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	<title>National Panchayati Raj Day Archives - The CSR Journal</title>
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	<title>National Panchayati Raj Day Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>National Panchayati Raj Day 2025: जानते हैं देश की पंचायतों की पंचायत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Apr 2025 09:06:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Gram Panchayats]]></category>
		<category><![CDATA[National Panchayati Raj Day]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>National Panchayati Raj Day: भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां शासन की जड़ें जन-जन तक पहुंचाने के लिए पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और विकास में ग्रामीण जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज व्यवस्था एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रणाली है। इसी व्यवस्था की महत्ता और इसके [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5><a href="http://googlesecure.mygov.in/campaigns/national-panchayati-raj-day/">National Panchayati Raj Day</a>: भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां शासन की जड़ें जन-जन तक पहुंचाने के लिए पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और विकास में ग्रामीण जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज व्यवस्था एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रणाली है। इसी व्यवस्था की महत्ता और इसके योगदान को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (National Panchayati Raj Day) मनाया जाता है।</h5>
<h2>भारत में पंचायती राज का इतिहास</h2>
<h5>National Panchayati Raj Day: वैदिक साहित्य में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की संगठित प्रणाली के कई संदर्भ मिलते हैं। ग्रामीण स्थानीय निकाय किस प्रकार कार्य करते हैं, इसे सुसंगत रूप से समझाने के लिए विभिन्न संदर्भों को एक साथ बुनना ज़रूरी है।</h5>
<h5>वैदिक राज्य, जो एक ग्रामीण राज्य था, में गांव प्राथमिक प्रशासनिक इकाई के रूप में कार्य करता था। ग्रामिनी एक प्रमुख ग्राम अधिकारी का नाम था। वह राजा के राज्याभिषेक समारोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला एक सम्मानित अधिकारी था।रामायण और महाभारत जैसे प्रमुख महाकाव्यों में ग्राम संस्थाओं का प्रत्यक्ष उल्लेख बहुत कम मिलता है। मुस्लिम काल में कुछ नई अवधारणाएं भारतीय समाज में आईं। नए शासकों ने नई प्रथाओं और मान्यताओं को अपनाया, जिनमें मुक्कद्दम गांव का प्रशासन संभालता था, पटवारी राजस्व संग्रह का काम संभालता था, और चौधरी पंच के सहयोग से विवाद समाधान का काम संभालते थे। कराधान और भूमि प्रबंधन के संबंध में काफी आपसी मतभेद थे। जिला स्तर पर प्रशासन का नियंत्रण था। ग्रामीण बस्तियों को अपनी सीमाओं के अंदर पर्याप्त स्वशासन का अधिकार प्राप्त था। ब्रिटिश शासन ने ग्राम समुदायों की दीर्घकालिक आर्थिक आत्मनिर्भरता को कमजोर कर दिया तथा सामुदायिक भावना को गंभीर क्षति पहुंची। गांव में उपभोग के लिए उत्पादन की जगह बाजार के लिए उत्पादन ने ले ली। गांव के कलाकारों और शिल्पकारों की प्रमुखता खत्म हो गई। उन्हें अच्छे वेतन वाली नौकरियों की तलाश में अपने गांव छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। परिणामस्वरूप, ग्राम पंचायतों ने अपनी स्वतंत्रता और बस्तियों के बीच परस्पर सम्पर्क खो दिया। अंग्रेजों ने कुछ ऐसी प्रशासनिक पद्धतियां अपनाईं, जिनसे ग्रामीण समुदायों का विनाश और तेज हो गया। वास्तव में, ये सभी उन समुदायों की बातें हैं जो प्रशासनिक ढांचे में ब्रिटिश संशोधनों के परिणामस्वरूप बुरी स्थिति में आ गए। भारतीय गांवों में लंबे समय से प्रचलित पंचायती राज की गिरावट का कारण केन्द्रीकरण को माना जा सकता है। स्वतंत्रता के बाद पंचायती राज व्यवस्था ने अपना वर्तमान स्वरूप पहली बार स्वतंत्रता के बाद 1959 में अपनाया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पंचायतों को लोगों के स्वामित्व वाली व्यवस्था माना जाता था। लोकतंत्र की सच्ची आवाज़ होने के कारण स्थानीय स्वशासन को आवश्यक माना जाता था।</h5>
<h2>राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस का उद्भव</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/gram-panchayat-smallest-democratic-system-make-it-strong-hindi/">National Panchayati Raj Day</a>: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुरुआत 24 अप्रैल 1993 को हुई, जब 73वां संविधान संशोधन अधिनियम लागू हुआ। इस संशोधन के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिला और पूरे देश में त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली को अपनाया गया। भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने 2010 में पहली बार इस दिन को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में घोषित किया और तब से हर साल 24 अप्रैल को यह दिवस मनाया जाता है।</h5>
<h5>यह अधिनियम पंचायती राज संस्थानों (PRI) को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है और उन्हें जमीनी स्तर पर स्वशासन संस्थानों के रूप में कार्य करने का अधिकार देता है। पंचायती राज भारत में स्थानीय शासन की एक त्रि-स्तरीय प्रणाली (Three-Tier System) है जिसमें ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायतें, ब्लॉक स्तर पर पंचायत समितियां और जिला स्तर पर जिला परिषदें शामिल हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर शक्ति और संसाधनों का विकेंद्रीकरण करना (Decentralize Power and Resources) और सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy), सामाजिक न्याय और समावेशी विकास (Social Justice and Inclusive Development) को बढ़ावा देना है।</h5>
