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	<title>टाटा मेमोरियल सेंटर Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>अब 100 रुपये में होगा कैंसर का इलाज? दोबारा कैंसर होने से रोकेगी ये टैबलेट, टाटा हॉस्पिटल ने किया रिसर्च</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/tablet-prevent-resurgence-of-cancer-tata-hospital-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Feb 2024 10:10:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>अगर आप कैंसर से पीड़ित है और आपका ट्रीटमेंट चल रहा है तो दोबारा कैंसर के फैलने का चांसेस होता है। Cancer Treatment के बाद भी कई मरीजों में कैंसर वापस फैल जाता है। Tata Memorial Hospital के डॉक्टरों ने एक रिसर्च कर कैंसर दोबारा ना हो इसका इलाज खोजा है। टाटा अस्पताल के खारघर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>अगर आप कैंसर से पीड़ित है और आपका ट्रीटमेंट चल रहा है तो दोबारा कैंसर के फैलने का चांसेस होता है। <a href="https://thecsrjournal.in/top-cancer-treatment-centres-in-india/">Cancer Treatment</a> के बाद भी कई मरीजों में कैंसर वापस फैल जाता है। Tata Memorial Hospital के डॉक्टरों ने एक रिसर्च कर कैंसर दोबारा ना हो इसका इलाज खोजा है। टाटा अस्पताल के खारघर स्थित एडवांस सेंटर फॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर (एक्ट्रेक) अस्पताल के डॉ. इंद्रनील मित्रा के नेतृत्व में ये Cancer Research किया गया है। जिसमें बताया गया है कि रिसर्च में चूहों पर शोध किया है। चूहों में मनुष्य के कैंसर सेल डाले गए। जिसके बाद उनमें ट्यूमर निर्माण हुआ। उसके बाद रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और सर्जरी के जरिए उनका इलाज किया। इसके बाद कैंसर सेल्स नष्ट होकर उनके बहुत छोटे-छोटे टुकड़े हो गए। यह मरते हुए कैंसर सेल में से क्रोमेटिन कण (क्रोमोजोन के टुकड़े) ब्लड वेन्स के जरिए शरीर के दूसरे हिस्से में पहुंच जाते हैं। ये शरीर में मौजूद अच्छे सेल्स में मिल जाते हैं और उन्हें भी कैंसर सेल में तब्दील कर देते हैं। इस कैंसर रिसर्च से यह स्पष्ट हो गया है कि कैंसर सेल नष्ट होने बावजूद वापस आ जाते हैं।</h5>
<h2>इलाज के दौरान दोबारा कैंसर होने से रोकेगी 100 रुपये की ये टैबलेट</h2>
<h5>Recurring Cancer की समस्या का हल खोजने के लिए डॉक्टरों ने चूहों को रेसवेरेट्रॉल और कॉपर (तांबा) के संयुक्त प्रो-ऑक्सिडेंट टेबलेट दी। यह टैबलेट क्रोमोजोन को बेअसर करने में असरदार रही। टाटा मेमोरियल सेंटर (Tata Memorial Centre) के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र बडवे ने The CSR Journal से ख़ास बातचीत करते हुए बताया कि कैंसर के इलाज (Cancer Treatment in India) को बेहतर बनाने की दिशा में अधिक शोध की जरूरत है। डॉ. इंद्रनील मित्रा (Dr. Indraneel Mittra) के शोध से दुनियाभर में कैंसर ट्रीटमेंट को और भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वहीं <a href="https://tmc.gov.in/index.php/en/">टाटा मेमोरियल सेंटर</a> के उपनिदेशक सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि समस्या की जड़ का पता लगाने के साथ-साथ उसका निवारण भी उतना ही जरूरी है। कॉपर- रेसवेरेट्रॉल के एक घरेलू नुस्खा है। कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने और इलाज के दौरान होने वाले दुष्परिणामों को कम करने में भी मददगार साबित होता है। रेसवेरेट्रॉल अंगूर, बेरीज के छिलके सहित अन्य पदार्थों से मिलता है। कई खाद्य पदार्थों से भी कॉपर मिलता है।</h5>
