM Machine]]></category>
		<category><![CDATA[Women Success Story]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; Paytm की पूर्व कर्मचारी ने एक साधारण सोच को 250 करोड़ की कंपनी में बदला, कभी वेंडिंग मशीन का मतलब था चिप्स, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक, लेकिन प्रेरणा कालरा ने ख़ुद से पूछा, “क्या मशीन से घर जैसा खाना नहीं मिल सकता?” लोगों ने हंसी उड़ाई, पर उसने सपने उड़ाए- “अगर ATM पैसे दे [&#8230;]</p>
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<h5>Paytm की पूर्व कर्मचारी ने एक साधारण सोच को 250 करोड़ की कंपनी में बदला, कभी वेंडिंग मशीन का मतलब था चिप्स, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक, लेकिन प्रेरणा कालरा ने ख़ुद से पूछा, “क्या मशीन से घर जैसा खाना नहीं मिल सकता?” लोगों ने हंसी उड़ाई, पर उसने सपने उड़ाए- “अगर ATM पैसे दे सकता है, तो खाना क्यों नहीं?” और आज, वही सोच बन गई है 250 करोड़ का स्टार्टअप- जिसका नाम है Daalchini। 4000+ मशीनें, 110+ शहर, लाखों ग्राहक! क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो दुनिया की आदत नहीं, दुनिया की जरूरत पहचानते हैं- “सोच बदलो, और दुनिया बदल जाएगी।”</h5>
<h2>प्रेरणा कालरा ने एक साधारण आइडिया को 250 करोड़ के स्मार्ट-रिटेल बिज़नेस में बदला</h2>
<h5>भारत में वेंडिंग मशीनों का नाम आते ही लंबे समय तक लोगों के मन में सिर्फ एक तस्वीर आती थी- चिप्स, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक से भरी मशीनें! यह माना जाता था कि वेंडिंग मशीनें सिर्फ स्नैक्स देने के लिए बनी हैं। लेकिन इसी सोच के बीच एक महिला ने सवाल उठाया, “क्या मशीन से घर जैसा ताज़ा खाना नहीं मिल सकता?” और इस सवाल के साथ शुरू हुआ उस विचार का सफर, जिसने भारत में स्मार्ट ईटिंग और डिजिटल फूड सर्विस को नया चेहरा दिया। इस सफर की नायक हैं प्रेरणा कालरा, जिन्होंने Daalchini Smart Vending Network की शुरुआत की और इसे भारत की तेजी से बढ़ती हुई हेल्दी फूड टेक कंपनियों में बदल दिया।</h5>
<h2>Paytm से Daalchini तक- प्रेरणा कालरा की अलग सोच</h2>
<h5>प्रेरणा कालरा की कहानी की शुरुआत हुई Paytm से, जहां वह तीसरी कर्मचारी के रूप में शामिल हुई थीं। डिजिटल टेक्नोलॉजी, फिनटेक और उपभोक्ता व्यवहार को समझने का मौका उन्हें यहीं मिला। लेकिन यह विचार उन्हें तब आया जब एक वर्क ट्रिप पर वह लंबे समय तक सही भोजन नहीं तलाश पाईं और उन्हें मजबूरी में पैक्ड स्नैक्स या जंक फूड खाना पड़ा। यह समस्या सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि करोड़ों नौकरीपेशा युवाओं, कॉलेज छात्रों और यात्रियों की थी, जिन्हें बाहर हेल्दी और ताज़ा खाना मिलने में मुश्किल होती थी। इसी अनुभव ने उनके मन में यह सोच पैदा की कि अगर बैंकिंग के लिए ATM हैं, तो खाने के लिए भी ऐसी तकनीक क्यों न हो, जो लोगों को जब चाहे तब गुणवत्ता वाला खाना दे सके।</h5>
<h2>लीक से हटकर सोच, पर हिम्मत नहीं हारी</h2>
<h5>2016 में उन्होंने इस विचार पर काम शुरू किया। यह आसान नहीं था, क्योंकि भारत में ताज़ा और गर्म भोजन को मशीन के माध्यम से उपलब्ध कराने की तकनीक उस समय मौजूद नहीं थी। उन्हें मशीन, तापमान नियंत्रण, खाना ताज़ा रखने की व्यवस्था, डिजिटल पेमेंट सिस्टम, डिलीवरी मॉडल, और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई पहलुओं पर काम करना पड़ा। शुरुआती चरण में लोगों को यह विचार बहुत असामान्य लगा, लेकिन प्रेरणा ने हिम्मत नहीं हारी।</h5>
