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	<title>Anju Singh, Author at The CSR Journal</title>
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	<title>Anju Singh, Author at The CSR Journal</title>
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		<title>नितिन नवीन की नई टीम से मिले पीएम मोदी, मोदी@25 और Gen Z पर बड़ा दांव</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/pm-modi-brainstorms-with-bjps-new-65-member-team-launches-modi25-campaign-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:46:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पीएम मोदी की नई भाजपा टीम से मुलाकात: राजनीति में हलचल, दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पहुंचा नया नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय मुख्यालय में नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>पीएम मोदी की नई भाजपा टीम से मुलाकात: राजनीति में हलचल, दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पहुंचा नया नेतृत्व</h2>
<h5>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय मुख्यालय में नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष <a href="https://thecsrjournal.in/bjp-national-president-nitin-naveen-chairs-marathon-session-of-65-member-boost-youth-connectivity-hindi">नितिन नवीन की 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम</a> के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। 17 अगस्त 2026 को घोषित इस नई टीम की यह पहली औपचारिक सांगठनिक मुलाकात थी, जिसमें आगामी विधानसभा चुनावों, जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती और &#8216;जेन-जी&#8217; (Gen-Z) युवाओं तक सोशल मीडिया के माध्यम से पैठ बनाने की रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ। इस बैठक के साथ ही भाजपा ने अपनी राजनीतिक रणनीतियों को नई धार देने के लिए देशव्यापी &#8216;मोदी@25&#8217; अभियान और 15 दिवसीय &#8216;सेवा संकल्प महोत्सव&#8217; की भी घोषणा कर दी है, जिससे देश की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा हो गई है।</h5>
<h2>देशव्यापी सांगठनिक पुनर्गठन और नई दिशा</h2>
<h5>भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए शनिवार शाम को नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पार्टी मुख्यालय में नेतृत्व परिवर्तन की पहली बड़ी झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ठीक शाम सात बजे पार्टी के नवनियुक्त पदाधिकारियों का मार्गदर्शन करने पहुंचे। <a href="https://thecsrjournal.in/bjp-unveils-national-executive-smriti-irani-appointed-gen-secy-piyush-goyal-named-treasurer-hindi">राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन</a> की अगुवाई में तैयार हुई भाजपा की नई ब्रिगेड ने पूरे देश से आकर इस महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह नया स्वरूप केवल एक सांगठनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि आगामी वर्षों में होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों और दूरगामी सांगठनिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक अभेद्य चक्रव्यूह है। इस बैठक की शुरुआत में राष्ट्रगीत &#8216;वंदे मातरम&#8217; के सभी छह छंदों का सामूहिक पाठ किया गया, जिसे विपक्षी दलों के रुख के खिलाफ एक वैचारिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।</h5>
<h2>सांगठनिक संरचना: नई टीम के प्रमुख चेहरे</h2>
<h5>नितिन नवीन की इस नवनियुक्त 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम में अनुभवी दिग्गजों और युवा ऊर्जा का एक अनूठा संतुलन देखने को मिला है। टीम के गठन में जातिगत, क्षेत्रीय और लैंगिक समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसमें 12 महिला चेहरों को शामिल किया गया है।</h5>
<h5>बैठक के मुख्य एजेंडे: &#8216;Gen Z&#8217; और सोशल मीडिया पर फोकस</h5>
<h5>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की इस संयुक्त बैठक में पार्टी के आगामी तीन बड़े लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई-</h5>
<h5>युवा और Gen-Z आउटरीच: प्रधानमंत्री मोदी ने पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पार्टी को नए जमाने के मतदाताओं यानी &#8216;Gen Z&#8217; युवाओं से सीधे तौर पर जुड़ना होगा। उनकी भाषा, उनकी आकांक्षाओं और उनकी सोच को समझते हुए पार्टी की विचारधारा को उन तक पहुंचाना होगा।</h5>
<h5>सोशल मीडिया और आईटी सेल में बदलाव: डिजिटल मोर्चे पर विपक्ष को पछाड़ने के लिए अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को नया आईटी सेल प्रभारी बनाया गया है। बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के आधुनिक टूल्स और <a href="https://thecsrjournal.in/pm-modis-instagram-record-follower-surge-sparks-digital-political-race-hindi">रील्स के दौर में सकारात्मक नैरेटिव</a> सेट करने पर गंभीर मंत्रणा हुई।</h5>
<h5>सरकारी योजनाओं का जमीनी प्रचार: केंद्र सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों और विकास कार्यों को सीधे बूथ स्तर और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक पदाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।</h5>
<h2>राजनीति में हलचल: &#8216;मोदी@25&#8217; और सेवा संकल्प महोत्सव का ऐलान</h2>
<h5>इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान भाजपा ने एक अत्यंत महत्वाकांक्षी राष्ट्रव्यापी अभियान &#8216;मोदी@25&#8217; को हरी झंडी दिखाई। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और लोकतांत्रिक शासन (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में) में अभूतपूर्व 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत 7 सितंबर 2026 से देशव्यापी &#8216;सेवा संकल्प महोत्सव&#8217; की शुरुआत होगी। यह 15 दिवसीय महोत्सव पूरी तरह से जनता की सेवा को समर्पित होगा, जिसके तहत निम्नलिखित सामाजिक कार्य किए जाएंगे।</h5>
<h5>देश के प्रत्येक जिले और ब्लॉक स्तर पर वृहद स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा।</h5>
<h5>युवाओं को जोड़कर देश के कोने-कोने में बड़े पैमाने पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे।</h5>
<h5>ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में मुफ्त स्वास्थ्य शिविरों (Health Camps) का आयोजन होगा।</h5>
<h2>चुनावी महामंथन: आगामी राज्यों पर नजर</h2>
<h5>भाजपा मुख्यालय के विस्तारित कार्यालय में दिनभर चली तीन दौर की बैठकों में आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति का खाका तैयार किया गया। राष्ट्रीय पदाधिकारियों के बाद राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों, प्रभारियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी बैठकें निर्धारित की गई हैं। पार्टी का सीधा लक्ष्य चुनावी राज्यों में एंटी-इन्कम्बेंसी को पछाड़कर संगठन को &#8216;बूथ जीतो, चुनाव जीतो&#8217; के मंत्र पर सक्रिय करना है।</h5>
<h2>राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया</h2>
<h5>राजनीतिक पंडितों के अनुसार, नितिन नवीन की अध्यक्षता में भाजपा का यह नया सांगठनिक ढांचा पूरी तरह से चुनावी मोड में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। राम माधव और स्मृति ईरानी जैसे मुखर चेहरों की राष्ट्रीय संगठन में वापसी यह दर्शाती है कि भाजपा राष्ट्रीय विमर्श और वैचारिक मोर्चे पर किसी भी प्रकार का ढीलापन बर्दाश्त नहीं करना चाहती। वहीं, पीएम मोदी का सीधे नई टीम से संवाद करना यह संदेश देता है कि शीर्ष नेतृत्व नए पदाधिकारियों की पीठ पर मजबूती से खड़ा है।भाजपा मुख्यालय से निकली यह सांगठनिक ऊर्जा आने वाले दिनों में देश के राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक गरमाने वाली है, क्योंकि &#8216;सेवा संकल्प महोत्सव&#8217; के माध्यम से भाजपा कार्यकर्ता सीधे जनता के बीच पैठ बनाने जा रहे हैं।</h5>
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			</item>