<h5>पंचायती राज प्रणाली को एक संवैधानिक इकाई के रूप में स्थापित किया गया। भारत में पंचायती राज व्यवस्था का एक लंबा इतिहास है जो प्राचीन काल से चला आ रहा है, जहां ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्राम स्तर पर स्वशासन का अभ्यास किया जाता था। हालांकि, आधुनिक पंचायती राज प्रणाली की उत्पत्ति बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशों से हुई है, जिसे 1957 में भारत में पंचायती राज संस्थानों को शुरू करने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए स्थापित किया गया था। समिति ने पंचायती राज की त्रिस्तरीय प्रणाली की स्थापना की सिफारिश की, जिसमें ग्राम पंचायतें, पंचायत समितियां और जिला परिषदें शामिल होंगी। समिति की सिफ़ारिशों को भारत के कई राज्यों में लागू किया गया, लेकिन संवैधानिक स्थिति और वित्तीय संसाधनों की कमी ने इन संस्थानों की प्रभावशीलता को सीमित कर दिया। 1992 में 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम पारित होने तक ऐसा नहीं हुआ था कि पंचायती राज प्रणाली को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ और यह भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली का मौलिक हिस्सा बन गया। अधिनियम में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं और अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण का भी प्रावधान किया गया, जिससे स्थानीय शासन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हुई।</h5>
<h2>पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी</h2>
<h5>National Panchayati Raj Day: पंचायती राज में महिलाओं की भागीदारी भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से सुनिश्चित की गई है, जिसके तहत पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 33प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इस आरक्षण के परिणामस्वरूप महिलाओं को स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और विकास कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल होने का अवसर मिला है। 1993 में लागू हुआ यह संशोधन पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है, जिसमें पंचायत सदस्य और उनके प्रमुख दोनों शामिल हैं। इस आरक्षण के कारण महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और वे अब स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कई राज्य सरकारों ने पंचायती राज में महिलाओं के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है, जिससे महिलाओं की भागीदारी और बढ़ गई है। पंचायतों में महिलाओं के नेतृत्व को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य पहल भी की जा रही हैं। महिलाओं की भागीदारी में अभी भी कुछ चुनौतियां हैं, जैसे कि सामाजिक और सांस्कृतिक रुकावटें, शिक्षा की कमी, और राजनीतिक जागरूकता का अभाव।<br />
महिलाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता, क्षमता निर्माण, और संस्थागत सुधारों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।</h5>
<h2>National Panchayati Raj Day पर दिए जाने वाले पुरस्कार</h2>
<h5>राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार कई श्रेणियों के तहत प्रदान किए जाते हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर शासन, सामाजिक समावेश और पर्यावरणीय स्थिरता को मान्यता देना है। श्रेणियां इस प्रकार हैं:</h5>
<h5>दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार (DDUPSVP) यह पुरस्कार सतत विकास लक्ष्य के 9 विषयगत क्षेत्रों में से प्रत्येक के अंतर्गत शीर्ष 3 ग्राम पंचायतों को मान्यता देता है।</h5>
<h5>नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार: सभी 9 विषयों में उच्चतम औसत स्कोर वाले शीर्ष 3 जीपी, ब्लॉक पंचायत और जिला पंचायत को सम्मानित किया जाता है।</h5>
<h5>ग्राम ऊर्जा स्वराज विशेष पंचायत पुरस्कार: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने और उपयोग करने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए शीर्ष 3 ग्राम पंचायतों को प्रदान किया जाता है।</h5>
<h5>कार्बन न्यूट्रल विशेष पंचायत पुरस्कार: शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के प्रयासों के लिए शीर्ष 3 ग्राम पंचायतों को दिया जाता है।</h5>
<h5>पंचायत क्षमता निर्माण सर्वोत्तम संस्थान पुरस्कार: सतत विकास लक्ष्यों (LSDG) के स्थानीयकरण को प्राप्त करने में पंचायतों को अनुकरणीय संस्थागत सहायता प्रदान करने वाले शीर्ष 3 संस्थानों को प्रदान किया जाता है।</h5>
<h2>ग्राम पंचायत का स्वरूप</h2>
<h5>National Panchayati Raj Day: ग्राम पंचायत का क्षेत्र बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रावधानानुसार लगभग 7,000 की जनसंख्या पर जिला दंडाधिकारी (DM) द्वारा घोषित किया जाता है। ग्राम पंचायत में एक या एक से अधिक गांव शामिल हो सकते हैं। मुखिया संबंधित ग्राम पंचायत के सभी मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से बहुमत के आधार पर निर्वाचित होते हैं। लगभग पांच सौ की आबादी पर एक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र Ward का गठन होता है और प्रत्येक वार्ड से एक ग्राम पंचायत सदस्य निर्वाचित होता है। एक ग्राम पंचायत में न्यूनतम 7 और अधिकतम 17 पंच निर्वाचित हो सकते हैं। सभी वार्ड सदस्य अपने बीच से ही एक उप मुखिया का बहुमत से चुनाव करते हैं। इस मतदान में मुखिया भी भाग लेते हैं। मुखिया, उपमुखिया और सभी वार्ड सदस्यों को मिलाकर ग्राम पंचायत का गठन होता है। ग्राम पंचायत का कार्यकाल प्रथम बैठक से पांच वर्ष तक का होता है।</h5>
<h2>ग्राम पंचायत की संरचना</h2>
