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	<title>District Mineral Foundation Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>मध्य प्रदेश में बड़ा घोटाला: कागजों पर बने तालाब, DMF फंड के करोड़ों रुपये डकारे</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/mp-dmf-fund-scam-old-pits-drains-falsely-logged-new-ponds-pocket-millions-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:36:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[District Mineral Foundation]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh News]]></category>
		<category><![CDATA[MP DMF Fund Scam]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गड्ढों को तालाब दिखाकर करोड़ों का भुगतान? MP में DMF फंड पर उठे बड़े सवाल मध्य प्रदेश के शहडोल, दमोह और रीवा जैसे जिलों में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड के तहत पुराने गड्ढों, सड़क निर्माण के दौरान निकली मुरूम की खदानों और नालों को &#8216;नया तालाब&#8217; बताकर करोड़ों रुपये के सरकारी भुगतान का बड़ा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2>गड्ढों को तालाब दिखाकर करोड़ों का भुगतान? MP में DMF फंड पर उठे बड़े सवाल</h2>
<h5>मध्य प्रदेश के शहडोल, दमोह और रीवा जैसे जिलों में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड के तहत पुराने गड्ढों, सड़क निर्माण के दौरान निकली मुरूम की खदानों और नालों को &#8216;नया तालाब&#8217; बताकर करोड़ों रुपये के सरकारी भुगतान का बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं।</h5>
<h2>पुराने गड्ढों से बना करोड़ों का खेल</h2>
<h5>मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां पुराने गड्ढों और सड़क खुदाई से बने गड्ढों को तालाब के रूप में सरकार को देखने का आरोप लगाया गया है। यह मामला तब से सुर्खियों में आया जब स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि धरातल पर कुछ और ही है, जबकि कागजों में सब कुछ बेशकुरदरा दिखाया गया है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन अब सभी के मन में यह सवाल उठता है कि इतनी बड़ी अनियोजित गड़बड़ी कैसे हुई।</h5>
<h2>शहडोल का मामला</h2>
<h5>ब्योहारी ब्लॉक के तेंदुहा गांव में पहले से मौजूद एक नाले (दर्री नाला) को नया तालाब बताकर ₹25 लाख का भुगतान कर दिया गया। इसी तरह जयसिंहनगर की बरना पंचायत में 20 साल पुराने टूटे तालाब की मरम्मत के बजाय ₹20.56 लाख से &#8216;नया तालाब&#8217; बनाने का फर्जीवाड़ा सामने आया है। दमोह और अन्य क्षेत्र में हाईवे के किनारे बने गड्ढों को रिकॉर्ड में जल संरचना या तालाब के रूप में दर्ज कर लाखों रुपये निकाल लिए गए।</h5>
<h2>DMF फंड का बड़ा घोटाला!</h2>
<h5>शहडोल और दमोह जैसे जिलों से मिली रिपोर्टों से पता चलता है कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) के फंड से करोड़ों रुपये का गबन किया गया है। 2022-23 के एक्शन प्लान में विभिन्न प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई थी, जिनमें नए तालाबों और घाटों का निर्माण शामिल था। कुल मिलाकर ₹7.48 करोड़ का बजट मंजूर किया गया और इनमें 24 प्रोजेक्ट नए तालाबों के लिए तय किए गए थे, लेकिन आरोप है कि कई नई जगहों पर कोई निर्माण नहीं पाया गया।</h5>
<h2>पुराने तालाबों का किया गया गलत इस्तेमाल</h2>
<h5>विशेष जानकारी के अनुसार, नए तालाबों के लिए मंजूर किए गए आधे से ज्यादा प्रोजेक्ट उस जगहों से जुड़े थे, जहां पहले से तालाब थे। हाईवे किनारे खोदें गए गड्ढों को तालाब बताकर ₹25 लाख का भुगतान किया गया। जयसिंहनगर ब्लॉक के जोरा गांव में एक गड्ढे को तालाब घोषित कर दिया गया, जबकि वह बस हाईवे निर्माण के लिए खुदा गया था।</h5>
<h2>आधिकारिक जांच का आश्वासन</h2>
<h5>शहडोल के कलेक्टर केदार सिंह ने कहा है कि मामले की पूरी जांच की जा रही है। पिछले 10 सालों में प्रदेश में बने तालाबों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आजकल की टेक्नोलॉजी की मदद से इस प्रकार के मामले को छुपाना मुश्किल है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पुराने तालाबों को फिर से नहीं बनाना चाहिए।</h5>
<h2>नेता प्रतिपक्ष का हमला</h2>
<h5>इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को मानसून सत्र में उठाएंगे और सरकार से स्पष्टीकरण मांगेंगे।</h5>
