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	<title>covid_19 Archives - The CSR Journal</title>
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	<title>covid_19 Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>टीका उत्सव मनाएं, टीकाकरण कराएं, कोरोना भगाएं  </title>
		<link>https://thecsrjournal.in/tika-utsav-encourage-corona-vaccination-india-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Apr 2021 11:08:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Corona Vaccination Drive]]></category>
		<category><![CDATA[Coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देश भर के एक बार फिर से कोरोना के केसेस बढ़ रहे है। कोरोना की ये दूसरी लहर, पहली लहर से ज्यादा घातक है, ज्यादा खतरनाक है। कोरोना ने साल 2020 में जब दस्तक दी थी तो संपूर्ण लॉक डाउन लग गया था। लेकिन इस बार भले मामले ज्यादा हो लेकिन हम लॉक डाउन के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>देश भर के एक बार फिर से कोरोना के केसेस बढ़ रहे है। कोरोना की ये दूसरी लहर, पहली लहर से ज्यादा घातक है, ज्यादा खतरनाक है। कोरोना ने साल 2020 में जब दस्तक दी थी तो संपूर्ण लॉक डाउन लग गया था। लेकिन इस बार भले मामले ज्यादा हो लेकिन हम लॉक डाउन के विकल्प को नहीं चुन सकते क्योंकि हमें कोरोना से बचने के साथ साथ आर्थिक तौर पर भी मजबूत होना है। कोरोना को मात देने के लिए हमारे पास कुछ ही हथियार है, हमेशा मास्क पहनना है, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है और सबसे महत्वपूर्ण कोरोना का टीका लगवाना है।</h5>
<h2>टीका नहीं लगवाने और लापरवाही की वजह से कोरोना ने तोड़े सारे रिकॉर्ड</h2>
<h5>देशभर में कोरोना का खौफनाक मंजर फैला हुआ है। कोरोना ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए पूरे देश में तबाही मचा रखी है। पूरे देश भर से कोरोना के डरावने आकड़े आ रहे है। गुरुवार को 1 लाख 26 हजार से ज्यादा केसेस आये। इसी के चलते देश के कुछ शहरों में टोटल लॉकडाउन तो ज्यादातर जगह नाइट कर्फ्यू लगाया जा चुका है। जानकारों की मानें तो कोरोना के मामले इसलिए बढ़ रहे है क्योंकि लोगों ने कोरोना को लेकर ढिलाई बरतनी शुरू कर दी थी। यहां तक कि लापरवाही ऐसे होने लगी थी कि मानो कोरोना खत्म सा हो गया था।</h5>
<h2>अपनी बारी आने के बाद जरूर लगवाएं टीका (Vaccination in India)</h2>
<h5>पहली लहर के दौरान हर कोई यही सवाल पूछ रहा था कि कोरोना का टीका कब तक इजात होगा, कब तक कोरोना का टीका आ पायेगा। लेकिन जब कोरोना का टीका आया तो लापरवाही ऐसे होने लगी कि लोगों से अपील करनी पड़ी कि कोरोना का टीका लगवाएं। आम जनमानस तो ठीक, फ्रंट लाइन वर्कर्स भी टीका लेने से हिचकिचाने लगे। टीके को लेकर राजनीति होने लगी, विपक्ष टीके को बीजेपी का टीका कहने लगे, राजनीति और अफवाह टीके पर इस कदर भारी पड़ी कि लोगों में टिका लगवाने को लेकर भ्रम की स्तिथि पैदा हो गयी। और फिर आज नतीजा क्या है सब जानते है कि एक दिन में लाख लाख केस से ज्यादा हो रहे है।</h5>
<h2>11 से 14 अप्रैल तक देश भर में मनाया जायेगा <a href="https://thecsrjournal.in/tika-utsav-modi-covid-zero-vaccine-wastage/">टीका उत्सव</a></h2>
<h5>टीके को लेकर जागरूकता नहीं होने की वजह से केंद्र सरकार द्वारा दिए गए टीके बिना इस्तेमाल के बेकार हो गए। सही तरीके से टीके का इस्तेमाल हो इसलिए पूरे देश में 11 अप्रैल ज्योतिबा फुले के जन्मदिवस से लेकर 14 अप्रैल, बाबा साहब आंबेडकर के जन्मदिन तक देश में &#8216;टीका उत्सव&#8217; मनाया जायेगा, जिसकी घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। पीएम ने इस टीका उत्सव के दौरान सभी लोगों के शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने की बात कही। उन्होंने टीका उत्सव को लेकर देश के युवाओं से भी आह्वान किया कि वो लोग आगे आएं और वैक्सीनेशन के बारे में जागरूकता फैलाएं।</h5>
<h2>आपके द्वारा टीका नहीं लगवाने से वेस्ट हो रहा है वैक्सीन (Corona Vaccination) का डोज</h2>
<h5>कोरोना को मात देने के लिए भारत उन देशों की लिस्ट में शुमार है जहां कोरोना की लड़ाई में हम सबसे पहले वैक्सीन का इजात किये और आम जनता को वैक्सीन लगना भी शुरू हो गया। लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि भारत में वैक्सीन की पर्याप्त मात्रा मौजूद तो है लेकिन उसे लेने के लिए लोग सामने नहीं आ रहे है लिहाजा वैक्सीन की डोस खराब हो जा रही है।</h5>
<h2>भारत में वैक्सीन &#8211; किसे कितनी मिली, कितनी बची</h2>
<h5>देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच वैक्सीनेशन को लेकर विवाद जारी है। कई राज्यों में वैक्सीन की कमी की बात सामने आई है, लेकिन केंद्र सरकार वैक्सीन की कमी से इनकार कर रही है। पिछले कुछ दिनों में वैक्सीन की कमी के मुद्दे पर राज्य और केंद्र के बीच बहस हो चुकी है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि कुछ राज्यों पर वैक्सीन डोज की कमी का खतरा मंडरा रहा है लेकिन केंद्र सरकार का दावा है कि स्टॉक को जल्द पूरा कर लिया जायेगा।</h5>
<h2>महाराष्ट्र को मिली सबसे ज्यादा वैक्सीन (Vaccination in Maharashtra)</h2>
<h5><a href="https://www.mohfw.gov.in/">केंद्र सरकार</a> द्वारा आकड़ों के अनुसार वैक्सीन पाने वालों की लिस्ट में महाराष्ट्र सबसे ऊपर है। उसे 1 करोड़, 6 लाख, 19 हजार, 190 जबकि सबसे कम चंडीगढ़ को 1 लाख, 80 हजार, 930 डोज मिली है। जहां तक बात बचे भंडार की है तो आंध्र प्रदेश के पास मात्र एक दिन से थोड़े ज्यादा का भंडार बचा है। हालांकि, उसे अगले 14 दिनों की खपत औसत से वैक्सीन की डिलीवरी होने वाली है। आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र के पास 3 दिनों से कुछ ज्यादा के वैक्सीन भंडार हैं जबकि इतनी वैक्सीन की डिलीवरी होने वाली है जिससे उसे अगले 9 दिनों तक का भंडार जमा हो जाएगा।</h5>
<h5>कोरोना से जंग जीतने के लिए वैक्सीनेशन का काम बहुत तेजी से चल रहा है। इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय से मिले डेटा के अनुसार देश में जिस स्पीड से वैक्सीनेशन हो रहा है उसके मुताबिक सिर्फ 5.5 दिनों के लिए वैक्सीन बची है। एक और हफ्ते की अतिरिक्त सप्लाई के लिए वैक्सीन पाइपलाइन में हैं। आंध्र प्रदेश और बिहार की बात करें तो यहां का मौजूदा वैक्सीन स्टॉक दो दिन से भी कम है। वहीं, ओडिशा जैसे राज्यों के पास बड़ी मुश्किल से 4 दिनों का स्टॉक है। पूरे देश की बात करें तो अप्रैल में रोजाना वैक्सीनेशन की दर करीब 3.6 मिलियन डोज प्रतिदिन की रही है।</h5>
<h2>देश में अब तक कुल 9,43,34,262 लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई है।</h2>
<h5>देश में अब तक कुल 9,43,34,262 लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई है। लेकिन इन आकड़ों में आपका नाम अगर नहीं है तो आज ही टीका लगवाने के लिए अपने आप को रजिस्टर्ड करवाएं। टीका लगवाएं और कोरोना से मुक्ति पाएं।</h5>
<h2>टीकाकरण होने से कोरोना का खतरा बेहद कम</h2>
<h5>कोरोना के बढ़ते मामलों के देखने के बाद जिस तरह की वैक्सीन लगवाने की होड़ सेंटरों पर देखी जा रही है ऐसा लग रहा है कि अब कोरोना के वैक्सीन को लेकर भ्रांतियां खत्म हो चुकी है। यहां बताना बेहद जरुरी है कि कोरोना के टीके के बाद ऐसा नहीं है कि आप बिलकुल कोरोना से सेफ हो गए। आपको वैसे ही कोरोना से बचने के लिए मास्क पहनना है, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है। जब तक दोनों डोस नहीं आप ले लेते है तब तक आप कोरोना से सुरक्षित नहीं है। कोरोना का टीका लगवाने के बाद कोरोना का ख़तरा बेहद कम हो जाता है।</h5>
<h2>दूसरे देशों को होती रहेगी वैक्सीन की सप्लाई, अपने देश में भी है पर्याप्त मात्रा</h2>
<h5>देश में जितनी तेजी से कोरोना संक्रमण का प्रसार हो रहा है, उतनी ही तेजी से कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) की मांग भी बढ़ने लगी है। वही दूसरी तरफ अन्य देशों को वैक्सीन की सप्लाई की जा रही है। इसको लेकर विपक्ष लगातार केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमले कर रहा है। यहां हम बता दें कि इस मामले पर अब कोवैक्स (COVAX) ग्लोबल वैक्सीन फैसिलिटी ने कहा कि भारत का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) कोरोना वैक्सीन को अन्य देशों को सप्लाई करने के लिए बाध्य है।</h5>
<h2>हर दिन 20 लाख खुराक का उत्पादन हो रहा है, मित्र देशों को अभी तक कोविड-19 रोधी टीके की 6.44 करोड़ डोज उपलब्ध कराई हैं</h2>
<h5>सीरम इंस्टिट्यूट की माने तो कंपनी प्रति दिन 20 लाख खुराक का उत्पादन कर रही है। सीरम ने अकेले भारत में 10 करोड़ से अधिक खुराक दी हैं और अन्य देशों को लगभग छह करोड़ खुराक का निर्यात किया है। कोवैक्स की को-लेड गावी (Global Alliance for Vaccines and Immunisation) ने जानकारी दी कि एक ऐसा समझौता है, जिसमें प्रावधान है कि भारत विकासशील देशों को वैक्सीन की सप्लाई करने से इनकार नहीं कर सकता है। गावी के साथ हुए इस समझौते के चलते सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया वैक्सीन की सप्लाई करने के लिए बाध्य है। गावी एक गठबंधन है, जो विकासशील और गरीब देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का काम करता है। मित्र देशों को अभी तक कोविड-19 रोधी टीके की 6.44 करोड़ डोज उपलब्ध कराई हैं।</h5>
<h2>आप द्वारा टीकाकरण नहीं करवाने से खराब हो रही कोविड वैक्सीन, ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोग टीका लगवाएं</h2>
