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	<title>UN Report Archives - The CSR Journal</title>
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	<title>UN Report Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>अमेरिका और UAE में हैं सबसे ज्यादा भारतीय प्रवासी: UN की वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Yadav Jyoti]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 May 2026 08:48:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[UAE]]></category>
		<category><![CDATA[UN Report]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संयुक्त राष्ट्र की &#8216;वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026&#8217; में बताया गया है कि 2024 में भारत से संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका दुनिया के प्रमुख प्रवासन गलियारों में शामिल हैं। भारत-UAE पाँचवें और भारत-अमेरिका छठे नंबर पर हैं। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय लोग अमेरिका और UAE में काम और शिक्षा के लिए जाते हैं। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>संयुक्त राष्ट्र की &#8216;वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026&#8217; में बताया गया है कि 2024 में भारत से संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका दुनिया के प्रमुख प्रवासन गलियारों में शामिल हैं। भारत-UAE पाँचवें और भारत-अमेरिका छठे नंबर पर हैं। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय लोग अमेरिका और UAE में काम और शिक्षा के लिए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 304 मिलियन लोग अपने जन्म के देश से बाहर रह रहे हैं।</h5>
<h2>भारत के प्रवासी श्रमिकों की स्थिति</h2>
<h5>यूएई में सर्वाधिक भारतीय प्रवासियों की मौजूदगी है, जहाँ लगभग 8 मिलियन अंतरराष्ट्रीय प्रवासी रहते हैं। इनमें भारतीय श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक है। इस कॉरिडोर में कामकाजी लोग शामिल हैं जो अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने की तलाश में हैं। भारतीय प्रवासियों के लिए यूएई एक प्रमुख गंतव्य बन गया है, जिसके कारण ये कॉरिडोर तेजी से बढ़ रहा है।</h5>
<h2>यूएस में भारतीय प्रवासियों की संख्या</h2>
<h5>रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 2024 में लगभग 3.2 मिलियन भारतीय प्रवासी अमेरिका में रह रहे थे। यह संख्या मेक्सिको के बाद विदेश में जन्मे लोगों का दूसरा सबसे बड़ा समूह है। कुछ एजेंसियों के हालिया आँकड़ों के अनुसार, अमेरिका में भारतीय प्रवासियों की संख्या लगभग 5 मिलियन है।</h5>
<h2>अन्य देशों का प्रवासन पर असर</h2>
<h5>अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के बाद, चीन और फिलीपींस के प्रवासियों की संख्या भी उल्लेखनीय है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में अमेरिका में क्रमशः 2.5 मिलियन और 2.3 मिलियन प्रवासी चीन और फिलीपींस से थे। यह दिखाता है कि एशियाई देशों के लिए अमेरिका एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है।</h5>
<h2>वैश्विक प्रवासन के आंकड़े</h2>
<h5>रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1990 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों का हिस्सा कुल जनसंख्या में 2.9 प्रतिशत था, जो 2024 तक बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर मेक्सिको से अमेरिका का कॉरिडोर अब भी सबसे बड़ा कॉरिडोर है। इसमें लगभग 11 मिलियन लोग शामिल हैं।</h5>
<h2>भारत से अन्य देशों की ओर प्रवासन</h2>
<h5>रिपोर्ट में यह ध्यान रखने योग्य है कि भारत से अफगानिस्तान और सीरिया की ओर भी प्रवास बढ़ रहा है। अफगानिस्तान से ईरान का कॉरिडोर दूसरे और सीरिया से तुर्की का कॉरिडोर तीसरे स्थान पर है। इन कॉरिडोर्स में अस्थायी स्थिति में रहने वाले लोग शामिल हैं।</h5>
<h2>UN की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु</h2>
<h5>IOM की रिपोर्ट में कई दशकों से भारत से अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या में वृद्धि की पुष्टि की गई है। ये प्रवासी उच्च कौशल वाले कार्यकर्ता या अंतरराष्ट्रीय छात्र के रूप में पहुंचे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कई वर्षों में भारत से उच्च शिक्षित और कुशल प्रवासियों की मांग में बढ़ोतरी हुई है।</h5>
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		<title>United Nations का चौंकाने वाला खुलासा: महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगह ‘घर’ ही क्यों?</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/united-nations-report-home-most-dangerous-place-for-women-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Yadav Jyoti]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 09:07:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[World]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Domestic Violence]]></category>