<h5>National Panchayati Raj Day: ग्राम पंचायत की संरचना में निर्वाचित मुखिया, उप मुखिया एवं प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचित सदस्य (Ward Member) सम्मिलित होते हैं। निर्वाचन में विजयी होने के उपरांत मुखिया, उप मुखिया एवं प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य (वार्ड सदस्य) को शपथ ग्रहण या प्रतिज्ञा लेना अनिवार्य है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत के सदस्यों (वार्ड सदस्य) के कुल स्थानों का 50 प्रतिशत स्थान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित किया जाता है। अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण पंचायत में उनकी जनसंख्या के अनुपात में होता है। पिछड़े वर्ग का आरक्षण अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों के आरक्षण के पश्चात् 20 प्रतिशत तक होता है। आरक्षित एवं अनारक्षित श्रेणी में 50 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाता है। आरक्षण का यही नियम मुखिया पद हेतु होनेवाले आरक्षण पर भी लागू है।</h5>
<h5>ग्राम पंचायत अपनी प्रथम बैठक की तिथि से 5 वर्षों की अवधि तक रहती है, उससे अधिक नहीं। ग्राम पंचायत सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण/ प्रतिज्ञा लेने की तिथि से यानी पांच वर्ष पूरा होते ही मुखिया और उपमुखिया की पदावधि समाप्त हो जाती है।</h5>
<h5>मुखिया/ वार्ड सदस्य के मृत्यु, त्याग-पत्र, अयोग्यता, पदच्युति अथवा अन्य कारणों से मुखिया का पद रिक्त हो जाने पर यथाशीघ्र उक्त पद पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन कराना आवश्यक है। मुखिया एव उप मुखिया दोनों का स्थान रिक्त हो जाने पर कार्यपालक पदाधिकारी 15 दिनों के अंदर पंचायत सदस्यों की बैठक बुलाकर उप मुखिया का चुनाव कराना होता है, जिसके लिए सदस्यों को कम से कम सात दिन पहले सूचना देनी होती है। ऐसी बैठक की अध्यक्षता कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा की जाती है, परन्तु कार्यपालक पदाधिकारी को उस चुनाव में मत देने का अधिकार नहीं है।</h5>
<h2>ग्राम पंचायत की बैठक</h2>
<h5>National Panchayati Raj Day: ग्राम पंचायत की बैठक दो माह में कम से कम एक बार ग्राम पंचायत के कार्यालय में आयोजित किया जाना अनिवार्य है। इसके लिए मुखिया जब भी उचित समझे तब सूचना देकर ग्राम पंचायत की बैठक आयोजित कर सकता है। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत के एक तिहाई सदस्यों के लिखित अनुरोध पर, अनुरोध प्राप्त होने की तिथि से 15 (पन्द्रह) दिनों के अन्दर विशेष बैठक आयोजित किया जाना अनिवार्य है। ग्राम पंचायत की सामान्य और विशेष बैठक आयोजन की नोटिस में बैठक का स्थान, तिथि समय तथा बैठक का एजेण्डा स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए। ग्राम पंचायत की बैठक के लिए कार्यावली (ऐजेण्डा) मुखिया/ उप मुखिया की सहमति से पंचायत सचिव के द्वारा बनाई जाती है। हर बैठक की कार्रवाई के विवरण को उसके लिए उपलब्ध रजिस्टर में अंकित किया जाना चाहिए और बैठक में भाग लेने वालों  का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। यह आम जनता के निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहनी चाहिए। सामान्य बैठक की सूचना बैठक के सात दिन पूर्व तथा विशेष  बैठक की सूचना तीन दिन पूर्व देना अनिवार्य है। ग्राम पंचायत की बैठक की अध्यक्षता करने का दायित्व मुखिया का है। मुखिया की अनुपस्थिति में बैठक की अध्यक्षता उपमुखिया द्वारा किया जायेगा।</h5>
<h5>ग्राम पंचायत की बैठक में कोरम (गणपूर्ति) हेतु कम-से-कम कुल सदस्यों की संख्या के आधे सदस्यों की उपस्थिति अनिर्वाय है। बगैर कोरम के ग्राम पंचायत की बैठक में लिए गए निर्णय मान्य नहीं होते हैं। कोरम की ओर ध्यान दिलाये जाने की स्थिति में एक घंटा तक प्रतीक्षा करने के उपरांत अगर बैठक स्थगित की जाती है, तो अगली बैठक की पुन: लिखित सूचना दी जाएगी। स्थगित बैठक की अगली बैठक में भी कुल सदस्य संख्या की आधी गणपूर्ति आवष्यक होगी। ग्राम पंचायत की बैठक चाहे वह सामान्य हो या विशेष या बजट पास कराना हो या अन्य कोई प्रस्ताव पारित कराना हो तो उक्त सभी बैठक में कोरम कुल सदस्य संख्या का 50 प्रतिशत होना अनिवार्य है।</h5>
<h2>ग्राम पंचायत के कार्य</h2>
<h5>National Panchayati Raj Day: ग्राम पंचायतों का मुख्य कार्य ग्रामीण विकास में सहयोग करना तथा ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सभा में निर्णय की प्रक्रिया में आम आदमी को जोड़ना है। बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के अनुसार ग्राम पंचायतों को निम्न कार्य आवंटित किए गए हैं :-</h5>
<h5>संसाधनों के प्रबंधन  व उत्पादन संबंधी कार्य, ग्रामीण व्यवस्था व निर्माण संबंधी कार्य, मानवीय क्षमता वृध्दि संबंधी कार्य</h5>
<h5>कृषि तथा कृषि विस्तार, सामाजिक और फार्म वनोद्योग,लघु वन उत्पाद, ईंधन और चारा, पशुपालन, दुग्ध उद्योग व मुर्गी पालन, मछली पालन</h5>
<h5>खादी, ग्राम तथा कुटीर उद्योग, ग्रामीण स्वच्छता एवं पर्यावरण, ग्रामीण गृह निर्माण, पेयजल व्यवस्था</h5>
<h5>सड़क, भवन, पुल, पुलिया, जलमार्ग, विद्युतीकरण एवं वितरण, गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत, जनवितरण प्रणाली</h5>
<h5>सार्वजनिक संपत्ति का रख-रखाव, बाजार तथा मेले, ग्रामीण पुस्तकालय तथा वाचनालय, खटालों, कांजी हाऊस तथा ठेला स्टैण्ड का निर्माण एवं रख-रखाव</h5>
<h5>कसाईखानों का निर्माण एवं रख-रखाव, सार्वजनिक पार्क, खेलकूद का मैदन आदि का रख-रखाव, सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ादान की व्यवस्था, झोपड़ियों एवं शेडों का निर्माण तथा नियंत्रण</h5>
<h5>सामान्य कार्य के अधीन योजना बनाना एवं बजट तैयार करना, अतिक्रमण हटाना तथा बाढ़- सुखाड़ आदि प्राकृतिक आपदाओं के समय आम जन को सहायता प्रदान करना, गांव के अनिवार्य सांख्यिकी आंकड़ों को सुरक्षित रखना</h5>
<h5>धर्मशालाओं, छात्रावासों एवं अन्य वैसे ही संस्थानों का निर्माण एवं उसका रख-रखाव करना, शिक्षा, प्राथमिक व माधयमिक स्तर तक, वयस्क तथा अनौपचारिक शिक्षा</h5>