<h5>सरकार और The CSR Journal लगातार जनता से अपील कर रहा है कि जो भी टीका लगवाने के लिए पात्र है वो जरूर टीकाकरण करवाए। टीकाकरण से कोरोना का प्रसार नहीं होगा और वैक्‍सीन खराब भी नहीं होगी। टीका खराब होने का कारण ये है कि हम वैक्सीन नहीं लगवा रहे है। वैक्सीन खराब होने का कारण हम ही लोग है।  दरअसल कोवैक्‍सीन के एक वॉयल में 20 डोज होती हैं वहीं कोविशील्‍ड के वॉयल में 10 डोज होती हैं। ऐसे में वैक्‍सीनेशन सेंटर पर दो-चार भी आदमी जाते हैं तो पूरा वॉयल खोलना पड़ता है और बाकी बची वैक्सीन बिना लगाए खराब हो जाती हैं। चूंकि एक बार वॉयल खुलने के बाद इन्‍हें वापस उसी तरह रखना संभव नहीं है। ऐसे में ये बची हुई डोज फेंकनी ही पड़ती हैं। ऐसे में लोगों को वैक्‍सीन के लिए जागरूक करने की भारी जरूरत है ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में लोग वैक्‍सीन लगवाने के लिए पहुंचें।</h5>
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		<title>सीएसआर फंड सिर्फ केंद्र को क्यों &#8211; कांग्रेस</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/coronavirus-csr-pm-cares-cm-relief-fund/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2020 10:30:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[corona]]></category>
		<category><![CDATA[Coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[corporate sustainability]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सीएसआर यानि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी, वो रकम जो समाज की भलाई के लिए कॉर्पोरेट कंपनियां दान देती है। ये रकम लाखों करोड़ों में होता है। इस कोरोना के संकट काल में हम सबने देखा सुना कि टाटा ने 1500 करोड़ दान दिया, अंबानी ने 500 करोड़ दान दिया। ये रकम पीएम केयर्स फंड में दान [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>सीएसआर यानि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी, वो रकम जो समाज की भलाई के लिए कॉर्पोरेट कंपनियां दान देती है। ये रकम लाखों करोड़ों में होता है। इस कोरोना के संकट काल में हम सबने देखा सुना कि टाटा ने 1500 करोड़ दान दिया, अंबानी ने 500 करोड़ दान दिया। ये रकम पीएम केयर्स फंड में दान दिया गया। नियमों के अनुसार जितने भी कॉर्पोरेट्स है, वो अपने सीएसआर फंड का इस्तेमाल सरकार की मदद के लिए कर सकते है। अब यही बात राज्य सरकारों को अखरने लगी और इसको लेकर रस्साकशी भी होने लगी। सीएसआर फंड के तहत <a href="http://www.mca.gov.in/">केंद्र सरकार</a> के खाते में तो करोडो रुपये आ गए लेकिन इस बीच गरीब रह गयी राज्य सरकारें।</h5>
<h2>सीएसआर फंड पर महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु सरकार उठा चूका है सवाल</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/coronavirus-success-story-bhilwara-model/">कोरोना</a> काल के संकट में केंद्र सरकार के सामने राज्य सरकारों ने फंड का रोना शुरू कर दिया, कोरोना काल में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनता बचाने के बजाय राज्य सरकारें पैसों की कमी का रोना शुरू कर दिया, हो भी क्यों न, इस महामारी से लड़ने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम होना जरुरी है। वेस्ट बंगाल, तमिलनाडु, केरला के बाद अब महाराष्ट्र में भी ये आरोप लगने लगा है कि सीएसआर फंड को लेकर केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ भेदभाव कर रही है। ममता बनर्जी ने तो कहा है कि केंद्र सरकार का फंड को लेकर रवैया भेदभाव है वही महाराष्ट्र सरकार के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को खत लिखकर ये भी मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार केंद्र सरकार से इस बाबत बात करें।</h5>
<h2>पीएम केयर फंड में निधि जमा करने दबाव डाल रहे केंद्रीय मंत्री &#8211; कांग्रेस</h2>
<h5>बहरहाल इस बीच महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र सहित देशभर के उद्योगपति राज्य की आर्थिक मदद करना चाहते हैं लेकिन मुख्यमंत्री सहायता निधि में दिया गया दान सीएसआर निधि के तहत नहीं आएगा, इस लिए उद्योगपति पीछे हो रहे हैं। जबकि केंद्र सरकार के कई मंत्री उद्योगपतियों पर पीएम केयर फंड में निधि देने के लिए दबाव डाल रहे हैं। सांवंत ने कहा कि केंद्र सरकार के आपदा व्यवस्थापन कानून में राज्य आपदा निवारण निधि तो लेकर स्पष्टता नहीं है। राज्य आपदा निवारण निधि में सीएसआर के तहत केवल वस्तु स्वीकार करने की अनुमति है। लेकिन लॉकडाउन के चलते फिलहाल इस प्रावधान का कोई लाभ नहीं है।</h5>
<h2>सीएसआर विवाद पर देवेंद्र फडणवीस का जवाब</h2>
<h5>कांग्रेस के इन आरोपों का जवाब देते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसिब्लिटी फंड केवल प्रधानमंत्री राहत कोष में ही जमा किया जा सकता है। ऐसा नियम केंद्र सरकार ने 2013 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने ही बनाया था। इसके बाद भी राज्य सरकार एसडीआरएफ खाते में सीएसआर फंड स्वीकार कर सकती है। ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार को सीएसआर फंड नहीं मिल सकता। सीएसआर फंड राज्य सरकार ले सकती है। केंद्र सरकार मदद दे भी रही है। खुद यह बात मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कह चुके हैं, लेकिन कुछ नेता केंद्र की मदद को लेकर विवाद पैदा करना चाहते हैं।</h5>
<h2>क्या है पूरा विवाद</h2>
<h5>महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर सीएसआर की राशि मुख्यमंत्री सहायता निधि में नहीं देने का नियम बनाया है। यह राज्य सरकारों के साथ अन्याय है। सचिन सावंत ने The CSR Journal से ख़ास बातचीत करते हुए बताया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अनुच्छेद 46 के अनुसार केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष का निर्माण करती है। उक्त अधिनियम के 46 (1 बी) द्वारा किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा आपदा प्रबंधन के उद्देश्य से दिए जाने वाले अनुदान को इस कोष में स्वीकार किया जा सकता है। । इसी प्रकार इसी अधिनियम के अनुच्छेद 48 के द्वारा राज्य सरकार ने राज्य आपदा और प्रतिक्रिया शमन निधि बनाई। लेकिन उक्त अधिनियम में व्यक्तिगत या किसी संस्थान से अनुदान स्वीकार करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस अस्पष्टता के कारण आज तक राज्य सरकार ने उक्त निधि में किसी व्यक्ति या संस्थान से कोई अनुदान स्वीकार नहीं किया है।</h5>
<h5>10 अप्रैल, 2020 के सामान्य परिपत्र संख्या 15/2020 द्वारा केंद्र सरकार ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर दिया है। तीसरे और चौथे प्रश्न के उत्तर में, केंद्र सरकार का कहना है कि कोविद -19 से लड़ने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को कॉर्पोरेटों द्वारा दिए गए योगदान को सीएसआर के तहत माना जाएगा। लेकिन केंद्र सरकार यह अच्छी तरह से जानती है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 में इसका उल्लेख नहीं है। केंद्र सरकार के सामान्य परिपत्र संख्या 10/2020 दिनांक 23 मार्च 2020 के अनुसार, कंपनियां कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार कोविद -19 के लिए व्यक्तिगत रूप से खर्च करने और सीएसआर का लाभ लेने में सक्षम होंगी, लेकिन राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होगा।</h5>
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		<title>क्या है कोरोना की जंग में भीलवाड़ा मॉडल?</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/coronavirus-success-story-bhilwara-model/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2020 11:08:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CSR Health & Sanitation]]></category>
		<category><![CDATA[Leaders Speak]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[bhilwara]]></category>
		<category><![CDATA[corona coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कोरोना की जंग में भीलवाड़ा जैसा राजस्थान का एक गुमनाम सा जिला आज पूरे देश के लिए नजीर बन गया, कोरोना को काबू करने के लिए इन दिनों भीलवाड़ा मॉडल की खूब चर्चा हो रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने में भीलवाड़ा मॉडल काफी सफल रहा है, इस मॉडल को लेकर देशभर में तारीफ [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h4>कोरोना की जंग में भीलवाड़ा जैसा राजस्थान का एक गुमनाम सा जिला आज पूरे देश के लिए नजीर बन गया, कोरोना को काबू करने के लिए इन दिनों भीलवाड़ा मॉडल की खूब चर्चा हो रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने में भीलवाड़ा मॉडल काफी सफल रहा है, इस मॉडल को लेकर देशभर में तारीफ भी हो रही है, इसके चलते कई राज्य सरकारों ने भीलवाड़ा मॉडल को अपनाया है तो केंद्र सरकार भी सबसे ज्यादा प्रभावित जगहों पर इसी तर्ज पर काबू करने की बात कर रही है। इस मॉडल के पीछे भीलवाड़ा के जिलाधिकारी राजेंद्र भट्ट है जिन्होंने बखूबी ना सिर्फ इसे लागू कराया बल्कि आज की तारीख में भीलवाड़ा कोरोना मुक्त हो गया है। The CSR Journal ने ख़ास बातचीत की <a href="https://www.bhilwara.rajasthan.gov.in/content/raj/bhilwara/en/home.html#">भीलवाड़ा</a> के जिलाधिकारी राजेंद्र भट्ट से</h4>
<h2>बहुत मुबारक हो आप सभी को, आपके इस कोरोना की जंग में भीलवाड़ा मॉडल को ख़ूब सराहा जा रहा है और कई तो इसे अपने यहां अपनाने की सोच रहें है, भीलवाड़ा मॉडल आखिरकार है क्या, किस तरह से आपने इसे अंजाम दिया?</h2>
