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	<title>devbhoomi uttarakhand Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>उत्तराखंड: संघर्ष, संस्कृति और स्वाभिमान की कहानी, जहां हर घाटी में भक्ति की गूंज है, हर पर्वत पर देवत्व का वास है </title>
		<link>https://thecsrjournal.in/uttarakhand-foundation-day-all-you-need-know-about-devbhoomi-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 07:15:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Art & Culture]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>9 नवम्बर 2000 — यह तारीख केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं थी, बल्कि यह पहाड़ों की आत्मा की पुकार का उत्तर थी। इस दिन उत्तराखंड भारत का 27वां राज्य बना और सदियों से उपेक्षित पर्वतीय जनता को अपनी पहचान मिली। “हमारा पहाड़, हमारी सरकार” यह नारा केवल एक मांग नहीं, बल्कि उत्तराखंड आंदोलन का ध्येय [&#8230;]</p>
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<h5>9 नवम्बर 2000 — यह तारीख केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं थी, बल्कि यह पहाड़ों की आत्मा की पुकार का उत्त<wbr />र थी। इस दिन उत्तराखंड भारत का 27वां राज्य बना और सदियों से उपेक्षित पर्वतीय जनता को अपनी पहचान मिली। “हमारा पहाड़, हमारी सरकार” यह नारा केवल एक मांग नहीं, बल्कि उत्तराखंड आंदोलन का ध्येय बन गया था। गढ़वाल, कुमाऊँ और तराई के हजारों लोगों ने वर्षों तक संघर्ष किया, महिलाएं सड़कों पर उतरीं, नौजवानों ने अपनी जानें दीं, और अंततः दिल्ली ने उनकी आवाज सुनी।</h5>
<h2>राज्य की स्थापना का इतिहास: जब पहाड़ों ने अपनी पहचान मांगी और इतिहास ने सुना</h2>
<h5>उत्तराखंड का इतिहास केवल भौगोलिक सीमाओं का नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और अस्तित्व की लड़ा<wbr />ई का इतिहास है। स्वतंत्रता के बाद जब पहाड़ी इलाकों को उत्तर प्रदेश में मिला दिया गया, तो लोगों को लगा कि उनकी विशेष भौगोलिक परिस्थितियां, कठिन पहाड़, सीमित संसाधन, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी बड़े राज्य में खो जाएंगी। 1970 के दशक में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की स्थापना हुई। यहीं से अलग राज्य की मांग ने राजनीतिक रूप लिया। 1994 में मुज़फ्फरनगर कांड ने इस आंदोलन को निर्णायक रूप से दिशा दी, जब शांतिपूर्ण आंदोलन कर रही महिलाओं और छात्रों पर पुलिस ने गोली चलाई। यह घटना पूरे पहाड़ में आग की तरह फैल गई। नारे गूंजे, “पहाड़ का पानी, पहाड़ की जवानी<wbr />, अब पहाड़ के काम आएगी।”</h5>
<h5>आखिरकार, लंबे संघर्षों के बाद, <a href="https://governoruk.gov.in/hi/about-department/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE/">9 नवम्बर 2000 को केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम पारित किया, और जन्म हुआ उत्तरांचल राज्य का</a> ! बाद में 1 जनवरी 2007 को इसका नाम बदलकर उत्तराखंड रखा गया, जो शाब्दिक रूप से अर्थ रखता है, “उत्तर का खंड” या “देवभूमि<wbr />”।</h5>
<h2>देवभूमि उत्तराखंड- जहां हर घाटी में गूंजती है आस्था की गूंज</h2>
<h5>पवित्र नदियों, प्राचीन तीर्थों और आध्यात्मिक परंपराओं के कारण ही कहा जाता है उत्तराखंड को “देवभूमि” ! भारत के उत्तर में हिमालय की गोद में बसा राज्य उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक महिमा और धार्मिक धरोहर के लिए भी जाना जाता है। इसे “देवभूमि” यानी “देवताओं की भूमि” कहा जाता है। यहां हर नदी, हर पर्वत, हर घाटी में किसी न किसी देवता, ऋषि या पवित्र कथा का निवास माना गया है।</h5>
<h2>उत्तराखंड- जहां देवताओं ने किया था वास</h2>
<h5>पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, उत्तराखंड वह स्थान है जहां भगवान शिव, विष्णु, पार्वती, ऋषि-मुनि और योगियों ने तपस्या की। केदारनाथ में स्वयं भगवान शिव लिंग रूप में विराजमान हैं। बद्रीनाथ भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है, जहां उन्होंने नीलकंठ पर्वत की छाया में ध्यान किया था। गंगोत्री और यमुनोत्री से निकलती नदियां गंगा और यमुना भारत की जीवनरेखाएं हैं। इसीलिए यह भूमि केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि दैवीय ऊर्जा से परिपूर्ण प्रदेश मानी जाती है।</h5>
<h2>आस्था की भूमि – देवताओं की धरती उत्तराखंड</h2>
<h5>उत्तराखंड को “देवभूमि” यूं ही नहीं कहा जाता। यहां के हर शिखर, हर घाटी और हर नदी में आस्था की धारा बहती है। हिंदू धर्म में <a href="https://thecsrjournal.in/kedarnath-gangotri-yamunotri-doors-closed-winter-season-hindi/">“चारधाम यात्रा”</a> का विशेष धार्मिक महत्व है। यह यात्रा भगवान विष्णु, भगवान शिव, देवी गंगा और देवी यमुना को समर्पित है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन चार धामों की यात्रा कर श्रद्धा से दर्शन करता है, वह जीवन-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।</h5>
<h2>बद्रीनाथ धाम- भगवान विष्णु का निवास</h2>
<h5>अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह धाम भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने तपस्या के लिए हिमालय का चयन किया, तब देवी लक्ष्मी ने बुरांश के पेड़ का रूप धारण कर उन्हें छाया दी। इसी कारण इसका नाम “बद्री वन” पड़ा। यहां के दर्शन को “वैष्णव साधना” का सर्वोच्च रूप माना गया है। “जय बद्री विशाल” की गूंज यहां के हर यात्री के हृदय को भक्ति से भर देती है।</h5>
<h2>केदारनाथ धाम- भगवान शिव की तपोभूमि</h2>
<h5>यह मंदिर समुद्र तल से 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां हर पत्थर शिवत्व का प्रतीक है। कथा है कि महाभारत के बाद पांडवों ने भगवान शिव से क्षमा मांगी और शिव ने बैल के रूप में प्रकट होकर यहां लिंग रूप में अवतार लिया। यहां का शिवलिंग त्रिकोणाकार है, जो पूरे भारत में अद्वितीय है। 2013 की विनाशकारी बाढ़ में भी यह मंदिर चमत्कारिक रूप से सुरक्षित रहा, जिसे आज भी लोग शिव की कृपा मानते हैं।</h5>
<h2>गंगोत्री धाम- मां गंगा का उद्गम स्थल</h2>
<h5>गंगोत्री वह पावन स्थान है जहां मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं। मान्यता है कि राजा भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर गंगा ने स्वर्ग से अवतरण किया था ताकि उनके पूर्वजों को मोक्ष मिले। इस स्थल पर गंगोत्री मंदिर में भक्त गंगा मां की आरती करते हैं और हिमालय की गोद में बहती नदी को प्रणाम करते हैं।यहां हर बूंद में शुद्धता, हर लहर में आस्था झलकती है।</h5>
<h2>यमुनोत्री धाम- देवी यमुना का पवित्र निवास</h2>
<h5>यमुनोत्री, चारधाम यात्रा का प्रारंभिक पड़ाव माना जाता है। यह स्थान मां यमुना को समर्पित है, जो सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन मानी जाती हैं। कहा जाता है कि यमुना के दर्शन से व्यक्ति को मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। यहां के “सूर्यकुंड” में भक्तजन पूजा हेतु प्रसाद पकाते हैं, जो इस धाम की विशेष परंपरा है।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/maa-dhari-devi-considered-guardian-deity-uttarakhand-protector-char-dham-pilgrimage-hindi/">मां धारी देवी- देवभूमि की रक्षक शक्ति</a></h2>
<h5>उत्तराखंड की धार्मिक परंपरा में मां धारी देवी का स्थान सबसे विशेष है। यह मंदिर अलकनंदा नदी के तट पर, श्रीनगर (गढ़वाल) और रुद्रप्रयाग के बीच स्थित है। देवी धारी मां को यहां “उत्तराखंड की जाग्रत देवी” कहा जाता है। मान्यता है कि सदियों पहले अलकनंदा की धारा में मां धारी देवी की मूर्ति बहती हुई यहां पहुंची थी।स्थानीय लोगों ने जब उस मूर्ति को स्थापित किया, तो मां ने स्वयं कहा, “मैं यहीं विराजमान रहूंगी और इस भूमि की रक्षा करूंगी।” धारी देवी की मूर्ति आधे शरीर के रूप में विराजमान है। ऊपरी भाग धारी देवी मंदिर में और निचला भाग कालीमठ में पूजित है। यह स्वरूप कोमलता और क्रोध, दोनों शक्तियों का प्रतीक माना जाता है।</h5>
<h2>धारी देवी की चेतावनी और 2013 की त्रासदी</h2>
<h5>मां धारी देवी की दिव्यता की सबसे चर्चित कथा 2013 की बाढ़ से जुड़ी है। जून 2013 में मंदिर क्षेत्र में जलविद्युत परियोजना के कारण मां की मूर्ति को अस्थायी रूप से हटाया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने चेतावनी दी थी कि “यह अशुभ है, मां को हिलाना विनाश को आमंत्रित करेगा।” उसी शाम भयंकर आपदा आई, अलकनंदा और मंदाकिनी में प्रलयकारी बाढ़ आई, जिसने केदारनाथ समेत पूरे गढ़वाल को हिला दिया। लोगों का विश्वास है कि यह केवल संयोग नहीं था, बल्कि मां की नाराज़गी का प्रतीक था। तब से धारी देवी को “देवभूमि की रक्षक देवी” कहा जाने लगा।</h5>
<h2>चारधाम और धारी देवी- देवभूमि का आध्यात्मिक संतुलन</h2>
<h5>मां धारी देवी को “गढ़वाल की कुलदेवी” भी कहा जाता है। मान्यता है कि उत्तराखंड में जब भी कोई बड़ा संकट आता है, मां धारी देवी ही रक्षा करती हैं। हर वर्ष अष्टमी और नवमी पर यहां विशेष पूजा होती है, जहां हज़ारो श्रद्धालु एकत्र होते हैं। चारधाम के देव और देवी शक्ति रूप में धारी देवी, दोनों मिलकर उत्तराखंड को संतुलित करते हैं। चारधाम मोक्ष और अध्यात्म का मार्ग दिखाते हैं। मां धारी देवी उस मार्ग की रक्षक हैं। यही कारण है कि उत्तराखंड केवल तीर्थभूमि नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और दिव्य चेतना की भूमि है।</h5>
<h2>त्रियुगीनारायण मंदिर और हरिद्वार का कुंभ मेला</h2>
<h5>जहां विवाह की साक्षी बनी अग्नि अब भी जल रही है, जहां अमृत की बूंदों ने धरती को पवित्र किया ! देवभूमि उत्तराखंड में हर घाटी, हर पत्थर, हर नदी की अपनी एक कथा है। इन्हीं में से दो स्थलों का विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, त्रियुगीनारायण मंदिर, जो भगवान विष्णु की साक्षी में भगवान शिव औरदेवी पार्वती के वि<wbr />वाह का स्थल माना जाता है, और हरिद्वार का कुंभ मेला, जहां लाखों श्रद्धालु आत्मशुद्धि के लिए गंगा में डुबकी लगाते हैं।</h5>
<h2><a href="https://triyuginarayantemple.com/">त्रियुगीनारायण मंदिर &#8211; जहां एक हुए अविनाशी शिव और माता पार्वती </a></h2>
<h5>त्रियुगीनारायण मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थल है, जो केदारनाथ धाम के समीप रुद्रप्रयाग ज़िले के त्रियुगीनारायण गांव में स्थित है। नाम ही बताता है, “त्रि-युग” अर्थात् तीन युगों से यह ज्योति प्रज्वलित है- सत्ययुग, त्रेतायुग और द्वापरयु<wbr />ग !</h5>
<h5>हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। कहते हैं कि स्वयं भगवान विष्णु ने पार्वती के भाई के रूप में उपस्थित होकर विवाह की विधि पूरी कराई थी। साक्षी के रूप में यहां जो अग्निकुंड प्रज्वलित किया गया था, उसकी अग्नि आज भी अनवरत जल रही है। यह अग्नि तीन युगों से बिना बुझी हुई मानी जाती है। भक्त यहां “अक्षत विवाह” की कामना लेकर आते हैं। माना जाता है कि इस कुंड की राख अपने पास रखने से वैवाहिक जीवन में सौहार्द बना रहता है। मंदिर के सामने स्थित तीन पवित्र कुंड भी हैं –</h5>
<h5>1. <strong>रुद्र कुंड</strong> – स्नान हेतु</h5>
<h5>2. <strong>विष्णु कुंड –</strong> धार्मिक आचरण हेतु</h5>
<h5>3. <strong>ब्रह्म कुंड –</strong> आचमन और पूजन हेतु,</h5>
<h5>यहां के जल को अमृत तुल्य माना जाता है।</h5>
<h2>तीर्थ और विवाह का संगम स्थल</h2>
<h5>त्रियुगीनारायण मंदिर की विशेषता यह भी है कि यहां कई नवविवाहित जोड़े आज भी विवाह संस्कार सम्पन्न करते हैं। कहा जाता है कि त्रियुगीनारायण में विवाह करने <wbr />वाला जोड़ा सदा अखंड प्रेम और सौ<wbr />भाग्य से परिपूर्णरहता है। मंदिर का निर्माण उत्तर भारतीय नागर शैली में हुआ है, जो केदारनाथ मंदिर से काफी मेल खाता है। यहां के पत्थरों पर इतिहास, पौराणिकता और श्रद्धा, तीनों एक साथ अंकित हैं। केदारनाथ यात्रा करने वाले श्रद्धालु त्रियुगीनारायण के दर्शन को अधूरा नहीं छोड़ते। यह स्थान तीर्थयात्रा और विवाह संस्कार, दोनों का प्रतीक है, जहां आध्यात्मिकता और जीवन का आनंद एक साथ जुड़ते हैं।</h5>