		<item>
		<title>हैदराबाद में 7 मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने से मचा हड़कंप, 2 की मौत</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/hyderabad-under-construction-building-collapses-anjaiah-nagar-2-dead-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:22:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Hyderabad Building Collapse]]></category>
		<category><![CDATA[Illegal Construction]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हैदराबाद में निर्माणाधीन सात मंजिला इमारत अचानक जमींदोज, मलबे से दो शव बरामद, इलाके में हड़कंप हैदराबाद के माधापुर में शनिवार को एक सात मंजिला निर्माणाधीन अवैध इमारत अचानक भरभराकर ढह गई, जिसमें मलबे के नीचे दबने से दो मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2>हैदराबाद में निर्माणाधीन सात मंजिला इमारत अचानक जमींदोज, मलबे से दो शव बरामद, इलाके में हड़कंप</h2>
<h5>हैदराबाद के माधापुर में शनिवार को एक सात मंजिला निर्माणाधीन अवैध इमारत अचानक भरभराकर ढह गई, जिसमें मलबे के नीचे दबने से दो मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दर्दनाक हादसा आईटी हब माने जाने वाले माधापुर थाना क्षेत्र के अंजैया नगर (गाचीबोवली के पास) में हुआ। हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस, दमकल विभाग और ड्रआरएफ (DRF)/हैडरा (HYDRAA) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया।</h5>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p dir="ltr" lang="en">🚨 HYDERABAD: A 7-storey illegal building under construction has collapsed in Anjaiah Nagar, Madhapur.</p>
<p>🛑 Casualties: 2 confirmed dead, multiple injured.🏗️ Cause:</p>
<p>Illegal construction on a 50-sq-yard plot; cellar excavation compromised the structure. <a href="https://x.com/hashtag/Hyderabad?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Hyderabad</a>…</p>
<p>— sushil kadam (@imsushilkadam) <a href="https://x.com/imsushilkadam/status/2091132157293109285?ref_src=twsrc%5Etfw">August 22, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2>हैदराबाद में मौत की बहुमंजिला इमारत ढही, 2 मजदूरों की मौत, मलबे में अभी भी कइयों के दबे होने की आशंका</h2>
<h5>शनिवार दोपहर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के वीआईपी और घनी आबादी वाले इलाके माधापुर (अंजैया नगर) में एक बड़ा हादसा सामने आया। यहाँ नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर बनाई जा रही एक 7 मंजिला निर्माणाधीन इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भयावह दुर्घटना में दो निर्माण श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनकी पहचान उमेश कारे और मोपत (महतब) के रूप में हुई है। दोनों मृतक मजदूर मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और यहाँ टाइल्स बिछाने का काम करते थे। इस हादसे में पड़ोसी इमारतों में रहने वाले लोगों समेत कई अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</h5>
<h2>महज 50 गज की जमीन पर खड़ी थी &#8216;अवैध&#8217; मौत की मीनार</h2>
<h5>स्थानीय प्रशासन और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह सात मंजिला इमारत महज 50 वर्ग गज के एक अत्यंत छोटे से भूखंड (प्लॉट) पर खड़ी की जा रही थी। निर्माण कार्य एक ड्रेन (नाले) के बिल्कुल सटकर किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस इमारत के पास म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन या स्थानीय प्रशासन की कोई वैध अनुमति (Clearance) नहीं थी।स्थानीय कांग्रेस विधायक अरेकापुडी गांधी ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद <a href="https://thecsrjournal.in/nalasopara-illigal-building-demolished-without-rehabilitation">अवैध निर्माण</a> को लेकर तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया, &#8220;माधापुर डिवीजन के सेरीलिंगमपल्ली क्षेत्र में इस अवैध निर्माण को नगर निगम के अधिकारियों द्वारा चार महीने पहले ही रुकवा दिया गया था। लेकिन बिल्डर और जमीन मालिक ने मिलीभगत कर हाल ही में बिना किसी अनुमति के दोबारा काम शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, बिल्डर द्वारा सात मंजिला इमारत से सटे हिस्से में बेसमेंट (सेलर) की खुदाई को बिना सुरक्षा मानकों के आगे बढ़ाया जा रहा था, जिसके कारण मुख्य इमारत की नींव अचानक कमजोर हो गई और वह भरभराकर बगल के अपार्टमेंट पर गिर गई।&#8221;</h5>
<h2>चीख-पुकार के बीच शुरू हुआ बचाव कार्य, पड़ोसी इमारतें भी क्षतिग्रस्त</h2>
<h5>दोपहर में जैसे ही जोर के धमाके के साथ इमारत ढही, पूरे अंजैया नगर इलाके में धूल का गुबार छा गया और चारों तरफ अफरा-तफरी व चीख-पुकार मच गई। इमारत गिरने के प्रभाव से बगल में स्थित एक पांच मंजिला अपार्टमेंट को भी भारी नुकसान पहुंचा है और उसके मलबे की चपेट में आने से पड़ोसी इमारत के दो बुजुर्ग नागरिक घायल हो गए। पास के ही एक हॉस्टल को सुरक्षा के लिहाज से तुरंत खाली करा लिया गया, जहाँ रहने वाले छात्र डर के मारे सड़कों पर आ गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस कमिश्नरेट की टीम, दमकल कर्मी और हैडरा (HYDRAA) के जवान आधुनिक कटर और जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंचे। मलबे के भारी पत्थरों और कंक्रीट को हटाकर दबे हुए लोगों को निकालने का काम देर शाम तक जारी रहा। हैडरा प्रमुख ए.वी. रंगनाथ ने बताया कि शुरू में मलबे में किसी के होने की जानकारी नहीं थी, लेकिन मलबा हटाने पर दो शव बरामद हुए। आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे 2 से 3 और मजदूर फंसे हो सकते हैं, जिनकी तलाश में खोजी दस्ते लगातार जुटे हुए हैं।</h5>
<h2>स्थानीय लोगों में आक्रोश, बिल्डर और मालिक के खिलाफ मामला दर्ज</h2>
<h5>इस हादसे ने हैदराबाद में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माणों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह हादसा शाम के समय या कामकाजी घंटों में हुआ होता, तो जान-माल का नुकसान और भी बड़ा हो सकता था। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए इमारत के मालिक खाजा और बिल्डर सादिक की पहचान कर ली है और रायदुर्गम पुलिस स्टेशन में लापरवाही तथा अवैध निर्माण के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/hyderabad-under-construction-building-collapses-anjaiah-nagar-2-dead-hindi">हैदराबाद में 7 मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने से मचा हड़कंप, 2 की मौत</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आधी आबादी, पूरा सियासी दांव: यूपी में महिला वोट के लिए दलों की जोरदार जंग</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/womens-vote-battle-in-up-parties-race-to-win-half-the-electorate-ahead-of-2027-polls-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 12:49:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[UP CM Yogi Adityanath]]></category>
		<category><![CDATA[UP Elections 2027]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Women Votes]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>यूपी में महिला मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक अहमियत ने बदली चुनावी रणनीति! योजनाओं, सुरक्षा, रोजगार, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के मुद्दे बन रहे सियासत का केंद्र उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर महिला मतदातासबसे महत्वपूर्ण चुनावी समूहों में शामिल होती दिखाई दे रही हैं। प्रदेश की कुल [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/womens-vote-battle-in-up-parties-race-to-win-half-the-electorate-ahead-of-2027-polls-hindi">आधी आबादी, पूरा सियासी दांव: यूपी में महिला वोट के लिए दलों की जोरदार जंग</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div class="gs">
<div class="   ">
<div id=":n5" class="ii gt">