<h2>Delhi NCR से शुरू हुआ सफ़र</h2>
<h5>2019 में उन्होंने आधिकारिक रूप से Daalchini लॉन्च की। पहली मशीन दिल्ली-एनसीआर के एक ऑफिस में लगाई गई और लोगों की प्रतिक्रिया उम्मीद से बेहतर थी। लोग चकित थे कि एक मशीन से उन्हें इडली-सांभर, रोटी-सब्ज़ी, खिचड़ी, दाल-चावल या सलाद जैसे ताज़ा भारतीय व्यंजन मिल सकते हैं। मशीनें पूरी तरह IoT यानी इंटरनेट-आधारित तकनीक से संचालित थीं, जिससे खाना हमेशा ताज़ा रहे और मशीन बिना देखरेख के भी चल सके।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/janta-curfew-22-march-2020-ahead-of-68-days-nationwide-lockdown-covid-hindi/">Lockdown में दुनिया थमी</a>, नहीं रुकी दालचीनी</h2>
<h5>2020 में जब कोरोना महामारी आई, तब लोगों को संपर्करहित और सुरक्षित खाने के तरीकों की जरूरत बढ़ गई। यही वजह थी कि दालचीनी ने लॉकडाउन के दौरान भी तेजी से विस्तार किया। ऑफिस बंद थे, लेकिन हस्पताल, कंपनियों के कैंपस, हॉस्टल, मेट्रो स्टेशन और पब्लिक प्लेसेस पर इन मशीनों ने लोगों को सुरक्षित और पैक्ड भोजन उपलब्ध कराया। धीरे-धीरे लोगों में मशीन से खाना लेने का भरोसा बढ़ा और कंपनी की लोकप्रियता भी।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/tribal-women-jharkhand-turning-mahua-into-cold-press-oil-inspiring-rural-entrepreneurs-across-india-hindi/">महिला सशक्तिकरण की राह </a></h2>
<h5>आज Daalchini सिर्फ मशीनों का नेटवर्क नहीं बल्कि एक बदलाव का प्रतीक है। इस कंपनी की 4000 से अधिक मशीनें अब भारत के 110 से ज्यादा शहरों में लगी हैं और हर दिन लाखों लोग इसका भोजन लेते हैं। खास बात यह है कि इस कंपनी ने सिर्फ ग्राहकों की समस्या का समाधान नहीं किया बल्कि हजारों महिलाओं और घरेलू कुक्स को भी नया मंच दिया। कई महिला होम शेफ अब दालचीनी के माध्यम से अपनी कमाई का साधन बना चुकी हैं और अपने छोटे किचन को बिजनेस में बदल रही हैं।</h5>
<h2>QR स्कैन से मिलता गरमागरम भोजन</h2>
<h5>प्रेरणा कालरा कहती हैं कि भारतीय लोग सिर्फ सुविधा नहीं चाहते, बल्कि ऐसा खाना चाहते हैं जिसमें स्वाद और सेहत दोनों हो। उस जरूरत को समझते हुए दालचीनी लगातार अपने मेन्यू में पारंपरिक भारतीय व्यंजन, लो-कैलोरी फूड, मिलेट बेस्ड भोजन और डाइट-फ्रेंडली विकल्प जैसे पोहे, इडली, पाव-भाजी, रोटियां, राजमा-चावल, सलाद जोड़ रही है। मशीन से खाना लेने का अनुभव भी बेहद आसान है। आप मशीन के सामने फोन स्कैन करते हैं, UPI या कार्ड से भुगतान करते हैं और कुछ ही सेकंड में गरम ताज़ा खाना आपके हाथ में होता है।</h5>
<h2>डिजिटल इंडिया की नई पहचान ‘दालचीनी’</h2>
<h5>भारत के बदलते जीवनशैली के दौर में, जहां लोग तेज़ रफ्तार जिंदगी जी रहे हैं, दालचीनी जैसे मॉडल यह साबित कर रहे हैं कि तकनीक अगर सही दिशा में इस्तेमाल हो, तो वह जीवन को आसान, स्वस्थ और बेहतर बना सकती है। यह स्टार्टअप सिर्फ एक कंपनी नहीं बल्कि यह संदेश है कि बदलाव हमेशा बड़े निवेश से नहीं, बल्कि एक सही सवाल और समाधान की इच्छा से शुरू होता है। आज जब लोग दालचीनी मशीन के पास रुककर गरम खाना लेते हैं, तो शायद उन्हें यह पता नहीं होता कि इसके पीछे एक महिला की दूरदर्शिता, कड़ी मेहनत और विश्वास है, इतना कि उन्होंने दुनिया की धारणा बदल दी कि मशीन सिर्फ स्नैक्स देने के लिए नहीं, बल्कि घर जैसा खाना देने के लिए भी हो सकती है।</h5>
<h5>और इसी तरह, एक साधारण आइडिया ने भारत में एक नई क्रांति ला दी, जहां सुविधा, स्वाद और सेहत, तीनों साथ चलते हैं।</h5>
