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	<title>Shri Bankebihari Mandir Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>श्रीबांकेबिहारी मंदिर में चांदी चोरी की अफवाह, हकीकत में केमिकल युक्त इत्र से हो रहा है धातु का क्षरण !</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/no-silver-theft-vrindavan-banke-bihari-temple-chemical-based-perfumes-causing-corrosion-says-management-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 06:29:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; श्रीबांकेबिहारी मंदिर से जुड़ी बड़ी खबर: गर्भगृह की ग़ायब चांदी को लेकर फैली अफवाहों पर मंदिर प्रबंधन का बड़ा बयान! वायरल वीडियो से मची हलचल के बीच मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया- गर्भगृह से चांदी चोरी नहीं हुई, केमिकल युक्त इत्र के कारण चांदी का हो रहा है क्षरण, श्रद्धालुओं से संयम बरतने की [&#8230;]</p>
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<h5>श्रीबांकेबिहारी मंदिर से जुड़ी बड़ी खबर: गर्भगृह की ग़ायब चांदी को लेकर फैली अफवाहों पर मंदिर प्रबंधन का बड़ा बयान! वायरल वीडियो से मची हलचल के बीच मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया- गर्भगृह से चांदी चोरी नहीं हुई, केमिकल युक्त इत्र के कारण चांदी का हो रहा है क्षरण, श्रद्धालुओं से संयम बरतने की अपील</h5>
<h2>सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से फैली सनसनी</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/banke-bihari-corridor-first-registry-vrindavan-hindi/">वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर</a> के गर्भगृह से जुड़ी एक खबर ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच चिंता और हलचल पैदा कर दी। बीते दिनों सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें यह दावा किया गया कि मंदिर के गर्भगृह की चौखट और देहरी से चांदी गायब हो गई है। इन वीडियो में इसे चोरी से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए गए, जिसके बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर सवाल उठने लगे।</h5>
<h2>मंदिर प्रबंधन ने किया अफवाहों का खंडन</h2>
<h5>मामला तूल पकड़ने के बाद श्रीबांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन समिति को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। प्रबंधन ने साफ कहा कि मंदिर परिसर से चांदी की कोई चोरी नहीं हुई है। जो चांदी कम या क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही है, वह किसी आपराधिक घटना का परिणाम नहीं बल्कि लंबे समय से हो रहे रासायनिक क्षरण (Corrosion) का नतीजा है।</h5>
<h2>केमिकल युक्त इत्र बना नुकसान की वजह</h2>
<h5>मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्रद्धालु अपनी आस्था के तहत भगवान श्रीबांकेबिहारी को इत्र और सुगंधित द्रव अर्पित करते हैं। परंतु आजकल बाजार में मिलने वाले अधिकांश इत्रों में अल्कोहल, सल्फर और अन्य केमिकल तत्व मौजूद होते हैं। ये रसायन जब लगातार चांदी की चौखट और देहरी के संपर्क में आते हैं, तो चांदी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि चांदी धीरे-धीरे गलने लगती है, काली पड़ जाती है या उसकी परत कमजोर होकर झड़ने लगती है।</h5>
<h2>धातु विशेषज्ञों की राय</h2>
<h5>धातु विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी एक कोमल धातु है और केमिकल युक्त तरल पदार्थों के संपर्क में आने पर उसमें क्षरण होना स्वाभाविक है। विशेष रूप से अल्कोहल आधारित इत्र और परफ्यूम चांदी की सतह को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर चांदी का वजन और मोटाई कम हो जाती है, जिससे आम लोगों को यह भ्रम हो सकता है कि चांदी चोरी हो गई है।</h5>
<h2>पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी स्थिति</h2>
<h5>मंदिर प्रशासन ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का मुद्दा सामने आया हो। पूर्व में भी चांदी के आवरण को लेकर जांच कराई गई थी, तब भी निष्कर्ष यही निकला था कि चांदी को नुकसान चोरी से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले केमिकल युक्त पदार्थों से हुआ है।</h5>
<h2>सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों का जवाब</h2>
<h5>चांदी चोरी के आरोपों के बाद मंदिर की सुरक्षा को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इस पर प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि गर्भगृह अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जहां सेवायतों की सतत मौजूदगी रहती है। इसके अलावा मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और निगरानी व्यवस्था मौजूद है। ऐसे में चांदी चोरी होने की संभावना लगभग शून्य है।</h5>
<h2>श्रद्धालुओं से विशेष अपील</h2>
<h5>मंदिर प्रबंधन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे गर्भगृह में केमिकल युक्त इत्र, परफ्यूम या अन्य तरल पदार्थ चढ़ाने से बचें। यदि इत्र अर्पित करना ही हो, तो केवल परंपरागत और प्राकृतिक सुगंधित द्रव्यों का  सीमित उपयोग करें। इससे मंदिर की प्राचीन धातु संरचनाओं और पवित्रता की रक्षा की जा सकेगी।</h5>