<h2>हरिद्वार कुंभ मेला- जहां अमृत की बूंदों ने धरती को पवित्र किया</h2>
<h5>हरिद्वार- अर्थात् “हरि का द्वार”, जहां गंगा पर्वतों से निकलकर मैदानों की ओर प्रवाहित होती है। यह शहर भारत के चार प्रमुख कुंभ स्थलों में से एक है -प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार। कुंभ मेले की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए क्षीरसागर का मंथन किया, तो अमृत कलश निकलने पर देवताओं ने उसे छिपाने की कोशिश की। इसी दौरान अमृत की चार बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरीं- प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में ! इन्हीं चार स्थलों पर हर 12 वर्ष में कुंभ मेला आयोजित किया जाता है।</h5>
<h2>हरिद्वार का महत्व : गंगा का स्पर्श और मोक्ष का द्वार</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/maha-kumbh-record-over-50-crore-devotees-holy-dip-at-triveni-sangam-hindi/">हरिद्वार का कुंभ मेला</a> गंगा तट पर स्थित हर की पौड़ी पर केंद्रित रहता है। यहां जब लाखों श्रद्धालु सूर्योदय से पहले गंगा स्नान करते हैं, तो पूरा वातावरण “हर हर गंगे, जय माँ गंगे” की गूंज से भर उठता है। मान्यता है कि कुंभ स्नान के दौरान गंगा का एक स्पर्श जन्मों के पाप मिटा देता है और मोक्ष प्रदान करता है। हरिद्वार के कुंभ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भव्यता विश्व चर्चित है। कुंभ मेले में अखाड़ों के नागा साधु, तपस्वी और संन्यासी शाही स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं। शाही जुलूस के रूप में जब संत समाज गंगा में प्रवेश करता है, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक उत्सव में बदल जाता है। यहां धर्म, योग, आयुर्वेद, और भारतीय संस्कृति का विराट संगम दिखाई देता है। <a href="https://thecsrjournal.in/guinness-world-record-team-prayagraj-mahakumbh-hindi/">2025 में आयोजित आखिरी हरिद्वार कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना</a>। अगला महाकुंभ 2033 में होने की संभावना है, जिसके लिए अभी से तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।</h5>
<h2>कुंभ का संदेश : एकता और आत्मशुद्धि</h2>
<h5>कुंभ मेला केवल स्नान या अनुष्ठान नहीं है। यह आत्मबोध और मानवता का महोत्सव है। यह हमें सिखाता है कि, “पानी केवल शरीर को नहीं धोता, बल्कि आत्मा को भी शुद्ध करता है।” हरिद्वार में जब सूर्य की पहली किरण गंगा पर पड़ती है, तो ऐसा लगता है जैसे स्वयं ईश्वर ने इस भूमि को आशीर्वाद दिया हो।</h5>
<h2>देवभूमि के दो प्रतीक- विवाह और मोक्ष</h2>
<h5>उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण मंदिर और हरिद्वार कुंभ मेला दो अलग प्रतीक हैं- एक सृष्टि की शुरुआत का, दूसरा आत्मा की मुक्ति का ! त्रियुगीनारायण हमें बताता है कि प्रेम और धर्म का संगम जीवन की नींव है, और हरिद्वार सिखाता है कि त्याग और आस्था से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। देवभूमि उत्तराखंड की यही विशेषता है- यहां विवाह भी तपस्या है, और स्नान भी साधना !</h5>
<h2>संस्कृति और परंपरा – लोकजीवन की आत्मा</h2>
<h5>उत्तराखंड की संस्कृति सादगी, श्रम और प्रकृति के साथ सामंजस्य की मिसाल है। यहां के लोकगीत और नृत्य लोगों के जीवन से गहराई से जुड़े हैं। झोड़ा, छपेली, थड्या, चांचरी जैसे लोकनृत्य हर पर्व पर झूम उठते हैं। मंगल गीत विवाहों में गाए जाते हैं, जबकि बेडू पाको बारामासा राज्य का अमर लोकगीत बन चुका है। उत्तराखंड की थाली में भट्ट की दाल, झंगोरे की खीर, मं<wbr />डुवे की रोटी, सिसुने की साग और गहत की दाल जैसे पारंपरिक व्यंजन मिलते हैं। महिलाओं की पिछौड़ा और गहने उनकी पहचान हैं, जबकि पुरुषों की टोपी और अंगवस्त्र पहाड़ी संस्कृति का प्रतीक हैं। नंदा देवी राजजात यात्रा- बारह साल में एक बार होने वाली यह यात्रा भक्ति और लोकएकता का अद्भुत उदाहरण है। हरेला, भिटोली, गंगा दशहरा और घी संक्रांति जैसे पर्व प्रकृति और कृषि जीवन से जुड़ी आस्था दर्शाते हैं।</h5>
<h2>भौगोलिक स्वरूप – प्रकृति का अद्भुत संतुलन</h2>
<h5>उत्तराखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक भव्यता में है। राज्य दो मुख्य भागों में बंटा है- गढ़वाल और कुमाऊं! यहां हिमालय की ऊँचाइयां, हरियाली से भरे जंगल, झरनों की आवाज और झीलों की शांति सब कुछ मिलकर इसे धरती पर स्वर्ग बनाते हैं। उत्तराखंड की प्रमुखपर्वत और चोटियां, नंदा देवी (7816 मीटर) भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी और राज्य की शान कहलाती है। त्रिशूल, पंचचूली, चौखंभा- ये शिखर न केवल पर्वतारोहियों के आकर्षण का केंद्र हैं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी पूजनीय हैं। यहां से निकलने वाली नदियां गंगा, यमुना, अलकनंदा, मंदाकिनी<wbr />, काली और शारदा पूरे उत्तर भारत को सिंचित करती हैं। नैनीताल, भीमताल, देवरिया ताल, <wbr />टिहरी झील, सातताल जैसे झीलें पर्यटन और जल संसाधन दोनों के लिए अहम हैं। राज्य में कॉर्बेट नेशनल पार्क, राजाजी नैशनल पार्क, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व जैसी संरक्षित वन संपदाएं हैं, जो बाघ, तेंदुए, हिरण, कस्तूरी मृग और सैकड़ों पक्षी प्रजातियों का घर हैं।</h5>
<h2>उत्तराखंड का इतिहास और विरासत</h2>
<h5>उत्तराखंड का अतीत सांस्कृतिक रूप से अत्यंत गौरवशाली रहा है। यहां कत्यूर वंश (8वीं-11वीं सदी) और बाद में चंद वंश ने शासन किया। इन राजाओं ने कला, संस्कृति और स्थापत्य को अभूतपूर्व ऊँचाइयाँ दीं। बैजनाथ मंदिर समूह और जागेश्वर मंदिर परिसर आज भी उन दिनों की भव्यता की झलक दिखाते हैं। गढ़वाल क्षेत्र में गढ़ों (किलों) की परंपरा रही, जिनसे ही “गढ़वाल” नाम पड़ा। यह भूमि महर्षि व्यास, कश्यप, पार्वती और कई योगियों की तपस्थली रही है। कहा जाता है कि महाभारत का लेखन भी बद्रीनाथ क्<wbr />षेत्र में हुआ था। यात्रा के अलावा उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांचक गतिविधियों और विविध संस्कृति के कारण विश्व प्रसिद्ध है।</h5>
<h2>उत्तराखंड के मुख्य पर्यटन स्थल</h2>
<h5><strong>गढ़वाल क्षेत्र-</strong>“Queen Of Hills” मसूरी में झरनों, वादियों और औपनिवेशिक स्थापत्य का सुंदर संगम है।</h5>
<h5><strong>देहरादून</strong> – राज्य की राजधानी, जहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ शिक्षा और शोध संस्थान हैं। ऋषिकेश – योग और ध्यान की विश्व राजधानी। यहां गंगा आरती और रिवर राफ्टिंग पर्यटकों को आकर्षित करती है।</h5>
<h5><strong>टिहरी झील</strong> – एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील, जहां बोटिंग और वाटर स्पोर्ट्स का आनंद लिया जा सकता है।</h5>
<h5><strong>कुमाऊं क्षेत्र: नैनीताल</strong> – झीलों का शहर, जहां नैना देवी मंदिर और टिफिन टॉप प्रसिद्ध हैं।</h5>
<h5><strong>रानीखेत और अल्मोड़ा</strong> – शांत वातावरण, देवदार के जंगल और प्राचीन मंदिरों से भरपूर।</h5>
<h5><strong>पिथौरागढ़ और मुनस्यारी</strong> – यहां से हिमालय की पंचचूली श्रृंखला का नजारा अद्भुत है।</h5>
<h5><strong>जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क</strong> – भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान (1936), जहां बाघ देखने के लिए दुनियाभर से पर्यटक आते हैं।</h5>
<h2>रोमांच और साहसिक पर्यटन</h2>
<h5>उत्तराखंड रोमांच-प्रेमियों का भी स्वर्ग है। यहां हर तरह के साहसिक खेलों की सुविधा है —</h5>
<h5><strong>रिवर राफ्टिंग</strong>: ऋषिकेश और अलकनंदा घाटी में,</h5>
<h5><strong>ट्रेकिंग</strong>: केदारनाथ, रूपकुंड, हर्षिल, फूलों की घाटी और पिंडारी ग्लेशियर जैसी जगहों पर।</h5>
<h5><strong>पैराग्लाइडिंग</strong>: भीमताल और टिहरी में।</h5>
<h5><strong>स्कीइंग:</strong> औली में, जो एशिया के बेहतरीन स्की रिसॉर्ट्स में से एक है।</h5>
<h2>प्रकृति और वन्य पर्यटन</h2>
<h5><strong>फूलों की घाटी</strong> (<a href="https://www.uttarakhandtourism.gov.in/destination/valley-of-flowers">Valley of Flowers): यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल</a> है। यहां जून से सितंबर तक सैकड़ों दुर्लभ फूलों की प्रजातियां खिलती हैं।</h5>
<h5><strong>राजाजी नेशनल पार्क</strong>: हाथियों, हिरणों और पक्षियों के लिए प्रसिद्ध।</h5>
<h5><strong>नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व</strong>: जैव विविधता और ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध।</h5>
<h2>होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन</h2>
<h5>उत्तराखंड सरकार ने “होमस्टे योजना” शुरू की है, जिसके तहत ग्रामीण परिवार अपने घरों को पर्यटकों के लिए खोल रहे हैं। इससे न केवल पर्यटक स्थानीय संस्कृति से जुड़ते हैं, बल्कि ग्रामीणों को भी आर्थिक मजबूती मिलती है। चौखुटिया, भीमताल, स्यालदे, और <wbr />खाती जैसे गांव अब ग्रामीण पर्यटन के मॉडल बन चुके हैं।</h5>
<h2>ईको-टूरिज्म और आध्यात्मिक संतुलन</h2>
<h5>राज्य में अब ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन का विकास हो। साथ ही, योग, ध्यान, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक पर्यटन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ऋषिकेश, हरिद्वार और कौसानी जैसे स्थान अब वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में भी विश्व पटल पर प्रसिद्ध हैं।</h5>
<h2>पर्यटन से अर्थव्यवस्था तक का सफर</h2>
<h5>उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान लगभग 25 प्रतिशत तक है। हर साल औसतन चार से पांच करोड़ यात्री और पर्यटक राज्य का भ्रमण करते हैं। सरकार चारधाम महामार्ग परियोजना, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और नए एयर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के ज़रिए पर्यटन को और सशक्त बना रही है।</h5>
<h5>उत्तराखंड के लिए प्रकृति वरदान है, लेकिन यह वरदान जिम्मेदारी के साथ आता है। 2013 की केदारनाथ आपदा ने दिखा दिया कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कितना जरूरी है। पहाड़ों पर अनियोजित निर्माण, सड़कों का अत्यधिक विस्तार, और नदियों के किनारे होटल निर्माण जैसी गतिविधियाँ पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर कर रही हैं। राज्य सरकार ने अब “<a href="https://rwd.uk.gov.in/about-department/vision-mission/">Green Uttarakhand Mission&#8221; </a>और “Chardham All Weather Road” जैसी योजनाएं लागू की हैं, जिनमें पर्यावरण संरक्षण पर खास ध्यान दिया जा रहा है।</h5>
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<h2>अर्थव्यवस्था और पलायन की चुनौती</h2>
<p>उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, पर्यटन, जलविद्युत और सेवा क्षेत्र पर आधारित है। परंतु एक गंभीर समस्या ग्रामीण पलायन है, जहां लाखों लोग रोजगार की तलाश में मैदानों की ओर जा रहे हैं, सैकड़ों गांव खाली हो चुके हैं, जिन्हें “भूतिया गांव” कहा जाने लगा है। सरकार “रिवर्स माइग्रेशन नीति” के तहत स्वरोजगार, होमस्टे और जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जैविक उत्पाद, हस्तशिल्प और फूलों की खेती कर रही हैं।</p>
<h2>योग, आयुर्वेद और शिक्षा का केंद्र</h2>
<p>ऋषिकेश को “विश्व की योग राजधानी” कहा जाता है। यहां हर साल अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव आयोजित होता है, जिसमें 100 से अधिक देशों के लोग भाग लेते हैं। हरिद्वार और देहरादून में आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थान और विश्वविद्यालय योग, प्राकृतिक चिकित्सा और जैविक विज्ञान को प्रोत्साहित कर रहे हैं। IIT रुड़की, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, <a href="https://www.doonuniversity.ac.in/">Doon University</a> जैसे संस्थान राज्य को शिक्षा और अनुसंधान की दिशा में अग्रणी बना रहे हैं।</p>
<h2>आत्मनिर्भर उत्तराखंड की राह</h2>