<h4>भीलवाड़ा मॉडल हमारी एक सोची-समझी स्ट्रेटजी है। 20 मार्च को जब हमारे यहां पर पहला केस <a href="https://thecsrjournal.in/csr-news-besides-pm-cares-funds-for-covid-19-activities-count-as-csr-clarifies-mca/">कोरोना</a> पॉजिटिव आया, तो वह केस था एक डॉक्टर का। वह यहां के एक नामचीन और बड़े डॉक्टर है। जिन्होंने अस्पताल में और प्राइवेट क्लीनिक में बहुत सारे मरीज देखे थे। उनके अस्पताल में बहुत सारे मरीज एडमिट थे डॉक्टर अपने संक्रमण काल में सिर्फ अस्पताल के 5400 मरीज देख चुके थे, यह रिकॉर्ड हमारे पास तो था, लेकिन उन्होंने प्राइवेट क्लीनिक में कितने मरीज देखें तो इसका डेटा हमारे पास नही था। उन घर पर बहुत भीड़ लगती रहती थी। हम अगर ये मानकर चले कि उन्होंने अस्पताल में 5000 से ज्यादा मरीज देखें, यह भी हम आकलन लगा रहे थे कि घर पर भी उन्होंने उतने ही मरीज देखे होंगे। यानी डॉक्टर ने लगभग यानि डॉक्टर ने लगभग दस हज़ार लोगों को देखा था।</h4>
<h2>इतने बड़े पैमाने पर संक्रमण का फैलाव का डर, एक व्यक्ति जो पॉजिटिव था, वो 10 हज़ार लोगों के संपर्क में आया, ऐसे में तो कम्युनिटी स्प्रेड का डर था, किस तरह से फिर आप लोग सर्तक हुए, मुख्यमंत्री जी का इसपर क्या कहना था ?</h2>
<h4>मुख्यमंत्री जी से हमने प्लान ऑफ एक्शन डिस्कस किया, सबसे पहले हमने आसपास के जिलों के जिलाधिकारियों को अलर्ट किया कि हमारे जिले में इस तरह का मामला आया है, हमें जानकारी कुछ भी नही थी। हमनें बताया कि आप लोग अपने अपने जिलों को सील कर दें। तो सबसे पहले जिले को आइसोलेशन में किया गया। लेकिन हमें पता था कि सिर्फ आइसोलेशन से काम नहीं होने वाला है, हमारा शहरी इलाका एपीसेन्टर हो सकता है था इसलिए हमने सिटी को आइसोलेट किया। ताकि शहर के लोग ग्रामीण इलाकों में ना जा सके। इसके साथ ही अस्पताल और जहां पर पॉजिटिव मरीज मिल रहे थे वह इलाका भी काँटेन्मेंट जोन में तब्दील किया, 1 किलोमीटर के दायरे में पूरी तरह से मूवमेंट को रिस्टिक किया गया। पूरी तरह से इन इलाकों में आवाजाही बंद की गई दुकानें बंद रहेंगी। हर एक चीज उस इलाके में बंद रहेगा। साथ ही लगातार डिसइन्फेक्शन का काम भी जारी रहेगा। इन सब के साथ साथ पूरे शहर की डोर टू डोर जाकर स्क्रीनिंग कराई गई और रूरल एरिया में डोर टू डोर सर्वे भी करवाया गया कि जो भी लोग किसी तरह से सिंप्टमैटिक तो नही है जैसे बुखार खांसी जुखाम या फिर उस अस्पताल में अपने आप को दिखाया हो या उस डॉक्टर के पास गए हो सारा एक परफॉर्मा के तहत सर्वे हुआ।</h4>
<h2>तो क्या आपके पास इतना मैन पावर था कि हर एक घर जाकर स्क्रीनिंग और सर्वे को अंजाम दिया जा सकें। ये किस तरह से पॉसिबिल हो पाया?</h2>
<h4>हमनें एक सिस्टम की तहत काम किया, हमारें पास हो मैन पावर था उसी को चरणबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया,  हमारें हर गांव में ANM है, आशा वर्कर्स है, अस्पतालों में डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टॉफ हमनें सब का इस्तेमाल किया, स्वाइन फ्लू के लिए सर्वे करने वाली टीम को भी हमने मैदान में सर्वे के लिए उतार दिया। ये एक्सपर्ट टीम होती है और इस टीम ने सभी को ट्रेंड भी किया। कोरोना को काबू में करने के लिए हमने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भी कोरोना वारियर्स कक ट्रेनिंग दी। हमें ये बताने में खुशी है कि अबतक पूरे भीलवाड़ा शहर की 3 बार स्क्रीनिंग की जा चुकी है। पूरे जिले में साढ़े 22 लाख की आबादी रहती है और सभी का सर्वे हुआ है। जो जो पॉजिटिव निकलते जा रहे थे उनकी बड़ी ही एग्रिसेवली कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही थी। और उन्हें आइसोलेट किया जाता या कोरेंटिन में भेज दिया जाता ।</h4>
<h2>यहां हम आपकी आइसोलेशन और कोरेंटिन की स्ट्रेटेजी भी समझना चाहेंगे, क्योंकि स्थानीय लोगों का समर्थन और उन मरीजों की निगरानी कैसे संभव हो पाती थी, आइसोलेशन और कोरेंटिन सेंटरों की कमी तो नही हुई न?</h2>
<h4>आइसोलेशन और कोरेंटिन सेंटर की कमी ना हो इसलिए शहर के जितने भी होटल थे, उनको कोरेंटिन सेंटर में बदल दिया गया। अगर गांव के लोगों को लक्षण मिलते तो उन्हें उनको घरों के अंदर ही होम क्वॉरेंटाइन कर दिया जाता और घर के सामने एक बोर्ड लगा दिया जाता वह कहीं मूवमेंट ना कर सके। उन पर लगातार निगरानी रखने के लिए उसी गांव के जो सम्मानित व्यक्ति हुआ करते थे या फिर कोई रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी उनको कोरोना फाइटर की उपाधि देकर इन मरीजों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए नियुक्त भी कर दिया जाता था। इन लोगों की जितनी भी रिक्वायरमेंट होती थी घर के अंदर सारी सुविधाएं प्रोवाइड की जाती थी। भीलवाड़ा जिले में 1910 गांव है और हर गांव में कोरोना फाइटर की इसी तरह से तैनाती की गई।</h4>
<h2>सरकार की तरफ से आपको किस तरह सहयोग मिल रहा है, कोई कमी तो नही है ना, क्योंकि डॉक्टर्स, PPE किट की मांग के हिसाब से सप्लाई नही है, भीलवाड़ा में क्या स्तिथि है?</h2>
<h4>राजस्थान सरकार ने जिला प्रशासन की खूब मदद की, जिस तरह से सिर्फ एक जिए में आंकड़े बढ़ रहें थे, ये हम सब के लिए एक चिंता का विषय था, मीडिया रिपोर्ट्स देखने के बाद और डर का माहौल लोगों में बन गया, हमें लगातार कम्युनिटी स्प्रेड की चिंता सता रही थी लेकिन सरकार की सर्तकता सराहनीय रही, हमें डॉक्टरों नर्सों और मेडिकल स्टाफ की कोई कमी नही रही, PPE किट की कोई कमी नही रही, अब तो लैब भी हमारें भीलवाड़ा में हो गया है।</h4>
<h2>आंकड़ों की बात करें तो पूरे भीलवाड़ा में कितने लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए, कितने का सफल इलाज हुआ, कितने मरीजों की मौत हुई, फिलहाल कोरोना के क्या आंकड़े है?</h2>
<h4>जब से ये महामारी फैली है, भीलवाड़ा में 28 लोग पॉजिटिव आये थे, उनमें से 25 लोग सही सलामत घर जा चुके है। अब तक 40260 टेस्ट हम करा चुके है, हर दिन 300 लोगों का टेस्ट होता है, यहां हम ये भी स्पष्ट करना चाहते है कि जो भीलवाड़ा में 2 लोगों की मौत हुई थी वो कोरोना से नही बल्कि अन्य बीमारी से पहले से ही ग्रसित थे। एक मरीज को ब्रेन स्ट्रोक आया था और दूसरे मरीज की किडनी फेलियर से मौत हुई है। अभी एक ही मरीज कोरोना से संक्रमित है जो 4 दिन पहले आया है। और ये बताते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि पिछले 2 दिनों से एक भी कोरोना पॉजिटिव मरीज भीलवाड़ा में नही आया।</h4>
<h2>लॉक डाउन और भी बढ़ाया जा रहा है, राजस्थान में बढ़ाया जा चुका है, महाराष्ट्र में भी 30 तारीख तक बढ़ाया जा चुका है, कई ऐसे मामले देखें जा रहें है कि जिनमें कोई कोरोना के लक्षण ही नही है फिर भी वो कोरोना पॉजिटिव है। आपके जिलें में क्या इस तरह के पेशेंट आये और किस तरह से आपने इसको टैकल किया?</h2>
<h4>भीलवाड़ा जिले के 28 पॉजिटिव केसेस में से 9 ऐसे मरीज थे जिन्हें कोई लक्षण ही नही था, ऐसे मरीजों को हम एसिम्टमैटिक पेशेंट बोलते है, ऐसे कई लोग हो सकते हो जो एसिम्टमैटिक पॉजिटिव हो और वो लोग औरों में फैला रहें हो। इस परिस्थिति से निपटने के लिए 20 तारीख से 2 अप्रैल तक हमने सख्त कर्फ़्यू लगाकर रखा, इस दौरान हमनें जरूरी सामानों की दुकानों को भी बंद रखा चाहे वो राशन की दुकानें हो या मेडिकल की। कोई असुविधा न हो जनता में इसलिए हम लोगों ने घरों तक जरूरी सामान पहुंचाया। सब्जी, राशन, दवाईयों को घर तक पहुंचाया । सरकार की तरफ से 45 गाड़ियां भी हमने उप्लब्ध करवाये। एसिम्टमैटिक मरीज स्लीपर बम जैसे है इसलिए टेस्टिंग और फिर क़वारंटाइन करना जरूरी है। 14 दिन में इनमें लक्षण अपने आप आ जाते है या फिर ये पॉजिटिव से नेगेटिव हो जाते है। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि कोरोना का जो चेन है उसे हम भीलवाड़ा में ही तोड़ दें। फिलहाल लॉक डाउन को और बढ़ाया जाना चाहिए ऐसे मैं गुजारिश करता हूँ।</h4>
<h2>जिस डॉक्टर से कोरोना की शुरुवात भीलवाड़ा में हुई थी अभी उस डाक्टर की तबियत कैसी है?</h2>
<h4>भीलवाड़ा में जिस डॉक्टर से कोरोना संक्रमण हुआ वो डॉक्टर अब कोरोना नेगेटिव हो गया है, वो पूरी तरह ठीक है, उस डॉक्टर के साथ अन्य 3 डॉक्टर और 14 नर्सिंग स्टाफ भी पूरी तरह से ठीक है। अस्पताल के मरीज भी अब ठीक हो गए।</h4>
<h2>एक अहम सवाल, आपका भीलवाड़ा मॉडल क्या देश के दूसरे राज्यों और शहरों में भी लागू किया जा सकता है क्या?</h2>
<h4>ये सवाल कई बार मुझसे पूछा गया है, इसका जवाब यही है कि पूरा का पूरा मॉडल अगर आप कहीं का कहां फिट करना चाहेंगे तो नही हो पायेगा। अगर आपके कपड़े का साइज मीडियम है तो एक्स्ट्रा लार्ज वाला आदमी नही पहन पायेगा। जिस तरह से हमारा जिला है यानी 7 लाख की शहरी आबादी और 25 लाख रूरल आबादी, ऐसे राजस्थान में 23 और जिले है जहां भीलवाड़ा से भी ज्यादा आबादी है, जहां कम आबादी है वहां तो लागू किया जा सकता है लेकिन जहां ज्यादा आबादी है वहां मुश्किल है। अगर हम बात करें मुंबई की तो <a href="https://thecsrjournal.in/coronavirus-mumbai-turns-wuhan/">मुंबई</a> के लिए कुछ सिस्टम को लिया जा सकता है बाकी मॉडल को कस्टमाइज किया जा सकता है। धारावी में कैसे लगेगा ये भी लोग मुझसे पूछ रहे है, तो मैं बता दूं कि जब एक स्लम है जहां एक छोटे से कमरे में 8 लोग रहते है वहां सोशल डिस्टेंसिंग संभव ही नही है ऐसे में इन्हें शिफ्ट कर क़वारंटाइन सेंटर में ले जाना पड़ेगा। बड़ी आबादी में डोर टू डोर सर्विस भी देना संभव कैसे हो पायेगा ये भी देखना चाहिए। बहुत कुछ किया जा सकता है।</h4>