<h2>कैंसर इलाज में अभी कॉपर- रेसवेरेट्रॉल की दवाई पर कई मंजूरी बाकी है</h2>
<h5>एडवांस सेंटर फॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर (एक्ट्रेक) के डॉक्टरों का दावा है कि ये न्यूट्रास्यूटिकल कैंसर के साइड इफेक्ट्स को 50 फीसदी कम कर सकती है। साथ ही दोबारा कैंसर होने के खतरे को 30 फीसदी तक रोक सकती है। हालांकि टाटा कैंसर हॉस्पिटल ने इस दवा को लेकर कोई कीमत तय नहीं कि है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दवा की कीमत करीब 100 रुपए हो सकती है। फिल्हाल दवा को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के अप्रूवल का इंतजार है। सामान्य तौर पर किसी दवा को अप्रूवल के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से मान्यता चाहिए होती है।  जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। किसी भी नई प्रिसक्रिप्शन दवा को देश में बेचने के लिए Drug Controller General of India (DCGI) से अप्रूवल की जरूरत पड़ती है। चूंकि जिस कैंसर की दवा की बात हम कर रहे हैं। वो न्यूट्रास्यूटिकल फूड सप्लीमेंट है इसलिए इसे भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से मान्यता की जरूरत पड़ेगी, जो खाने-पीने की चीजों पर निगरानी रखने वाली संस्था है।</h5>
<h2>देश में हर साल करीब 14 लाख कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं</h2>
<h5>कैंसर की ये दवाई साइड इफेक्ट को कम करता है। टाटा के बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. नवीन खत्री के अनुसार इलाज के दौरान मरीज के मुंह में छाले पड़ जाते हैं, कॉपर- रेसवेरेट्रॉल के सेवन से इस तकलीफ से काफी राहत मिलती है। मुंह के कैंसर की कोशिकाओं की आक्रामकता को कॉपर- रेसवेरेट्रॉल का टैबलेट देने के बाद कैंसर सेल की तीव्रता कम हो गई। पेट से संबंधित कैंसर मरीजों के इलाज के दौरान हाथ और पांव की स्किन छूटने के साइड इफेक्ट को भी कम करने में इससे मदद मिलती है। ब्रेन ट्यूमर के मरीजों में भी कॉपर- रेसवेरेट्रॉल के सेवन से बेहतर परिणाम मिले हैं। देश में हर साल करीब 14 लाख कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। जिसमें से करीब 9 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। कैंसर के साथ एक बड़ी समस्या ये है कि ये एक बार ठीक होने के बाद दोबारा भी हो सकता है। इसी सिलसिले में वैज्ञानिक सालों से रिसर्च कर रहे हैं कि आखिर एक बार इलाज के बाद कैंसर वापस कैसे लौट आता है। इसी कड़ी में टाटा मेमोरियल हास्पिटल के डॉक्टरों ने बड़ी सफलता मिलने का दावा किया है।</h5>
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		<title>टाटा हॉस्पिटल आयुर्वेद से करेगा कैंसर का इलाज!</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/tata-memorial-cancer-hospital-ayurvedic-centre-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Dec 2023 11:20:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आने वाले दिनों में कैंसर का इलाज आयुर्वेद से होने की संभावना है। (Cancer Treatment with Ayurveda) कैंसर के मरीजों को कुछ वर्षों में उपचार का दूसरा विकल्प मिल सकता है। आयुर्वेद से कैंसर के ट्रीटमेंट को लेकर टाटा मेमोरियल अस्पताल (Tata Memorial Cancer Hospital) मुंबई से सटे खोपोली में रिसर्च सेंटर बना रहा है। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>आने वाले दिनों में कैंसर का इलाज आयुर्वेद से होने की संभावना है। (Cancer Treatment with Ayurveda) कैंसर के मरीजों को कुछ वर्षों में उपचार का दूसरा विकल्प मिल सकता है। आयुर्वेद से कैंसर के ट्रीटमेंट को लेकर टाटा मेमोरियल अस्पताल (Tata Memorial Cancer Hospital) मुंबई से सटे खोपोली में रिसर्च सेंटर बना रहा है। यह देश का पहला अस्पताल होगा, जहां आयुर्वेद की मदद से कैंसर का उपचार किया जाएगा (India&#8217;s First Ayurvedic Cancer Hospital by Tata)। इस अस्पताल में कैंसर पर रिसर्च भी किया जायेगा। लगभग 21 एकड़ जमीन पर 100 बेड की क्षमता वाला अस्पताल साल 2026 तक तैयार हो जाएगा। खोपोली में बन रहे इस टाटा कैंसर रिसर्च सेंटर में कैंसर का कारगर इलाज करने वाली आयुर्वेदिक दवाइयों पर शोध किया जायेगा। यहां आयुर्वेद की मदद से रिसर्च और ट्रीटमेंट पर ही फोकस किया जायेगा।</h5>
<h2>टाटा में कैंसर के इलाज को असरदार बनाएगा आयुर्वेद!</h2>
<h5>फिलहाल टाटा मेमोरियल सेंटर में कैंसर मरीजों का उपचार एलोपैथिक से किया जा रहा है (Cancer Treatment in Mumbai)। मरीजों के पास इस गंभीर बीमारी के उपचार के लिए यही एक मात्र विकल्प है। ये एलोपैथी ट्रीटमेंट काफी खर्चीला होता है। जिसे हर कोई अफ़्फोर्ड नहीं कर पाता है, इसके साथ ही कई साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। कैंसर के इलाज में आयुर्वेदिक पद्धति से कैंसर का आज भी कोई कारगर उपचार संभव नहीं है। इसलिए मेडिसिनल और देसी आयुर्वेदिक दवाइयों पर इस सेंटर में रिसर्च किया जायेगा ताकि अलोपॅथी और आयुर्वेदिक पद्धति से मौजूदा इलाज को बेहतर बनाया जा सके और कैंसर रोगियों पर वह असरदार भी हो।</h5>
<h2>टाटा अस्पताल में कैंसर के इलाज के लिए कारगर हो सकती है देसी जड़ी बूटियां</h2>
<h5>जिस व्यक्ति को एक बार कैंसर हो जाता है और वह इलाज करवाता है तो उसे साइड इफ़ेक्ट भी सहना पड़ता है। इतना ही नहीं कैंसर के दोबारा होने की संभावना भी होती है। इसलिए ऐसी दवा को बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद भी मरीज की इम्यूनिटी को बढ़ा सके। टाटा अपने इस खोपोली सेंटर पर मेडिसिनल प्लांट्स व हर्ब्स की मदद से ऐसी दवाइयों की खोज करेंगे जो मरीजों का कारगर तरीके से इलाज करने में मदद कर सके।</h5>
<h2>टाटा बना रहा है भारत का पहला कैंसर अस्पताल, जो आयुर्वेद पद्धति से कैंसर पर शोध और उपचार करेगा</h2>
<h5>The CSR Journal से ख़ास बातचीत करते हुए Tata Memorial Centre के नवनियुक्त डायरेक्टर डॉ. सुदीप गुप्ता ने बताया कि Tata Cancer Hospital को महाराष्ट्र सरकार ने खोपोली में जमीन उपलब्ध कराई है जहां Tata Cancer Treatment Centre बनाया जा रहा है और इस सेंटर में बाकायदा पारम्परिक कैंसर ट्रीटमेंट के साथ साथ आयुर्वेद पद्धति पर भी रिसर्च किया जायेगा और ख़ास बात ये भी डॉ. सुदीप गुप्ता ने बताया कि हम इस सेंटर पर मेडिसिनल प्लांट को खुद उगाएंगे, उसका संरक्षण करेंगे और रिसर्च केंद्र में उस पर ट्रायल किया जाएगा। TMC Director Dr. Sudeep Gupta ने बताया कि कई बार हमने देखा है कि सोशल मीडिया जैसे वॉट्सऐप, फेसबुक, यू-ट्यूब पर कुछ मेडिसिनल प्लांट और हर्ब्स की मदद से कैंसर को ठीक करने का दावा किया जाता है, जो गलत होते हैं। हमारा रोल यही होगा कि उन आयुर्वेद दवाइयों पर रिसर्च करना और यह पता लगाना कि क्या वाकई में यह दवाइयां कैंसर के इलाज में मददगार हैं या नहीं।</h5>
<h2>पूरे पूरे भारत में कैंसर उपचार के लिए बने हब, फिलहाल देश को 30-40 Cancer Care Hub की जरुरत</h2>