<p>उत्तराखंड की आत्मा उसकी संस्कृति, प्रकृति और सरलता में है। भविष्य के लिए आवश्यक है कि यह राज्य अपनी मूल पहचान को खोए बिना आधुनिक विकास की ओर बढ़े। इको-टूरिज्म, जैविक खेती, वन आधारितउद्योग और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य के लिए स्वर्णिम अवसर हैं। युवा पीढ़ी को पहाड़ों में ही रोजगार और शिक्षा के अवसर मिलें, यह सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए।</p>
<h2>देवभूमि उत्तराखंड- जहां हर सांस में ईश्वर का वास है</h2>
<p>उत्तराखंड से लौटते हुए हर यात्री-सैलानी के मन में बस यही भाव उमड़ता है-“अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए,<wbr /> क्योंकि मैंने स्वयं ईश्वर को <wbr />महसूस किया है।” उत्तराखंड की यह भूमि आज भी उतनी ही पवित्र है जितनी प्राचीन काल में थी। यहां के पर्वत देवता हैं, नदियां देवियां हैं, और हवा स्वयं मंत्र है। देवभूमि में कदम रखो, तोहर <wbr />श्वास में ईश्वर का नाम सुनाई दे<wbr />ता है- यही इस भूमि का चमत्कार <wbr />है।”</p>
<p>उत्तराखंड आज भले छोटा राज्य हो, लेकिन उसकी आत्मा विराट है। यहां की मिट्टी में आस्था है, हवा में शांति है, और जल में जीवन की पवित्रता। जैसे-जैसे यह राज्य आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह देश को यह सिखा रहा है कि विकास केवल ऊंची इमारतें नहीं, बल्कि ऊंचे संस्कार भी हैं। “जहां हिमालय झुककर धरती को चूमता है,<wbr />वहीं जन्मी है देवभूमि उत्तराखं<wbr />ड।”</p>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/uttarakhand-foundation-day-all-you-need-know-about-devbhoomi-hindi/">उत्तराखंड: संघर्ष, संस्कृति और स्वाभिमान की कहानी, जहां हर घाटी में भक्ति की गूंज है, हर पर्वत पर देवत्व का वास है </a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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		<title>भारत का पहला 132 मीटर लंबा केबल ग्लास ब्रिज ‘बजरंग सेतु’ रोमांच, प्रकृति और इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/bajrang-setu-india-first-longest-glass-bridge-set-open-rishikesh-soon-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 07:24:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Travel]]></category>
		<category><![CDATA[Trending]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[devbhoomi uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[Glass Bridge Bajrang Setu]]></category>
		<category><![CDATA[Rishikesh Tourism]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ऋषिकेश में तैयार हो रहा ‘बजरंग सेतु’ (Bajrang Setu) देश का पहला ग्लास केबल सस्पेंशन ब्रिज बनने जा रहा है, जो आधुनिक इंजीनियरिंग और धार्मिक प्रतीकों का सुंदर मिश्रण होगा। यह पुल 132 मीटर लंबा है और पारदर्शी ग्लास के रास्तों से सुसज्जित है। पुल का डिजाइन और प्रवेश द्वार केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह से प्रेरित हैं, जो इसे एक पवित्र [&#8230;]</p>
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]]></description>
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<h5>ऋषिकेश में तैयार हो रहा ‘बजरंग सेतु’ (Bajrang Setu) देश का पहला ग्लास केबल सस्पेंशन ब्रिज बनने जा रहा है, जो आधुनिक इंजीनियरिंग और धार्मिक प्रतीकों का सुंदर मिश्रण होगा। यह पुल 132 मीटर लंबा है और पारदर्शी ग्लास के रास्तों से सुसज्जित है। पुल का डिजाइन और प्रवेश द्वार केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह से प्रेरित हैं, जो इसे एक पवित्र और भव्य रूप प्रदान करते हैं।</h5>
<h2>देश का पहला सबसे बड़ा ग्लास ब्रिज <a href="https://thecsrjournal.in/haridwar-ganga-aarti-makes-presence-oxford-book-of-world-records-hindi/">उत्तराखंड ऋषिकेश</a> में</h2>
<h5>भारत अब अपने पहले 132 मीटर लंबे केबल ग्लास ब्रिज के उद्घाटन की तैयारी में है। यह एक ऐसा स्थापत्य चमत्कार है जो रोमांच, आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राकृतिक सुंदरता को एक साथ जोड़ता है। उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों के बीच ऋषिकेश में स्थित यह पारदर्शी पुल पर्यटकों को रोमांच और शांति दोनों का अनोखा अनुभव प्रदान करेगा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह पुल साल 2025 के अंत तक जनता के लिए खुल जाएगा, जबकि 2026 की शुरुआत तक यह पूरी तरह संचालन में आ जाएगा। लगभग ₹68–70 करोड़ की लागत से बना यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड की सतत विकास और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।</h5>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p dir="ltr" lang="en">Bajrang Setu in Rishikesh, Uttarakhand India’s first glass floored suspension bridge, is 85.3% complete. It replaces the old Lakshman Jhula and will open by Oct 2025. The ₹70 crore bridge will improve tourism and pedestrian access across the Ganga. <a href="https://t.co/SBD55QbrQi">pic.twitter.com/SBD55QbrQi</a></p>
<p>— Amαr 🇮🇳 (@Amarrrrz) <a href="https://twitter.com/Amarrrrz/status/1936842280532623590?ref_src=twsrc%5Etfw">June 22, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2>नवाचार और रोमांच का नया प्रतीक</h2>
<h5>यह 132 मीटर लंबा केबल ग्लास ब्रिज भारत की तेज़ी से बढ़ती नवाचार और इको-टूरिज्म क्षमता का प्रतीक है। पुल के पारदर्शी ग्लास फ्लोर से नीचे फैले घने जंगलों का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। इसका केबल सस्पेंशन डिजाइन न केवल आकर्षक है, बल्कि मजबूती और सुरक्षा का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। ब्रिज का डिजाइन विश्व के प्रसिद्ध ग्लास स्काईवॉक से प्रेरित है, जो हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। उच्च गुणवत्ता वाले ग्लास पैनल, हवा-प्रतिरोधी केबल्स और भूकंप-रोधी नींव इस पुल को इंजीनियरिंग की दृष्टि से बेहद सुरक्षित और शानदार बनाते हैं। यह पुल उत्तराखंड के एडवेंचर टूरिज्म को नई दिशा देगा, जिससे देशी और विदेशी पर्यटकों को एक अनोखा प्राकृतिक अनुभव मिलेगा।</h5>
<h2>इंजीनियरिंग उत्कृष्टता से निर्मित अनुभव</h2>
<h5>यह 132 मीटर लंबा ग्लास ब्रिज अत्याधुनिक तकनीक और पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों से तैयार किया गया है। पुल की फर्श में मल्टी-लेयर टफेंड ग्लास पैनल लगाए गए हैं जो भारी पैदल यातायात और मौसम के बदलावों को झेलने में सक्षम हैं। पुल के बीच वाले हिस्से को दोपहिया और छोटे चारपहिया वाहनों के लिए आरक्षित किया गया है, जिससे स्थानीय संपर्क में सुविधा होगी। पुल के दोनों टावर केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह जैसी आकृति में बनाए गए हैं। एक ओर केदारनाथ की प्रतिमा और दूसरी ओर बद्रीनाथ की आकृति स्थापित की जाएगी, जो आस्था और इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम पेश करने के साथ <a href="https://www.uttarakhandtourism.gov.in/">उत्तराखंड के &#8216;देवभूमि</a>&#8216; कहलाने की परिचायक होगी। ग्लास ब्रिज के निर्माण में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। एंटी-स्लिप ग्लास, मजबूत रेलिंग्स, और सुरक्षित व्यूइंग ज़ोन बनाए गए हैं ताकि पर्यटक आराम से इस रोमांचक अनुभव का आनंद ले सकें। चारों ओर के घने जंगलों और पर्वतीय दृश्यों से घिरा यह क्षेत्र फोटोग्राफी, दर्शनीय भ्रमण और एडवेंचर वॉक के लिए आदर्श स्थान बनेगा।</h5>
<h2>उत्तराखंड के पर्यटन को नई उड़ान</h2>
<h5>“देवभूमि” कहलाने वाला उत्तराखंड अब केवल धार्मिक यात्राओं के लिए नहीं, बल्कि एडवेंचर और इको-टूरिज्म के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। इस नए ग्लास ब्रिज से राज्य के पर्यटन राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। स्थानीय व्यवसाय, होमस्टे और ट्रैवल सेवाएं पहले से ही पर्यटकों की बढ़ती संख्या को संभालने की तैयारी में हैं। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए जिम्मेदार पर्यटन और अपशिष्ट प्रबंधन योजनाएं लागू की जाएंगी। यह प्रोजेक्ट राज्य के अन्य विकास कार्यों, जैसे बेहतर सड़क संपर्क, इको-पार्क और प्रकृति संरक्षण के साथ मिलकर ऋषिकेश को एडवेंचर और वेलनेस टूरिज्म के नए मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।</h5>
<h2>उद्घाटन और पर्यटक जानकारी</h2>
<h5>अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह पुल 2025 के अंत तक जनता के लिए खोला जाएगा, और 2026 की शुरुआत में पूर्ण रूप से चालू हो जाएगा। खुलने के बाद पर्यटक 132 मीटर लंबे पारदर्शी पुल पर चलते हुए नीचे की घाटियों, गंगा के बहाव और हरियाली का अद्भुत दृश्य देख सकेंगे। प्रशासन की योजना के अनुसार यहां एंट्री पास, गाइडेड टूर, नाइट-व्यू सेशन और लाइट शो जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सुरक्षा डेमो, फोटोग्राफी पॉइंट्स और विश्राम क्षेत्र भी इस अनुभव का हिस्सा होंगे। पर्यटक देहरादून से ऋषिकेश आसानी से पहुंच सकते हैं, जो सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं।</h5>
<h2>प्रकृति, रोमांच और स्थायित्व का मेल</h2>
<h5>यह प्रोजेक्ट सिर्फ रोमांच या डिजाइन का नहीं, बल्कि सतत विकास के दर्शन का भी प्रतीक है। निर्माण में पर्यावरण को कम से कम प्रभावित करने की नीति अपनाई गई है। स्थानीय सामग्रियों का उपयोग और पर्यावरण विशेषज्ञों की सलाह से यह सुनिश्चित किया गया कि आसपास की प्राकृतिक संरचना सुरक्षित रहे। जब पर्यटक इस पुल पर कदम रखेंगे, तो वे नवाचार और प्रकृति का अद्भुत संगम महसूस करेंगे, जो आधुनिक भारत की विकास यात्रा की सच्ची झलक पेश करेगा।</h5>
<h2>विश्वस्तरीय पर्यटन की ओर ऐतिहासिक कदम</h2>
<h5>भारत का पहला 132 मीटर लंबा केबल ग्लास ब्रिज केवल एक नया आकर्षण नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन अनुभवों की दिशा में देश का ऐतिहासिक कदम है। इंजीनियरिंग की उत्कृष्टता, पर्यावरण चेतना और सांस्कृतिक गौरव का यह मिश्रण जल्द ही उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई ऊंचाई देगा। चाहे आप रोमांच प्रेमी हों, फोटोग्राफर या प्रकृति प्रेमी, जब यह ₹70 करोड़ का अद्भुत पुल खुलेगा, तो उस पर चलना अपने आप में एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/bajrang-setu-india-first-longest-glass-bridge-set-open-rishikesh-soon-hindi/">भारत का पहला 132 मीटर लंबा केबल ग्लास ब्रिज ‘बजरंग सेतु’ रोमांच, प्रकृति और इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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		<title>दिन में तीन बार रूप बदलती है माता की मूर्ति, कहलाती हैं चारों धाम की रक्षक </title>
		<link>https://thecsrjournal.in/maa-dhari-devi-considered-guardian-deity-uttarakhand-protector-char-dham-pilgrimage-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Sep 2025 04:37:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Tourism]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[devbhoomi uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Dhari Devi Shrinagar Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2025]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत में रहस्यमय और प्राचीन मंदिरों की कोई कमी नहीं है। एक ऐसा ही मंदिर उत्तराखंड के श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां हर दिन एक चमत्कार होता है, जिसे देखकर लोग हैरान हो जाते हैं। दरअसल, इस मंदिर में मौजूद माता की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/maa-dhari-devi-considered-guardian-deity-uttarakhand-protector-char-dham-pilgrimage-hindi/">दिन में तीन बार रूप बदलती है माता की मूर्ति, कहलाती हैं चारों धाम की रक्षक </a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
]]></description>