<div id=":n4" class="a3s aiL ">
<div id="avWBGd-20">
<h2>यूपी में महिला मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक अहमियत ने बदली चुनावी रणनीति! योजनाओं, सुरक्षा, रोजगार, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के मुद्दे बन रहे सियासत का केंद्र</h2>
<h5>उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर महिला मतदातासबसे महत्वपूर्ण चुनावी समूहों में शामिल होती दिखाई दे रही हैं। प्रदेश की कुल आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब आधी है और पिछले कुछ चुनावों में महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी ने राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करने के लिए मजबूर किया है। यही वजह है कि सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक सभी दल अब महिलाओं को केवल चुनावी घोषणाओं की लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि एक निर्णायक राजनीतिक शक्ति के रूप में देख रहे हैं।</h5>
<h2>राजनीतिक पार्टियों ने कसी कमर</h2>
<h5>2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। महिला सम्मेलन, स्वयं सहायता समूहों से संपर्क, छात्राओं और कामकाजी महिलाओं से संवाद, महिला सुरक्षा के मुद्दे, मुफ्त या रियायती सुविधाओं के वादे, आर्थिक सहायता, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषय धीरे-धीरे चुनावी विमर्श के केंद्र में आते जा रहे हैं। दरअसल, <a href="https://thecsrjournal.in/up-women-get-rs-50000-first-instalment-before-2027-assembly-polls-like-bihar-model-hindi">उत्तर प्रदेश में महिला मतदाताओं</a> का महत्व केवल उनकी संख्या तक सीमित नहीं है। कई चुनावों में महिलाओं की मतदान भागीदारी पुरुषों के बराबर या उससे अधिक रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए यह समझना जरूरी हो गया है कि महिला वोट अब ‘साइलेंट वोट’ भर नहीं, बल्कि सरकार बनाने और सत्ता का समीकरण बदलने वाली ताकत है।</h5>
<h2>महिला वोट बैंक की बदली तस्वीर</h2>
<h5>उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक चुनावी राजनीति जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव और पुरुष मतदाताओं के रुझान के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन पिछले वर्षों में महिला मतदाताओं की राजनीतिक सक्रियता ने इस पारंपरिक चुनावी गणित को काफी हद तक बदल दिया है। महिलाएं अब परिवार के पुरुष सदस्य की पसंद के आधार पर ही मतदान करेंगी, यह धारणा कमजोर हुई है। रोजगार, महंगाई, राशन, बिजली, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ जैसे मुद्दे महिलाओं के अपने राजनीतिक निर्णय को प्रभावित कर रहे हैं। यही कारण है कि राजनीतिक दलों की रणनीति में महिलाओं के लिए अलग घोषणाएं और कार्यक्रम लगातार बढ़े हैं। पार्टियां अब यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि उनकी सरकार महिलाओं के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाले मुद्दों पर अधिक प्रभावी काम कर सकती है।</h5>
<h2>भाजपा के सामने महिला समर्थन बनाए रखने की चुनौती</h2>
<h5>सत्तारूढ़ भाजपा के लिए 2027 का चुनाव महिला समर्थन को बनाए रखने की बड़ी परीक्षा होगा। पिछले वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं को महिला लाभार्थियों से जोड़कर प्रचारित किया गया है। <a href="https://thecsrjournal.in/free-lpg-gas-connection-pradhan-mantri-ujjwala-yojana-hindi">उज्ज्वला</a>, प्रधानमंत्री आवास, जनधन खाते, स्वच्छता अभियान, राशन और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से सरकार ने महिला मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा भी भाजपा के राजनीतिक संदेश का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। सरकार कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश करती रही है। लेकिन 2027 से पहले भाजपा के सामने चुनौती यह होगी कि योजनाओं के लाभ और सरकारी दावों को महिला मतदाताओं के व्यक्तिगत अनुभव से किस तरह जोड़ा जाए। महंगाई, रोजगार, परिवार की आय, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी रोजमर्रा की समस्याओं पर महिलाओं की राय चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए भाजपा केवल उपलब्ध योजनाओं का प्रचार करने तक सीमित नहीं रहना चाहेगी, बल्कि संगठन के स्तर पर महिला मतदाताओं से सीधा संवाद बढ़ाना भी उसके लिए महत्वपूर्ण होगा।</h5>
<h2>समाजवादी पार्टी की रणनीति: पीडीए के साथ महिला मतदाता</h2>
<h5>समाजवादी पार्टी के लिए महिला मतदाता का सवाल उसके व्यापक सामाजिक गठजोड़ से जुड़ा हुआ है। पार्टी की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ने वाले पीडीए विमर्श के साथ महिलाओं को जोड़ना महत्वपूर्ण रणनीतिक आवश्यकता है। सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह महिला मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक छवि को कितना व्यापक बना पाती है। पार्टी यदि महिलाओं को केवल सामाजिक समूह के रूप में देखने के बजाय उनके अलग आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता देती है, तो उसे फायदा मिल सकता है। महिलाओं के लिए रोजगार, शिक्षा, सुरक्षा, महंगाई और सरकारी योजनाओं की पहुंच जैसे विषय सपा के चुनावी अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। साथ ही महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।</h5>
<h2>कांग्रेस की नजर महिला मतदाताओं पर</h2>
<h5>कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता, आरक्षण और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए महिला मतदाता एक ऐसा वर्ग है जिसके जरिए वह अपनी संगठनात्मक पहुंच को बढ़ाने का प्रयास कर सकती है। पार्टी की चुनौती हालांकि दोहरी है। एक ओर उसे महिलाओं के बीच अपना स्वतंत्र राजनीतिक आधार बनाना होगा, वहीं दूसरी ओर उसे जमीनी संगठन को भी मजबूत करना होगा। केवल घोषणाओं से महिला वोट हासिल करना आसान नहीं होगा। स्थानीय स्तर पर महिला कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर तक पहुंच महत्वपूर्ण होगी।</h5>
<h2>बसपा के लिए भी महिला मतदाता महत्वपूर्ण</h2>
<h5>बहुजन समाज पार्टी के राजनीतिक आधार में दलित महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में 2027 में महिला मतदाता पार्टी के लिए भी अहम होंगी। बसपा के सामने चुनौती यह है कि वह अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ नई पीढ़ी की महिला मतदाताओं को कितना जोड़ पाती है। शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दे दलित और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। यदि पार्टी इन मुद्दों को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाती है तो वह महिला मतदाताओं के बीच अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।</h5>
<h2>महिला वोट के लिए मुफ्त योजनाओं से आगे की राजनीति</h2>
<h5>2027 के चुनाव में महिलाओं को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि राजनीतिक दल उन्हें क्या पेशकश करते हैं। क्या मुकाबला केवल नकद सहायता, मुफ्त सुविधाओं और सब्सिडी तक सीमित रहेगा या महिला रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक स्वतंत्रता जैसे दीर्घकालिक मुद्दे भी चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनेंगे? महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता तत्काल राहत दे सकती है, लेकिन लंबे समय में रोजगार और आय का स्थायी स्रोत अधिक महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में महिला श्रम भागीदारी बढ़ाना, छोटे व्यवसायों को सहायता देना, स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराना और कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ना बड़ी राजनीतिक प्राथमिकता बन सकती है। इसलिए 2027 से पहले राजनीतिक दलों के सामने सिर्फ यह चुनौती नहीं है कि वे महिलाओं को क्या देंगे, बल्कि यह भी सवाल है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनकी दीर्घकालिक नीति क्या होगी।</h5>
<h2>सुरक्षा अब भी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा</h2>