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		<title>20 वर्षीय ऋतुपर्णा को मिला रोल्स-रॉयस से ₹72 लाख का पैकेज, कई भारतीय युवा विदेशी कंपनियों में चमके</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/rituparna-journey-rolls-royce-new-chapter-indias-innovation-story-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 10:28:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CSR Education and Skill Training]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Responsible Stars]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Trending]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Karnataka News]]></category>
		<category><![CDATA[Rolls Royce]]></category>
		<category><![CDATA[Women Success Story]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; बीते दिनों कर्नाटक की 20 वर्षीय छात्रा ऋतुपर्णा के.एस. का नाम देशभर में सुर्खियों में रहा और होना भी चाहिए। एक युवती, जिसने NEET में असफल होकर डॉक्टर बनने का सपना छोड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। उसने रास्ता बदला, लक्ष्य नहीं ! आज वह Rolls-Royce जैसी वैश्विक एयरोइंजन कंपनी में ₹72 लाख वार्षिक पैकेज के साथ नियुक्त हुई [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="gs">
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<h5>बीते दिनों कर्नाटक की 20 वर्षीय छात्रा ऋतुपर्णा के.एस. का नाम देशभर में सुर्खियों में रहा और होना भी चाहिए। एक युवती, जिसने NEET में असफल होकर डॉक्टर बनने का सपना छोड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। उसने रास्ता बदला, लक्ष्य नहीं ! आज वह Rolls-Royce जैसी वैश्विक एयरोइंजन कंपनी में ₹72 लाख वार्षिक पैकेज के साथ नियुक्त हुई है। यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं की नई मानसिकता, नए साहस और नई दिशा का प्रतीक है।</h5>
<h2>20 वर्षीय भारतीय छात्रा को मिल 72 लाख का ऑफर</h2>
<h5>कर्नाटक की 20 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा ऋतुपर्णा के. एस. ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। <a href="https://www.rolls-royce.com/about.aspx">ब्रिटेन की प्रतिष्ठित एयरो-इंजन निर्माता कंपनी रोल्स-रॉयस</a> ने उन्हें ₹72.3 लाख वार्षिक पैकेजपर नियुक्त किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋतुपर्णा जेट इंजन निर्माण विभाग से जुड़ने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला इंजीनियर मानी जा रही हैं।</h5>
<h2>मेडिकल से इंजीनियरिंग तक का सफर</h2>
<h5>ऋतुपर्णा के एस, कर्नाटक के थिर्थहल्ली तालुक के कोडुरु की रहने वाली ऋतुपर्णा का पहला सपना डॉक्टर बनने का था। उन्होंने NEET परीक्षा दी, पर सीट न मिलने पर उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने मंगालुरु स्थित Sahyadri College of Engineering and Management में Robotics और Automation Engineering में दाखिला लिया।</h5>
<h2>कॉलेज के दिनों में ही अंतरराष्ट्रीय ख्याति</h2>