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<h5><a href="https://thecsrjournal.in/the-magnetic-pull-uttarakhand-kasaar-devi-temple-dedicated-adishakti-maa-bhagwati-hindi/">भारत में रहस्यमय और प्राचीन मंदिरों की कोई कमी नहीं</a> है। एक ऐसा ही मंदिर उत्तराखंड के श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां हर दिन एक चमत्कार होता है, जिसे देखकर लोग हैरान हो जाते हैं। दरअसल, इस मंदिर में मौजूद माता की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। मूर्ति सुबह में एक कन्या की तरह दिखती है, फिर दोपहर में युवती और शाम को एक बूढ़ी महिला की तरह नजर आती है। यह नजारा वाकई हैरान कर देने वाला होता है।</h5>
<h2><a href="https://pauri.nic.in/hi/tourist-place/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0/">चार धाम और पहाड़ों की रक्षक मां धारी देवी </a></h2>
<h5>देश में देवी-देवताओं को समर्पित ऐसे कई मंदिर हैं, जो किसी रहस्य या फिर अन्य कारण से अधिक प्रसिद्ध हैं। एक ऐसा ही मंदिर उत्तराखंड में स्थित है, जिसका नाम धारी देवी मंदिर है। धार्मिक मान्यता है कि मां धारी देवी को उत्तराखंड की संरक्षक देवी माना जाता है और मां धारी देवी चार धामों की रक्षा करती हैं। मां धारी देवी का यह मंदिर (Dhari Devi Mandir) देश में जगह जगह स्थापित 108 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर झील के ठीक बीचों-बीच स्थित है। देवी काली को समर्पित इस मंदिर में विराजमान धारी माता को पहाड़ों और तीर्थयात्रियों की रक्षक देवी माना जाता है।</h5>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="hi" dir="ltr">उत्तराखंड के श्रीनगर क्षेत्र में, अलकनंदा नदी के तट पर मां धारी देवी का मंदिर स्थित है। यह सिद्धपीठ मां काली कल्याणी को समर्पित है। क्या आप जानते हैं कि मां धारी देवी को उत्तराखंड की &#39;रक्षक देवी&#39; भी माना जाता है? <a href="https://twitter.com/hashtag/Uttarakhand?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Uttarakhand</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Dharidevi?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Dharidevi</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/Srinagar?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Srinagar</a> <br />Credit- <a href="https://twitter.com/myflyingguide?ref_src=twsrc%5Etfw">@myflyingguide</a> <a href="https://t.co/JZsIa6NNbj">pic.twitter.com/JZsIa6NNbj</a></p>
<p>&mdash; Uttarakhand Tourism (@UTDBofficial) <a href="https://twitter.com/UTDBofficial/status/1575691442701291521?ref_src=twsrc%5Etfw">September 30, 2022</a></p></blockquote>
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<h2>माता ने स्वयं आदेश दिया मूर्ति स्थापित करने का</h2>
<h5>एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भीषण बाढ़ से मंदिर बह गया था। साथ ही उसमें मौजूद माता की मूर्ति भी बह गई और वह धारो गांव के पास एक चट्टान से टकराकर रुक गई। कहते हैं कि उस मूर्ति से एक ईश्वरीय आवाज निकली, जिसने गांव वालों को उस जगह पर मूर्ति स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद गांव वालों ने मिलकर वहां माता का मंदिर बना दिया। मंदिर में देवी धारी की मूर्ति का ऊपरी आधा भाग स्थित है, जबकि मूर्ति का निचला आधा हिस्सा कालीमठ में स्थित है, जहां उन्हें देवी काली के रूप में पूजा जाता है। पुजारियों की मानें तो मंदिर में मां धारी की प्रतिमा द्वापर युग से ही स्थापित है।</h5>
<h2>माता का स्थान बदलते ही उत्तराखंड में आई प्रलय</h2>
<h5>कहते हैं कि मां धारी के मंदिर को साल 2013 में तोड़ दिया गया था और उनकी मूर्ति को उनके मूल स्थान से हटा दिया गया था, इसी वजह से उस साल केदारनाथ में ग्लेशियर टूटने और बादल फटने से भयानक बाढ़ आई थी, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। दरअसल 16 जून, 2013 को अलकनंदा हाइड्रो पावर द्वारा निर्मित 330 मेगावाट अलकनंदा हाइड्रो इलेक्ट्रिक बांध के निर्माण के लिए देवी के मूल मंदिर को हटा दिया गया और अलकनंदा नदी से लगभग 611 मीटर की ऊंचाई पर कंक्रीट के चबूतरे पर स्थानांतरित कर दिया गया। मूर्ति को स्थानांतरित करने के कुछ ही घंटों बाद, इस क्षेत्र को 2004 की सूनामी के बाद से देश की सबसे खराब प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना करना पड़ा। बाद में उसी जगह पर फिर से मंदिर का निर्माण करवाया गया। उत्तराखंडवासी उस प्रलय को कभी भूल नहीं पाए जिसने शिव के धाम की रूपरेखा बदल दी। 1882 में एक स्थानीय राजा द्वारा इसी तरह के प्रयास के परिणामस्वरूप एक भूस्खलन हुआ था जिसने <a href="https://badrinath-kedarnath.gov.in/AboutUs/shri-kedarnath.aspx">केदारनाथ</a> को समतल कर दिया था।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/gadiyaghat-mataji-mandir-mp-mysterious-bhavani-temple-where-diyas-lit-using-kalisindh-river-water-not-oil-ghee-hindi/">नवरात्रों में होती है धूम </a></h2>
<h5>हर साल नवरात्रों के अवसर पर देवी कालीसौर को विशेष पूजा की जाती है। देवी काली के आशीर्वाद पाने के लिए दूर और नजदीक के लोग इस पवित्र दर्शन करने आते रहे हैं। मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है ।यह मंदिर दिल्ली-राष्ट्रीय राष्ट्रीय राजमार्ग 55 पर श्रीनगर से 15 किमी दूर है ।अलकनंदा नदी के किनारे पर मंदिर के पास तक 1 किमी-सीमेंट मार्ग जाता है। मंदिर नागर शैली में बना है, जिसमें शिखर, गढ़वाली संरचना और एक खुली छत है। अलकनंदा नदी पर एक स्टील के पुल से गुजर कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।</h5>
<h2>धारी देवी मंदिर कैसे पहुंचे</h2>
<h5>धारी देवी मंदिर पहुंचने के लिए 145 किमी दूर देहरादून का जौलीग्रांट हवाई अड्डा है। इसके अलावा मंदिर से 115 किलोमीटर दूर ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है। वहीं, हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून से मां धारी देवी मंदिर तक आसानी से छोटे-बडे़ वाहनों की मदद से पहुंच सकते हैं। धारी देवी मंदिर सुबह 06 बजे खुलता है और शाम को 07 बजे बंद होता है। उत्तराखंड आने पर आप धारी देवी मंदिर के साथ-साथ खिर्सू गांव, कंडोलिया मंदिर और रुद्रप्रयाग के दर्शन भी कर सकते हैं। इन सबसे पहले, उत्तराखंड को जिस वजह से देवभूमि कहा जाता है, वे चारों धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और पतित पावनी मां गंगा का उद्गम स्थल श्री गंगोत्री धाम के दर्शन करना न भूलें।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/maa-dhari-devi-considered-guardian-deity-uttarakhand-protector-char-dham-pilgrimage-hindi/">दिन में तीन बार रूप बदलती है माता की मूर्ति, कहलाती हैं चारों धाम की रक्षक </a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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		<title>उत्तराखंड के इस मंदिर में छिपे चुंबकीय रहस्य, शरीर को खींच लेती हैं शक्तियां, नासा ने भी माना </title>
		<link>https://thecsrjournal.in/the-magnetic-pull-uttarakhand-kasaar-devi-temple-dedicated-adishakti-maa-bhagwati-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Sep 2025 04:22:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Travel]]></category>
		<category><![CDATA[Trending]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[devbhoomi uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[Magnetic Powers]]></category>
		<category><![CDATA[Mata Kasaar Devi Mandir]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2025]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उत्तराखंड को देवभूमि यूंही नहीं कहा जाता। उत्तर के पवित्र चारधाम के अलावा उत्तराखंड में आपको कई मंदिर दिख जाएंगे, जिनका अपना महत्व है, लेकिन अल्मोड़ा के कसार देवी मंदिर का एक अलग ही ऐतिहासिक महत्व है। ये मंदिर अपने चुंबकीय प्रभाव के लिए मशहूर है। अगर आप नवरात्रि में देवी के मंदिर में जाने [&#8230;]</p>
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<h5>उत्तराखंड को देवभूमि यूंही नहीं कहा जाता। उत्तर के पवित्र चारधाम के अलावा उत्तराखंड में आपको कई मंदिर दिख जाएंगे, जिनका अपना महत्व है, लेकिन अल्मोड़ा के <a href="https://thecsrjournal.in/navratri-maa-chandraghanta-puja-vidhi-mahatva-color-hindi/">कसार देवी मंदिर</a> का एक अलग ही ऐतिहासिक महत्व है। ये मंदिर अपने चुंबकीय प्रभाव के लिए मशहूर है। अगर आप नवरात्रि में देवी के मंदिर में जाने का सोच रहे हैं, तो एक बार इस मंदिर में जरूर जाएं। यह <a href="https://thecsrjournal.in/second-day-navratri-dedicated-maa-brahmacharini-hindi/">मंदिर आदिशक्ति मां भगवती</a> को समर्पित है और दूसरी शताब्दी का माना जाता है</h5>
<h2>चुंबकीय शक्ति से भरा <a href="https://almora.nic.in/hi/tourist-place/%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A5%9C%E0%A4%BE/">मां कसार देवी का मंदिर</a></h2>
<h5>उत्तराखंड जैसे खूबसूरत राज्य से पूरा देश वाकिफ है, बल्कि यहां की कुछ ऐसी जगह हैं, जो विदेशों के लोगों में काफी लोकप्रिय हैं, जैसे ऋषिकेश और हरिद्वार। योग राजधानी के रूप में प्रसिद्ध ऋषिकेश में आप विदेशियों को भी घूमते हुए देख पाएंगे। लेकिन आज हम आपको उत्तराखंड में मौजूद एक ऐसे रहस्यमय मंदिर के बारे में बताने वाले हैं, जहां लोग दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं अल्मोड़ा के कसार देवी मंदिर की। इस मंदिर को 108 सिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। ये मंदिर अपने एक अनोखे चुंबकीय चमत्कार से भी लोकप्रिय है, जिसके बारे में जानने के लिए अक्सर यहां वैज्ञानिक भी आते रहते हैं। कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र <a href="https://science.nasa.gov/biological-physical/stories/van-allen-belts/">Van Ellan Belt</a> है जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है। इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं। माना जाता है कि इस चमत्कार के बारे में आजतक कोई भी पता नहीं लगा पाया है।</h5>
<h2>विवेकानंद के ध्यान की भूमि माता कसार देवी मंदिर</h2>
<h5>कसार देवी वो जगह है, जहां स्वामी विवेकानंद भी आए थे और यहां उन्होंने ध्यान किया था। तब से ये जगह और मंदिर हर तरह के यात्रियों के बीच प्रसिद्ध हो चुका है। स्वामी विवेकानंद को ये जगह इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने अपने लेखन में इसका जिक्र भी किया था। कसार देवी की शक्ति लोगों में इतनी लोकप्रिय हुई कि यहां बॉब डायलन, जॉर्ज हैरिसन, कैट स्टीवंस, एलन गिन्सबर्ग और टिमोथी लेरी जैसे कुछ प्रसिद्ध व्यक्ति भी आए थे। 70 के दशक में हिप्पी संस्कृति के दशक में ये जगह हिप्पी हिल बन गई थी।</h5>
<h2>1960-70 के दशक का हिप्पी आंदोलन</h2>
<h5>कसार देवी एक शांत गांव है जो कसार देवी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो एक शक्तिपीठ मंदिर है। 1960-70 के दशक के हिप्पी आंदोलन के दौरान, पश्चिमी देशों के लोग आध्यात्मिकता और मानसिक शांति की तलाश में यहां आते थे। कसार देवी मंदिर परिसर के पास Crank’s Ridge नामक एक पहाड़ी है जो हिप्पियों, कलाकारों, लेखकों और संगीतकारों के बीच बहुत लोकप्रिय थी। यह क्षेत्र हिप्पी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया था। यह स्थान कला, अध्यात्म और कविता का संगम था। प्रसिद्ध दार्शनिक और कलाकार जैसे बॉब डिलन और कैट स्टीवंस भी उस दौरान यहां आए थे। हिप्पी आंदोलन के दौरान, कसार देवी एक सादा जीवन जीने वाले लोगों का केंद्र था। यह तेज़ संगीत और भागदौड़ वाली गतिविधियों के लिए नहीं, बल्कि चिंतन, लेखन और आराम करने के लिए आदर्श था।</h5>
<h2>शक्ति के लिए मशहूर कसार देवी</h2>