<h5>महिला सुरक्षा उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण विषय रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, <a href="https://thecsrjournal.in/ncw-launches-posh-inquiry-handbook-strengthen-women-workplace-safety-hindi">कार्यस्थल पर सुरक्षा</a> और पुलिस तक महिलाओं की आसान पहुंच जैसे मुद्दे सीधे महिला मतदाताओं को प्रभावित करते हैं।सरकार कानून-व्यवस्था के आंकड़ों और पुलिस व्यवस्था को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकती है, लेकिन विपक्ष जमीनी घटनाओं और महिलाओं के अनुभवों को मुद्दा बनाएगा। यही वजह है कि 2027 में महिला सुरक्षा का सवाल केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। महिला मतदाता यह देख सकती हैं कि सरकार के दावे उनके रोजमर्रा के जीवन में कितने प्रभावी साबित हुए हैं।</h5>
<h2>रोजगार और महंगाई पर होगा असली इम्तिहान</h2>
<h5>महिला वोट को लेकर राजनीतिक दल जितने भी वादे करें, अंततः परिवार की आर्थिक स्थिति चुनावी व्यवहार पर असर डालेगी। घरेलू बजट, खाद्य पदार्थों की कीमतें, शिक्षा का खर्च, स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और रोजगार के अवसर महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और उससे जुड़े काम, स्वयं सहायता समूह, छोटे कारोबार और स्थानीय रोजगार के अवसर अहम हैं। वहीं शहरों में <a href="https://thecsrjournal.in/mission-shakti-yojana-women-to-drive-e-auto-rickshaw-up-hindi">शिक्षित महिलाओं के लिए सुरक्षित रोजगार</a>, परिवहन, कार्यस्थल की सुविधाएं और समान अवसर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए महिला वोट की राजनीति केवल ‘महिला कल्याण’ तक सीमित नहीं है। यह सीधे राज्य की अर्थव्यवस्था और परिवार की आर्थिक स्थिति से जुड़ा प्रश्न बन चुकी है।</h5>
<h2>सोशल मीडिया ने बदली महिला राजनीति</h2>
<h5>महिला मतदाताओं तक पहुंचने के लिए राजनीतिक दल अब पारंपरिक रैलियों के साथ सोशल मीडिया का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। महिला केंद्रित वीडियो, योजनाओं की जानकारी, लाभार्थियों की कहानियां और राजनीतिक संदेश डिजिटल माध्यमों के जरिए तेजी से फैलाए जा सकते हैं। लेकिन <a href="https://thecsrjournal.in/pm-modis-instagram-record-follower-surge-sparks-digital-political-race-hindi">डिजिटल प्रचार</a> के साथ एक नई चुनौती भी है। महिला मतदाता अब केवल राजनीतिक दलों का संदेश सुनने वाली नहीं हैं। वे योजनाओं और दावों की तुलना करती हैं, अपनी समस्याएं साझा करती हैं और सरकार के काम पर प्रतिक्रिया भी देती हैं। यानी 2027 में महिला मतदाता तक पहुंचने की लड़ाई बूथ से लेकर मोबाइल स्क्रीन तक लड़ी जाएगी।</h5>
<h2>सिर्फ वोट नहीं, नेतृत्व में भागीदारी भी</h2>
<h5>महिला मतदाताओं को साधने की राजनीति के बीच महिला प्रतिनिधित्व का प्रश्न भी महत्वपूर्ण है। पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी ने राजनीति में नई पीढ़ी की महिला नेतृत्व क्षमता को बढ़ाया है। अब सवाल यह है कि विधानसभा और लोकसभा स्तर पर राजनीतिक दल महिलाओं को कितनी टिकट देते हैं और पार्टी संगठन में उन्हें कितनी निर्णायक भूमिका मिलती है। यदि दल महिलाओं से वोट मांगते हैं तो महिलाओं को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने का सवाल भी उठेगा। यही मुद्दा 2027 के चुनाव में महिला राजनीति को एक नए स्तर पर ले जा सकता है।</h5>
<h2>2027 की चुनावी लड़ाई में निर्णायक भूमिका</h2>
<h5>उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मतदाता अब किसी एक पार्टी की स्थायी संपत्ति नहीं हैं। यही सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। महिलाएं अलग-अलग चुनावों और क्षेत्रों में अलग राजनीतिक प्राथमिकताएं दिखा सकती हैं। एक ओर सरकारी योजनाओं का लाभ और सुरक्षा जैसे मुद्दे सत्ता पक्ष को समर्थन दिला सकते हैं, वहीं रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय समस्याएं विपक्ष के पक्ष में माहौल बना सकती हैं। इसलिए 2027 का चुनाव महिला मतदाताओं के लिए केवल ‘किसने क्या दिया’ का चुनाव नहीं होगा, बल्कि ‘किसने हमारे जीवन को कितना बेहतर बनाया’ का सवाल भी बन सकता है।</h5>
<h2>आधी आबादी अब चुनावी समीकरण का केंद्र</h2>
<h5>उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मतदाता की बढ़ती अहमियत ने राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। 2027 से पहले भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा और अन्य दल महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेंगे। लेकिन महिला मतदाताओं को केवल चुनावी ‘वोट बैंक’ मानना अब पर्याप्त नहीं होगा। आज की महिला मतदाता अपने परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों की शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और भविष्य की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक फैसला लेने की क्षमता रखती है।</h5>
<h2>महिलाओं के चुनाव पर यूपी का भविष्य</h2>
<h5>2027 की उत्तर प्रदेश की सियासत में असली मुकाबला केवल जातीय समीकरणों और पारंपरिक वोट बैंकों का नहीं होगा। आधी आबादी के भरोसे की लड़ाई भी उतनी ही निर्णायक होगी। अब सवाल यह नहीं है कि राजनीतिक दल महिलाओं को अपने पक्ष में कैसे लाएंगे, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि महिलाएं किस दल को अपने भविष्य का भरोसेमंद विकल्प मानती हैं। 2027 के चुनाव में यही भरोसा सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने की राह को आसान या मुश्किल बना सकता है।</h5>
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		<title>45 करोड़ का बजट, 170 करोड़ की कमाई: आवारापन 2 बनी ब्लॉकबस्टर</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/emraan-hashmis-bollywood-golden-run-awarapan-2-hits-170-cr-worldwide-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 10:40:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Entertainment]]></category>
		<category><![CDATA[Good News]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[100]]></category>
		<category><![CDATA[Awarapan 2]]></category>
		<category><![CDATA[bollywood movies]]></category>
		<category><![CDATA[box office news]]></category>
		<category><![CDATA[Emraan Hashmi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Awarapan 2 Box Office Collection Day 8: छप्पर फाड़ कमाई कर रही इमरान हाशमी की फिल्म इमरान हाशमी स्टारर एक्शन-थ्रिलर फिल्म &#8216;आवारापन 2&#8217; ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाते हुए अपनी रिलीज के 8वें दिन दुनियाभर में लगभग 170 करोड़ रुपए (169.17 करोड़ रुपए) का शानदार ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। 14 अगस्त 2026 को [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>Awarapan 2 Box Office Collection Day 8: छप्पर फाड़ कमाई कर रही इमरान हाशमी की फिल्म</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/emraan-hashmi-awarapan-2-crosses-110-cr-mark-beats-sunny-deols-bantwara-1947-hindi">इमरान हाशमी स्टारर एक्शन-थ्रिलर फिल्म &#8216;आवारापन 2&#8217;</a> ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाते हुए अपनी रिलीज के 8वें दिन दुनियाभर में लगभग 170 करोड़ रुपए (169.17 करोड़ रुपए) का शानदार ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के वीकेंड पर रिलीज हुई यह फिल्म, साल 2007 की कल्ट क्लासिक फिल्म &#8216;आवारापन&#8217; का आधिकारिक सीक्वल है।  लगभग 45 करोड़ रुपए के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने मात्र 8 दिनों में अपनी लागत से कई गुना अधिक कमाई कर बॉक्स ऑफिस पर &#8216;ब्लॉकबस्टर&#8217; का टैग हासिल कर लिया है।</h5>
<h2>बॉक्स ऑफिस धमाका: &#8216;आवारापन 2&#8217; ने 8वें दिन छुआ 170 करोड़ का जादुई आंकड़ा</h2>