<h5>कॉलेज के दौरान ऋतुपर्णा ने एरकनट किसानों के लिए रोबोट विकसित किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में सराहा गया। बाद में Rolls-Royce ने उन्हें आठ महीने की इंटर्नशिप पर लिया। उनकी प्रदर्शन क्षमता को देखते हुए कंपनी ने पहले ₹39 लाख का प्री-प्लेसमेंट ऑफर दिया, बाद में यह बढ़ाकर ₹72 लाख कर दिया गया। इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने भारतीय समयानुसार रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक काम किया ताकि ब्रिटेन और अमेरिका की समयसीमा के अनुसार प्रोजेक्ट पूरे हो सकें। ऋतुपर्णा आने वाले महीनों में टेक्सास स्थित जेट इंजन यूनिट में जॉइन करेंगी।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/indian-youths-jobs-in-abroad-free-visa-hindi/">अन्य भारतीय युवाओं की शानदार उपलब्धियां</a></h2>
<h2>आयुष्मान त्रिपाठी – ₹1.20 करोड़ का ऑफर</h2>
<h5>छत्तीसगढ़ स्थित IIIT नवा रायपुर के छात्र आयुष्मान त्रिपाठी को अमेरिकी कंपनी The Trade Desk ने ₹1.20 करोड़ का पैकेज दिया है। खास बात यह है कि वे IIT या IIM से नहीं हैं, फिर भी देश के टॉप पैकेज पाने वालों में शामिल हुए। IIIT-Naya Raipur की 2024-25 प्लेसमेंट रिपोर्ट में उनके इस ऑफर को हाईलाइट किया गया है। प्लेसमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, IIIT Naya Raipur में औसत पैकेज 18.9 लाख और मीडियन पैकेज 14.5 लाख रुपये है।</h5>
<h2>विपुल जैन – ₹1.45 करोड़ का ऑफर</h2>
<h5>IIIT प्रयागराज (इलाहाबाद) के छात्र विपुल जैन को अमेरिकी क्लाउड कंपनी Rubrik से ₹1.45 करोड़ का ऑफर मिला है। यह संस्थान के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक पैकेज है।</h5>
<h2>यथिन प्रकाश केथेपल्ली – ₹1.50 करोड़ का ऑफर</h2>
<h5>IIIT नवा रायपुर के ही छात्र यथिन को नीदरलैंड की स्टार्टअप OTEX ने करीब ₹1.50 करोड़ का पैकेज दिया है। वे कंपनी की फाउंडिंग टीम का हिस्सा बनने वाले हैं। यह ऑफर सिर्फ सैलेरी नहीं, बल्कि स्टार्टअप की टीम में भागीदारी का अवसर भी है जो टेक्नोलॉजी + एंटरप्रेन्योरशिप दोनों दिशा में उनकी भूमिका दर्शाता है।</h5>
<h2>बदलता परिदृश्य</h2>
<h5>हालिया ट्रेंड बताता है कि अब बड़ी विदेशी कंपनियां सिर्फ IIT-IIM के छात्रों को नहीं, बल्कि छोटे और उभरते इंजीनियरिंग संस्थानों से भी प्रतिभा चुन रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि, “भारतीय युवाओं में तकनीकी दक्षता, प्रोजेक्ट अनुभव और वैश्विक कार्य संस्कृति की अनुकूलता लगातार बढ़ रही है, यह पैकेज उसी का संकेत है।” ऋतुपर्णा का संदेश भी यही है, “बड़े सपने देखने से कुछ नहीं होता, आपको 200 प्रतिशत मेहनत करनी पड़ती है।”</h5>
<h2>असफलता के बाद लिखी सफलता की नई इबारत</h2>
<h5>Rithuparna KS की कहानी यह दर्शाती है कि असफलता (जैसे NEET में न पाना) एक अंत नहीं, बल्कि नए रास्ते की शुरुआत भी हो सकती है। उनकी मेहनत, तकनीकी कौशल, और इंटर्नशिप में सफलता ने उन्हें एक प्रतिष्ठित ग्लोबल कंपनी (रोल्स-रॉयस) में बहुत बड़ा पैकेज दिलाया। इसके साथ ही, Ayushman Tripathi, Vipul Jain, Yathin Prakash जैसे अन्य युवा यह दिखाते हैं कि भारत के तकनीकी छात्र सिर्फ IIT/IIM से नहीं, बल्कि अन्य कॉलेजों से भी बहुत बड़े पैकेज पा सकते हैं। यह ट्रेंड प्रेरणादायक है, क्योंकि यह बताता है कि कौशल + जुनून + अवसर मिलकर बड़ी सफलता ला सकते हैं और यह सिर्फ अभिजात कॉलेजों तक सीमित नहीं है। भारतीय युवाओं की वैश्विक कंपनियों में बढ़ती पहुंच “न्यू इंडिया” की ताकत को दिखाती है।