<h5>कसार देवी मंदिर भारत की देवभूमि के नाम से फेमस उत्तराखंड की अल्मोड़ा पहाड़ियों पर स्थित है। मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहां देवी मां साक्षात अवतार में आई थीं। कहते हैं कि भारत की ये एकलौती ऐसी जगह है, जहां चुंबकीय शक्तियां मौजूद हैं। कसार देवी मंदिर परिसर में जी पी एस 8 ( KASAR DEVI GPS 8) वह पॉइंट है, जिसके बारे में अमेरिका की संस्था नासा (NASA, AMERICA) ने ग्रेविटी पॉइंट बताया है। मुख्य मंदिर के द्वार के बायीँ ओर नासा के द्वारा यह स्थान चिन्हित करते ही GPS 8 लिखा है। मंदिर के आसपास कई जगह हैं, जहां धरती के अंदर बड़े-बड़े भू-चुंबकीय पिंड हैं। आपको बता दें, कसार देवी मंदिर के आसपास का क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है। यहां धरती के अंदर भू-चुंबकीय पिंड है। इस मंदिर से कई शक्तियां जुड़ी हुई हैं, जिसका पता लगाने के लिए यहां नासा के वैज्ञानिक भी आए हैं, लेकिन आखिर में वो खाली हाथ ही लौटे हैं। इस क्षेत्र के आसपास लोगों को मानसिक शांति का अनुभव होता है।</h5>
<h2>हर साल लगता है मेला</h2>
<h5>अल्मोड़ा में मौजूद कसार देवी मंदिर एक बड़ा ही ऐतिहासिक महत्व रखता है, ये मंदिर फेमस तीर्थ स्थलों में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दौरान कसार मेला लगाया जाता है, जहां हजारों-लाखों लोग शरीक होते हैं। जानकारी के मुताबिक, मेले का महत्व न केवल देश के लोगों में बल्कि विदेशों में भी काफी फैला हुआ है। शांति पाने के लिए आप आसपास के गांव में जा सकते हैं, यहां की हरियाली और नजारे आपको यकीनन मंत्रमुग्ध कर देंगे। यही नहीं, कसार देवी बिनसर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के काफी पास है, यहां आप हर प्रजाति के पक्षियों को देख सकते हैं। कसार देवी मंदिर के आसपास आप योग और मेडिटेशन भी कर सकते हैं। यहां डियर पार्क भी है, जो नारायण तिवारी देवाई में स्थित है। ये पार्क अल्मोड़ा से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। पार्क देवदार और ओक के जंगलों से घिरा हुआ है।</h5>
<h2>कैसे पहुंचे कसार देवी के दरबार</h2>
<h5><strong>हवाईजहाज से</strong> &#8211; देहरादून का पंतनगर हवाई अड्डा कसार देवी के सबसे नजदीक है, जो 124 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से, यात्री आसानी से स्थानीय बसों या निजी टैक्सियों लेकर अल्मोड़ा जा सकते हैं जो कसार देवी मंदिर से 8 किलोमीटर दूर है।</h5>
<h5><strong>ट्रेन से</strong> &#8211; कसार देवी का पास का रेलवे काठगोदाम रेलवे स्टेशन है और यह मंदिर से 88 किलोमीटर की दूरी पर है। स्थानीय बसें और प्राइवेट टैक्सियां स्टेशन से अल्मोड़ा के लिए रोजाना चलती हैं।</h5>
<h5><strong>सड़क द्वारा</strong> &#8211; आखिरी डेस्टिनेशन, कसार देवी अल्मोड़ा से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर है, जो प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। मंदिर और दिल्ली के बीच की दूरी 373 किलोमीटर है, जिसे बसों, टैक्सियों या प्राइवेट कारों के माध्यम से कवर किया जा सकता है। आज भी यह स्थान देशी और विदेशी पर्यटकों, पर्वतारोहियों और आध्यात्मिक साधकों को आकर्षित करता है।</h5>
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		<title>यमुना में बहकर आए शव कह रहे उत्तराखंड-देहरादून आपदा की दर्दनाक कहानी</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/bodies-found-floating-river-yamuna-saharanpur-uttarakhand-cloudburst-disaster-victims-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Sep 2025 08:45:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Tourism]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Dehradun Cloud Burst]]></category>
		<category><![CDATA[devbhoomi uttarakhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Saharanpur News &#8211; उत्तराखंड में बादल फटने के बाद यमुना नदी में अचानक जलप्रवाह के कारण दो शव मिले हैं। महिला की पहचान मुरादाबाद निवासी सुंदरी और युवक की पहचान संभल निवासी मोनू के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों शवों को क़ब्ज़े में लेकर जांच के लिए भेज दिया। उत्तराखंड आपदा के पीड़ितों [&#8230;]</p>
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<h5>Saharanpur News &#8211; उत्तराखंड में बादल फटने के बाद यमुना नदी में अचानक जलप्रवाह के कारण दो शव मिले हैं। महिला की पहचान मुरादाबाद निवासी सुंदरी और युवक की पहचान संभल निवासी मोनू के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों शवों को क़ब्ज़े में लेकर जांच के लिए भेज दिया।</h5>
<h2>उत्तराखंड आपदा के पीड़ितों के शव बहकर सहारनपुर पहुंचे</h2>
<h5>उत्तराखंड में बादल फटने के बाद यमुना नदी में अचानक आए जलप्रवाह के चलते दो अज्ञात शव बेहट क्षेत्र में बहकर आने से सनसनी फैल गई। दोनों की पहचान के बाद पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। महिला मुरादाबाद और युवक संभल का रहने वाला था। मंगलवार देर शाम थाना मिर्जापुर क्षेत्र के गांव अबकरपुर बांस के पास यमुना नदी में महिला का शव मिला, जिसकी पहचान मुरादाबाद निवासी 35 वर्षीय सुंदरी के रूप में हुई। वह देहरादून के हरबर्टपुर में कार्यरत थी। इसके बाद बुधवार सुबह युवक का शव भी यमुना में बहकर आया। पुलिस जांच में युवक की पहचान मोनू पुत्र राजेंद्र निवासी फिरोजपुर थाना गढ़ी, जनपद संभल के रूप में हुई है।</h5>
<h2>देहरादून में Cloud Burst के बाद यमुना उफान पर</h2>
<h5>16 सितंबर की शाम थाना मिर्जापुर को सूचना मिली थी कि ग्राम कोटड़ा मैनपुरा के पास यमुना नदी के किनारे महिला का शव पड़ा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव कब्जे में लिया और जांच शुरू की। अगले ही दिन यानी 17 सितंबर को फिर से सूचना मिली कि नदी में एक युवक का शव दिखाई दिया है। पुलिस ने उसे भी निकालकर शिनाख्त करवाई। एसपी देहात सागर जैन ने बताया कि हाल ही में उत्तराखंड में हरबर्टपुर के आसपास भारी बारिश और बाढ़ आई थी। इसके चलते यमुना में तेज बहाव हो गया और कई लोग इसमें बह गए। आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं परिस्थितियों में महिला और युवक भी बहकर सहारनपुर पहुंचे। पुलिस का कहना है कि यह प्राकृतिक आपदा है, जिसमें उत्तराखंड से बहकर कई शव सहारनपुर तक पहुंच रहे हैं। नदी में लगातार शव मिलने से स्थानीय लोग भी दहशत में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के किनारे हालात बेहद डरावने हैं और प्रशासन को सुरक्षा इंतजाम और मजबूत करने चाहिए।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/cloudburst-uttarakhand-dehradun-flooded-bridge-swept-away-hindi/">उत्तराखंड की दून घाटी में फटा बादल, मची तबाही </a></h2>
<h5>15 सितंबर की रात उत्तराखंड की दून घाटी में आई आपदा में लापता हुए छह और लोगों के शव मिले हैं। इनमें चार शव देहरादून में और दो शव सहारनपुर के मिर्जापुर यमुना नदी में मिले हैं। इसके साथ ही मृतकों का आंकड़ा 23 पहुंच गया है। 17 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें फुलेत गांव में सहारनपुर के छह मजदूर भी शामिल हैं। फुलेत समेत कई अन्य गांवों में<a href="https://uttarakhandtraffic.com/sdrf"> SDRF</a> कई दिनों से लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है।</h5>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p dir="ltr" lang="en">Nature&#8217;s wrath so terrible? <a href="https://twitter.com/hashtag/Cloudburst?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Cloudburst</a> in <a href="https://twitter.com/hashtag/Kishtwar?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Kishtwar</a> village in <a href="https://twitter.com/hashtag/JammuAndKashmir?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#JammuAndKashmir</a> Five dead, over 25 missing.<a href="https://twitter.com/hashtag/flashfloods?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#flashfloods</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/flood?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#flood</a> <a href="https://t.co/jPx48DFv5T">pic.twitter.com/jPx48DFv5T</a></p>
<p>— Abhinay Maths (@abhinaymaths) <a href="https://twitter.com/abhinaymaths/status/1420261693813186562?ref_src=twsrc%5Etfw">July 28, 2021</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2>टूटी सड़कें, बहे पुल, कटा संपर्क</h2>
<h5>टूटी सड़कों और पुलों की मरम्मत के लिए भी SDRF, NDRF और सरकारी महकमा जुटा हुआ है। मसूरी जाने वाले दोनों मार्ग बंद हो गए। हालांकि, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अधिकारिक रूप से 23 मौत और 17 लोगों के लापता होने की जानकारी मुहैया कराई है। राजधानी और आसपास के इलाकों में हुई भारी बारिश से सभी नदी-नाले उफान पर थे। बांदल, सौंग, तमसा (टोंस) और आसन नदी में आए जल सैलाब ने चारों ओर तबाही मचाई। टोंस नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत 15 मजदूर भी बहे थे। इनमें से आठ लोगों के शव सहसपुर क्षेत्र में आसन नदी से बरामद हुए थे जबकि दो को बचा लिया गया था। इसमें से पांच अब भी लापता हैं।</h5>
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		<title>देहरादून में बादल फटने से भारी तबाही, सहस्त्रधारा में बह गईं दुकानें, SDRF ने संभाली कमान</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/cloudburst-uttarakhand-dehradun-flooded-bridge-swept-away-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 07:36:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Tourism]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[CM Uttarakhand Pushkar Singh Dhami]]></category>
		<category><![CDATA[Dehradun Cloud Burst]]></category>
		<category><![CDATA[devbhoomi uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[Sahastradhara Floods]]></category>
		<category><![CDATA[SDRF At Resque]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Dehradun Cloud Burst: देहरादून में बादल फटने से सहस्रधारा और आसपास के इलाके तबाही की चपेट में आ गए हैं। कई होटल व दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। देहरादून में बादल फटने के बाद ऋषिकेश में भी आज सुबह से चंद्रभागा नदी उफान पर है। नदी का पानी हाईवे तक [&#8230;]</p>
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<h5>Dehradun Cloud Burst: देहरादून में बादल फटने से सहस्रधारा और आसपास के इलाके तबाही की चपेट में आ गए हैं। कई होटल व दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। देहरादून में बादल फटने के बाद ऋषिकेश में भी आज सुबह से चंद्रभागा नदी उफान पर है। नदी का पानी हाईवे तक पहुंच गया है। चंद्रभागा नदी में फंसे तीन लोगों को SDRF टीम ने रेस्क्यू किया।</h5>
<h2>उत्तराखंड की राजधानी हुई पानी से लबालब</h2>
<h5>उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार देर रात बादल फटने और भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। देहरादून के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सहस्रधारा में देर रात बादल फटने की घटना हुई। इससे कई होटल और दुकानें बह गईं। कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। जबकि झाझरा के पास परवल गांव में आठ मजदूर आसन नदी के तेज बहाव में लापता हो गए, एक ट्रैक्टर और स्कूटी भी बह गए। नंदा की चौकी का पुल भी बहाव की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया। भारी बारिश से उत्पन्न विकट हालातों को देखते हुए देहरादून डीएम ने जिले के सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी की घोषणा की है। आज 12वीं तक स्कूल बंद हैं। साथ ही SDRF और राहत टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।</h5>
<h2>तेज़ बहाव और मलबे में बह गईं दुकाने</h2>