<h2>भीलवाड़ा के सफल मॉडल को देखते क्या दूसरे राज्य और शहर आपको संपर्क कर रहें है, क्या कोई इस मॉडल को जानने के लिए कॉल आ रहा है?</h2>
<h4>बिल्कुल आ रहा है, हमारे प्रदेश में मुख्यमंत्री जी से लगातार लोग संपर्क कर रहें है। जो जो संपर्क कर रहा है हमारे मुख्यमंत्री जी ने एक PPT बनाया है उन्हें ये सब दे रहें है। हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से अधिकारी मुझसे संपर्क में भी है। इस मॉडल से जो अच्छी चीज लगेगी वो अपने अपने राज्यों में लागू करेंगे।</h4>
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		<title>वुहान जैसे हो रहें है मुंबई के हालात</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/coronavirus-mumbai-turns-wuhan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Apr 2020 10:57:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[BMC]]></category>
		<category><![CDATA[corona]]></category>
		<category><![CDATA[Coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में हालात दिन ब दिन बदतर होते जा रहें है, कोरोना के संक्रमण लगातार बढ़ते जा रहें है, आलम ये है कि चिंता ये भी सताने लगी है कि मुंबई कहीं वुहान की डगर पर तो नहीं है, बीएमसी द्वारा जारी आकड़ों के मुताबिक मुंबई के आंकड़े डरावने है, अकेले [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में हालात दिन ब दिन बदतर होते जा रहें है, कोरोना के संक्रमण लगातार बढ़ते जा रहें है, आलम ये है कि चिंता ये भी सताने लगी है कि मुंबई कहीं <a href="https://thecsrjournal.in/coronavirus-a-man-made-disaster/">वुहान</a> की डगर पर तो नहीं है, बीएमसी द्वारा जारी आकड़ों के मुताबिक मुंबई के आंकड़े डरावने है, अकेले शुक्रवार को कोरोना पॉजिटिव के मामलों में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला। वहीं मौतों के आंकड़े डराने वाले है।</h5>
<h2>एक दिन में मुंबई में <a href="https://thecsrjournal.in/mumbais-slums-are-hotspot-to-corona/">कोरोना</a> के 218 नए मामले</h2>
<h5>शुक्रवार को एक ही दिन में सिर्फ मुंबई में कोरोना के 218 नए मामले सामने आए। साथ ही कोरोना के 10 मरीजों की मौत हुई। अब तक मुंबई शहर में ही कुल 64 लोगों की कोरोना के चलते मौत हो चुकी है। इस तरह मुंबई में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 993 हो गई है। अच्छी बात ये भी कि चार लोग शुक्रवार को ठीक भी हुए। मुंबई में कोरोना के चलते कुल ठीक हुए लोगों की संख्या 69 हो चुकी है।</h5>
<h5>देश के दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र की तुलना करें तो महाराष्ट्र अव्वल पर है, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने The CSR Journal से बात करते हुए बताया कि शुक्रवार तक महाराष्ट्र में1574 मरीज है, और 188 मरीजों का कोरोना नेगेटिव आने के बाद उन्हें डिस्चार्ज दे गया। सरकारी अमलों और नेताओं की माने तो महाराष्ट्र में आंकड़े इसलिए बढ़ रहें है क्योंकि महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा टेस्टिंग हो रही है।</h5>
<h2>महाराष्ट्र में 125 डिस्चार्ज, 40 हजार क्वारंटीन किये गए</h2>
<h5>महाराष्ट्र में अब तक 30 हजार से अधिक लोगों के सैंपल की लैब में चेकिंग हो चुकी है। इनमें से 1574 को छोड़ सभी की रिपोर्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई है। वहीं 35 हजार से ज्यादा लोगों को होम क्वारंटीन किया गया है, जबकि 4 हज़ार से ज्यादा लोग इंस्टिट्यूशनल क्वारंटीन हैं।</h5>
<h2>मुंबई की झोपड़ियां है खतरनाक</h2>
<h5>मुंबई में कोरोना का हाल यह है कि एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्ती धारावी में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। वहां मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। वही इसी तरह अकेले मुंबई में 381 कन्टेनमेंट जोन बनाये गए है। इन कन्टेनमेंट जोन में बहुत सख्ती बरती जा रही है, यहां पूरी तरह से कर्फ्यू का पालन कराया जा रहा है। दुकानें भी बंद है, जरूरी संसाधन खुद सरकार घरों तक पहुंचा रही है। बहरहाल इन्ही सब हालातों को देखते हुए ये कहा जा रहा है कि कहीं वुहान की डगर पर मुंबई तो नही है न।</h5>
<h2>सीएम उद्धव ठाकरे ने लॉक डाउन बढ़ाने की मांग</h2>
<h5>लॉक डाउन होने के बावजूद मुंबई और महाराष्ट्र में मामले बढ़ रहें है और अगर लॉक डाउन खत्म किया गया तो मामला और भी गंभीर सो सकता है और यही चिंता हर राज्यों ने व्यक्त किया। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार मुख्यमंत्रियों के साथ तीसरी बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। कॉन्फ्रेंसिंग में लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने पर चर्चा हुई। महाराष्ट्र सीएम उद्धव ने लॉकडाउन बढ़ाने की मांग की।</h5>
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		<title>लॉक डाउन में मुंबई पुलिस की स्मार्ट पहल</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/coronavirus-lockdown-mumbai-police-dcp-interview/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2020 13:17:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Leaders Speak]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[corona]]></category>
		<category><![CDATA[Coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
		<category><![CDATA[Global Health]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Police]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देशभर में इस वक्त लॉक डाउन है, सड़कें पूरी तरह से सूनी है, सड़कों पर अगर कोई दिखाई दे रहा है तो वो है मेडिकल स्टाफ, बीएमसी के लोग और सबसे महत्वपूर्ण मुंबई पुलिस के जवान। मुंबई पुलिस हर एक हद तक जाकर मुंबई की सुरक्षा में लगी हुई है। इस लॉक डाउन में पुलिस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h4>देशभर में इस वक्त लॉक डाउन है, सड़कें पूरी तरह से सूनी है, सड़कों पर अगर कोई दिखाई दे रहा है तो वो है मेडिकल स्टाफ, बीएमसी के लोग और सबसे महत्वपूर्ण मुंबई पुलिस के जवान। मुंबई पुलिस हर एक हद तक जाकर मुंबई की सुरक्षा में लगी हुई है। इस लॉक डाउन में पुलिस के लिए कई सारे चैलेंजेस है, इन चैलेंजेस पर बात करने के लिए हमारे साथ मौजूद है <a href="https://mumbaipolice.maharashtra.gov.in/">मुंबई पुलिस</a> के डीसीपी ऑपरेशंस प्रणय अशोक</h4>
<h2>बहुत बहुत स्वागत है प्रणय जी The CSR Journal में आपसे जानना चाहेंगे कि पूरे देश भर में <a href="https://thecsrjournal.in/lockdown-may-extend-maharashtra-health-minister-interview/">लॉक डाउन</a> है, मुंबई में भी हालात खराब हो रहें है, कोरोना की बात करें तो मुंबई में मामले बढ़ते जा रहे हैं, आप मुंबई पुलिस के लिए इसे किस तरह से चैलेंज मानते है ?</h2>
<h4>चैलेंजेस की बात करें तो सबसे बड़ा चैलेंज हमारे लिए यही है कि मुंबई एक बहुत बड़ा शहर है। हर एक इलाके का अपना अलग-अलग रूप और कॉम्पोनेंट है। वहां का इकोनामिक कंपोजिशन अलग है, पापुलेशन कंपोजिशन अलग है। इसलिए इन इलाकों की दिक्कतें भी अलग-अलग हैं। ऐसे में लॉक डाउन को फॉलो करवाना, लॉक डाउन को इंप्लीमेंट करना यह हमारे लिए एक चैलेंज ही है। मुंबई की संरचना ऐसी है कि यहां पर जगह कम है, यह एक डेंसली पापुलेटेड शहर है, सभी तक लॉक डाउन का पालन करवाना यह एक बड़ा टास्क है। हमारे लिए ये भी चैलेंज है कि लोगों तक एसेंशियल सर्विसेस को सुचारू रूप से जारी रखना। हम रेगुलर इंटरेक्शन बाद एसेंशियल सर्विसेज, मेडिकल सर्विसेज, इमरजेंसी सर्विसेस या कुछ रिटेलर, ई-कॉमर्स सर्विसेस के साथ इनकी स्मूथ फंक्शनिंग हो इसलिए हम लगातार कोशिश कर रहे है ताकि आम मुंबईकरों तक राशन, दूध, दवाइयां या फिर कोई भी जरूरी साझो समान आसानी से पहुँच सकें। मुंबईकरों को कोई दिक्कत नहीं हो।</h4>
<h2>आपने भीड़भाड़ और डेंसली पापुलेटेड शहर का जिक्र किया तो जाहिर सी बात है मुंबई में कई ऐसे भीड़-भाड़ इलाके हैं, <a href="https://thecsrjournal.in/mumbais-slums-are-hotspot-to-corona/">स्लम</a> है चाहे वो धारावी हो, सांताक्रुज हो या फिर बांद्रा, मुंबई के ऐसे इलाके हैं जहां पर बहुत ज्यादा भीड़ भाड़ है, ऐसे में आप लोग को कितनी कठिनाइयां आ रही है क्योंकि देखा जा रहा है कि वीडियो में पुलिस का लोग विरोध भी कर रहे हैं?</h2>
<h4>विरोध से ज्यादा हम अनअवेयरनेस को को फेस कर रहे हैं। अभी भी कई तबकों में इस महामारी के बारे में जागरूकता नहीं है। अभी भी लोग इस महामारी के सीरियसनेस और उसके सिचुएशन को समझ नहीं रहे हैं, इन इलाकों में भीड़भाड़ कम हो इसके लिए हम लगातार उन इलाकों में पेट्रोलिंग कर रहें हैं। जगह-जगह हमने नाकाबंदी लगाई है। लगातार हम लोगों को जागरूक कर रहे हैं। पब्लिक अनाउंसमेंट कर रहे हैं ताकि लोगों को पता चले कि यह कितना भयानक बीमारी है। ताकि लोगों को पता चले कि यह लॉक डाउन उनके लिए क्यों जरूरी है। इसके अलावा हम Dial 100 और ट्विटर के जरिए किसी को कोई क्लेरिफिकेशन चाहिए तो इसके जरिये हम लोगों की मदद कर रहे हैं। कई जगह हम खुद इनिशिएटिव लेकर लोगों की मदद की।जैसे जहां मार्केट लगती थी वहां से लोगों को बड़े मैदानों में शिफ्ट किया। धारावी का मार्केट भी शिफ्ट किया गया है। दादर मार्केट को भी हमने शिफ्ट किया है। जहां पर लोग आ सके और वहां पर ही सब्जियां खरीद सकें। यहां हम लोग सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरी तरह ख्याल रखे हुए हैं। ग्राउंड पर हम लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए चूने से मार्किंग भी की है, हम लोगों को प्रोत्साहित भी कर रहें है।</h4>