<h2>सरकारी स्तर पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन</h2>
<h5>पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि जब यह मामला हुआ, तब वह इस विभाग के मंत्री नहीं थे। हालांकि, वे अधिकारियों से जानकारी लेकर इस मामले की गंभीरता से जांच कराएंगे। उन्होंने कहा कि यदि गड़बड़ी पाई गई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में देखना यह है कि इस घोटाले का असली सच क्या निकलता है।</h5>
<h2>DMF फंड के नियमों की अनदेखी</h2>
<h5>खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बने इस फंड (PMKKKY योजना) का इस्तेमाल बुनियादी सुविधाओं (पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य) के बजाय कागजों में तालाब बनाकर लूटे जाने पर सवाल उठ रहे हैं। इस स्तर के भ्रष्टाचार पर विपक्ष (जैसे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ) ने भी प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।</h5>
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		<title>CSR: संसदीय समिति का निर्देश कहा खनन क्षेत्रों में सरकारी कंपनियों के सीएसआर खर्च की समीक्षा करे सरकार</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/review-provisions-on-csr-spend-by-psus-to-avoid-overlapping-in-areas-under-district-mineral-foundation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Jan 2019 06:21:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CSR Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
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		<category><![CDATA[Committee on Coal and Steel]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संसद की एक समिति ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन की परियोजनाओं के लिये राज्यों को 15,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बांटे जाने का जिक्र करते हुए सरकार को खनन क्षेत्रों में कंपनियों के सीएसआर खर्च की समीक्षा करने को कहा है। संसदीय समिति ने ये फैसले इसलिए लिया ताकि एक ही क्षेत्र में कार्ययोजनाओं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>संसद की एक समिति ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन की परियोजनाओं के लिये राज्यों को 15,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बांटे जाने का जिक्र करते हुए सरकार को खनन क्षेत्रों में कंपनियों के सीएसआर खर्च की समीक्षा करने को कहा है। संसदीय समिति ने ये फैसले इसलिए लिया ताकि एक ही क्षेत्र में कार्ययोजनाओं का दोहराव न हो। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन का गठन खनन अधिनियम के तहत खनन के पट्टों से मिली राशि का एक भाग समाज कल्याण योजनाओं पर खर्च करने के लिये किया गया है। इसके साथ ही सरकारी कंपनियों के लिये 80 प्रतिशत सीएसआर खर्च खनन क्षेत्रों में करना जरूरी है।</h5>
<h5>कोयला और इस्पात की संसद की स्थायी समिति की माने तो प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत कई सामाजिक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये अगस्त 2018 तक 15,547.83 करोड़ रुपये जमा किये गये और राज्यों को दिये गये हैं। समिति का मानना है कि जिन जिलों में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन राशि का वितरण हुआ है वहां एक ही उद्देश्य के लिये सीएसआर राशि के खर्च की भी समीक्षा की जानी चाहिये ताकि राशि को अन्य क्षेत्रों में उचित इस्तेमाल में लाया जा सके। इससे सीएसआर का पैसा एक ही जगह दो दो बार नही लगेगा।</h5>
<h5>इस संसदीय समिति के अध्यक्ष चिंतामणि मालवीय की माने तो समिति चाहती है कि अनावश्यक दोहरे खर्च को रोकने के लिये सरकार उन जगहों पर अनिवार्य 80 प्रतिशत सीएसआर खर्च की समीक्षा करे जहां डीएमएफ राशि भी खर्च की जा रही है। समिति ने कहा कि यह समीक्षा कम से कम उन कंपनियों की जरूर की जानी चाहिये जो खनन कार्यों में शामिल हैं। सीएसआर के तहत अगस्त 2018 तक 21,235 करोड़ रुपये आये लेकिन महज 4,888 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी की जा सकी हैं। ऐसे में संसदीय समिति ने खनन मंत्रालय को सीएसआर को लेकर निगरानी की व्यवस्था बनाने को कहा है।</h5>
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