<h5>लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला व बाल विकास, गरीबी उन्मूलन (गरीबी हटाना), कमजोर वर्गो, विशेष रूप से अनुसूचित जाति तथा जनजाति का कल्याण, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा खेलकूद को बढ़ावा देना, शारीरिक एवं मानसिक रूप से नि:शक्त व्यक्तियों के लिए सामाजिक कल्याण</h5>
<h5>उपरोक्त कार्यों के अतिरिक्त, समय-समय पर सरकार द्वारा जो कार्य पंचायत को सौंपे जाएं, उन्हें कार्यान्वित करना।</h5>
<h2>ग्राम पंचायत का बजट</h2>
<h5>एक ग्राम पंचायत में 1 साल में कितना पैसा आता है, यह ग्राम पंचायत की जनसंख्या, आकार, और विकास कार्यों पर निर्भर करता है। लेकिन, आम तौर पर, एक ग्राम पंचायत को हर साल कम से कम 9 लाख रुपये का बजट मिलता है। इसके अतिरिक्त, मनरेगा जैसे केंद्र सरकार के कार्यक्रमों से भी धन मिलता है, जो लगभग 12 करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो सकता है। पंचायतें करों के माध्यम से अपने राजस्व का केवल 1 प्रतिशत अर्जित करती हैं। उनका अधिकांश राजस्व केन्द्र और राज्यों द्वारा दिए गए अनुदान से आता है। आंकड़े बताते हैं कि 80 फ़ीसदी राजस्व केन्द्र सरकार के अनुदान से आता है, जबकि 15 फ़ीसदी राज्य सरकार के अनुदान से आता है। राज्य राजस्व हिस्सेदारी और अंतर-राज्य असमानताएं इस प्रकार हैं-</h5>
<h5>अपने-अपने राज्य के राजस्व में पंचायतों की हिस्सेदारी न्यूनतम बनी हुई है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश में पंचायतों की राजस्व प्राप्तियां राज्य के स्वयं के राजस्व का मात्र 0.1 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 2.5 प्रतिशत है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। प्रति पंचायत अर्जित औसत राजस्व के संबंध में भी राज्यों में व्यापक भिन्नताएं हैं। केरल और पश्चिम बंगाल क्रमशः 60 लाख रुपये और 57 लाख रुपये प्रति पंचायत के औसत राजस्व के साथ सबसे आगे हैं, जबकि असम, बिहार, कर्नाटक, ओडिशा, सिक्किम और तमिलनाडु में प्रति पंचायत राजस्व 30 लाख रुपये से अधिक था। आंध्र प्रदेश, हरियाणा, मिजोरम, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में औसत राजस्व काफी कम है, जो प्रति पंचायत 6 लाख रुपये से भी कम है।</h5>
<h2>विशेष श्रेणी राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2025,</h2>
<h5>24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर बिहार में विशेष श्रेणी पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। पहली बार, पंचायती राज मंत्रालय ने जलवायु कार्रवाई और आत्मनिर्भरता में पंचायतों के प्रयासों को मान्यता देने के लिए विशेष श्रेणी पुरस्कारों की शुरुआत की है। इस वर्ष का राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (NPRD) एक विशेष क्षण होगा, जब विशेष श्रेणी राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2025, 24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी जिले के लोहना उत्तर ग्राम पंचायत में आयोजित होने वाले NPRD -2025 के राष्ट्रीय समारोह में प्रदान किए जाएंगे। यह पहली बार है कि पंचायती राज मंत्रालय ने स्वयं के स्रोत से राजस्व (OSR) में वृद्धि के जरिये जलवायु कार्रवाई और आत्मनिर्भरता की प्रमुख राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में ग्राम पंचायतों के अनुकरणीय प्रयासों को प्रोत्साहित करने और मान्यता देने के लिए समर्पित विशेष श्रेणी पुरस्कारों को संस्थागत रूप दिया है। इसके अलावा, सतत विकास लक्ष्यों (LSDG) के स्थानीयकरण के साथ जुड़े पंचायतों के क्षमता निर्माण के लिए सर्वश्रेष्ठ संस्थानों के लिए पुरस्कार भी इस अवसर पर प्रदान किए जाएंगे। प्रमुख राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में पंचायतों/संस्थाओं के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए निम्नलिखित विशेष श्रेणी के राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार शुरू किए गए हैं:</h5>
<h5>जलवायु कार्रवाई विशेष पंचायत पुरस्कार (CASPA)-पंचायतों को जलवायु-उत्तरदायी स्थानीय सरकारों के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना।</h5>
<h5>आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार (ANPSA) &#8211; पंचायतों द्वारा स्वयं के स्रोत राजस्व में वृद्धि के जरिये आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।</h5>
<h5>पंचायत क्षमता निर्माण सर्वोत्तम संस्थान पुरस्कार (PKNSSP)- पंचायती राज प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण में उत्कृष्टता को पहचानना। यह पुरस्कार मंत्रालय द्वारा 2023 में स्थापित किया गया था और पहले पुरस्कार 2024 में प्रदान किए गए थे।</h5>
<h2>राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2025 की विशेष श्रेणियों के पुरस्कार विजेता हैं:</h2>
<h5>जलवायु कार्रवाई विशेष पंचायत पुरस्कार (CASPA)</h5>
<h5>Rank 1: दव्वा एस ग्राम पंचायत, गोंदिया जिला, महाराष्ट्र</h5>
<h5>Rank 2: बिरदाहल्ली ग्राम पंचायत, हासन जिला, कर्नाटक</h5>
<h5>Rank 3: मोतीपुर ग्राम पंचायत, समस्तीपुर जिला, बिहार</h5>
<h5>आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार (ANPSA)</h5>
<h5>Rank 1: मॉल ग्राम पंचायत, रंगारेड्डी जिला, तेलंगाना</h5>
<h5>Rank 2: हटबदरा ग्राम पंचायत, मयूरभंज जिला, ओडिशा</h5>
<h5>Rank 3: गोलापुडी ग्राम पंचायत, कृष्णा जिला, आंध्र प्रदेश</h5>
<h5>पंचायत क्षमता निर्माण सर्वोत्तम संस्थान पुरस्कार (PKNSSP)</h5>
<h5>Rank 1: केरल स्थानीय प्रशासन संस्थान (केआईएलए), केरल</h5>
<h5>Rank 2: राज्य ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान, ओडिशा</h5>
<h5>Rank 3: राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, असम</h5>
<h5>प्रत्येक पुरस्कार में क्रमशः 1 करोड़ रुपये (रैंक 1), 75 लाख रुपये (रैंक 2) और 50 लाख रुपये (रैंक 3) की वित्तीय प्रोत्साहन राशि शामिल है। पुरस्कार विजेताओं को विशेष रूप से डिज़ाइन की गई ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। गौरतलब है कि 6 पुरस्कार विजेता ग्राम पंचायतों में से 3 &#8211; बिहार (मोतीपुर ग्राम पंचायत), महाराष्ट्र (दव्वा एस ग्राम पंचायत) और ओडिशा (हटबद्रा ग्राम पंचायत) &#8211; की मुखिया महिला सरपंच हैं।</h5>