		<category><![CDATA[UN Report]]></category>
		<category><![CDATA[Women Safety]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दुनिया भर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अक्सर कहा जाता है कि बाहर निकलना जोखिम भरा है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट इस सोच को पूरी तरह उलट देती है. रिपोर्ट का दावा है कि वर्ष 2024 में हर 10 मिनट में एक महिला की हत्या उसी के किसी करीबी ने कीI [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>दुनिया भर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अक्सर कहा जाता है कि बाहर निकलना जोखिम भरा है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट इस सोच को पूरी तरह उलट देती है. रिपोर्ट का दावा है कि वर्ष 2024 में हर 10 मिनट में एक महिला की हत्या उसी के किसी करीबी ने कीI पति, पार्टनर, पिता, भाई या कोई अन्य रिश्तेदारI यह तथ्य बताता है कि महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा उनके घर के भीतर ही मौजूद हैI</h5>
<h2>हर 10 मिनट में एक महिला की हत्या किसके हाथों?</h2>
<h5>UNODC और UN Women द्वारा जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में करीब 50,000 महिलाओं और लड़कियों को उनके अंतरंग साथी या परिवार के सदस्य ने मौत के घाट उतार दियाI यह औसतन प्रतिदिन 137 हत्याओं के बराबर हैI रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि महिलाओं की कुल हत्याओं में से 60% हत्याएं उनके किसी करीबी ने की, जबकि पुरुषों की हत्याओं में यह आंकड़ा मात्र 11% हैI यानी महिलाओं के लिए खतरा उन लोगों से सबसे ज्यादा है जिनपर वे सबसे अधिक भरोसा करती हैंI</h5>
<h2>2024 का आंकड़ा कम क्यों, जब खतरा पहले जैसा ही है?</h2>
<h5>रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2024 का आंकड़ा 2023 से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन इसे प्रगति नहीं माना जा सकताI कारण कई देशों ने पूरा डेटा उपलब्ध नहीं करायाI इसका मतलब है कि वास्तविक स्थिति इसके मुकाबले और भी डरावनी हो सकती हैI UN का कहना है कि फेमिसाइड में कमी का कोई संकेत नहीं दिख रहा, बल्कि यह अपराध और जटिल होता जा रहा हैI</h5>
<h2>अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित</h2>
<h5>रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का कोई भी क्षेत्र फेमिसाइड से अछूता नहीं हैI लेकिन अफ्रीका सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 2024 में करीब 22,000 मामले दर्ज किए गएI एशिया, अमेरिका, यूरोप और ओशिनिया—कहीं भी महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैंI सभी महाद्वीपों में घरेलू हिंसा और करीबी रिश्तेदारों द्वारा हत्या की संख्या चिंताजनक हैI</h5>
<h2>घर महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक स्थान क्यों बना?</h2>
<h5>रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है हत्याओं के जोखिम के मामले में घर अभी भी महिलाओं और लड़कियों के लिए सबसे खतरनाक जगह बना हुआ हैI इसकी वजहें: घरेलू तनाव, नियंत्रण और पितृसत्तात्मक दबाव, रिश्तों में हिंसा और दुर्व्यवहार, आर्थिक और भावनात्मक निर्भरता, कई देशों में कमजोर कानून और धीमी न्याय प्रक्रिया</h5>
<h2>डिजिटल हिंसा ने स्थिति को और बिगाड़ा</h2>
<h5>रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि डिजिटल दुनिया महिलाओं के लिए नया रणक्षेत्र बन चुकी हैI ऑनलाइन अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जैसे- गैर-सहमति से तस्वीरें या वीडियो शेयर करना, डॉक्सिंग (निजी जानकारी फैलाना), डीपफेक वीडियो, साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन धमकियां और बदनामी, ये अपराध अक्सर ऑफलाइन हिंसा की शुरुआत बन जाते हैं और कई बार हत्या तक पहुंच जाते हैंI</h5>
<h2>क्या है जरूरत?</h2>
<h5>रिपोर्ट जोर देती है कि अगर फेमिसाइड पर काबू पाना है तो ऐसे मजबूत कानून बनाए जाएं जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार की हिंसा को अपराध मानें, अपराधियों को पहली हिंसक घटना से ही जवाबदेह ठहराया जाए, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सख्त निगरानी हो, और समाज को महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी सोच बदलनी होगीI</h5>
<h5>UN के मुताबिक, फेमिसाइड अब वैश्विक महामारी का रूप ले चुका हैI जब तक कानून, समाज और टेक्नोलॉजी मिलकर कार्रवाई नहीं करेंगे, महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ एक कल्पना बनी रहेगीI</h5>
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