<h5>देर रात करीब 11:30 बजे हुए इस हादसे में सहस्त्रधारा का कार्लिगाड़ क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार तेज बहाव के साथ आई मिट्टी और मलबे ने सात से आठ दुकानों को पूरी तरह बहा दिया, जबकि आसपास के कई होटल भी क्षतिग्रस्त हो गए। इस हादसे में दो लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक बड़े पैमाने पर जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। हादसे की जानकारी मिलते ही SDRF और NDRF की टीमें रात में ही मौके पर पहुंच गईं। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। राहत और बचाव कार्य के लिए जेसीबी समेत भारी मशीनरी लगाई गई है। लापता लोगों की तलाश युद्धस्तर पर जारी है। कार्लिगाड़ में बादल फटने के बाद भारी मात्रा में मलबा नीचे बाजार में आ गया। इससे कई दुकानें और होटल ध्वस्त हो गए। फिलहाल प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में एहतियात बरतने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।</h5>
<h2>बारिश से कई इलाकों में जल भराव</h2>
<h5>देहरादून में देर रात मूसलाधार बारिश से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। नदी नाले ऊफान पर आ गए। कुछ इलाकों में घरों, दुकानों में जलभराव होने से लोग मुसीबत में हैं। कहीं-कहीं सड़कों पर पेड़ गिरने, मलबा आने से आवागमन बाधित हुआ है। उधर, मालदेवता में सौंग नदी ऊफान पर है। कुछ रिसॉर्ट, होटलों में मलबा और पानी घुस गया है। देहरादून में मोहनी रोड, पूरन बस्ती, बलबीर रोड, भगत सिंह कॉलोनी, संजय कॉलोनी आदि क्षेत्रों में घरों में पानी घुस गया है। आईटी पार्क के पास हाल ही में बनी सड़क मलबा आने से टूट गई है। अधोईवाला, अपर राजीवनगर में बिजली का ट्रांसफार्मर बह गया। एक पुल के टूटने की भी सूचना है। नगर निगम के कंट्रोल रूप को विभिन्न क्षेत्रों में जलभराव की सूचना मिली है, टीमें राहत बचाव के लिए मौके पर रवाना हो गई हैं।</h5>
<h2>जल प्रलय में बही <a href="https://dehraduntourism.co.in/tapkeshwar-temple-dehradun">टपकेश्वर महादेव</a> की मूर्ति, माता वैष्णों देवी की गुफा को जोड़ने वाला पुल धव्स्त</h2>
<h5>देहरादून के पौराणिक टपकेश्वर महादेव मंदिर में बारिश के चलते भयंकर जल प्रलय आ गया, जिसके बाद मंदिर के बाहर लगी पीतल की शिव मूर्ति बह गई। माता वैष्णों देवी गुफा योग मंदिर टपकेश्वर, संतोषी माता मंदिर टपकेश्वर को जोड़ने वाला गोरखा रेजिमेंट द्वारा 1962 में बना पुल भी बह गया। के वी वीरपुर और आर्मी क्षेत्र के पीछे के भाग का संपर्क कट गया।</h5>
<h2>इंस्टिट्यूट में फंसे बच्चों का सफल रेस्क्यू</h2>
<h5>देहरादून के पौंधा स्थित देवभूमि इंस्टिट्यूट परिसर में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसमें लगभग 200 छात्र-छात्राएं फंसे होने की सूचना SDRF को मिली। उक्त सूचना पर SDRF वाहिनी मुख्यालय, देहरादून से एक रेस्क्यू टीम तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना की गई। टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर त्वरित रेस्क्यू अभियान संचालित किया गया। जलभराव के बीच टीम ने अत्यंत सूझबूझ एवं तत्परता से कार्य करते हुए सभी 200 छात्र-छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। <a href="https://uttarakhandtraffic.com/sdrf">SDRF Uttarakhand</a> के प्रयासों से बचाई गए सभी बच्चे सकुशल हैं।</h5>
<h2>कॉलेज हॉस्टल में घुसा पानी, रेस्क्यू किए गए बच्चे</h2>
<h5>बारिश का कहर देहरादून में लगातार बढ़ रहा है। निमी नदी के किनारे बने एक निजी कॉलेज में हालात बिगड़ गए, जहां नदी के तेज बहाव और मलबे ने कॉलेज को अपनी चपेट में ले लिया। नदी में आए उफान ने पुल के नीचे पेड़ और मलबा फंसा दिया, जिससे पानी का बहाव सीधा कॉलेज के अंदर घुस गया। हालात बिगड़ते देख SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और हॉस्टल में फंसे छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं कमरों में मलबे के अंदर से समान निकालते युवा, जो अपने घरों के लिए निकल रहे हैं, उनका कहना है कि उन्होंने मौत का मंजर देखा है।</h5>
<h2>देहरादून में मौत का तांडव! चारों तरफ तबाही का मंजर</h2>
<h5>बादल फटने के बाद देहरादून के सहस्त्रधारा में बुरा हाल है। तबाही के बाद का मंजर देख वहां के निवासी खुद के जान को खतरे में महसूस कर रहे हैं। सहस्त्रधारा के कार्लीगाढ़ और मज्याड गांव में पहाड़ गिरने के बाद मलबे में 5 लोगों के जिंदा दफन होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ विकासनगर की आसन नदी की चपेट में 12 लोग बह गए, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई, 5 का रेस्क्यू किया गया और 4 लोग अभी तक लापता है।</h5>
<h2>मसूरी में मलबे में दबकर मजदूर की मौत</h2>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p dir="ltr" lang="en">Severe cloud burst near Dehradun has caused massive destruction,many bridges and roads incl those between Haridwar-Dehradun, Dehradun-Mussoorie have collapsed or heavily damaged, 2 persons are said to be missing, hotels and shops destroyed <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw">@narendramodi</a> ji too much urbanization… <a href="https://t.co/jQV1VNh6Ul">pic.twitter.com/jQV1VNh6Ul</a></p>
<p>— Mona kanwal (@monakaran) <a href="https://twitter.com/monakaran/status/1967800996618453330?ref_src=twsrc%5Etfw">September 16, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h5>दूसरी तरफ मसूरी में भी झड़ी पानी में एक मजदूर के आवास पर मलबा आ गया। घटना में एक मजदूर की मौत हो गई है और एक गंभीर रूप से घायल हो गया है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और घायल मजदूर को उपचार के लिए अस्पताल ले गए। शहर कोतवाल संतोष कुमार ने बताया कि बारिश का पानी और मलबा मजदूर के कच्चे आवास के ऊपर आ गया था। इससे एक मजदूर की मलबे में दबने से मौके पर ही मौत हो गई और एक मजदूर घायल हो गया है। घायल को उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।</h5>
<h2>नैनीताल में स्कूलों की छुट्टी घोषित</h2>
<h5>देहरादून में देर रात से लगातार बारिश जारी है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार अभी 24 घंटे और बारिश की संभावना जताई जा रही है। वहीं खराब मौसम को देखते हुए नैनीताल जिले में सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए जिलाधिकारी वंदना सिंह ने ये आदेश जारी किए हैं।</h5>
<h2>पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने सीएम धामी से ली आपदा की जानकारी</h2>
<h5>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फ़ोन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से देहरादून में आई आपदा की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने प्रदेश को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि केंद्र सरकार आपदा की इस घड़ी में राज्य के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग से राज्य में राहत कार्य और तेज़ी से संचालित होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक मशीनरी पूरी तत्परता से सक्रिय है और बचाव एवं राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं।</h5>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p dir="ltr" lang="hi">“जनसेवा ही संकल्प, जनहित ही प्राथमिकता…&#8221;</p>
<p>जन्मदिवस पर भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर निकले माननीय मुख्यमंत्री श्री <a href="https://twitter.com/pushkardhami?ref_src=twsrc%5Etfw">@pushkardhami</a> जी <a href="https://t.co/z6ldBAfaS6">pic.twitter.com/z6ldBAfaS6</a></p>
<p>— Office Of Pushkar Singh Dhami (@OfficeofDhami) <a href="https://twitter.com/OfficeofDhami/status/1967817238125351333?ref_src=twsrc%5Etfw">September 16, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h5>मुख्यमंत्री धामी देहरादून जनपद के प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं । इस अवसर पर स्थानीय विधायक एवं वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ उपस्थित हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रभावित परिवार को असुविधा न हो और राहत सामग्री, सुरक्षित ठहराव, भोजन, पानी एवं स्वास्थ्य सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर है और SDRF, NDRF, पुलिस बल व स्थानीय प्रशासन लगातार सक्रिय हैं।</h5>
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		<title>आस्था का वैश्विक सम्मान: गंगा आरती बनी दुनिया की सबसे भव्य और निरंतर आरती</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/haridwar-ganga-aarti-makes-presence-oxford-book-of-world-records-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 10:35:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
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		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[devbhoomi uttarakhand]]></category>
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		<category><![CDATA[Oxford Book Of World Records]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत की आस्था और संस्कृति को मिला वैश्विक सम्मान! हरिद्वार की पावन गंगा आरती को आधिकारिक रूप से Oxford Book Of World Records में स्थान प्राप्त हुआ है। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के लिए ऐतिहासिक क्षण है। भारत की सांस्कृतिक विरासत ‘हरिद्वार की गंगा [&#8230;]</p>
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<h5>भारत की आस्था और संस्कृति को मिला वैश्विक सम्मान! हरिद्वार की पावन गंगा आरती को आधिकारिक रूप से <a href="https://oxfordbookofworldrecords.com/">Oxford Book Of World Records</a> में स्थान प्राप्त हुआ है। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत की आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के लिए ऐतिहासिक क्षण है।</h5>
<h2>भारत की सांस्कृतिक विरासत ‘हरिद्वार की गंगा आरती’</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/mahashivratri-in-banaras-mangala-aarti-hindi/">भारत की सांस्कृतिक धरोहर</a> और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक हरिद्वार की गंगा आरती को अब वैश्विक स्तर पर पहचान मिल गई है। हरकी पैड़ी पर 109 वर्षों से निरंतर आयोजित होने वाली गंगा आरती को ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। शुक्रवार को हरकी पैड़ी स्थित गंगा सभा कार्यालय में ऑक्सफोर्ड बुक्स ऑफ रिकॉर्ड्स के भारत में प्रतिनिधि और संरक्षक सुरेश मिश्रा ने एक आयोजन में श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और महामंत्री तन्मय वशिष्ठ तथा अन्य पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया।</h5>
<h5>ऑक्सफोर्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे दुनिया की सबसे भव्य और निरंतर आयोजित होने वाली आरतियों में से एक के रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान की है। यह ऐतिहासिक क्षण न केवल हरिद्वार और उत्तराखंड, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है।</h5>
<h2>गंगा आरती की परंपरा और वैभव</h2>
<h5>1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से शुरू हुई गंगा आरती आज भी अपनी दिव्यता और विशालता के लिए जानी जाती है। हर की पैड़ी पर रोज़ाना तीन बार हजारों भक्त दीपदान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इसमें सम्मिलित होते हैं। इसका सीधा प्रसारण आज पूरी दुनिया में देखा जाता है।</h5>
<h5>गंगा आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है। दीपों की लौ और वेदों की ध्वनि पूरे विश्व को ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश देती है। प्रतिदिन हरिद्वार के हर की पैड़ी पर संपन्न होने वाली गंगा आरती, अपने दिव्य वातावरण, वैदिक मंत्रोच्चार, दीपों की हजारों ज्योतियों और भक्तों की सामूहिक उपस्थिति के कारण विश्वभर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व की सबसे भव्य एवं निरंतर आयोजित होने वाली आरतियों में से एक के रूप में मान्यता मिली है।</h5>
<h2>आध्यात्मिक शांति और मानव कल्याण का संदेश</h2>
<h5>गंगा आरती सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह आयोजन विश्व शांति, मानव कल्याण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इसमें शामिल होकर उन्हें आत्मिक शांति और दिव्यता की अनुभूति होती है। उल्लेखनीय है कि हर की पैड़ी की प्रबंधकारिणी तीर्थ पुरोहितों की संस्था श्री गंगा सभा 1916 से लगातार हरकी पैड़ी पर इस महा आरती का आयोजन कर रही है। कोरोना काल में भी प्रतिदिन निर्बाध रूप से आरती का आयोजन किया गया।</h5>