<h2>अगर हम मरकज की बात करें तो वाकई में जिस तरह से दिल्ली में उनलोगों ने किया वो भयावह है। महाराष्ट्र और मुंबई से भी लोग वहां पर गए हुए थे, क्या आप लोगों ने उन्हें चिन्हित किया, किस तरह से उन पर आप लोग कार्रवाई कर रहें है ?</h2>
<h4>हम लगातार मरकज के लोगों को ट्रेसिंग करने का काम कर रहे हैं। उनके बारे में जानकारी निकाल रहे हैं। उनका आईडेंटिफाइड कर रहे हैं। मरकज को लेकर पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है, मुंबई पुलिस पूरी तरह से कोशिश कर रही है कि उनकी शिनाख्त जल्द से जल्द की जाए और फिर नियमों के अनुसार उन्हें होम क्वॉरेंटाइन किया जाए या आइसोलेशन वार्ड में रखा जाए।</h4>
<h2>यह हम लगातार देख रहें है कि लोगों को कोरोना वायरस को लेकर डर लग रहा है, ट्विटर और Dial 100 पर क्या इंक्वायरी के मामले बढ़ गए हैं?</h2>
<h4>मुंबई पुलिस का डायल100 बहुत ही सोफिस्टिकेटेड और बहुत ही मॉडर्न प्रणाली है। मुंबई पुलिस के डायल हंड्रेड के कंट्रोल रूम में एक समय पर 40 जवान तैनात रहते हैं, कोरोना वायरस को देखते हुए जो डेली बेसिस के कॉल्स रहते हैं उनमे बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है। जब से लॉक डाउन हुआ है अमूमन हम लोगों ने 10,000 कॉल अटेंड किए हैं।</h4>
<h2>आप लोग इलाकों को चिन्हित कर रहे हैं और जहां पर कोरोना पॉजिटिव के मामले ज्यादा हैं उस इलाके को सील कर रहें हैं। लेकिन इस दौरान क्या विशेष समुदाय को समझाने में ज्यादा दिक्कत आ रही है ?</h2>
<h4>जहां कोरोना पॉजिटिव के ज्यादा मामले आएं है उन सभी इलाकों को बीएमसी कंटेनमेंट जोन घोषित करती है, हमारा रोल वहां पर सिर्फ लोगों की आवाजाही रोकना है। लोग उस जोन में सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो कर रहे हैं या नहीं यह देखना है। लॉ एंड ऑर्डर देखना है। हम इन इलाकों में ज्यादा सख्ती से बैरिकेटिंग करते हैं। जाहिर है अगर इन इलाकों में हम मूवमेंट को रोकते हैं तो परेशानियां तो जरूर आएंगी, लेकिन हम उसको हल कर लेते हैं।</h4>
<h2>हॉटस्पॉट होती जा रही है मुंबई, यहां लगातार मामले बढ़ रहे हैं, यह एक एपिसेंटर होता जा रहा है, मुंबई पुलिस की तैयारियों की बात करें तो आप लोग किस तरह से तैयार है?</h2>
<h4>लॉक डाउन में मुंबई पुलिस पूरी तरह से तैयार है। हम डे टू डे बेसिस पर आकलन करते हैं। बीएमसी के साथ, हेल्थ डिपार्टमेंट के साथ लगातार हम कॉर्डिनेट कर रहे हैं। हम अगर मुंबई पुलिस के जवानों की बात करें तो हम खुद भी बहुत ज्यादा केयर ले रहे हैं। हमारे जवान बहुत ज्यादा ख्याल रख रहे हैं। हमारा जो स्टाफ्स ग्राउंड पर ड्यूटी कर रहा है उनकी सेहत के लिए हम बहुत ज्यादा ख्याल रख रहे हैं। पुलिस के जवानों को हैंड सैनिटाइजर, फेस मास्क दिया जा रहा है।  जो नाकाबंदी कर रहे हैं उनको धूप से बचाने के लिए छाते दिए जा रहे हैं। फिल्ड में जितने भी हमारे जवान लगे हुए हैं उनको बकायदा खाना पहुंचाया जा रहा है, एनर्जी ड्रिंक दिया जा रहा है। पानी पहुंचाया जा रहा है। हम अगर सही सलामत रहेंगे तो हम मुंबई को महफूज रख सकेंगे।</h4>
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		<title>बढ़ सकता है लॉक डाउन &#8211; राजेश टोपे, स्वास्थ्य मंत्री, महाराष्ट्र</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/lockdown-may-extend-maharashtra-health-minister-interview/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2020 07:29:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Leaders Speak]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[corona]]></category>
		<category><![CDATA[Coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[rajesh tope]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में लगातार कोरोना पॉजिटिव के मामले बढ़ रहे हैं, देश के दूसरे राज्यों से तुलना करें तो महाराष्ट्र सबसे अव्वल है। देश में लॉक डाउन है, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पुणे सबसे ज्यादा प्रभावित है। अब तो एशिया की सबसे बड़े स्लम धारावी में भी मामले आने लगे जो बेहद चिंताजनक है। [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/lockdown-may-extend-maharashtra-health-minister-interview/">बढ़ सकता है लॉक डाउन &#8211; राजेश टोपे, स्वास्थ्य मंत्री, महाराष्ट्र</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4>महाराष्ट्र में लगातार कोरोना पॉजिटिव के मामले बढ़ रहे हैं, देश के दूसरे राज्यों से तुलना करें तो महाराष्ट्र सबसे अव्वल है। देश में लॉक डाउन है, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पुणे सबसे ज्यादा प्रभावित है। अब तो एशिया की सबसे बड़े स्लम धारावी में भी मामले आने लगे जो बेहद चिंताजनक है। ऐसे में महाराष्ट्र की किस तरह से तैयारी है, इस पर बात करने के लिए The CSR Journal के साथ मौजूद है महाराष्ट्र के <a href="https://arogya.maharashtra.gov.in/1035/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0">स्वास्थ्य मंत्री</a> राजेश टोपे।</h4>
<h2>राजेश जी बहुत-बहुत स्वागत है आपका The CSR Journal में। महाराष्ट्र में लगातार मामले बढ़ रहे हैं, मेरा पहला सवाल, <a href="https://thecsrjournal.in/mumbais-slums-are-hotspot-to-corona/">कोरोना</a> को लेकर क्या हम पूरी तरह से तैयार है?</h2>
<h4>जरूर यह चिंता की बात है, जब आंकड़े बढ़ते हैं तो एक स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते चिंता तो जरूर होती है, मुख्यमंत्री को चिंता है, सभी हमारे मंत्री गण को चिंता हो रही है। लेकिन इस बीच हमें कॉन्फिडेंस भी है क्योंकि हम शुरू से ही इस बीमारी को लेकर एहतियात बरत रहे हैं, जो तैयारी करने की जरूरत थी वह हमने पहले ही किया है। जैसे कि देश में लॉक डाउन बाद में हुआ, उसके दो दिन पहले ही हम लोगों ने लॉक डाउन किया था। हम पहले से ही बहुत कड़े कदम उठा रहें थे, हम ने पब्लिक गैदरिंग बंद किया, धार्मिक गैदरिंग, स्पोर्ट्स इवेंट, कल्चरल इवेंट्स ये सारे बंद किये गए। यहां तक कि स्कूल कॉलेज तक बंद कर दिए, एग्जाम और इलेक्शन भी हम लोगों ने टाल दिया। ये संक्रमण कम से कम हो यही हमारा लक्ष्य है और यही हमारी कोशिश भी।रही बात संख्या बढ़ने की तो हम पूरी तरह से इसके रोकथाम के लिए तैयार है। इस तैयारी के लिए राज्य में जो भी संसाधन लगेंगे उसके लिए हम काम कर रहे हैं। जैसे वेंटिलेटर, डॉक्टरों की संख्या में इजाफा, ट्रेन्ड नर्सेज, पैरामेडिकल फोर्सेस, प्रोटेक्शन किट , यह सभी संसाधन हम जुटा रहे हैं, हां जरूर इनमें कमियां है लेकिन हम वैश्विक मार्केट से सीएसआर एक्टिविटी की मदद से खरीदने की कोशिश में लगे हैं।</h4>
<h2>आखिरकार महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले क्यों आ रहे हैं, इस बारे में क्या महाराष्ट्र सरकार ने कोई आकलन किया है कि ऐसा क्यों है?</h2>
<h4>महाराष्ट्र में मुंबई है और मुंबई एक इंटरनेशनल शहर है। यहां इस संक्रमण की शुरुआत हुई है लेकिन यह हमारे देश की उपज नहीं है, ये बीमारी हमारे देश से शुरू नहीं हुआ, यह चाइना से वायरस आया हुआ है। हमारे देश में जो बाहर से लोग आए हुए हैं, व्यापार के लिए, टूरिस्ट के लिए, हमारे देश के लोग जो टूरिस्ट बनकर बाहर गए थे, उन देशों में खासतौर पर कोरोना से प्रभावित जो देश है, वहां से आए हुए लोगों द्वारा यह संक्रमण फैला हुआ है। अगर हम देखे तो एक ग्रुप दुबई गया हुआ था, ग्रुप में से 25 लोग कोरोना संक्रमित थे और यह भारत आने के बाद कांटेक्ट की वजह से बहुत ज्यादा बढ़ गया। लेकिन लेकिन गनीमत है कि अभी तक कम्युनिटी संक्रमण नहीं है।</h4>
<h2>अगर जो हम मुंबई की बात करें तो यहां पर बहुत सारे ऐसे इलाके हैं जो कि हॉटस्पॉट हो सकते हैं। क्या आप लोगों ने उस को चिन्हित किया है। जैसे धारावी हुआ, जहां पर कई पॉजिटिव मामले सामने आया। सांताक्रुज हो या बांद्रा हो या तमाम ऐसे स्लम जहां बहुत घनी आबादी है, इसको लेकर आप का क्या प्लान है?</h2>
<h4>इस बात को लेकर चिंता जरूर है, यहां इतना डेंस पापुलेशन है, हम इस बारे में जरूर सोच रहे हैं कि अगर यहां पर संक्रमण का फैलाव होता है तो किस तरह से इसे टैकल किया जाए। धारावी में जो केस आया हुआ है उसको देखते हुए हमने तुरंत उस इलाके को कंटेनमेंट ज़ोन डिक्लेयर किया। जब कंटेनमेंट ज़ोन डिक्लेअर हो जाता है तब वहां कर्फ्यू बहुत शक्ति से इंप्लीमेंट किया जाता है। सख्ती से अमल का मतलब है कि बिल्कुल भीड़ नहीं दिखेगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बहुत अच्छी तरह से करवाया जाएगा। इस दरमियान अगर पुलिस का बल इस्तेमाल करना पड़े तो जरूर उसका फोर्स इस्तेमाल किया जाएगा। इन भीड़भाड़ इलाकों का सर्विलेंस भी किया जा रहा है, जिसके लिए सीसीटीवी का मदद लिया जा रहा है। मुंबई के कंट्रोल रूम से उसकी लगातार मॉनिटरिंग होती है, इन इलाकों का हम ड्रोन से भी सर्वे कर रहे हैं। अंदर अंदर जो इलाके होते हैं वहां पर भी निगरानी की जा रही है।</h4>
<h2>यह सवाल सभी के जहन में है। 14 तारीख को लॉक डाउन जब खत्म हो जाएगा तो क्या स्थिति सामान्य हो जाएगी। लोग आवाजाही कर सकेंगे, क्या परिस्थिति होगी, क्योंकि आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग किए, क्या लगता है कि 15 तारीख को सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा?</h2>