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		<title>PM Modi on Pahalgam Terror Attack: Will Trace and Punish Every Terrorist beyond Their Imagination</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/pm-modi-pahalgam-terror-attack-trace-punish-every-terrorist-beyond-imagination/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ahana Bhattacharya]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Apr 2025 08:27:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar Assembly Election]]></category>
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		<category><![CDATA[National Panchayati Raj Day]]></category>
		<category><![CDATA[pahalgam]]></category>
		<category><![CDATA[Pahalgam Terror Attack]]></category>
		<category><![CDATA[PM Modi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://thecsrjournal.in/?p=76692</guid>

					<description><![CDATA[<p>Prime Minister Narendra Modi stated on Thursday that India will “trace and punish every terrorist and their backers” of the Pahalgam terror attack. The prime minister who arrived in Bihar on the occasion of National Panchayati Raj Day vowed that “terrorism will not go unpunished” and justice will be served. “Today, on the soil of [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/pm-modi-pahalgam-terror-attack-trace-punish-every-terrorist-beyond-imagination/">PM Modi on Pahalgam Terror Attack: Will Trace and Punish Every Terrorist beyond Their Imagination</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h4>Prime Minister Narendra Modi stated on Thursday that India will “trace and punish every terrorist and their backers” of the Pahalgam terror attack. The prime minister who arrived in Bihar on the occasion of National Panchayati Raj Day vowed that “terrorism will not go unpunished” and justice will be served.</h4>
<h4>“Today, on the soil of Bihar, I say to the whole world, India will identify, trace and punish every terrorist and their backers. We will pursue them to the ends of the Earth. India&#8217;s spirit will never be broken by terrorism. Terrorism will not go unpunished. Every effort will be made to make sure that justice is done. The entire nation is one in this resolve. Everyone who believes in humanity is with us. I thank the people of various countries and their leaders who have stood with us,” PM Modi said while addressing a gathering in Bihar’s Madhubani district.</h4>
<h1>Conspirators and terrorists will be punished beyond their imagination: PM Modi</h1>
<h4>The Prime Minister further said the entire country knows how “terrorists brutally killed innocent, and India stands with the family of victims&#8221;. Speaking about the Pahalgam incident, he said: “Conspirators and terrorists, who committed this will get punishment beyond their imagination.&#8221;</h4>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p dir="ltr" lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | On Pahalgam terror attack, PM Modi says, &#8220;Today, on the soil of Bihar, I say to the whole world, India will identify, trace and punish every terrorist and their backers. We will pursue them to the ends of the Earth. India&#8217;s spirit will never be broken by terrorism.… <a href="https://t.co/8SPHOAJIi2">pic.twitter.com/8SPHOAJIi2</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1915308682373689529?ref_src=twsrc%5Etfw">April 24, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h4> “The willpower of 140 crore Indians will now break the backbone of the masters of terror. The entire country is in shock over how the terrorists killed innocent civilians in Pahalgam. India is with those who have lost their loved ones in this attack. The government is trying its best to provide treatment to those who are injured,” he stated.</h4>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-76561 size-full" src="https://thecsrjournal.in/wp-content/uploads/2025/04/GpL9jX_a4AAFmKK.jpeg" alt="" width="680" height="590" srcset="https://thecsrjournal.in/wp-content/uploads/2025/04/GpL9jX_a4AAFmKK.jpeg 680w, https://thecsrjournal.in/wp-content/uploads/2025/04/GpL9jX_a4AAFmKK-300x260.jpeg 300w, https://thecsrjournal.in/wp-content/uploads/2025/04/GpL9jX_a4AAFmKK-150x130.jpeg 150w" sizes="(max-width: 680px) 100vw, 680px" /></p>
<h1>Pahalgam Terror Attack: 26 Indians killed</h1>
<h4>In a horrifying terror attack that shook Kashmir’s picturesque Baisaran meadow in Pahalgam, Pakistan-based terrorists opened fire on a group of tourists on Tuesday, killing at 26 people and injuring 17 including tourists and security personnel. Two officers from Indian Navy and the Intelligence Bureau were also among the deceased.</h4>
<h4>In retaliation, two terrorists were killed on Wednesday in a heavy exchange of fire with security forces in Jammu and Kashmir’s Baramulla by the Indian Army. The encounter broke out when around two-three terrorists tried to infiltrate through general area of Sarjeevan at Baramulla’s Uri Nala.</h4>
