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संसद में उठा सीएसआर का मुद्दा, सरकार ने दिया ये जवाब

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संसद में उठा सीएसआर का मुद्दा, सरकार ने कहा खर्च पर नहीं जारी कर सकते आदेश
 
डेमोक्रेसी के मंदिर में संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है। राजनीतिक मुद्दों पर बहस हो रही है। कानून और नियमों में संशोधन हो रहा है। पेगासस जासूसी मामले के बीच राजनीतिक गलियारों में जमकर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे है। लेकिन इस बीच सीएसआर यानी कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी पर एक महत्वपूर्ण सवाल पर जवाब देते हुए सरकार ने ये स्पष्ट किया है कि CSR के खर्च को लेकर सरकार सिर्फ कॉरपोरेट कंपनीज को निर्देश दे सकती है, लेकिन आदेश नहीं दे सकती है।

संसद में सीएसआर पर सवाल, सरकार के जवाब

दरअसल राजस्थान के नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार को सीएसआर के प्रावधानों में बदलाव कर इस खर्च को कंपनियों के प्रचालन क्षेत्र में ही शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य सहित अन्य बुनियादी विकास पर खर्च के लिए आदेशात्मक प्रावधान लाने की मांग की और लोकसभा में हनुमान बेनीवाल ने सीएसआर खर्च के संबंध में सवाल किया। Corporate Social Responsibility के मुद्दे पर हनुमान बेनीवाल ने लिखित में सवाल पूछा कि CSR के जरिये सरकार क्यों नहीं Corporates को आदेश देती कि वो स्थानीय स्तर पर अनिवार्य रूप से सीएसआर खर्च करे।

स्थानीय सीएसआर खर्च निर्देशात्मक है, अनिवार्य नहीं है – संसद में सरकार

इस सवाल के जवाब में सरकार ने कहा है कि कानून में प्रावधान है कि कंपनी अपने प्रचालन क्षेत्र को प्राथमिकता देगी लेकिन यह निर्देशात्मक है, अनिवार्य नहीं है। यानी सीएसआर कानून के तहत कंपनियां सीएसआर खर्च खुद संज्ञान लेते हुए कर सकती है। कंपनियां स्थानीय स्तर पर सीएसआर खर्च कर सकती है, लेकिन उन्हें आदेश नहीं दिया जा सकता। सरकार ने कानून का हवाला देते हुए कहा कि सरकार कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 की अनुसूची VII तक कंपनी सीएसआर नीति नियम 2014 के माध्यम से कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के लिए व्यापक ढांचा प्रदान करती है।
कंपनियों द्वारा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और स्थानीय क्षेत्र की वरीयता के बीच संतुलन बनाए जाने की आवश्यकता है। इस अधिनियम के तहत सीएसआर का एक बोर्ड संचालित प्रक्रिया है और कंपनी बोर्ड अपनी सीएसआर समितियों की सिफारिशों के आधार पर कंपनी के सीएसआर कार्यों की योजना बनाने, उनके संबंध में निर्णय लेने, उन्हें कार्यान्वित करने और उनकी निगरानी करने के लिए अधिकृत है। सरकार कंपनियों को किसी विशिष्ट क्षेत्रीय कार्यालय के लिए खर्च करने के संबंध में कोई विशेष निर्देश जारी नहीं करती है।

सीएसआर के तहत पश्चिमी राजस्थान के 6 जिलों में हुए 85 करोड़ रुपए ख़र्च

वहीं सांसद हनुमान बेनीवाल ने नागौर इलाके में सीएसआर खर्च की भी जानकारी मांगी। जवाब में बताया गया कि पश्चिमी राजस्थान के 6 जिलों में पिछले 4 सालों में 85 करोड़ रुपए के सीएसआर के जरिये विकास के कार्य हुए। सरकार के जवाब से असंतुष्ट सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि प्रश्नकाल स्थगित होने के कारण इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकी लेकिन ऐसे कई प्रकरण सरकार की जानकारी में है जिसमें कंपनियों ने सीएसआर निधि का या तो उपयोग ही नहीं किया या फिर दुरुपयोग किया इस मामले को लेकर वह केंद्र सरकार को फिर से लेटर लिखेंगे।

क्या कहता है सीएसआर कानून

गौरतलब है कि कंपनी अधिनियम की धारा 135 के तहत प्रत्येक कंपनियों सहित जिसका तत्काल पूर्ण वित्तीय वर्ष के दौरान निवल मूल्य 500 करोड़ रुपए या उससे अधिक है अथवा टर्नओवर ₹1000 या उससे अधिक है अथवा निवल लाभ पांच करोड रुपए या उससे अधिक है को कंपनी के सीएसआर नीति के अनुसार सीएसआर के प्रति कंपनी के औसत निवल लाभ का कम से कम 2% खर्च करने का आदेश देती है। सीएसआर के लिए किए गए काम इस अधिनियम के अनुसूचित विनिर्दिष्ट क्षेत्रीय विषयों से संबंधित होने चाहिए।