<h4>अगर 14-15 तारीख को हालात ठीक रहे तो धीरे धीरे किया जा सकता है लेकिन हालात ठीक रहे तो। यह किस तरह से करना चाहिए इसको लेकर एक एक्सपर्ट की कमेटी गठित की जाएगी जिसका ओपिनियन लेकर ही आगे करना पड़ेगा। ऐसा तो बिल्कुल नहीं कि पूरा एक ही दिन में खोल दिया जाएगा और सब लोग बाहर निकलेंगे, जो 21 दिन का फ्रस्ट्रेशन है वह तो एक ही दिन में निकल जाएगा। ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। इसके बारे में भी लोगों को मन बनाना जरूरी है। लॉक डाउन को खत्म करने के लिए कुछ नियम कानून रहेंगे और उस नियमों के तहत ही धीरे-धीरे ही ढील दी जाएगी लेकिन अगर स्थिति ठीक हुई तो। अगर स्थिति ठीक नहीं रहती है तो तो एक्सटेंशन का भी हमें ध्यान रखना पड़ेगा।</h4>
<h2>कोरोना को हराने के लिए महाराष्ट्र में आप लोग ट्रिपल T का फार्मूला अपना रहे हैं, क्या है ये TTT फार्मूला ?</h2>
<h4>कोरोना में मॉर्टिलिटी रेट बहुत कम है, 2 पर्सेंट है, लेकिन इसका फैलाव बहुत तेजी से होता है और इसीलिए इस को ध्यान में रखते हुए TTT का फार्मूला हम अपना रहे हैं। पहला अगर संक्रमण फैलता है तो ट्रेसिंग करना जरूरी है, दूसरा है टेस्टिंग और अगर पॉजिटिव रिपोर्ट आता है तो मरीज को आईसोलेट किया जाता है और तीसरा है ट्रीटमेंट। हम इसी के तहत काम करते हुए आए हैं और विश्व में भी यही फार्मूला अपनाया जा रहा है।</h4>
<h2>आप महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री हैं, बतौर मंत्री आप महाराष्ट्र की जनता से क्या अपील करना चाहते हैं। किस तरह से जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं, जबकि पूरे महाराष्ट्र में एक खौफ का माहौल हो गया है ?</h2>
<h4>मैं सिर्फ दो ही लाइन बोलूंगा कि सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन कीजिए। आप घरों में ही रहे, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें। कोरोना को हराने के लिए हमने एक स्लोगन तैयार किया, &#8220;है मैं ही मेरा रक्षक हूं&#8221; &#8220;मैं घर पर रहूंगा&#8221; और &#8220;मैं कोरोना को हराऊंगा&#8221; इसी प्रण के साथ हमें हमारा देश सुरक्षित रखना है, हमें हमारा राज्य सुरक्षित रखना है, हमें हमारा शहर सुरक्षित रखना है।</h4>
<h2>कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की बात करें तो बड़े पैमाने पर महाराष्ट्र में कॉर्पोरेट कंपनियों ने सरकार की मदद की, केंद्र सरकार की मदद करने के लिए सामने आये, इसे आप किस तरह से देखते है ?</h2>
<h4>महाराष्ट्र में हमेशा से ही कॉर्पोरेट अपना कॉन्ट्रिब्यूशन करता रहता है। हमेशा से ही कॉर्पोरेट्स सामाजिक उत्तरदायित्व को निभाया है, कभी भी कोई भी मुश्किल की घड़ी आई, कॉर्पोरेट्स हमेशा से ही अपनी जिम्मेदारियों का वहन, निर्वाहन करता रहा है, बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। इस मुश्किल की घडी में भी कॉर्पोरेट उदार दिल दिखाते हुए सरकारों के साथ खड़ा हैं। सीएसआर फंड मुख्यमंत्री सहायता कोष में दे रहा हैं। फिलहाल इस सीएसआर फंड की बेहद जरूरत है, कभी-कभी गवर्नमेंट प्रोसीजर से काम बहुत जल्दी नहीं होता है ऐसे में सीएसआर का फंड इस्तेमाल करके जल्द से जल्द संसाधनों की खरीदारी हो रही है। सभी कॉरपोरेट्स का मैं तहे दिल से, दिल की गहराइयों से उनका शुक्रिया अदा कर रहा हूं।</h4>
<h2>एक आखिरी सवाल, आप स्वास्थ्य मंत्री हैं, लगातार आप रेलवे स्टेशन पर जा रहे हैं, अस्पतालों में जा रहे हैं, आप एकदम से सुरक्षित है ना, डर तो नहीं लग रहा है ना?</h2>
<h4>मैं बिल्कुल सुरक्षित हूं, मेरे ऊपर मेरे राज्य की जिम्मेदारी है और मुझे वह जिम्मेदारी बहुत बखूबी निभानी है।</h4>
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		<title>कोरोना की हॉटस्पॉट है मुंबई की झोपड़ियां, बांट सकती है मौत</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/mumbais-slums-are-hotspot-to-corona/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2020 11:30:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC)]]></category>
		<category><![CDATA[cornavirus]]></category>
		<category><![CDATA[corona]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कोरोना की हॉटस्पॉट है मुंबई की झोपड़ियां मुंबई, सपनों की नगरी, ख्वाबों की दुनिया, देश के कोने कोने से लोग यहां आकर अपनी किस्मत आज़माते है। कोई मुंबई का हो जाता है तो कोई मुंबई की झोपड़ियों का, किसी की किस्मत चमक जाती है तो कोई कहीं का नहीं रह पाता। यहां आसमान छूती आलिशान [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2>कोरोना की हॉटस्पॉट है मुंबई की झोपड़ियां</h2>
<h5>मुंबई, सपनों की नगरी, ख्वाबों की दुनिया, देश के कोने कोने से लोग यहां आकर अपनी किस्मत आज़माते है। कोई मुंबई का हो जाता है तो कोई मुंबई की झोपड़ियों का, किसी की किस्मत चमक जाती है तो कोई कहीं का नहीं रह पाता। यहां आसमान छूती आलिशान इमारतें है तो वही 5-10 फूट में पसरी झुग्गी झोपड़ियां है, और आजकल देश की आर्थिक राजधानी की झुग्गी झोपड़ियां इंसानी जिंदगी का काल बनी है। कोरोना का ख़ौफ़ जहां पूरे देश में है तो मुंबई एक मात्र शहर है जहां कोरोना पॉजिटिव के सबसे ज्यादा मामले है। लॉक डाउन में आलम ऐसा हो जा रहा है कि मानों यहां सब सामान्य है। मज़बूरी है लोगों की। बड़ी बड़ी इमारतों में तो लोग अपने घरों में घूमघाम कर वक़्त तो गुजर बसर कर ही ले रहें है लेकिन झोपड़ियों में मामला गंभीर होता जा रहा है। लॉक डाउन का शत प्रतिशत पालन नहीं होने से साथ ही बहुत घनी आबादी होने के नाते मुंबई की झोपड़पट्टियां कोरोना का हॉटस्पॉट साबित हो रहीं है।</h5>
<h2>मुंबई की 70 फीसदी आबादी झोपड़पट्टियों में रहती है</h2>
<h5>सपनों की नगरी मुंबई। यहां की आबादी की बात करें तो देश की सबसे घनी बस्तियां यहां मुंबई में है। एक अनुमान के मुताबिक मुंबई की 70 फीसदी आबादी यहां स्लम यानि की झोपड़पट्टियों में रहती है, यहां की झोपड़पट्टियों का आलम ऐसा है कि इन घरों में जैसे आप पहला कदम डालेंगे तो घर खत्म हो जाता है। छोटे छोटे कमरों में 10-10 लोग रहते है ऐसे में सामाजिक दुरी यहां ना के बराबर हो पाता है। ऐसे में कोरोना को मुंबई में कैसे हराया जा ये महाराष्ट्र सरकार और खासकर स्थानीय निकाय बीएमसी के लिए एक बड़ा चैलेंज है। धारावी जो देश ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी है वहां कोरोना के मामले आने के बाद सरकार के साथ साथ इन झोपड़पट्टियों में रहने वालों के हाथ पैर फूलने लगे। धारावी, वर्ली कोलीवाड़ा जैसे तमाम इलाकों को अब बीएमसी ने सील भी करना शुरू कर दिया है ताकि कोरोना के प्रसार को रोका जा सकें।</h5>
<h2>मुंबई, महाराष्ट्र में <a href="https://thecsrjournal.in/nizamuddin-markaz-jamaat-coronavirus-case/">कोरोना</a> के आंकड़े</h2>
<h5>महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है। शनिवार दोपहर तक 47 नए पॉजिटिव केस मिले हैं। इनमें सीआईएसएफ के 11 जवान शामिल हैं।इसके साथ राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या 537 हो गई है। इनमें से 376 अकेले मुंबई शहर में हैं। शुक्रवार को राज्य में 6 कोरोना पीड़ितों ने दम तोड़ दिया था, इसके बाद यहां मरने वालों की संख्या 27 हो गई है। जहां जहां ये मामले सामने आये है यहां के मोहल्लों को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है। इलाके में बैरिकेड्स लगाकर आवाजाही रोक दी गई है। कोविड-19 वायरस ने गति पकड़ ली और अब यह समुदायों में फैलने लगा है। इसे रोकने के लिए मुंबई के हॉटस्पॉट चिन्हित करके बीएमसी से पुलिस की मदद से उन्हें पूरी तरह बंद किया है।</h5>
<h2><a href="http://stopcoronavirus.mcgm.gov.in/">बीएमसी</a> ने संवेदनशील इलाकों का मैप जारी किया</h2>
<h5>पहले धारावी को मुंबई की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब दहिसर के गणपत पाटील नगर, मालवणी मालाड, गोवंडी, शिवाजी नगर बैंगन वाडी, कुर्ला, बांद्रा, बेहरामपाडा, जोगेश्वरी आदि भागों में धारावी से भी ज्यादा झोपड़पट्टियां बसी हुई हैं। इन इलाकों में कोरोना संकमण की चेन को तोड़ने के लिए मुंबई में बीएमसी ने हाई रिस्क वाले इलाकों का एक मैप वेबसाइट वेबसाइट पर अपलोड किया। इन इलाकों में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसमें मालाड, वरली, घाटकोपर, भायखला और शिवाजी नगर गोवंडी शामिल है। इससे पहले बीएमसी ने कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद मुंबई के 200 से ज्यादा इलाकों को पूरी तरह से सील कर दिया था।</h5>
<h2>सोशल डिस्टेंसिंग ना के बराबर</h2>
<h5>इस वायरस को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग सबसे अहम है और इन घनी बस्तियों में इसलिए यह संभव नहीं हो पा रहा है। अब तक बस्तियों में आठ लोगों को कोरोना पॉजिटिव हो चुका है। सामाजिक दूरी इन मलिन बस्तियों और चॉलों संभव नहीं है। झुग्गी बस्तियों में ज्यादातर घरों में टिन की चादरें एक साथ रखी जाती हैं और यहां रहने वाले लोग सामुदायिक शौचालयों का उपयोग करते हैं।</h5>
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		<item>
		<title>कोरोना के जंग में जमात का आघात</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/nizamuddin-markaz-jamaat-coronavirus-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Mar 2020 12:48:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[corona]]></category>