<h5>श्री गंगा सभा में ऑक्सफोर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाणपत्र सौंपा गया। इसके बाद अगले वर्ष गंगा सभा का प्रतिनिधिमंडल ऑक्सफोर्ड यूनियन (यूके) में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय समारोह में भाग लेगा। श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने बताया कि यह श्री गंगा सभा, हरिद्वार तथा उत्तराखंड के लोगों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। गंगा सभा इस सम्मान से गौरवान्वित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि गंगा सभा भविष्य में भी इससे बड़े सम्मान अपने काम को लेकर प्राप्त करेगी ऐसी उन्हें उम्मीद है।</h5>
<h2>श्री हरि, अर्थात <a href="https://badrinath-kedarnath.gov.in/AboutUs/shri-badrinath.aspx">बद्रीनाथ धाम का द्वार है हरिद्वार</a></h2>
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<h5>उत्तराखंड में हरिद्वार अर्थात हरि का द्वार है। हरि याने भगवान विष्णु। हरिद्वार नगरी को भगवान श्रीहरि (बद्रीनाथ) का द्वार माना जाता है, जो गंगा के तट पर स्थित है। पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र और गंगा द्वार भी कहा जाता है। यह भारतवर्ष के सात पवित्र स्थानों में से एक है। हरिद्वार में हर की पौड़ी को ब्रह्मकुंड कहा जाता है। इसी विश्वप्रसिद्ध घाट पर कुंभ का मेला लगता है और यहीं पर विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती होती है।</h5>
<h5>हरिद्वार की गंगा आरती जग प्रसिद्ध है। इस आरती का गवाह बनने सिर्फ भारतीय पर्यटक ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी भारी मात्रा में आते हैं। गंगा की पवित्र लहरों के घाट जिसे हर की पौड़ी के नाम से जाना जाता वहां पर हर संध्या को आरती की जाती है जो गंगा मैया को समर्पित है। पुजारियों द्वारा हाथ में लिए बड़े-बड़े दीयों से इस पावन स्थान की आरती की जाती है। आरती देखकर ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने स्थल को अपनी रोशनी से जगमगा दिया हो। पानी में पड़ता दीयों का प्रतिबिंब टिमटिमाते सितारों की तरह मालूम पड़ता है। महाआरती की मधुर आवाज़ पूरे घाट में गूंजती हुई सुनाई पड़ती है।</h5>
<h5> हरिद्वार की तर्ज पर बाद में गंगा आरती का आयोजन ऋषिकेश, वाराणसी, प्रयाग और चित्रकूट में भी होने लगा। हरिद्वार की गंगा महा आरती को देखते हुए 1991 में वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर भी मां गंगा की आरती प्रारंभ हुई थी।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/haridwar-ganga-aarti-makes-presence-oxford-book-of-world-records-hindi/">आस्था का वैश्विक सम्मान: गंगा आरती बनी दुनिया की सबसे भव्य और निरंतर आरती</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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		<title>35 साल बाद मिले 24 दोस्तों के लिए आखिरी साबित हुआ Reunion, धराली की आसमानी आफ़त ने निगला</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/maharashtra-friends-reunion-after-thirty-five-years-proved-last-uttarkashi-dharali-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Aug 2025 05:12:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
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		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
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		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[Uttarkashi Dharali Cloudburst]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उत्तराखंड के उत्तराकाशी में आई भीषण बाढ़ के बाद ‘ऑपरेशन जिंदगी’ युद्धस्तर पर जारी है। बचाव कार्य में तेजी लाते हुए अभी तक 274 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि लापता लोगों को तलाशने के लिए सेना, ITBP, NDRF और SDRF की टीमें लगातार खोज और बचाव कार्य में जुटी हैं। इस [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/maharashtra-friends-reunion-after-thirty-five-years-proved-last-uttarkashi-dharali-hindi/">35 साल बाद मिले 24 दोस्तों के लिए आखिरी साबित हुआ Reunion, धराली की आसमानी आफ़त ने निगला</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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<h5><a href="https://thecsrjournal.in/soldiers-feared-missing-after-dharali-army-camp-hit-flash-flood-uttarkashi-kalp-kedar-destroyed-hindi/">उत्तराखंड के उत्तराकाशी में आई भीषण बाढ़</a> के बाद ‘ऑपरेशन जिंदगी’ युद्धस्तर पर जारी है। बचाव कार्य में तेजी लाते हुए अभी तक 274 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि लापता लोगों को तलाशने के लिए सेना, ITBP, NDRF और SDRF की टीमें लगातार खोज और बचाव कार्य में जुटी हैं। इस आपदा में जो लोग लापता हैं उनमें वे 24 दोस्त भी शामिल हैं जो उत्तराकाशी जाने के लिए करीब 35 साल बाद एक साथ मिले थे।</h5>
<h2>35 साल बाद मिले 24 दोस्त, आखिरी साबित हुआ Reunion</h2>
<h5>कहते हैं कि नियति आपको किस्मत में लिखे के पास लेकर जाती है। ऐसा ही एक बड़ा उदाहरण उत्तराखंड की तबाही के बाद सामने आ रहा है। महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 60 किमी दूर स्थित मंचर के एक आवासी खुर्द गांव का एक स्कूल,  जिसमें साल 1990 में 10वीं क्लास के 24 सहपाठी 35 सालों के बाद रियूनियन के लिए उत्तराखंड पहुंचे। उसी समय उत्तराखंड के उत्तराकाशी में बादल फटने की घटना हुई, जिसमें आई भीषण बाढ़ के बाद ये सभी दोस्त लापता हो गए हैं। ये सभी लोग 1990 में पुणे से लगभग 60 किलोमीटर दूर मंचर के आवासी खुर्द गांव के एक स्कूल में कक्षा 10वीं में एक साथ पढ़ते थें। मंगलवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित धराली गांव में आए जलप्रलय के बाद इन 24 दोस्तों का कुछ पता नहीं चल पाया है।</h5>
<h2>चारधाम यात्रा के निकले दोस्त हुए लापता</h2>
<h5>राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि महाराष्ट्र के कम से कम 149 पर्यटक उत्तराखंड में फंसे हुए हैं।आवासारी खुर्द निवासी अशोक भोर और 1990 बैच के उनके दसवीं कक्षा के 23 दोस्त 35 साल बाद &#8216;चार धाम यात्रा&#8217; के लिए फिर से मिले। इन लोगों ने 1 अगस्त को मुंबई से ट्रेन पकड़ी थी और 12 अगस्त को फ्लाइट से इनकी वापसी थी। अशोक भोर के बेटे आदित्य ने बताया कि पिता से उनके परिवार ने आखिरी बार सोमवार शाम 7 बजे के आसपास बात की थी। उस वक्त वह सभी गंगोत्री से लगभग 10 किमी दूर थे और मामूली भूस्खलन के चलते फंसे हुए थे। आदित्य ने बताया कि अब उनके फोन भी नहीं मिल रहे।</h5>
<h2>पुणे के बैचमेट ने बताया वीडियो कॉल पर हुई थी बात</h2>
<h5>लापता 24 दोस्तों के बैचमेट मल्हारी अभंग ने बताया कि आखिरी बार सोमवार दोपहर वीडियो कॉल पर बातचीत हुई थी। कुछ ने गंगोत्री यात्रा से जुड़े सोशल मीडिया अपडेट भी साझा किए थे। वे 5 अगस्त को उत्तरकाशी में रुके थे और 6 अगस्त को गौरीकुंड जाने वाले थे। हरिद्वार से उन्होंने एक बस बुक की थी, लेकिन उसके बाद से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/cloudburst-uttarkashi-dharali-kills-four-turnning-village-into-rubbles-hindi/">महाराष्ट्र के तक़रीबन 150 पर्यटक धराली में फंसे</a></h2>
<h5>राज्य आपदा प्रबंधन के एक अधिकारी ने कहा, उत्तराखंड में फंसे पर्यटकों से संपर्क करना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन हम उत्तराखंड प्रशासन के संपर्क में हैं। महाराष्ट्र के फंसे हुए पर्यटकों में से 76 मुंबई से, 17 छत्रपति संभाजीनगर से, 15 पुणे से, 13 जलगांव से, 11 नांदेड़ से, पांच ठाणे से, नासिक और सोलापुर से चार-चार, मालेगांव से तीन और अहिल्यानगर से एक पर्यटक हैं। मुंबई के लगभग 61 पर्यटक सुरक्षित हैं और अभी हनुमान आश्रम में हैं। हालांकि, 149 पर्यटकों में से लगभग 75 के फोन अभी भी बंद हैं और नेटवर्क से बाहर हैं।</h5>
<h2>जलगांव के 16 लोग उत्तरकाशी में आई आपदा में लापता</h2>
<h5>जलगांव के कलेक्टर आयुष प्रसाद के अनुसार, इस सप्ताह की शुरुआत में उत्तराखंड के उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ के बाद, महाराष्ट्र के जलगांव जिले के 16 लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। स्थिति पर अपडेट देते हुए, प्रसाद ने कहा, &#8220;सूचना मिली है कि जलगांव जिले के 19 लोग उत्तरकाशी में हैं, जिनमें से तीन लोगों से संपर्क हो गया है। 16 लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है।” उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र सरकार और जलगांव जिला प्रशासन लापता व्यक्तियों का पता लगाने के लिए उत्तराखंड सरकार और उत्तरकाशी जिला प्रशासन के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, &#8220;महाराष्ट्र सरकार और जिला प्रशासन ने उत्तराखंड सरकार और उत्तरकाशी जिला प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की है। हमें उत्तराखंड सरकार से पूरा सहयोग मिल रहा है।”</h5>
<h2>टूटी सड़कें और मौसम पहुंचा रहे राहत कार्य में बाधा</h2>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p dir="ltr" lang="en">Yesterday&#8217;s flash flood caused by cloud burst in Uttarkashi, North India is another reminder from mother nature to stop excess construction work, deforestation in the hills&#8230;</p>
<p>No matter how strong your economy or technology is, It doesnt stand a chance in front of nature&#8217;s… <a href="https://t.co/3neTYgxSph">pic.twitter.com/3neTYgxSph</a></p>
<p>— Lisa Sebastian (@Goan_Senorita) <a href="https://twitter.com/Goan_Senorita/status/1952968448910168422?ref_src=twsrc%5Etfw">August 6, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h5>राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के महानिरीक्षक अरूण मोहन जोशी ने कहा, हमारी प्राथमिकता आज उन्नत उपकरणों को हवाई मार्ग के जरिए मौके पर पहुंचाना है। उन्नत उपकरणों के साथ आ रही हमारी टीम बुधवार को सड़कों के अवरूद्ध होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकीं। उन्होंने बताया कि धराली में 50 से 60 फुट ऊंचा मलबे का ढेर है और आपदा में लापता लोग उसके नीचे फंसे हो सकते हैं। जोशी ने बताया कि उन्नत उपकरण विशाल मलबे में लापता लोगों की तलाश करने में बचाव कर्मियों की मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि दूसरी प्राथमिकता अवरूद्ध मार्गों के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे श्रद्धालुओं को बाहर निकालना है। उन्होंने बताया कि उनकी संख्या 300-400 हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि सुबह 10 बजे तक 61 लोगों को हेलीकॉप्टर से ITBP मातली लाया जा चुका है। बाहर निकाले गए लोगों को उनके गंतव्य तक भेजने के प्रबंध भी किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और पर्यटकों के अलावा, लापता लोगों में मजदूर भी हो सकते हैं क्योंकि बाढ़ आने के समय कई होटल निर्माणाधीन थे। इसके अतिरिक्त ऐसा बताया जा रहा है कि आपदा के समय धराली में सेब के बागानों में भी कई मजदूर काम कर रहे थे।</h5>
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		<title>Chardham Yatra: केदारनाथ में घोड़े और खच्चरों में मिला Equine Influenza Virus </title>
		<link>https://thecsrjournal.in/equine-influenza-virus-found-horses-mules-kedarnath-uttarakhand-quarantine-centres-chardham-yatra-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Apr 2025 07:37:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Animal Welfare & Cruelty]]></category>