<h1>PM Modi cut short Saudi tour, vows justice will be served</h1>
<h4>In the wake of the Pahalgam terror attack, Prime Minister Narendra Modi cut short his state visit to Saudi Arabia and decided to return to India. The PM departed from Jeddah in the wee hours of Wednesday.</h4>
<h4>PM Modi skipped the official dinner hosted by Saudi Arabia in view of the terror attack in Kashmir and arrived in India early on Wednesday. He was originally scheduled to return Wednesday night.</h4>
<h4>“I strongly condemn the terror attack in Pahalgam, Jammu and Kashmir. Condolences to those who have lost their loved ones. I pray that the injured recover at the earliest. All possible assistance is being provided to those affected,” PM Modi stated in an X post on Wednesday condemning the heinous attack.</h4>
<h4>“Those behind this heinous act will be brought to justice…they will not be spared! Their evil agenda will never succeed. Our resolve to fight terrorism is unshakable and it will get even stronger,” the prime minister further said.</h4>
<h1>LeT-linked organisation The Resistance Front claimed responsibility</h1>
<h4>The Resistance Front (TRF), a proxy of the banned Pakistan-based terror group Lashkar-e-Taiba (LeT), claimed responsibility for the attack. The organisation is backed by Pakistan’s intelligence agency ISI. The Resistance Front is allegedly linked to the banned Lashkar-e-Taiba (LeT). The outfit is considered a proxy of LeT founder and 26/11 mastermind Hafiz Saeed.</h4>
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		<title>ऐसे करें अपने गांव का विकास, बनायें अपने गांव को मॉडल विलेज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Apr 2024 08:49:14 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<div id=":31i" class="Ar Au Ao">
<div id=":31e" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" tabindex="1" role="textbox" contenteditable="true" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":38r" aria-controls=":38r" aria-expanded="false">
<h5>देश के विकास का रास्ता गांव की गलियों से होकर ही गुजरता है। गांव का जो रास्ता शहर की तरफ जाता है वही रास्ता गांव की तरफ भी आता है। लेकिन तमाम दावों, वादों और योजनाओं के बावजूद भी आज गांव की तरफ विकास अपना रुख नहीं कर पाया है। जिससे तरक्की का रास्ता और गुलजार हो सके, गावों में समृद्धि आ सके। सरकार बनाने में ग्रामीणों का विशेष योगदान होता है, लेकिन चुनाव के बाद गांव की तरफ शायद ही कोई जनप्रतिनिधि वहां आता हो। नेता अपने काम और जाति की दुहाई लेकर गांव में वोट मांगने जरूर आते हैं लेकिन विकास करने की बारी जब आती है तो ये नेता रफूचक्कर हो जाते है। भारत मुख्यतः गांवों का देश है, यहां की अधिकांश जनसंख्या गांवों में रहती है। आधे से अधिक लोगों का जीवन खेती पर निर्भर है, इसलिए इस बात की आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि गांव के विकास के बिना देश का विकास किया जा सकता है।</h5>
<h2>गांव के विकास से ही राष्ट्र का विकास संभव है</h2>
<h5>गांधी जी ने कहा था &#8211; अगर आप असली भारत को देखना चाहते है तो गांवों में जाइये क्योंकि असली भारत गांवों में बसता है। आर्थिक सामाजिक जातिगत सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल देश में कुल 73.44 फीसदी परिवार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं। इस आधार पर गांव में ज्यादा होना चाहिए जो कि नहीं हो सका। आज भी बहुत सारे गांव में स्कूल, अस्पताल, स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था, सिंचाई के साधन, खेती खलियान कृषि, छोटे उद्योग जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। इन सबको ठीक करने के लिए सभी सरकारों की जिम्मेदारी है लेकिन ग्राम पंचायत की ज्यादा जिम्मेदारी है। गांव के विकास के लिए शासन की न कोई योजनाबद्ध प्रणाली है और ना ही विकास कार्यों को लेकर इच्छाशक्ति दिखाई देती है।</h5>
<h2>विकसित ग्राम, विकसित प्रदेश और विकसित देश</h2>
<h5>इसी के चलते निरंतर व्याप्त निराशा और भविष्य की चिंता में गांव में भारी भरकम लोग भारी संख्या में पलायन कर रहे हैं। आज भी कई ऐसे गांव है जहां पर बिजली के खंभे तो लग गए है, तारे पहुंच गई हैं, लेकिन बिजली नहीं पहुंची है। जहां इलाज के लिए ग्रामीणों को आज भी झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे ही रहना पड़ता है। देश में कई ऐसे गांव है जहां आज भी पीने के पानी के लिए सिर पर पानी उठाकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। समस्याएं तमाम है लेकिन क्या ये जिम्मेदारी सिर्फ सरकार, प्रशासन, जिला पंचायत या फिर ग्राम पंचायत की ही है। अगर ये जिम्मेदारी हम और आप उठा लें कि हमें हमारे जिले, हमारे गांव में विकास की गंगा बहानी है तो ये संभव है।</h5>
<h2>राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर जानें कैसे आप बना सरके है अपने गांव को एक मॉडल विलेज</h2>
<h5>हम कब तक दूसरों को कोसते रहते हुए सिर्फ हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे। आज समूचे भारत में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (<a href="https://thecsrjournal.in/a-development-thinking/">National Panchayati Raj Day</a>) मनाया जा रहा है ऐसे में आइये जानते है कि ऐसा क्या करने से हमारे गांवों में विकास हो सकता है। अगर आप जिम्मेदार और जागरूक नागरिक है तो गांव के विकास में आप बहुत बड़ा योगदान दे सकते है। गांव के विकास में आपको क्या चाहिए, सबसे पहले तो ये आपको समझना होगा। सिलसिलेवार तरीके से जानते है।</h5>
<h2>एक आदर्श गांव बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है</h2>