		<category><![CDATA[Coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जहां एक तरफ पूरा देश लॉक डाउन है, जहां देश ऐसे दुश्मन से जंग लड़ रहा है जिसे खुली आखों से हम देख भी नहीं सकते ऐसी परिस्थिति में दिल्ली में जमात ने आघात किया है, इन कड़े शब्दों का इस्तेमाल जरुरी है, जब देश कोरोना को रोकने के लिए कड़े फैसले कर रही है [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>जहां एक तरफ पूरा देश लॉक डाउन है, जहां देश ऐसे दुश्मन से जंग लड़ रहा है जिसे खुली आखों से हम देख भी नहीं सकते ऐसी परिस्थिति में दिल्ली में जमात ने आघात किया है, इन कड़े शब्दों का इस्तेमाल जरुरी है, जब देश कोरोना को रोकने के लिए कड़े फैसले कर रही है ऐसे में धार्मिक आयोजनों की क्या जरूरत है। निजामुद्दीन के मरकज से दिल्ली में कोरोना का और भी ख़तरा बढ़ गया है, यहां से जो आंकड़े सामने आ रहें है वो भयावह है। दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके की एक धार्मिक संस्था में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बाद बवाल मचा हुआ है।</h5>
<h2>जमात में तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले गए तो हुआ कोरोना का खुलासा</h2>
<h5>दरअसल इस जमात में तमिलनाडु के 64 साल के बुजुर्ग को तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाना पड़ा था, जहां रविवार को उनकी मौत हो गई।  मौत की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए मरकज में जांच की। यहां एक-एक कमरे में 8-10 लोग ठहरे थे। इनमें से कई को हल्की खांसी और जुकाम की शिकायत भी थी। तब जाकर इसका खुलासा हुआ।</h5>
<h2>जमात में 24 लोग <a href="https://thecsrjournal.in/csr-funds-to-fight-coronavirus-in-india/">कोरोना</a> पॉजिटिव</h2>
<h5>दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में इस्लामिक धार्मिक आयोजन यानि मरकज के लिए 1500 से ज्यादा लोग एक जगह पर ठहरे हुए थे। मीडिया में खबर आने के बाद पिछले तीन दिनों से इन्हें यहां से निकाला जा रहा है। 1548 लोगों को डीटीसी बसों के जरिए अलग-अलग हॉस्पिटल्स ले जाया गया। इनकी जांच की जा रही है। रविवार के दिन 200 लोगों को यहां से हॉस्पिटल ले जाया गया था, इनमें से 24 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। बाकी लोगों की रिपोर्ट का इंतजार है।</h5>
<h2>मरकज से गए कई लोगों की हुई मौत</h2>
<h5>दिल्ली के मरकज में गए उनके तेलंगाना के 6 लोगों की मौत हो गई है। कश्मीर के सोपोर से यहां पहुंचे एक अन्य 65 साल बुजुर्ग ने भी पिछले हफ्ते श्रीनगर में कार्डियक अरेस्ट के बाद दम तोड़ दिया था। देश के अलग-अलग राज्यों ने तब्लीगी जमात में गए लोगों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों यहां से करीब 800 लोग बाहर जा चुके हैं। पुलिस इन्हें ढूंढ़ रही है। इनका कांटेक्ट ट्रेसिंग किया जा रहा है।</h5>
<h2>441 लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं</h2>
<h5><a href="https://delhi.gov.in/">दिल्ली</a> के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 1548 लोगों को मरकज से निकाला जा चुका है, 441 लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं, सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, 1107 लोगों को &#8216;क्वॉरन्टीन&#8217; किया गया है, सीएम केजरीवाल ने कहा कि इतने लोगों को एक जगह इकट्ठा नहीं किया जाना था, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा सब बंद है। इस मामले में अधिकारियों की गलती होगी तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, सीएम केजरीवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल को एफआईआर करने के लिए पत्र भी लिखा है।</h5>
<h2>आयोजकों का कहना कि जमात की जानकारी सरकार को दी गयी थी</h2>
<h5>देश में लॉकडाउन के ऐलान के बाद इस तरह लोगों का इकट्ठा होना अपराध है। लेकिन, मरकज आयोजित करने वाले मस्जिद प्रशासन का कहना है कि उन्होंने किसी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जब जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी, उसी दिन से मरकज को बंद कर दिया गया, लेकिन ट्रेनें न चलने के कारण मरकज में आए लोग यहीं फंसे रह गए। जनता कर्फ्यू के एक दिन पहले ही रेलवे ने देशभर की कई ट्रेनों को रद्द कर दिया था। ऐसे में मरकज में आए लोगों कहीं नहीं जा पाए। बहरहाल गलती तो हुई है, और डर इस बात का भी है कि कहीं ये दिल्ली का एपिसेंटर न बन जाए।</h5>
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		<title>कोरोना की जंग में जब सेना की जहाज से पहुंची जिंदगी</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/navy-aircraft-transported-masks-testing-kit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Mar 2020 11:29:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[corona]]></category>
		<category><![CDATA[Coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Army]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देश पर जब भी संकट आता है, भारतीय सेना के जवान अपनी जिंदगी की परवाह किये बिना ही हमारे सामने चट्टान की तरह खड़े रहते है, कोरोना की महामारी से जहां पूरा देश ठप्प है वहीं हमारे सेना के जाबाज जवान कोरोना को हराने में जुटे है। लॉक डाउन की स्तिथि है, पूरी तरह से [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>देश पर जब भी संकट आता है, भारतीय सेना के जवान अपनी जिंदगी की परवाह किये बिना ही हमारे सामने चट्टान की तरह खड़े रहते है, कोरोना की महामारी से जहां पूरा देश ठप्प है वहीं हमारे सेना के जाबाज जवान कोरोना को हराने में जुटे है। लॉक डाउन की स्तिथि है, पूरी तरह से यातायात बंद है, ऐसे में आम जनमानस को फ़ौरन राहत मिले इसलिए भारतीय सेना सामने आयी है। सेना के जवान देवदूत बनकर हमेशा से ही भारतीयों की रक्षा में तत्पर रहें है, हर विपदा की घड़ी में मदद के हाथ हमेशा सेना ने उठाया है, <a href="https://thecsrjournal.in/first-made-in-india-coronavirus-test-kit/">कोरोना</a> की महामारी को देखते हुए जहां सेना के जवान जरूरतमंदों तक पहुंचकर खाना दें रही है, मास्क और सेनेटाइजर दे रही है तो वहीं जहाज़ से जिंदगी भी दें रही है।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/cyclone-fani-odisha-emerges-as-a-role-model-in-disaster-management/">नौसेना</a> ने दिल्ली से गोवा पहुंचाया फेस मास्क</h2>
<h5>गोवा स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने गोवा में भारी कमी हो जाने पर 60,000 फेस मास्क का ऑर्डर दिया था, लेकिन लॉक डाउन की वजह से इनकी ढुलाई दिल्ली में अटक गयी। ऐसे में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने <a href="https://www.goa.gov.in/">गोवा</a> में भारतीय नौसेना से इन फेस मास्क को दिल्‍ली से गोवा लाने की व्‍यवस्‍था करने का अनुरोध किया है। भारतीय नौसेना के एक लॉन्ग रेंज मैरीटाइम रिकोनिसेंस एयरक्राफ्ट ‘इल्यूशिन 38एसडी (आईएल-38)’ को तुरंत नई दिल्ली स्थित पालम हवाई अड्डे के लिए आईएनएस हंसा से रवाना करने के लिए तैयार किया। दिल्ली में इन फेस मास्क के संग्रह में एयर फोर्स स्टेशन पालम ने सहयोग किया और यह विमान फेस मास्क के साथ गोवा लौट आया।</h5>
<h2>कोरोना से लड़ने के लिए सेना ने जहाज से पहुंचाया</h2>
<h5>वहीं गोवा से पुणे आने के लिए 60 कोरोना वायरस टेस्टिंग सैंपल भेजना चाही, लेकिन फिर वही दिक्कत, लॉक डाउन की मौजूदा हालात को देखते हुए राज्यों की सीमाएं सील की जा चुकी है लेकिन टेस्टिंग किट समय पर पुणे पहुंचना जरुरी था लिहाजा एक बार फिर से भारतीय नौसेना मदद के लिए आयी और गोवा स्टेट हेल्थ डिपार्टमेंट के कुछ अधिकारियों को कोरोना वायरस के 60 किट के साथ एयरलिफ्ट कर पुणे पहुंचाया गया। इसके पहले भी गोवा से 4 लोगों की मेडिकल टीम को एयरलिफ्ट कर गोवा से पुणे पहुंचाया गया था।</h5>
<h2>जंग में उतरी भारतीय सेना, लॉन्च किया &#8216;ऑपरेशन नमस्ते&#8217;</h2>
<h5>बहरहाल इस संकट की घड़ी में हर कोई एक दूसरे का साथ दे रहा है और सेना देवदूत की तरह काम कर रही है, कोरोना से जंग के लिए मैदान में अब सेना उतर चुकी है और इस बार कोरोना को हराने के लिए शुरू हुआ &#8220;ऑपरेशन नमस्ते&#8221;। कोरोना वायरस को हराने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन नमस्ते की शुरुआत की है जिसका ऐलान खुद आर्मी चीफ एमएम नरवणे ने की और कहा कि सेना ने अतीत के सभी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है और ऑपरेशन नमस्ते को भी सफलतापूर्वक अंजाम देगी, सेना की ओर से हेल्प लाइन नंबर भी जारी किया गया है। देश में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सेना ने कुल आठ क्वारंटाइन सेंटर को स्थापित किया है। साथ ही घाटी में भी सेना लोगों की मदद कर रही है।</h5>
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		<item>
		<title>ख़ुशख़बरी &#8211; कोरोना टेस्ट के लिए मेड इन इंडिया का देसी किट तैयार, अब सस्ते में होगा कोरोना टेस्ट</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/first-made-in-india-coronavirus-test-kit/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Mar 2020 14:02:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Leaders Speak]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[corona]]></category>
		<category><![CDATA[Coronavirus]]></category>
		<category><![CDATA[covid_19]]></category>
		<category><![CDATA[Global Health]]></category>
		<category><![CDATA[Mylab Discover Solution]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://thecsrjournal.in/?p=21708</guid>