<h5>बॉलीवुड के &#8216;सीरियल किसर&#8217; और दमदार अभिनेता इमरान हाशमी का बॉक्स ऑफिस पर एक बार फिर से सिक्का जम गया है।  उनके करियर की सबसे बहुप्रतीक्षित सीक्वल फिल्मों में से एक, &#8216;आवारापन 2&#8217; घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों से मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स के बीच, फिल्म ने अपनी रिलीज के आठवें दिन (दूसरे शुक्रवार) दुनिया भर में 169.17 करोड़ रुपए की ग्रॉस कमाई का मील का पत्थर पार कर लिया है, जो 170 करोड़ रुपए के बिल्कुल करीब है। विशेष बात यह है कि इस फिल्म ने न केवल इमरान हाशमी के करियर को एक नई ऊंचाई दी है, बल्कि यह अभिनेता के पूरे सिनेमैटिक सफर की पहली सोलो 100 करोड़ क्लब (नेट) में शामिल होने वाली फिल्म बन गई है। उन्नीस साल पहले, यानी 2007 में आई मूल फिल्म &#8216;आवारापन&#8217; भले ही बॉक्स ऑफिस पर उस वक्त कमाल न कर सकी हो, लेकिन समय के साथ दर्शकों के बीच उसका कल्ट स्टेटस बन गया था। अब इसके सीक्वल ने थिएटर्स में आकर इतिहास रच दिया है।</h5>
<h2>8वें दिन की कमाई का पूरा गणित (बॉक्स ऑफिस ब्रेकअप)</h2>
<h5>फिल्म ट्रेड एनालिटिक्स वेबसाइट &#8216;सैकनिल्क&#8217; (Sacnilk) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, &#8216;आवारापन 2&#8217; ने अपने दूसरे शुक्रवार (8वें दिन) को भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 5.50 करोड़ रुपए का शुद्ध (Net) कलेक्शन किया है। कामकाजी दिन होने के बावजूद फिल्म की पकड़ मजबूत रही और इसने अपने सातवें दिन (गुरुवार) के मुकाबले महज 8.3% की सामान्य गिरावट दर्ज की। देशभर में यह फिल्म दूसरे हफ्ते में भी 9,858 शोज के साथ मजबूती से टिकी हुई है।</h5>
<h5>भारत में कुल नेट कलेक्शन: ₹119.00 करोड़</h5>
<h5>भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन: ₹141.87 करोड़</h5>
<h5>ओवरसीज (विदेशी बाजार) ग्रॉस कलेक्शन: ₹27.30 करोड़</h5>
<h5>कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन: ₹169.17 करोड़</h5>
<h5>फिल्म ने विदेशी बाजारों में भी अपनी धाक जमाई है, जहां केवल 8वें दिन फिल्म ने 1 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ग्रॉस बिजनेस किया।  खाड़ी देशों (यूएई), नॉर्थ अमेरिका और ब्रिटेन में इमरान हाशमी के फैंस इस एक्शन-इमोशनल ड्रामा को देखने भारी तादाद में पहुंच रहे हैं।</h5>
<h2>पहले हफ्ते का सफर: ओपनिंग डे से वीक डेज तक का जलवा&#8217;</h2>
<h5>आवारापन 2&#8242; की बॉक्स ऑफिस यात्रा पहले दिन से ही ऐतिहासिक रही है। स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले, शुक्रवार 14 अगस्त को रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले ही दिन 22 करोड़ रुपए की बंपर ओपनिंग लेकर ट्रेड एक्सपर्ट्स को चौंका दिया था। इसके बाद वीकेंड पर फिल्म की कमाई में भारी उछाल देखा गया।</h5>
<h5>पहला दिन (शुक्रवार): ₹22.00 करोड़</h5>
<h5>दूसरा दिन (शनिवार): ₹33.75 करोड़</h5>
<h5>तीसरा दिन (रविवार): ₹26.00 करोड़</h5>
<h5>पहला वीकेंड कुल: ₹81.75 करोड़</h5>
<h5>सोमवार को &#8216;मंडे टेस्ट&#8217; पास करते हुए फिल्म ने ₹9.25 करोड़ बटोरे। कामकाजी दिनों (मंगलवार से गुरुवार) में भी फिल्म लगातार 6 करोड़ से अधिक का दैनिक नेट कलेक्शन करती रही, जिसके चलते फिल्म ने अपने पहले विस्तारित हफ्ते (7 दिनों) में भारत में 113.50 करोड़ रुपए नेट का मजबूत कलेक्शन दर्ज कर लिया था।</h5>
<h2>बॉक्स ऑफिस क्लैश: सनी देओल की &#8216;बंटवारा 1947&#8217; को पछाड़ा</h2>
<h5>इस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर साल का सबसे बड़ा मुकाबला देखा गया था, जब इमरान हाशमी की &#8216;आवारापन 2&#8217; और बॉलीवुड के एक्शन किंग सनी देओल की भारी-भरकम बजट वाली फिल्म &#8216;बंटवारा 1947&#8217; एक साथ थिएटर्स में उतरी थीं। जहां &#8216;बंटवारा 1947&#8217; को लगभग 150 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से बनाया गया था, वहीं &#8216;आवारापन 2&#8217; का बजट केवल 45 करोड़ रुपए था। लेकिन आंकड़ों की बाजी पूरी तरह पलट गई। सनी देओल की फिल्म दर्शकों को लुभाने में नाकाम रही और इसकी रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई है। &#8216;बंटवारा 1947&#8217; ने अपने 8वें दिन घरेलू बाजार में महज 75 लाख रुपए कमाए, और इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अभी तक 50 करोड़ रुपए के आंकड़े को भी नहीं छू पाया है (लगभग 49.02 करोड़ रुपए)। इस लिहाज से इमरान हाशमी ने इस क्लैश में एकतरफा जीत हासिल की है।</h5>
<h2>कैसी है फिल्म की कहानी? (नोस्टाल्जिया और नए एक्शन का तड़का)</h2>
<h5>निर्देशक नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी &#8216;आवारापन 2&#8217; की कहानी दर्शकों के दिलों को छूने में कामयाब रही है। फिल्म की पटकथा को बिलाल सिद्दीकी, नितिन कक्कड़ और विशेष भट्ट ने मिलकर लिखा है।</h5>
<h5>कथानक और मुख्य किरदार:फिल्म की कहानी मूल फिल्म के करीब दो दशक बाद शुरू होती है। इमरान हाशमी एक बार फिर अपने आइकोनिक किरदार &#8216;शिवम पंडित&#8217; के रूप में पर्दे पर लौटे हैं। कहानी में दिखाया गया है कि शिवम दो दशक पहले अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले में किसी तरह बच गया था। अब वह अपराध की दुनिया को छोड़ चुका है, लेकिन नियति उसे वापस एक खतरनाक मिशन पर ले आती है। शिवम को पता चलता है कि बैंकॉक में एक बच्ची, जिसे उसने कभी गोद लेने के लिए दिया था, अचानक लापता हो गई है। अपनी उस पुरानी जिम्मेदारी और प्रायश्चित के लिए शिवम बैंकॉक जाता है। वहां उसका सामना एक अंतरराष्ट्रीय चाइल्ड ट्रैफिकिंग (बाल तस्करी) रैकेट से होता है। इसके बाद शुरू होता है हाई-स्टेक्स एक्शन, भावुक कर देने वाले मोमेंट्स और शिवम का अपने अतीत से सीधा मुकाबला। फिल्म में इमरान हाशमी के साथ मुख्य भूमिका में दिशा पाटनी और दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी भी हैं, जिन्होंने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। फिल्म का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार मिथुन, जीत गांगुली और अमाल मलिक ने तैयार किया है, जिसके गाने जैसे &#8216;वे जुनून&#8217; और &#8216;पिया घर आया&#8217; पहले से ही चार्टबस्टर बने हुए हैं।</h5>
<h2>ट्रेड एक्सपर्ट्स और क्रिटिक्स की राय</h2>
<h5>मशहूर ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने फिल्म को 4.0/5 स्टार देते हुए लिखा, &#8220;इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित के रूप में लौटे हैं और क्या शानदार वापसी की है! वह &#8216;आवारापन 2&#8217; की आत्मा हैं। फिल्म में जबरदस्त नोस्टाल्जिया वैल्यू के साथ-साथ मास-अपीलिंग सीन्स की भरमार है। यह बॉक्स ऑफिस पर एक सुनिश्चित सफलता है।&#8221;वहीं अन्य समीक्षकों का मानना है कि विशेष फिल्म्स (मुकेश भट्ट और विशेष भट्ट) का सीक्वल बनाने का ट्रैक रिकॉर्ड हमेशा से बेहतरीन रहा है (जैसे मर्डर 2, राज 3)। हालांकि कुछ क्रिटिक्स ने इसकी स्क्रिप्ट को थोड़ा प्रेडिक्टेबल बताया, लेकिन इमरान हाशमी के इंटेंस लुक, उनके दर्द से भरे अभिनय और बेहतरीन बैकग्राउंड स्कोर ने कमजोर कड़ियों को पूरी तरह से छुपा दिया है।</h5>
<h2>आगे की राह: क्या 200 करोड़ के क्लब में होगी एंट्री?</h2>
<h5>मात्र 45 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म ने डिस्ट्रीब्यूटर्स और प्रोड्यूसर्स को 175% से ज्यादा का मुनाफा (ROI) कमा कर दे दिया है, जिससे इसका &#8216;सुपरहिट&#8217; से &#8216;ब्लॉकबस्टर&#8217; बनना तय हो चुका है। वर्तमान में &#8216;आवारापन 2&#8217; साल 2026 की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन चुकी है। ट्रेड पंडितों का अनुमान है कि दूसरे वीकेंड (शनिवार और रविवार) को फिल्म की कमाई में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। यदि यह रफ्तार बरकरार रहती है, तो फिल्म बहुत जल्द ही दुनियाभर में 200 करोड़ रुपए के महा-आंकड़े को पार कर लेगी। हालांकि, आने वाले सप्ताह में (26 अगस्त को) साउथ सुपरस्टार यश और कियारा आडवाणी की फिल्म &#8216;टॉक्सिक&#8217; रिलीज होने वाली है, जिससे थिएटर्स में &#8216;आवारापन 2&#8217; की स्क्रीन्स पर थोड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन तब तक इमरान हाशमी बॉक्स ऑफिस पर अपना स्वर्णिम इतिहास लिख चुके होंगे।</h5>