<h5><a href="https://panchayat.gov.in/">ग्राम पंचायत</a> विकास योजना के माध्यम से गांवों के समग्र विकास के लिए कार्ययोजना तैयार किया जाता है और इनके स्वीकृत होते ही गांवों और ग्रामीणों की जरूरत के अनुसार विकास एवं निर्माण कार्य कराया जाता है। किसी भी गांव को आदर्श बनाने के लिए इसकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करनी पड़ती है। जिस प्रकार से मजबूत बुनियाद ही विशाल इमारत खड़ा करने में सक्षम है उसे प्रकार मजबूत बुनियाद गांव और पंचायत को भी सक्षम बनाती है। स्थानीय नेतृत्व व सामुदायिक भागीदारी के साथ-साथ पंचायत सरकार, राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं को गांव के विकास में लगाना एक आदर्श गांव के लिए आवश्यक है। ऐसे में आप खुद जिला मुख्यालय में जाकर ग्राम विकास के लिए कौन-कौन सी सरकारी योजनाएं है इसका लिस्ट बनाकर इन योजनाओं को अपने गांव में अमल करवाएं।</h5>
<h2>गांव के विकास में इन सरकारी योजनाओं को लाएं अमल में</h2>
<h5>राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सपना था कि प्रत्येक गांव स्वच्छ हो, सड़क बिलकुल दुरुस्त हो, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हो, जानवरों के लिए चारागाह हो, प्राथमिक से लेकर माध्यमिक शिक्षा का केंद्र हो जहां बच्चे बचपन से ही हुनरमंद बने, विवादों के निपटारन के लिए ग्राम पंचायत कचहरी हो, सफल और सब्जियों के लिए समुचित बाजार उपलब्ध हो, पर्यावरण सही हो, लोगों का रहन-सहन उच्च कोटि का हो। गांव में वाचनालय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच और खेलकूद की पूरी व्यवस्था हो। इन सभी के लिए सरकार ने Government Scheme बनाये है। जिसका फॉलो अप लेकर आप अपने गांव में ये योजनाएं ला सकते है।</h5>
<h2>खेती किसानी के लिए ये करें काम, हो जायेंगे किसान समृद्ध</h2>
<h5>भारतीय ग्रामीणों की आय का प्रमुख साधन कृषि है। कुछ लोग पशु-पालन से अपनी जीविका चलाते हैं। तो कुछ कुटीर उद्योग से कमाते है। भारत देश की आजादी के बाद से कृषि के विकास के साथ-साथ ग्राम-विकास की गति भी बढ़ी। लेकिन अगर आपको उन्नत खेती करनी है तो आपको आज की तकनीक अपनानी होगी। पारम्परिक खेती को छोड़कर आज आपको सॉइल टेस्ट करवाना होगा, आपकी मिटटी के लिए कौन सा फसल उपयुक्त है ये पहले जानना होगा उस हिसाब के किसान खेती करेगा तो वो समृद्ध होगा। आज किसानों के पास कृषि में उपयोग किये जाने वाले यंत्र भी पाए जाते है। इसे पाने के लिए कई योजनाएं है जिसकी जानकारी जिला कृषि अधिकारी के पास मिलेगा। एक जागरूक नागरिक जाकर ये हासिल कर सकता है। भारतीय किसानों की स्थिति ख़राब होने का एक प्रमुख कारण कृषि-ऋण है। बड़े-बड़े सेठ और साहूकार किसान को थोड़ा सा लोन देकर उसे अपनी फसल बहुत कम दाम में बेचने को मजबूर कर देते हैं। इसलिए आज अधिकांश गांवों में बैंक खोले गए हैं जो मामूली ब्याज पर किसानों को ऋण देते हैं। इन Farmer Loan की जानकारी लें।</h5>
<h2>ऐसे करें शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, जिससे गांव में पीने के पानी की नहीं होगी समस्या</h2>
<h5>गांव में शुद्ध एवं पर्याप्त पानी के लिए लोग तालाब, पोखर पर ज्यादातर निर्भर होते हैं और खासकर उत्तर भारत में ग्राउंडवाटर पानी का सबसे बड़ा साधन है। ऐसे में केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा हर घर नल योजना चलायी जा रही है, आप इन योजनाओं के बारे में जानकारी लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में अगर आपके गांव में शुद्ध पीने के पानी का व्यवस्था नहीं है तो डीएम ऑफिस में एप्लीकेशन कर सकते हैं। जिससे आपके गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हो जाएगी।</h5>
<h2>ऐसे करें इलाज, शिक्षा के लिए करें व्यवस्था</h2>
<h5>अगर आपके गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है या फिर आपके आसपास कोई डॉक्टर या फिर बीमारी के इलाज की व्यवस्था नहीं है तो आप जिलाधिकारी या फिर जिले के चीफ मेडिकल ऑफिसर से मुलाकात कर आपके गांव या फिर आसपास में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुलवाने के लिए आप उसे एक एप्लीकेशन दे सकते हैं। बात करें शिक्षा की तो प्रत्येक 2 से 3 किलोमीटर के फैसले पर राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार ने सुनिश्चित किया हुआ है कि प्राइमरी स्कूल हो या फिर सेकेंडरी स्कूल हो। अगर किसी कारणवश आपके यहां पर शिक्षा के लिए, एजुकेशन के लिए स्कूल नहीं है तो आप डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर से मुलाकात कर उसको एक ज्ञापन दे सकते हैं और यदि आपके यहां पर स्कूल है लेकिन अच्छी शिक्षा व्यवस्था नहीं है तो इसकी आप शिकायत जिला शिक्षा विभाग को कर सकते हैं। अगर जो आप अपने स्कूल में लाइब्रेरी या फिर कंप्यूटर एजुकेशन की भी सुविधा चाहते हैं तो भी आप जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।</h5>
<h2>उद्योग और रोजगार की भी करें सुनिश्चित, ताकि हो गांव का विकास</h2>
<h5>प्रत्येक गांव में ग्राम सभा की जमीन पर्याप्त मात्रा में होती हैं। अगर आपके गांव में उद्योग और रोजगार की व्यवस्था नहीं है तो ऐसे में जिला उद्योग विभाग में जाकर उनसे मिलकर एक ज्ञापन सौंप सकते हैं। जहां पर आपके गांव में राज्य सरकार कृषि आधारित रोजगार या फिर कृषि आधारित उद्योग के लिए इंडस्ट्रीज को जमीन दे सकती है। जहां पर डेयरी, मुर्गी पालन, चरखा, कुटीर उद्योग आदि की व्यवस्था की जा सकती है।  इससे आपके गांव में न सिर्फ उद्योग होगा बल्कि रोजगार की भी व्यवस्था हो सकती है। आप अपने गांव को अगर हरा भरा बनाना चाहते हैं और पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं तो हर जिले में एक सरकारी नर्सरी होती है जहां से आपको मुफ्त पौधे मिलते हैं। वहां पर जाकर आप मुफ्त पौधे लाकर आप अपने गांव में उसका रोपण कर सकते हैं।</p>