<h5>भारत सरकार और परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत संचालित टाटा मेमोरियल सेंटर (<a href="https://tmc.gov.in/index.php/en/">टीएमसी</a>) के डायरेक्टर डॉ सुदीप गुप्ता ने बताया कि भारत के सात राज्यों में अपने 11 अस्पतालों में सालाना 1.25 लाख नए कैंसर मरीजों का पंजीकरण हुआ है जो कि ये एक चिंता का विषय है। इन अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंदों की या तो मुफ्त या फिर बहुत सस्ते दामों पर इलाज किया जाता है। (Free and Affordable Cancer Care in India) टीएमसी के हाल ही में नियुक्त निदेशक डॉ. सुदीप गुप्ता बताते हैं कि वर्तमान राष्ट्रीय कैंसर मामले सभी केंद्रों में 13,00,000 हैं, लेकिन अगले 10 से 15 वर्षों में इसके 24,00,000 तक बढ़ने की उम्मीद है। इस अलार्मिंग सिचुएशन को देखते हुए डॉ. गुप्ता ने भारत सरकार को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है जिसमे उन्होंने पूरे देश में कैंसर उपचार के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल के कार्यान्वयन की वकालत की है। इस प्रस्ताव में 30 से 40 देश भर में कैंसर के इलाज के लिए विशेष केंद्र स्थापित करने की बात कही गयी है। इस Cancer Hub in India की मदद से कैंसर के इन केंद्रों के रणनीतिक भौगोलिक वितरण से इलाज और अस्पताल की पहुंच आसानी से सुनिश्चित की जा सकेगी।</h5>
<h2>कॉरपोरेट कंपनियां खुप करती है टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में सीएसआर</h2>
<h5>The CSR Journal से ख़ास बातचीत करते हुए Tata Memorial Centre के नवनियुक्त डायरेक्टर डॉ. सुदीप गुप्ता ने बताया कि Tata Cancer Hospital को बड़े पैमाने पर देश की Corporates अपना CSR फंड देती है। CSR for Cancer की मदद से गरीब और जरूरतमंद मरीजों के कैंसर का इलाज संभव हो पा रहा है।सीएसआर की मदद से देश की कॉर्पोरेट कंपनियां बड़े पैमाने पर कैंसर जैसी घातक बिमारियों पर अपना सीएसआर फंड खर्च कर रही है और बड़े स्तर पर टाटा मेमोरियल अस्पताल में सीएसआर की एक्टिविटीज कर रही है। कैंसर से लड़ने के लिए देश की बड़ी सरकारी कंपनियों ने सीएसआर के तहत टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और सेंटर को दान दिया है, पीएसयू की सीएसआर एक्टिविटीज की वजह से ही अस्पताल में बड़े पैमाने पर सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है, सीएसआर की मदद से ही अत्याधुनिक इक्विपमेंट और मशीनें अस्पताल में आ रही है, इन सुविधाओं का सीधा फायदा मरीज ही उठाता है।</h5>
<h2>मौत देता कैंसर, <a href="https://thecsrjournal.in/cancer-and-csr/">सीएसआर देती जिंदगी</a></h2>
<h5>डॉ. सुदीप गुप्ता ने कुछ कॉरपोरेट्स का नाम गिनवाते हुए उनका शुक्रिया अदा किया और बताया कि इनफ़ोसिस ने अपने CSR Funds से टाटा अस्पताल को आशा निवास बना कर दिया है जिसमे 300 रूम है। मुंबई और महाराष्ट्र के बाहर से आने वाले मरीजों को यहां ठहरने की उत्तम व्यवस्था है जिनके लिए ये आशा निवास बहुत कारगर सिद्द हो रही है। वही बच्चों के लिए भी सीएसआर से रहने के लिए घर प्रोवाइड किये जाते है। बच्चों के इलाज के लिए 6 महीने लग जाते है ऐसे में पीड़ित बच्चे और उनके माता पिता के लिए सेंट जूड इंडिया चाइल्ड केयर सेंटर चलाया जाता है, ये भी सीएसआर से चलाया जाता है। इनके आलावा अन्य मेडिकल उपकरण जो बहुत महंगे होते है वो भी PSU In India और कॉरपोरेट्स द्वारा दिए जाते है। बहरहाल सीएसआर एक ऐसा माध्यम बनता जा रहा है जिससे ना सिर्फ लोगों की जिंदगियों में बदलाव आ रहा है बल्कि कैंसर जैसे घातक बीमारी को भी सीएसआर मात दे रहा है।</h5>
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