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		<title>सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताने पर भड़के सिख, राहुल गांधी के आवास का घेराव</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/sikh-leaders-protest-against-rahul-gandhis-over-sajjan-kumar-remark-demand-apology-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 10:09:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[1984 anti-Sikh riots]]></category>
		<category><![CDATA[Congress Leader Rahul Gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Sajjan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Sikh Gurudwara Committee]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सिख नेताओं का राहुल गांधी के घर के बाहर प्रदर्शन: सज्जन कुमार को हीरो बताने पर कांग्रेस से की माफी की मांग नई दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास के बाहर शनिवार (22 अगस्त 2026) को सिख संगठनों और 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>सिख नेताओं का राहुल गांधी के घर के बाहर प्रदर्शन: सज्जन कुमार को हीरो बताने पर कांग्रेस से की माफी की मांग</h2>
<h5>नई दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास के बाहर शनिवार (22 अगस्त 2026) को सिख संगठनों और 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 1984 के सिख कत्लेआम के मुख्य दोषियों में से एक और कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा उन्हें &#8216;हीरो&#8217;, &#8216;रोल मॉडल&#8217; और &#8216;अपूरणीय क्षति&#8217; बताए जाने के खिलाफ किया गया। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में सिखों ने कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी से इस अपमानजनक कृत्य के लिए बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दंगों के दोषी को महिमामंडित करके कांग्रेस ने सिख समुदाय के 42 साल पुराने जख्मों पर फिर से नमक छिड़क दिया है।</h5>
<h2>कांग्रेसी नेताओं की &#8216;श्रद्धांजलि&#8217; से भड़का सिख समुदाय; DSGMC ने पूछा- क्या कातिल ही कांग्रेस के रोल मॉडल हैं?</h2>
<h5> शनिवार दोपहर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास के बाहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के बैनर तले सैकड़ों सिख प्रदर्शनकारी, जिनमें 1984 के दंगा पीड़ित परिवारों की बुजुर्ग महिलाएं और युवा शामिल थे, तख्तियां और बैनर लेकर राहुल गांधी के घर की तरफ बढ़े। प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने राहुल गांधी के आवास के चारों ओर भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारी लगातार कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और सुरक्षा घेरे को तोड़ने का प्रयास कर रहे थे।</h5>
<h2>विवाद की पृष्ठभूमि: सज्जन कुमार का निधन और कांग्रेस के बयान</h2>
<h5>इस भारी विवाद की शुरुआत 20 अगस्त 2026 (गुरुवार) को हुई, जब 1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे 80 वर्षीय पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार की तिहाड़ जेल से सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद मौत हो गई। सज्जन कुमार की मौत के बाद कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं, जिनमें कथित तौर पर सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और उदित राज जैसे नाम शामिल हैं, ने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए सज्जन कुमार के निधन को पार्टी के लिए &#8216;अपूरणीय क्षति&#8217; बताया और उन्हें एक बड़ा नेता व मार्गदर्शक करार दिया। कांग्रेस नेताओं के इसी रवैये ने सिख समुदाय के भीतर गुस्से की आग को भड़का दिया।</h5>
<h2>&#8217;42 साल पुराने जख्म फिर हुए हरे&#8217;: हरमीत सिंह कलका</h2>
<h5>प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कलका और महासचिव जगदीप सिंह कहलोन ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को सीधे आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी के आवास के बाहर मीडिया से बात करते हुए हरमीत सिंह कलका ने कहा:&#8221;सज्जन कुमार कोई साधारण नेता नहीं था, वह देश की अदालतों द्वारा प्रमाणित सिखों का हत्यारा था। उसकी मौत के बाद कांग्रेस नेताओं ने जिस तरह के बयान दिए और उन्हें अपना हीरो व रोल मॉडल बताया, वह बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। राहुल गांधी को आज देश के सामने और सिखों के सामने यह साफ करना होगा कि क्या सिखों का कातिल सज्जन कुमार उनका और उनकी पार्टी का असली हीरो है? कांग्रेस नेताओं के इस घिनौने कृत्य ने 42 साल बाद हमारे परिवारों के जख्मों को फिर से कुरेद दिया है।&#8221; जगदीप सिंह कहलोन ने मांग की कि राहुल गांधी स्वयं सामने आएं और दीपेंद्र हुड्डा सहित उन सभी नेताओं के बयानों पर जवाबदेही तय करते हुए पूरे सिख समाज से लिखित में माफी मांगें।</h5>
<h2>पीड़ित परिवारों की दर्दभरी दास्तां और रोष</h2>
<h5>प्रदर्शन में शामिल 1984 दंगों की एक बुजुर्ग पीड़ित महिला ने रोते हुए कहा, &#8220;हमने अपनी आंखों के सामने अपने पिताओं, भाइयों और पतियों को जलते हुए देखा है। सज्जन कुमार जैसे लोग उस भीड़ को उकसा रहे थे। कोर्ट ने उसे सजा दी, तब जाकर हमारी आत्मा को थोड़ी शांति मिली थी। लेकिन आज कांग्रेस के नेता उसे अपना आइकॉन बता रहे हैं। यह हमारे आंसुओं और हमारी त्रासदी का क्रूर मजाक है। जब तक राहुल गांधी माफी नहीं मांगेंगे, हमारा यह विरोध थमेगा नहीं।&#8221;</h5>
<h2>राजनीतिक घमासान: भाजपा का &#8216;मोहब्बत की दुकान&#8217; पर तीखा प्रहार</h2>
<h5>इस मुद्दे को लेकर देश का सियासी पारा भी पूरी तरह चढ़ चुका है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली सरकार के मंत्री और सिख नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक वीडियो जारी कर कहा कि कांग्रेस का असली चरित्र एक बार फिर बेनकाब हो गया है। सिरसा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा से सिख-विरोधी रही है और सज्जन कुमार जैसे अपराधियों को पार्टी ने हमेशा संरक्षण दिया। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर राहुल गांधी के चुनावी नारे पर तंज कसा:&#8221;1984 के सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार को कांग्रेस अपना &#8216;रोल मॉडल&#8217; बता रही है! जो व्यक्ति हजारों बेकसूर सिखों के कत्लेआम का जिम्मेदार था, कांग्रेस उसका महिमामंडन कैसे कर सकती है? यह राहुल गांधी की तथाकथित &#8216;मोहब्बत की दुकान&#8217; की असली सच्चाई और सोच है। यह साबित करता है कि कांग्रेस के मन में सिख समुदाय के प्रति कितनी नफरत भरी है। कांग्रेस को इस घोर अपमान के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए।&#8221;</h5>
<h2>इतिहास के पन्नों में सज्जन कुमार का काला अध्याय</h2>
<h5>सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर जितना तेजी से ऊपर चढ़ा था, उसका अंत उतना ही अंधकारमय रहा। 1977 में दिल्ली के पार्षद से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले सज्जन कुमार तीन बार लोकसभा सांसद रहे और दिल्ली में कांग्रेस का एक बड़ा चेहरा माने जाते थे। परंतु, 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में भड़के सिख विरोधी दंगों में उनकी भूमिका ने उन्हें इतिहास का खलनायक बना दिया।</h5>
<h2>दिसंबर 2018 की सजा</h2>
<h5>दिल्ली हाईकोर्ट ने नवंबर 1984 में दिल्ली के राज नगर पार्ट-1 (पालम इलाका) में पांच सिखों की बेरहमी से हत्या करने और एक गुरुद्वारे को आग लगाने के मामले में सज्जन कुमार को आपराधिक साजिश और दंगों को भड़काने का दोषी पाया। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें ताउम्र कैद (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी और टिप्पणी की थी कि यह &#8220;मानवता के खिलाफ अपराध&#8221; था। इसके बाद सज्जन कुमार को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।</h5>
<h2>फरवरी 2025 की दूसरी उम्रकैद</h2>
<h5>दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी 2025 में एक अन्य मामले (सरस्वती विहार कांड) में सज्जन कुमार को एक और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में एक सिख पिता-पुत्र (जसवंत सिंह और तरुंदीप सिंह) को भीड़ ने पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था और अदालत ने माना था कि सज्जन कुमार ने उस हिंसक भीड़ का नेतृत्व किया था।</h5>