		<category><![CDATA[Char Dham Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[devbhoomi uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[Equine Influenza Virus]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Equine Influenza Virus: Uttarakhand चार धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने की तारीखों का ऐलान हो चुका है। 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। इस यात्रा से पहले Kedarnath में घोड़े और खच्चरों में एक्वाईन इन्फ्लुएंजा वायरस Equine Influenza Virus के मिलने से चार धाम यात्रा को लेकर Uttarakhand [&#8230;]</p>
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<h5><a href="https://www.msdvetmanual.com/respiratory-system/respiratory-diseases-of-horses/equine-influenza">Equine Influenza Virus:</a> Uttarakhand चार धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने की तारीखों का ऐलान हो चुका है। 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। इस यात्रा से पहले Kedarnath में घोड़े और खच्चरों में एक्वाईन इन्फ्लुएंजा वायरस Equine Influenza Virus के मिलने से चार धाम यात्रा को लेकर Uttarakhand की Pushkar Singh Dhami सरकार Alert Mode में आ गई है।</h5>
<h2>चारधाम यात्रा पर लगा Equine Influenza Virus का ग्रहण</h2>
<h5>देश भर के लाखों करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की यात्रा, चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) 30 अप्रैल 2025 से शुरू होने वाली है। इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। Registrations हो चुके हैं, टिकटें बुक हो चुकी हैं, प्रशासन भी पूरी तरह तैयार है, लेकिन इस यात्रा के शुरू होने से पहले केदारनाथ से एक चिंताजनक खबर आई है। यहां घोड़े और खच्चरों में एक खतरनाक वायरस एक्वाईन इन्फ्लुएंजा (Equine Influenza Virus) मिला है।</h5>
<h5>इस वायरस के पाए जाने के बाद Uttarakhand की पुष्कर सिंह धामी सरकार अलर्ट हो गई है। रुद्रप्रयाग जिले में दो Quarantine Center बनाए गए हैं। आइए जानते हैं आखिर एक्वाईन इन्फ्लुएंजा वायरस (EIV) क्या है और धामी सरकार ने इससे निपटने के लिए क्या-क्या तैयारियां की हैं!</h5>
<h2>Uttarakhand पशुपालन मंत्री ने दिए सख्त निर्देश</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/uttarakhand-tourism-started-indias-first-gyrocopter-air-safari/">Uttarakhand चारधाम यात्रा</a> मार्ग पर 12 अश्ववंशीय पशुओं में Equine Influenza Virus मिला है। इस वायरस के मिलने के बाद पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने अधिकारियों के साथ तुरंत बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले और यात्रा के दौरान घोड़े-खच्चरों की वायरस को लेकर ठीक ढंग से स्क्रीनिंग पर फोकस किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह Virus एक पशु से दूसरे में तेजी से फैलता है, इसलिए इस Virus से संक्रमित घोड़े-खच्चरों के मालिकों को इन्हें अन्य जानवरों से दूर रखने की हिदायत दी गई है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित फाटा और कोटमा में संक्रमित पशुओं को रखने के लिए Quarantine Center बनाए गए हैं। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने राज्य के सभी पशु रोग नियंत्रण चौकियों पर अश्ववंशीय पशुओं की स्क्रीनिंग करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा में किसी भी रोगग्रस्त घोड़े-खच्चर को ले जाने की अनुमति नहीं जाएगी।</h5>
<h2>घोड़े-खच्चरों से अधिकांश श्रद्धालु करते हैं सफर</h2>
<h5>चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ और यमुनोत्री धाम की कठिन और लंबी चढ़ाई के लिए अधिकांश श्रद्धालु घोड़े और खच्चरों से जाते हैं। इस यात्रा के दौरान घोड़े और खच्चर पालने वालों की खूब आमदानी होती है। चारधाम यात्रा के दौरान राज्य के बाहर से भी घोड़े और खच्चर आते हैं। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने अधिकारियों को राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी अलर्ट रहने के निर्देश दिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी घोड़े और खच्चर को बिना स्वास्थ्य परीक्षण के जाने नहीं दिया जाए। Uttarakhand के 5 जिलों के सभी घोड़े-खच्चरों के Serological Sample लिए जाएंगे। इस सैंपल की जांच इंडियन वेटरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (Indian Vetery Research Institute) मुक्तेश्वर में कराई जाएगी। जो भी पशु Equine Influenza Virus Positive पाया जाएगा, उसे तुरंत क्वारंटीन किया जाएगा। क्वारंटीन के 12 दिनों के बाद फिर से सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही ऐसे पशु को चारधाम यात्रा में ले जाने की अनुमति दी जाएगी, और इसके पहले मालिक को घोड़े-खच्चर की नेगेटिव रिपोर्ट दिखानी पड़ेगी।</h5>
<h2>क्या है Equine Influenza Virus</h2>
<h5>Equine Influenza Virus घोड़ों, खच्चरों और गधों को अपनी चपेट में लेता है। इस वायरस से संक्रमित पशुओं को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इस वायरस के गिरफ्त में आने पर पशुओं में तेज बुखार होता है, नाक से स्राव होता है, खांसी आती है और थकान महसूस होती है। Equine Influenza, इन्फ्लूएंजा A वायरस के दो उपप्रकारों H7N7 और H3N8 के कारण होता है। यह वायरस संक्रमित घोड़ों, खच्चरों और गधों के संपर्क से दूषित वस्तुओं के जरिए फैलता है। Equine Influenza Virus से संक्रमित पशु, मनुष्यों के लिए बड़ा खतरा नहीं हैं, लेकिन संक्रमित घोड़ों के संपर्क में आने वाले कुछ लोगों में EIV के लिए एंटीबॉडी विकसित हो सकती है।</h5>
<h2>30 अप्रैल से खुलेंगे चार धाम के कपाट</h2>
<h5>चारों धामों के कपाट खुलने की तारीखों का ऐलान हो चुका है। अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को है। इस दिन से गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलेंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को खोले जाएंगे। चमोली जिले स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खोले जाएंगे। सिखों के पवित्र श्री हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई 2025 को खुलेंगे।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/equine-influenza-virus-found-horses-mules-kedarnath-uttarakhand-quarantine-centres-chardham-yatra-hindi/">Chardham Yatra: केदारनाथ में घोड़े और खच्चरों में मिला Equine Influenza Virus </a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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		<title>उत्तराखंड के चमोली में फिर हुआ हादसा, हेमकुंड साहिब जाने का मार्ग हुआ बंद</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/uttarakhand-chamoli-hemkund-sahib-bridge-collapsed-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Mar 2025 04:33:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Tourism]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[chaar dham yatra]]></category>
		<category><![CDATA[chamoli Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[devbhoomi uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[Gurudwara hemkund sahib]]></category>
		<category><![CDATA[landslide]]></category>
		<category><![CDATA[uttarakhand landslide]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Uttarakhand News: पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को खुलने वाले हैं। ऐसे में यात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं, लेकिन इस पुल के टूटने से अब यात्रा पर असर पड़ सकता है। उत्तराखंड के गोविंदघाट में मंगलवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। अचानक पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर गिरने से [&#8230;]</p>
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<h5><a href="https://thecsrjournal.in/avalanche-traps-bro-workers-uttarakhand/">Uttarakhand</a> News: पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को खुलने वाले हैं। ऐसे में यात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं, लेकिन इस पुल के टूटने से अब यात्रा पर असर पड़ सकता है। उत्तराखंड के गोविंदघाट में मंगलवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। अचानक पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर गिरने से गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जाने वाला पैदल पुल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे के बाद हेमकुंड साहिब और विश्व धरोहर फूलों की घाटी जाने का मार्ग बाधित हो गया है।</h5>
<h2>Uttarakhand में सिखों का पवित्र स्थल हेमकुंड साहिब</h2>
<h5>Uttarakhand के चमोली जिले में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब सिखों के सबसे पवित्र प्रार्थना स्थलों में गिना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सिखों के दसवें और अंतिम गुरु श्री गोविंद सिंहजी ने अपने पिछले जन्म में यहीं ध्यान लगाया था। इस खेतर में हेमकुंड साहिब ट्रस्ट की सेवाएं उल्लेखनीय हैं। ट्रस्ट ने हेमकुंड साहिब जाने के रास्ते में सड़कें और यात्रियों की सुविधा के लिए गुरुद्वारे बनवाए हैं। साल के 4 माह ही यात्री हेमकुंड साहिब के दर्शन पा सकते हैं। हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 25 मई को खुलने वाले हैं। ऐसे में यात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं, लेकिन इस पुल के टूटने से अब यात्रा पर असर पड़ सकता है।</h5>
<h2>पुल के टूटने से यात्रा हो सकती है प्रभावित</h2>
<h5>स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 10 बजे हुई, जब पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर पुल पर गिर गया. इससे यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 25 मई को खुलने वाले हैं। यात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं, लेकिन इस पुल के टूटने से अब यात्रा के संभावित समय पर असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि 2013 की आपदा में भी इस स्थान पर पहले बना पुल बह गया था, जिसके बाद इस नए पुल का निर्माण किया गया था। यह पुल गाड़ियों के आवागमन के लिए नहीं था, बल्कि तीर्थयात्रियों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए बनाया गया था।</h5>
<h2>अचानक से पुल पर गिर गया पहाड़,</h2>
<h5> Uttarakhand की अलकनंदा नदी के ऊपर बने 110 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण 2015 में हुआ था। 2025 में इस वैली ब्रीज का निर्माण होना था। लेकिन चट्टान टूटने की वजह से यह पुल टूट गया है। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह पहाड़ का आधा हिस्सा टूटकर पल के ऊपर आया, जिससे पुल टूट गया। पुल के टूटने से पुलना गांव में 300 से अधिक लोग फंस गए हैं। पुल टूटने के दौरान एक बाइक सवार गुजर रहा था, जो कि अभी भी लापता है। पुलिस एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन बाइक सवार की तलाश कर रही है।</h5>
<h2>Uttarakhand प्रशासन और संबंधित विभाग मौके पर पहुंचे</h2>
<h5>हेमकुंड साहिब के कपाट अभी बंद हैं, इसलिए इस मार्ग पर अधिक भीड़ नहीं थी। इस समय केवल पुलना गांव के ग्रामीण ही इस मार्ग पर तीन किलोमीटर तक गाड़ियों से आवाजाही कर रहे थे। घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग मौके पर पहुंच गए। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा, ताकि हेमकुंड साहिब की यात्रा सुचारु रूप से शुरू हो सके। अब सबसे बड़ी चुनौती इस मार्ग को जल्द से जल्द दुरुस्त करना है, ताकि हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाएगी, ताकि यात्रा में बाधा न आए।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/uttarakhand-chamoli-hemkund-sahib-bridge-collapsed-hindi/">उत्तराखंड के चमोली में फिर हुआ हादसा, हेमकुंड साहिब जाने का मार्ग हुआ बंद</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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