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/rituparna-journey-rolls-royce-new-chapter-indias-innovation-story-hindi">20 वर्षीय ऋतुपर्णा को मिला रोल्स-रॉयस से ₹72 लाख का पैकेज, कई भारतीय युवा विदेशी कंपनियों में चमके</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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		<title>CEO नहीं बनाया तो महिला ने कंपनी खरीद कर बॉस को ही दिखाया बाहर का रास्ता</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/denied-ceo-role-applebees-julia-stewart-bought-company-fired-old-boss-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Sep 2025 06:26:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[World]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Applebee's]]></category>
		<category><![CDATA[Julia Stewart]]></category>
		<category><![CDATA[Women Success Story]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हाल ही में एक पॉडकास्ट में जूलिया स्टीवर्ट की कहानी सामने आई है। जूलिया के मुताबिक Applebee’s नाम की कंपनी ने उसे सीईओ बनाने से इनकार कर दिया। बाद में उसने कंपनी ही खरीद ली और अपने पुराने बॉस को नौकरी से निकाल दिया। जूलिया स्टीवर्ट ने लिया ग़ज़ब का बदला सोशल मीडिया पर इन [&#8230;]</p>
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<h5>हाल ही में एक पॉडकास्ट में जूलिया स्टीवर्ट की कहानी सामने आई है। जूलिया के मुताबिक Applebee’s नाम की कंपनी ने उसे सीईओ बनाने से इनकार कर दिया। बाद में उसने कंपनी ही खरीद ली और अपने पुराने बॉस को नौकरी से निकाल दिया।</h5>
<h2>जूलिया स्टीवर्ट ने लिया ग़ज़ब का बदला</h2>
<h5>सोशल मीडिया पर इन दिनों जूलिया स्टीवर्ट नाम एक महिला खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। वजह जानकर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे। जूलिया ने हाल ही में खुलासा किया है कि जिस कंपनी ने उसे CEO के पोस्ट पर प्रमोशन देने से इनकार कर दिया था, अब उसी कंपनी को स्टीवर्ट ने खरीद लिया है। इतना ही नहीं, जिस बॉस ने उसे प्रमोशन देने से इनकार किया था, जूलिया ने उसे नौकरी से निकाल दिया।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/kalpana-saroj-inspiring-journey-womens-day-success-story-hindi/">जूलिया स्टीवर्ट ने बदली कॉर्पोरेट जगत की कहानी</a></h2>
<h5>कार्पोरेट दुनिया में प्रमोशन ना मिलना आम बात है, लेकिन जूलिया ने जो किया, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। जब उसके बॉस ने सीईओ बनाने से मना कर दिया तो उसने सालों बाद पूरी कंपनी ही खरीद ली और उसी बॉस को नौकरी से निकाल दिया। यह घटना बिजनेस जगत की सबसे बड़ी बदले की कहानी बन गई। जूलिया स्टीवर्ट ने वह सब कुछ किया जो उनसे कहा गया था। रेस्टोरेंट चेन Applebee’s की अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने संघर्षरत चेन को पटरी पर लाने के लिए अथक परिश्रम किया और एक ऐसी टीम बनाई जिसने रेस्टोरेंट को फिर से स्थापित होने में अथक परिश्रम किया। मुनाफ़ा बढ़ गया था, शेयर दोगुने हो गए थे, और कंपनी मज़बूत स्थिति में थी। फिर भी, जब उन्होंने प्रमोशन की उम्मीद में सीईओ के कार्यालय का रुख किया, तो उन्हें &#8220;नहीं&#8221; का जवाब मिला। स्टीवर्ट ने अंततः नौकरी छोड़ दी और बाद में कंपनी खरीदने और उस कार्यकारी को हटाने के लिए वापस लौटीं जिसने उन्हें मना कर दिया था।</h5>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Julia Stewart was a waitress for IHOP at 16. Through her hard work, she later went onto become the president of Applebee&#8217;s. When Applebee&#8217;s passed her over for the CEO position, she left to become CEO of IHOP and then bought Applebee&#8217;s. <a href="https://t.co/46A0dmwU9m">pic.twitter.com/46A0dmwU9m</a></p>