<p>आदर्श गांव बनाने के लिए सबसे पहले ग्रामीणों में इच्छा शक्ति का होना चाहिए। दूसरी चीज होती है नेतृत्व जहां जैसा नेतृत्व होता है वहां वैसे उन्नति होती है। सरकारी योजनाओं का हाल सभी जगह एक सी रहती है लेकिन अगर आप एक जागरूक नागरिक है और अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी रखते हैं तो ऐसे में आप इन तरीकों से अपने गांव को एक आदर्श ग्राम बना सकते हैं।</h5>
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		<title>लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे छोटा स्वरूप है ग्राम पंचायत</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/gram-panchayat-smallest-democratic-system-make-it-strong-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Apr 2023 09:40:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[National Panchayati Raj Day]]></category>
		<category><![CDATA[village development]]></category>
		<category><![CDATA[ग्राम पंचायत]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रामीण]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक व्यवस्था वाला देश हमारा भारत है। जहां का सबसे छोटा लोकतांत्रिक व्यवस्था ग्राम पंचायत है। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था तो मजबूत होती जा रही है लेकिन ग्राम पंचायत की व्यवस्था उतनी ही कमजोर होती जा रही है। इस साल 24 अप्रैल को पंचायती राज व्यवस्था (National Panchayati Raj Day) की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div id=":32q" class="Ar Au Ao">
<div id=":32m" class="Am Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" role="textbox" aria-label="Message Body">
<h5>दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक व्यवस्था वाला देश हमारा भारत है। जहां का सबसे छोटा लोकतांत्रिक व्यवस्था ग्राम पंचायत है। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था तो मजबूत होती जा रही है लेकिन ग्राम पंचायत की व्यवस्था उतनी ही कमजोर होती जा रही है। इस साल 24 अप्रैल को पंचायती राज व्यवस्था (National <a href="https://panchayat.gov.in/">Panchayati</a> Raj Day) की 30वी वर्षगांठ है या यूं कहें कि सरकार के विकेंद्रीकरण के 3 दशक पूरे हो गए। भारत सरकार ने ग्राम पंचायतों और शहरी नगरपालिका परिषदों को संवैधानिक दर्जा दिया था ताकि पंचायती राज व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास हो सके और दूसरा सामाजिक न्याय व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा सके। लेकिन ये दोनों अवधारणाएं ही है। हकीकत कुछ और बन गया है।</h5>
<h2>देश का विकास ग्रामीण विकास के बिना संभव नहीं है</h2>
<h5>देश का विकास ग्रामीण विकास के बिना संभव नहीं है। क्योंकि 80 फीसदी जनता आज भी ग्रामीण इलाकों में रहती है लेकिन जब बात आती है ग्रामीण आर्थिक सम्पन्नता की तो ग्रामीण विकास का कितना विकास हुआ है ये किसी से छुपा नहीं है। भारत के गांव-गांव ने देश को कई बड़े नेता दिए है। कई केंद्रीय मंत्रियों की शुरुआत ही ग्रामीण राजनीति से हुई लेकिन बावजूद इसके पंचायती राज व्यवस्था में मजबूती नहीं आ रही है। इसके कई कारण है। आखिरकार ग्राम पंचायत कहने के लिए स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था है लेकिन फिर भी कमजोर क्यों है तो इसके कई कारण है। गावों में अवसर की कमी के कारण युवाओं का गांव छोड़कर चले जाना। अगर किसी क्षेत्र में युवा वर्ग ही पलायन कर जाए तो वहां के मूलभूत विकास की बात कौन करेगा।</h5>
<h2>पलायन है ग्राम पंचायत के विकास में बड़ा रोड़ा</h2>
<h5><span style="font-family: 'Open Sans', arial, sans-serif;font-size: 17px">आजकल किसान का बेटा किसानी ना करते हुए वो शहर में जाकर मजदूरी करने को राजी है लेकिन खेती को ना कह रहा है। आज के दौर में कृषि घाटे का व्यापार बन गया है जिस पर कभी ग्रामीण विकास और उस क्षेत्र की समृद्धि की बुनियाद रखी जाती थी। वही बात करें ग्रामीण प्रतिनिधियों में साक्षरता के स्तर में कमी की जिसकी वजह से ग्राम पंचायत के प्रधान या सरपंच ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर दूरदर्शी सोच या दृष्टिकोण नहीं रखते हैं। यहां तक कि महिला प्रतिनिधियों के कार्य उनके परिवार के सदस्यों द्वारा किया जाता है। हमारा देश 5 ट्रिलियन इकॉनमी के सपने देख रहा है लेकिन हमारी ग्राम पंचायतें अभी भी पैसों और फंड की कमी झेल रही है। ग्राम पंचायतों के पास राजस्व का अपना कोई स्तोत्र नहीं होता है। आज भी ग्राम पंचायत अपनी किसी भी विकास कार्य के लिए राज्य या फिर केंद्रीय वित्त आयोग के सहायता राशि पर निर्भर है।</span></h5>
<h2>ग्राम पंचायत को सशक्त बनाने में आम सहभागिता जरुरी</h2>
<h5>हालांकि पंचायती राज को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा तो कदम उठाये जा रहे है लेकिन निजी स्तर व ग्रामीण स्तर पर भी काम करने की जरूरत है। ग्राम <a href="https://thecsrjournal.in/jharkhand-jamtara-cyber-fraud-csr-community-library-hindi/">पंचायतों</a> को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए युवाओं की सहभागिता को बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए। ग्रामीण आजीविका वृद्धि में स्थानीय संसाधनों के ज्यादा से ज्यादा उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के साथ ही वहां आजीविका के पर्याप्त संसाधन सृजित करने पर बल दिया जाना चाहिए।भारत के विकासशील से विकसित होने का सफर ग्रामीण विकास के माध्यम से ही पूर्ण होगा। केंद्रीय सरकार ने भी कई ऐसे दूरदर्शी सामाजिक तथा आर्थिक योजनाओं की शुरुआत की है जो न सिर्फ पंचायती व्यवस्था को सुधार करेगा बल्कि ग्रामीणों के जीवन को जल्द ही बदलाव देखने को मिलेगा।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/gram-panchayat-smallest-democratic-system-make-it-strong-hindi/">लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे छोटा स्वरूप है ग्राम पंचायत</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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