<h2>कांग्रेस बैकफुट पर, सफाई की कोशिशें जारी</h2>
<h5>सिख समुदाय के इस भारी आक्रोश और चारों तरफ से घिरने के बाद कांग्रेस पार्टी रक्षात्मक मुद्रा (बैकफुट) पर नजर आ रही है। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ताओं की ओर से अभी तक इस विरोध प्रदर्शन पर कोई औपचारिक या सीधा बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे व्यक्तिगत श्रद्धांजलि बताते हुए डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है। सिखों की नाराजगी को देखते हुए दिल्ली के स्थानीय कांग्रेस नेता इस पूरे विवाद से दूरी बनाते दिख रहे हैं।</h5>
<h2>जवाबदेही की मांग पर अड़ा सिख समाज</h2>
<h5>राहुल गांधी के घर के बाहर हुआ यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों के न्याय की लड़ाई का हिस्सा है जिन्होंने दशकों तक अदालतों के चक्कर काटे हैं। सिख नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे केवल बयानों से संतुष्ट नहीं होंगे। जब तक कांग्रेस के शीर्ष नेता और खुद राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से आकर इन बयानों की निंदा नहीं करते और सिख समाज से माफी नहीं मांगते, तब तक उनका देशव्यापी प्रदर्शन और कड़ा विरोध जारी रहेगा। दिल्ली पुलिस ने एहतियात के तौर पर कांग्रेस मुख्यालय और 10 जनपथ (राहुल गांधी के आवास) के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को अगले कुछ दिनों तक कड़ा रखने का फैसला किया है।</h5>
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			</item>
		<item>
		<title>केंद्र ने 4 साल से छोटे बच्चों के लिए सर्दी-जुकाम की कुछ दवाओं पर लगाया कड़ा प्रतिबंध</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/centre-bans-cold-cough-drug-combinations-for-children-under-4-years-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 09:42:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Children Health]]></category>
		<category><![CDATA[cough syrup]]></category>
		<category><![CDATA[Food And Drug Administration FDA]]></category>
		<category><![CDATA[Medicine Ban]]></category>
		<category><![CDATA[Union Health Ministry]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>केंद्र का सर्दी-जुकाम की दवा पर बड़ा आदेश: 4 साल से छोटे बच्चों के लिए रोक केंद्र सरकार ने 4 साल से छोटे बच्चों के लिए सर्दी-जुकाम की दवाओं (FDC) के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब क्लोरफेनिरामाइन मैलेट (Chlorpheniramine [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2>केंद्र का सर्दी-जुकाम की दवा पर बड़ा आदेश: 4 साल से छोटे बच्चों के लिए रोक</h2>
<h5>केंद्र सरकार ने 4 साल से छोटे बच्चों के लिए <a href="https://thecsrjournal.in/fda-maharashtra-stop-use-notice-coldrif-syrup-toxic-adulteration-alert-hindi">सर्दी-जुकाम की दवाओं (FDC) के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध</a> लगा दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब क्लोरफेनिरामाइन मैलेट (Chlorpheniramine Maleate) और फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड (Phenylephrine Hydrochloride) के मिश्रण (फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन &#8211; FDC) वाली दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फॉर्मूलेशन नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से असुरक्षित साबित हो सकता है। दवा निर्माताओं को आदेश दिया गया है कि वे इन दवाओं के रैपर, लेबल, पैकेज के अंदर मिलने वाली पर्ची (पैकेज इंसर्ट) और विज्ञापनों पर बड़े अक्षरों में यह वैधानिक चेतावनी अवश्य लिखें: &#8220;इस फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल 4 साल से कम उम्र के बच्चों पर नहीं किया जाना चाहिए&#8221;।</h5>
<h2>मासूमों की सुरक्षा सर्वोपरि: केंद्र ने बच्चों की सर्दी-जुकाम दवाओं पर लगाया कड़ा प्रतिबंध</h2>
<h5>देश में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश के शीर्ष दवा नियामक सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की सिफारिशों पर अमल करते हुए 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सामान्य सर्दी-जुकाम और खांसी के इलाज में धड़ल्ले से इस्तेमाल होने वाले दो रसायनों के मिश्रण (फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन) को पूरी तरह प्रतिबंधित व विनियमित कर दिया है। यह प्रतिबंध मुख्य रूप से &#8216;क्लोरफेनिरामाइन मैलेट&#8217; और &#8216;फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड&#8217; के संयोजन (FDC) पर लगाया गया है। ये दोनों साल्ट बाजार में बिकने वाले बच्चों के कई लोकप्रिय एंटी-कोल्ड सीरप, ड्रॉप्स और सस्पेंशन का मुख्य हिस्सा हुआ करते थे। सरकार की यह अधिसूचना ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत जनहित में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।</h5>
<h2>क्या हैं ये दोनों साल्ट और क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?</h2>
<h5>चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, क्लोरफेनिरामाइन मैलेट एक एंटीहिस्टामाइन दवा है, जिसका उपयोग एलर्जी के लक्षणों जैसे बहती नाक, लगातार छींक आना, और आंखों से पानी आने को रोकने के लिए किया जाता है। वहीं, फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड एक डीकन्जेस्टिव (Decongestant) दवा है, जो बंद नाक और श्वसन नली की सूजन को कम करके सांस लेने में राहत देती है। इन दोनों दवाओं के मिश्रण (FDC) का धड़ल्ले से ओवर-द-काउंटर (बिना डॉक्टर की पर्ची के) बच्चों को देने का चलन देश में वर्षों से रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति और औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) ने गहन समीक्षा के बाद पाया कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों के अपरिपक्व अंगों पर इन रसायनों का घातक और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। छोटे बच्चों के मामले में इन दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता को लेकर कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले थे, जिसके कारण इन्हें प्रतिबंधित करना अनिवार्य समझा गया।</h5>
<h2>लक्षण और दुष्प्रभाव: क्यों खतरनाक है यह कॉम्बिनेशन?</h2>
<h5>विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, सर्दी-जुकाम की इन दवाओं के अत्यधिक या बिना सोचे-समझे किए गए इस्तेमाल से बच्चों में कई तरह के गंभीर दुष्प्रभाव देखे जा रहे थे-</h5>
<h5>हृदय गति बढ़ना: फिनाइलेफ्राइन के प्रभाव के कारण छोटे बच्चों की धड़कनें असामान्य रूप से तेज हो जाती हैं।</h5>
<h5>दौरे पड़ना (Convulsions): कुछ मामलों में बच्चों के न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर असर पड़ने से उन्हें दौरे पड़ने की शिकायतें सामने आईं।</h5>
<h5>गंभीर सुस्ती या अनिद्रा: इन रसायनों के असंतुलन से बच्चा या तो अत्यधिक सुस्ती की स्थिति में चला जाता है या उसकी नींद पूरी तरह गायब हो जाती है।</h5>
<h5>अंगों की विफलता: अत्यधिक ओवरडोज के मामलों में बच्चों के लीवर और किडनी पर जानलेवा दबाव देखा गया है।</h5>
<h2>विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चेतावनी और वैश्विक संदर्भ</h2>
<h5>भारत सरकार का यह फैसला विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा समय-समय पर जारी किए गए वैश्विक सुरक्षा अलर्ट्स के अनुरूप है। पिछले कुछ वर्षों में गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और खुद भारत के कुछ राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान) में दूषित कफ सिरप और एंटी-कोल्ड दवाओं के सेवन से कई मासूम बच्चों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। वैश्विक स्तर पर, अमेरिका की एफडीए (FDA) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं भी बहुत पहले ही छोटे बच्चों के लिए इस प्रकार की ओटीसी (OTC) सर्दी की दवाओं के इस्तेमाल को असुरक्षित घोषित कर चुकी हैं। इन सभी घटनाओं ने भारत के दवा नियामक को पुरानी और असुरक्षित फॉर्मूलेशन की समीक्षा करने और कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।</h5>