<h2>सोशल मीडिया की अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत</h2>
<h5>प्रबंधन ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी सत्य नहीं होती। बिना पुष्टि किए ऐसे वीडियो और दावों को साझा करने से धार्मिक स्थलों को लेकर भ्रम और तनाव फैलता है। श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि किसी भी खबर की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करने के बाद ही उस पर विश्वास करें।</h5>
<h5>श्रीबांकेबिहारी मंदिर के गर्भगृह से चांदी चोरी होने की खबरें निराधार और भ्रामक हैं। वास्तविकता यह है कि वर्षों से केमिकल युक्त इत्र के प्रयोग के कारण चांदी का क्षरण हो रहा है। मंदिर प्रशासन अब इस दिशा में और सतर्कता बरतने के साथ-साथ श्रद्धालुओं को जागरूक करने पर जोर दे रहा है, ताकि आस्था के इस महान केंद्र की विरासत और पवित्रता सुरक्षित रह सके।</h5>
<h2>श्रीबांकेबिहारी मंदिर: भक्ति, परंपरा और अद्वितीय दर्शन की पावन स्थली</h2>
<h5>वृंदावन की पावन धरा पर स्थित श्रीबांकेबिहारी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण की माधुर्य भक्ति परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के उस रूप को समर्पित है, जिन्हें बांके (तीन जगह से मुड़े हुए) और बिहारी (विहार करने वाले) कहा जाता है। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था, प्रेम और आत्मिक शांति का केंद्र है।</h5>
<h2>स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि</h2>
<h5>श्रीबांकेबिहारी मंदिर की स्थापना 1864 ई. में स्वामी हरिदास जी के वंशजों द्वारा की गई मानी जाती है। स्वामी हरिदास जी, जो तानसेन के गुरु और महान संत-संगीतज्ञ थे, उन्होंने ही निधिवन में श्रीबांकेबिहारी जी की प्राकट्य लीला कराई थी। कहा जाता है कि निधिवन में राधा-कृष्ण की युगल मूर्ति के प्रकट होने के बाद, भक्तों की सुविधा के लिए श्रीकृष्ण के इस स्वरूप को वर्तमान मंदिर में स्थापित किया गया।मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। लाल बलुआ पत्थर से निर्मित यह मंदिर भव्य होने के बावजूद अत्यंत सरल और सौम्य दिखाई देता है। गर्भगृह में स्थापित श्रीबांकेबिहारी जी की मनोहारी मूर्ति अपने आप में अद्वितीय है। मूर्ति के चरण सीधे भूमि पर नहीं टिकते, बल्कि यह दर्शन कराती है कि प्रभु साक्षात विहार कर रहे हैं।</h5>
<h2>दर्शन की अनोखी परंपरा</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/uttar-pradesh-vrindavans-banke-bihari-temple-a-marvelous-confluence-of-devotion-mystery-and-krishna-bhakti-hindi/">श्रीबांकेबिहारी मंदिर की सबसे विशेष परंपरा</a> है- झांकी दर्शन। यहां निरंतर दर्शन नहीं होते, बल्कि कुछ-कुछ समय के अंतराल पर पर्दा हटाकर दर्शन कराए जाते हैं। मान्यता है कि प्रभु की छवि इतनी मोहक है कि भक्त उसमें खो न जाएं, इसलिए बीच-बीच में पर्दा डाला जाता है। यह परंपरा ब्रज की माधुर्य भक्ति को दर्शाती है, जहां भगवान को राजा या देवता नहीं, बल्कि सखा और प्रिय के रूप में पूजा जाता है। यहां मंगला, श्रृंगार या शयन आरती सार्वजनिक रूप से नहीं होती। मंदिर में घंटी-घड़ियाल का प्रयोग भी नहीं किया जाता। माना जाता है कि तेज ध्वनि से बाल स्वरूप भगवान विचलित हो सकते हैं। यहां भक्ति का स्वर अत्यंत कोमल, शांत और आत्मीय है।</h5>
<h2>प्रसिद्ध उत्सव</h2>
<h5>श्रीबांकेबिहारी मंदिर में वर्षभर अनेक उत्सव भव्य रूप से मनाए जाते हैं, जिनमें प्रमुख हैं-</h5>
<h5>• <strong>होली: फूलों की होली और <a href="https://thecsrjournal.in/mathura-vrindavan-temple-krishna-holi-hindi/">लट्ठमार होली,</a></strong></h5>
<h5><strong>• जन्माष्टमी: भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्स,</strong></h5>
<h5><strong>• राधाष्टमी,</strong></h5>
<h5><strong>• शरद पूर्णिमा,</strong></h5>
<h5><strong>• बसंत पंचमी! </strong></h5>
<h5>इन अवसरों पर मंदिर को फूलों, वस्त्रों और विशेष श्रृंगार से सजाया जाता है, और वृंदावन की गलियां भक्ति-रस में डूब जाती हैं। श्रीबांकेबिहारी मंदिर का संचालन सेवायत परंपरा के अनुसार होता है। यहां मंदिर का प्रबंधन किसी ट्रस्ट की बजाय पारंपरिक सेवायत परिवारों द्वारा किया जाता है। यही कारण है कि मंदिर की हर व्यवस्था में सदियों पुरानी ब्रज परंपराओं की झलक मिलती है।</h5>
<h2>श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र</h2>
<h5>मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से श्रीबांकेबिहारी जी के दर्शन करता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहां आने वाला हर भक्त यह अनुभव करता है कि भगवान स्वयं उसे निहार रहे हैं! यही इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है।श्रीबांकेबिहारी मंदिर केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि भक्ति की वह अनुभूति है जहां  भगवान और भक्त के बीच कोई औपचारिक दूरी नहीं रहती। वृंदावन की संकरी गलियों के बीच स्थित यह  मंदिर आज भी वैसा ही है- सरल, आत्मीय और प्रेम से भरा हुआ। यही कारण है कि श्रीबांकेबिहारी जी को देखने नहीं, महसूस करने के लिए भक्त बार-बार वृंदावन खिंचे चले आते हैं।</h5>
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