<p>— Women Posting W&#8217;s (@womenpostingws) <a href="https://twitter.com/womenpostingws/status/1826693435216331191?ref_src=twsrc%5Etfw">August 22, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2>नहीं मिला प्रमोशन तो ख़रीद ली कंपनी</h2>
<h5>सीरियल इंटरप्रेन्योर और रेस्टोरेंट ग्रुप एग्जीक्यूटिव रह चुकी जूलिया स्टीवर्ट ने एक पॉडकास्ट में बताया कि वह पहले एपलबीज कंपनी की प्रेसिडेंट थी। तब उन्हें वादा किया गया था कि अगर वह कंपनी को फायदा दिलाने में सफल रही तो उन्हें सीईओ बना दिया जाएगा। स्टीवर्ट बताती है कि उसने एक नई टीम बनाई और कंपनी को ऊपर उठाने में दिन-रात मेहनत की। स्टीवर्ट ने तीन साल की मेहनत के बाद कंपनी को फायदा भी पहुंचाया। उनके कार्यकाल के दौरान कंपनी के शेयर की कीमत दोगुने से भी अधिक हो गई। इसलिए 2001 में उन्होंने तत्कालीन सीईओ लॉयड हिल के साथ इस विषय पर चर्चा की। वादे के अनुसार जब स्टीवर्ट सीईओ से पूछने गई कि अब मेरे प्रमोशन का समय आ गया है, तो सीईओ अपनी बात से मुकर गया।</h5>
<h2>नई कंपनी में सफलता और बड़ा प्लान</h2>
<h5>एपलबीज छोड़ने के बाद जूलिया ने IHOP कंपनी जॉइन की और वहां पांच साल काम किया। उन्होंने वहां भी जबरदस्त सफलता हासिल की। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनी किसी बड़े अधिग्रहण की ओर बढ़ सकती है। तभी उनके मन में विचार आया कि क्यों न अपनी पुरानी कंपनी एपलबीज को ही खरीद लिया जाए। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को यह आइडिया पसंद आया और डील पर काम शुरू हुआ।</h5>
<h2>2.3 बिलियन डॉलर में खरीदी कंपनी, बॉस को दी छुट्टी</h2>
<h5>इसके बाद IHOP ने 2.3 बिलियन डॉलर में एपलबीज को खरीद लिया। खरीद के बाद जूलिया ने सबसे पहला फैसला लिया, अपने पुराने बॉस को निकालने का, जिसने उन्हें सीईओ का पद देने से मना किया था। उन्होंने डाइनिंग रेस्टोरेंट श्रृंखला IHOP के नेतृत्व में Applebee&#8217;s को 2.3 अरब डॉलर में अधिग्रहित किया। स्टीवर्ट ने कहा, &#8220;अब, ज़ाहिर है, आप बदला लेने के लिए 2.3 अरब डॉलर उधार नहीं लेते। आप ऐसा बिल्कुल नहीं करते। लेकिन हमने 2.3 अरब डॉलर उधार लिए थे। हमने Applebee&#8217;s को खरीदा था।&#8221; बाद में उन्होंने Applebee के पूर्व सीईओ को सूचित किया कि अब नेतृत्व की आवश्यकता नहीं है और उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद जूलिया स्टीवर्ट डाइन ब्रांड्स ग्लोबल की सीईओ बनीं।</h5>
<h2> दो कंपनियों को एक साथ बुलंदी तक पहुंचाया</h2>
<h5>जूलिया स्टीवर्ट के फ्रैंचाइज़िंग मॉडल ने शेयरों में ज़बरदस्त उछाल दर्ज किया और पांच साल के भीतर लगभग 1.1 अरब डॉलर का कर्ज़ चुका दिया। एप्पलबीज़ की घटती बिक्री के बीच, 2017 में इस्तीफ़ा देने से पहले, उन्होंने एक दशक तक दोनों ब्रांड्स का नेतृत्व किया। आज, इस सौदे से बनी मूल कंपनी डाइन ब्रांड्स के 3,500 से ज़्यादा रेस्टोरेंट हैं और इसका बाज़ार मूल्य 60 करोड़ डॉलर से ज़्यादा है। अब 70 साल की उम्र में भी वे कई कंपनियों के बोर्ड में हैं और एक वेलनेस ऐप की फाउंडर भी हैं।</h5>
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		<title>Women Success Story: कभी घर चलाने के लिए पकड़ती थी मछली, अब लहरों पर करेगी राज, कावेरी डिमर नेवी में शामिल</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/women-success-story-international-womens-day-kaveri-dimar-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 07:39:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CSR Women & Child Welfare]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[International Women Day]]></category>