					<description><![CDATA[<p>कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और 21 दिनों के लिए जारी लॉक डाउन के बीच पुणे से देश के लिए एक अच्छी ख़बर आई है। भारत में अभी तक कोरोनावायरस के टेस्ट के लिए विदेशी किट का इस्तेमाल हो रहा था। जो काफी महंगी भी थी, ऊपर से जरूरत के हिसाब से मौजूद भी नहीं [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/first-made-in-india-coronavirus-test-kit/">ख़ुशख़बरी &#8211; कोरोना टेस्ट के लिए मेड इन इंडिया का देसी किट तैयार, अब सस्ते में होगा कोरोना टेस्ट</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h4>कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और 21 दिनों के लिए जारी लॉक डाउन के बीच पुणे से देश के लिए एक अच्छी ख़बर आई है। भारत में अभी तक कोरोनावायरस के टेस्ट के लिए विदेशी किट का इस्तेमाल हो रहा था। जो काफी महंगी भी थी, ऊपर से जरूरत के हिसाब से मौजूद भी नहीं हो पा रही थी। लेकिन पुणे की <a href="https://mylabdiscoverysolutions.com/">मायलैब</a> डिस्कवरी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी ने मेड इन इंडिया के तहत एकदम सस्ती किट तैयार कर ली है। इस देसी कमाल को देखते हुए सरकार ने भी तेजी दिखाई और किट के उत्पादन को भी सरकारी मंजूरी दे दी है। अब इस स्वदेशी किट से ही कोरोना का टेस्ट संभव हो सकेगा। इस बड़ी उपलब्धी पर The CSR Journal ने एक्सक्लूसिव बातचीत की मायलैब डिस्कवरी सोल्युशंस प्राइवेट लिमिटेड के एडवाइजर और कॉर्पोरेट स्ट्रेटेजी के मेंटर सुजीत जैन से।</h4>
<h2>बहुत स्वागत है The CSR Journal में, आज के इस संकट की घड़ी में जब <a href="https://thecsrjournal.in/coronavirus-latest-updates-in-hindi/">कोरोना</a> वायरस लगातार पैर पसार रहा है, संक्रमण और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है वहीं मायलैब डिस्कवरी सोल्युशंस प्राइवेट लिमिटेड ने एक बड़ी उपलब्धी हासिल की है, कैसे ये संभव हो पाया कोरोना का देसी टेस्ट किट ?</h2>
<h4>सबसे पहले The CSR Journal का बहुत-बहुत शुक्रिया कि मुझे ये मौक़ा दिया। वाकई में देश एक संकट से गुजर रहा है, इस संकट के दौरान हम सबको एकजुट होकर इससे उबरना होगा, भारत सरकार और राज्य सरकारें जो भी दिशा निर्देश देती है उसे बतौर नागरिक हमें मानना ही चाहिए, इस संकट की घड़ी में ये हमारे लिए बड़ी उपलब्धि ही है कि हम ये कोरोना को टेस्ट करने के लिए स्वदेशी किट तैयार कर पाए है। इसके लिए हम केंद्र की मोदी सरकार और राज्य सरकार के आभारी है, मायलैब डिस्कवरी सोल्युशंस प्राइवेट लिमिटेड एक स्टार्ट अप है और इस कंपनी की शुरवात 2013 में हुई थी, इस कंपनी में काम करनेवाले सभी वैज्ञानिक बड़े बड़े मल्टी नेशनल कंपनियों में काम कर चुके है, पिछले सात सालों में हम लगातार रिसर्च करते आ रहे है, कड़ी मेहनत कर रहे है शायद यही कारण है कि आज हम भारत में पहली कंपनी बन पाए है जो कोरोना को लेकर ये किट 100 फीसदी सही रिजल्ट दे पा रही है।</h4>
<h2>कोरोना वायरस टेस्टिंग किट पूर्ण रूप से स्वदेशी है, भारत द्वारा भारत में निर्मित है ?</h2>
<h4>बिलकुल ये किट पूरी तरह से भारत में ही निर्मित हुई है, पूरी तरह से स्वदेशी है, मेक इन इंडिया के तहत बनी है, इस किट को बनाने का रिसर्च भी इंडिया में हुआ है और बनाया भी भारत में जा रहा है।</h4>
<h2>मायलैब डिस्कवरी सोल्युशंस ने कितने दिनों की मेहनत के बाद ये कारनामा कर दिखाया ?</h2>
<h4>मैं बताना चाहता हूँ कि कोरोनावायरस टेस्टिंग किट महज 19 दिनों के भीतर बनकर तैयार हुआ है, ये एक रेकॉर्ड ही है, मायलैब का मॉलिक्युलर बायोलॉजी में वर्चस्व है, हमारी काफी हाइली एक्सपीरियंस टीम है, कोरोनावायरस जब से आया है तब से लेकर हमारी टीम इसपर रिसर्च कर रही थी, कोरोना को लेकर हम क्या कर सकते है इसको लेकर हम लोग काफी मंथन कर रहे थे, जब भी इस तरह से संक्रमण फैलता है, वायरस फैलता है तो हम डिटेल्ड स्टडी करते है और यही कारण है कि कम समय में हम महज 19 दिनों के भीतर ही कोरोना टेस्टिंग किट को निजात कर पाए। जिसका रिजल्ट सौ फीसदी है। साथ ही ये भी बताना चाहूंगा कि ये किट किसी भी RTPCR मशीन पर काम करेगी। कंपनी ने इसका पूरा ख्याल रखा है कि ये किट किसी ख़ास मशीन नहीं बल्कि यूनिवर्सल RTPCR मशीनों पर चल सकें।</h4>
<h2>ये कोरोना टेस्ट किट मार्किट में कब तक उपलब्ध हो पायेगा ?</h2>
<h4>ये हमारे लिए ख़ुशी की बात है कि जब देश को कोरोना किट की सबसे ज्यादा जरूरत है तब हम ये प्रोवाइड करा पा रहे है, ये किट आज से कमर्शियली मार्किट में लांच हुई है और आज से ही बड़े पैमाने पर इसकी डिमांड होने लगी है। ICMR और प्राइवेट लैब को मिलाकर अब तक हमारे पास 5 लाख किट के ऑर्डर मिल चुके हैं और लगातार पूरे भारत से इस किट के लिए कॉल आ रहे हैं। महाराष्ट्र हो या आंध्र, गुजरात, गोवा हो या नॉर्थ ईस्ट, हर जगह से फ़ोन आ रहे है, इतना ही नहीं विदेशों से भी कॉल आ रहे है। अमेरिका यूरोप से भी कॉल आ रहे है।</h4>
<h2>जब इतने बड़े पैमाने पर इस किट के लिए कॉल आ रहे है तो आप लोग सप्लाई कैसे कर पाएंगे ?</h2>
<h4>हम बहुत ज्यादा प्रेशर में है, हमें अपने देश भारत में ज्यादा से ज्यादा किट मुहैया करना है ताकि देश और राज्य सरकारों की हम मदद कर सकें और बड़े पैमाने पर कोरोना का टेस्ट हो सके। कुछ दिक्कतें हो रही है जैसे आर्थिक दिक्कतें जिसपर हम काम कर रहें है और ये दिक्कतें खत्म भी हो रहीं है, आज के इस दौर में हम एक दिन में 10 हज़ार किट बना पा रहें है। सोमवार या मंगलवार से हमारा प्रोडक्शन 1 लाख तक हो जायेगा यानि एक दिन में हम 1 लाख किट तैयार कर पाएंगे। जिस तरह से देश में इसकी डिमांड है अब हमारा लक्ष्य 5 लाख किट तैयार करने की है।</h4>
<h2>इस किट को बनाने के लिए आपने बताया कि आर्थिक दिक्कत हो रही है, इस मामले में क्या सरकार कोई मदद कर रही है आपकी ?</h2>
<h4>जी बिलकुल, हमने हमारी दिक्कत भारत सरकार के समक्ष रखी है और वो हमें ग्रांट देने की बात कर रहे है। जैसे जैसे आर्डर करेंगे हमें आर्थिक मदद देतें रहेंगे। हम भारत सरकार के शुक्रगुजार है कि उन्होंने हमें किट बनाने के लिए लायसेंस दिया। इस तरह की किट बनाने के लिए फैसिलिटी रहनी चाहिए, डेढ़ साल तक लग जाते है इस तरह का इंफ़्रा को तैयार करने में लेकिन हमारी तैयारी पहले से ही थी और फिर जाकर हमें ये लायसेंस मिला। महाराष्ट्र सरकार ने ये किट की टेस्टिंग कस्तूरबा में भी किया, हर पहलु को देखने के बाद हमें सरकार ने किट की मंजूरी दी।</h4>
<h2>ये किट रिजल्ट कैसे बताता है, क्या अवधि रहती है, कितने समय के बाद रिपोर्ट आता है और इसकी अकुरसी कितनी होती है ?</h2>
<h4>भारत सरकार ने अपने लाइसेंस में कहा है कि इसकी अकुरसी 100 फीसदी होती है, जो पहले से ही मार्किट में किट मौजूद थे वो 8 घंटों में रिजल्ट बताते थे लेकिन ये स्वदेशी किट ढाई घंटों में ही रिजल्ट बता देता है, पहले स्क्रीनिंग और फिर कन्फर्मेशन ये दो प्रोसेस होते थे लेकिन हमने इसे दोनों कंबाइंड किया और ढाई घंटों में आपको पता चल जायेगा कि आपको कोरोना है या नहीं, इससे लैब की भी क्षमता बढ़ेगी और जल्दी टेस्ट भी हो पायेगा और इलाज भी जल्दी संभव हो पायेगा।</h4>
<h2>सबसे अहम सवाल, हर भारतीय जानना चाहता है कि इस कोरोनावायरस टेस्ट किट की क्या कीमत है ?</h2>
<h4>ये हमारे लिए फक्र की बात है कि ये किट बेहद सस्ती है, एक सैंपल किट की कीमत महज 1200 रुपये है, ये कुछ कीमत को लेकर कंफ्यूजन है जिसको मैं The CSR Journal के इस मंच पर क्लेरिफाई करना चाहता हूँ, एक सैंपल की कीमत 1200 है और एक सैंपल से एक व्यक्ति का ही टेस्टिंग हो पायेगा। फिलहाल इसकी कीमत 1200 है लेकिन जैसे ये बहुत बड़े पैमाने पर निर्मित होगा ये और भी कम हो सकता है।</h4>
<h2>चूँकि आप मायलैब के कॉर्पोरेट स्ट्रटेजिस्ट है ऐसे में आपसे समझना चाहेंगे कि क्या आपसे कॉर्पोरेट्स भी संपर्क में है ?</h2>
<h4>बिलकुल देश की बड़ी कॉर्पोरेट्स हमारे इस कोरोना टेस्टिंग किट के लिए आर्डर कर रही है, जांच पड़ताल कर रही है, ये कंपनियां अपने सीएसआर फंड का इस्तेमाल कर ये किट ख़रीददकर सरकार को मुहैया कराएंगी ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को कोरोना की चपेट में आने से बचाया जा सके, इंडिया आयल और पेटीएम जैसे कॉर्पोरेट्स हमसे संपर्क में है।</h4>
<h2>CSR यानि Corporate Social Responsibility की बात चली है तो आपसे जानना चाहते है कि कोरोना से लड़ने के लिए सीएसआर को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला किया है, सरकार के इस फैसले को आप कैसे देखते है?</h2>
<h4>सरकार का <a href="https://thecsrjournal.in/how-corporate-csr-is-helping-to-tackle-coronavirus/">सीएसआर</a> को लेकर फैसला बेहद ही सराहनीय है, सरकार के आव्हान पर अगर कॉर्पोरेट्स सीएसआर फंड का इस्तेमाल इस महामारी से बचने के लिए कर रहे है इससे अच्छी बात नहीं हो सकती। देश में बड़े कॉर्पोरेट्स सरकार की मदद के लिए सामने आ रहें है, एक बात हमें समझना होगा कि इस बीमारी से बचने के लिए जल्द से जल्द ये पता लगना जरुरी होता है कि आप कोरोना पॉजिटिव है या नहीं। जितना ज्यादा टेस्टिंग होगा हम जल्दी ही इससे लड़ पाएंगे और सीएसआर इसमें मददगार साबित हो रहा है।</h4>
<h2>मायलैब का सीएसआर प्लान क्या है ?</h2>
<h4>हम अभी एक स्टार्ट अप है, अभी हम सीएसआर तो नहीं करते है लेकिन जरूर इसको लेकर हम प्लानिंग कर रहे है, हम आने वाले दिनों में रिमोट इलाकों में और जहाँ मेडिकल सुविधाएं पर्याप्त नहीं है वहां कई प्रकार के टेस्टिंग उपकरण देंगे ताकि हर गरीब से गरीब इंसान तक सही उपचार पहुंच सकें।</h4>
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