		<category><![CDATA[Women Success Story]]></category>
		<category><![CDATA[महिला दिवस]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Women Success Story: आज महिला दिवस (International Women&#8217;s Day) है ऐसे में आईये ऐसी कुछ महिलाओं की बात करते है जिन्होंने अपने जज्बे से वो कारनामा कर दिखाया जिससे आज उनकी वाहवाही हो रही है। खंडवा जिले की गरीब लेकिन जज़्बे से लबरेज़ बेटी कावेरी डिमर (Kaveri Dimar Story), जो कभी पिता के कर्ज चुकाने [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h5>Women Success Story: आज महिला दिवस (<a href="https://thecsrjournal.in/international-womens-day-wakeup-before-you-celebrate-hindi/">International Women&#8217;s Day</a>) है ऐसे में आईये ऐसी कुछ महिलाओं की बात करते है जिन्होंने अपने जज्बे से वो कारनामा कर दिखाया जिससे आज उनकी वाहवाही हो रही है। खंडवा जिले की गरीब लेकिन जज़्बे से लबरेज़ बेटी कावेरी डिमर (Kaveri Dimar Story), जो कभी पिता के कर्ज चुकाने के लिए नर्मदा नदी में मछलियां पकड़ती थी, आज इंडियन नेवी में शामिल होकर देश की सेवा करने के लिए तैयार है। संघर्ष, मेहनत और हौसले की ऐसी कहानी शायद ही पहले सुनी गई हो। कावेरी ने इंदिरा सागर बांध के बैकवाटर में नाव चलाकर तैराकी सीखी और फिर ऐसा हुनर दिखाया कि विदेशों तक नाम गूंज उठा। मात्र 17 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई, एशियन चैंपियनशिप, वर्ल्ड चैंपियनशिप, ओलंपिक क्वालिफायर समेत कई बड़े टूर्नामेंट में दमखम दिखाया। नेशनल चैंपियनशिप में 45 गोल्ड, 6 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देशभर में अपनी पहचान बना ली।</h5>
<h2>Women Success Story: पिता का कर्ज चुकाने के लिए जाल से मछली निकालती थी बेटियां</h2>
<h5>कावेरी की काबिलियत को सोशल मीडिया ने नई उड़ान दी। नाव चलाने का वीडियो वायरल हुआ, तो तत्कालीन खेल अधिकारी जोसफ बक्सला ने गांव पहुंचकर तीनों बहनों को भोपाल स्पोर्ट्स अकादमी में ट्रायल दिलवाया। कावेरी का प्रदर्शन सबसे बेहतर निकला और 2016 में उसे एमपी वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी में दाखिला मिल गया। 40 हजार के कर्ज में डूबे पिता ने जब नदी में जाल डालकर मछलियां पकड़नी शुरू कीं, तो बेटियां भी साथ आ गईं। सुबह-सुबह तीनों बहनें जाल से मछली निकालकर ठेकेदार को बेचतीं, ताकि पिता का कर्ज उतार सके। परिवार का पेट पालने के लिए बचपन से मेहनत करने वाली कावेरी, अब देश की रक्षा के लिए समंदर की लहरों पर राज करेगी!</h5>
<h2>नर्मदा की लहरों से दुनिया तक पहुंचने का सफर</h2>
<h5>अब कावेरी का सिलेक्शन इंडियन नेवी में हो गया है। इंडियन नेवी में चयन के बाद जब कावेरी अपने गांव लौटी, तो मां-बाप की आंखों में यकीन नहीं हो रहा था। तिलक लगाकर बेटी का सम्मान किया, गांववालों ने फूल मालाओं से स्वागत किया।  गांव की इस बेटी ने बता दिया कि हालात कैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हैं, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है! <a href="https://www.un.org/en/observances/womens-day">International Women&#8217;s Day</a></h5>
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