<h2>बाजार के लोकप्रिय ब्रांड्स पर पड़ेगा सीधा असर</h2>
<h5>बाजार में मिलने वाले बच्चों के कई बड़े और लोकप्रिय कफ व कोल्ड सिरप इस आदेश के दायरे में आ रहे हैं, जैसे-</h5>
<h5>टी-मिनिक ड्रॉप्स (T-Minic Oral Drops)</h5>
<h5>एस्कोरिल फ्लू ड्रॉप्स (Ascoril Flu Drops)</h5>
<h5>सॉल्विन कोल्ड सिरप (Solvin Cold Syrup)</h5>
<h5>एलेक्स सिरप (Alex)</h5>
<h5>मैक्स्ट्रा (Maxtra)</h5>
<h5>अब इन सभी दवाओं के निर्माताओं को अपनी पैकेजिंग में बड़े बदलाव करने होंगे और यह सुनिश्चित करना होगा कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इसकी बिक्री और वितरण पूरी तरह थमे।</h5>
<h2>नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई</h2>
<h5>ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने सभी राज्यों के ड्रग इंस्पेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे बाजारों, फार्मेसियों और अस्पतालों में औचक निरीक्षण करें। यदि कोई भी निर्माता या केमिस्ट इस नए आदेश के लागू होने के बाद बिना वैधानिक चेतावनी वाली प्रतिबंधित दवाओं का स्टॉक रखता है या उसे 4 साल से छोटे बच्चों के माता-पिता को बेचता पाया जाता है, तो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के कड़े प्रावधानों के तहत उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और जेल की सजा भी हो सकती है। इससे पहले जून में भी सरकार ने मानव उपयोग के लिए अनुचित पाई गई 16 अन्य FDC दवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, जिससे साफ है कि सरकार नकली व असुरक्षित दवाओं के खिलाफ बड़े अभियान पर है।</h5>
<h2>पेरेंट्स और डॉक्टरों के लिए जरूरी सलाह: अब क्या करें?</h2>
<h5>वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक होने की आवश्यकता है।</h5>
<h5>डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न दें: केमिस्ट की दुकान से सीधे जाकर कोई भी कफ सिरप या सर्दी की दवा खरीदकर बच्चे को पिलाने की आदत को तुरंत छोड़ें।</h5>
<h5>सुरक्षित विकल्प अपनाएं: सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए सर्दी-जुकाम के अन्य सुरक्षित विकल्प और दवाएं मौजूद हैं। डॉक्टर बच्चे के वजन और सटीक उम्र के हिसाब से दवाएं निर्धारित करेंगे।</h5>
<h5>घरेलू और प्राकृतिक उपचार: हल्के सर्दी-जुकाम में 1 साल से बड़े बच्चों को गुनगुना पानी, सूप, या शहद देने से खांसी और गले को बहुत आराम मिलता है। बंद नाक के लिए सलाइन नेजल ड्रॉप्स (नमक के पानी की बूंदें) का इस्तेमाल डॉक्टरों द्वारा सबसे सुरक्षित माना जाता है।</h5>
<h2>पीडियाट्रिक ड्रग सेफ्टी में अहम कदम</h2>
<h5>केंद्र सरकार का यह फैसला देश में पीडियाट्रिक ड्रग सेफ्टी (बच्चों की दवा सुरक्षा) के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। बच्चों की जान जोखिम में डालकर मुनाफा कमाने वाली कंपनियों और बिना पर्ची दवा बेचने वाले केमिस्टों पर इस आदेश से नकेल कसी जा सकेगी।</h5>
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			</item>
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		<title>चीनी की मिठास में घुली नीतिगत कड़वाहट: खड़गे का मोदी सरकार पर तीखा हमला</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/kharge-slams-modi-govt-over-rising-sugar-prices-questions-flawed-ethanol-policy-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 08:05:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Ethanol Petrol]]></category>
		<category><![CDATA[inflation]]></category>
		<category><![CDATA[Mallikarjun Kharge]]></category>
		<category><![CDATA[Modi government]]></category>
		<category><![CDATA[Sugar Prices]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://thecsrjournal.in/?p=278900</guid>

					<description><![CDATA[<p>चीनी की मिठास में छिपी सरकारी नीतियों की कड़वाहट: खड़गे का सरकार पर हमला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की बढ़ती कीमतों और देश में घटते स्टॉक को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है और पूछा है कि यह कैसा ‘आत्मनिर्भर भारत’ है। त्योहारों के सीजन से ठीक पहले देश [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/kharge-slams-modi-govt-over-rising-sugar-prices-questions-flawed-ethanol-policy-hindi">चीनी की मिठास में घुली नीतिगत कड़वाहट: खड़गे का मोदी सरकार पर तीखा हमला</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>चीनी की मिठास में छिपी सरकारी नीतियों की कड़वाहट: खड़गे का सरकार पर हमला</h2>
<h5><a href="https://thecsrjournal.in/mallikarjun-kharge-big-statement-amit-shah-bjp-vande-mataram-controversy-hindi">कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे</a> ने चीनी की बढ़ती कीमतों और देश में घटते स्टॉक को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है और पूछा है कि यह कैसा ‘आत्मनिर्भर भारत’ है। त्योहारों के सीजन से ठीक पहले देश के फुटकर बाजारों में चीनी के दाम तेजी से उछले हैं, जिसने विपक्ष को सरकार की आर्थिक और कृषि नीतियों के खिलाफ एक बड़ा हथियार दे दिया है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर सरकार के सामने तीन सीधे सवाल दागे और देश की एथेनॉल नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। दूसरी तरफ, उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए बढ़ती कीमतों के लिए घरेलू उत्पादन में कमी और मौसम की मार को जिम्मेदार ठहराया है।</h5>
<h2>त्योहारों से पहले आसमान छूते दामों पर कांग्रेस का चौतरफा वार</h2>
<h5>देश में त्योहारों का सीजन शुरू होते ही आम जनता की रसोई पर महंगाई की एक और कड़वी मार पड़ी है। देश के कई हिस्सों में <a href="https://thecsrjournal.in/chini-ke-daam-badhe-sugar-price-hike-festival-season-20-rupees-increase-65-per-kg-hindi">चीनी के खुदरा दाम तेजी से बढ़ रहे</a> हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। खड़गे ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गलत नीतियों के कारण आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश भारत खुद चीनी के अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि &#8220;यह कैसा आत्मनिर्भर भारत है&#8221; जहाँ देश की अपनी जनता को मीठा खाने के लिए विदेशों से शुल्क-मुक्त चीनी आयात करनी पड़ रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे के इन तीखे सवालों के बाद देश की सियासत में &#8216;चीनी और एथेनॉल&#8217; को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस जहां इसे सरकारी कुप्रबंधन और <a href="https://thecsrjournal.in/ethanol-making-sugar-more-expensive-government-lists-five-reasons-hindi">एथेनॉल सम्मिश्रण (E20) नीति की विफलता</a> बता रही है, वहीं केंद्र सरकार और उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, कम उत्पादन और जमाखोरी को मुख्य कारण बताया है।</h5>
<h2>खड़गे के सरकार से तीन सीधे और कड़े सवाल</h2>
<h5>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल से सरकार को घेरते हुए तीन प्रमुख सवाल देश के सामने रखे।</h5>
<h2>स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों?</h2>
<h5>खड़गे ने पहला सवाल दागते हुए कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और निर्यातकों में से एक रहा है। इसके बावजूद, आज देश में चीनी का घरेलू स्टॉक पिछले 9 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया है? सरकार को यह स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।</h5>
<h2>निर्यात रोकने और आयात करने की नौबत क्यों आई?</h2>
<h5>उन्होंने पूछा कि आखिर देश में ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि सरकार को पहले तो चीनी के निर्यात पर पूरी तरह पाबंदी लगानी पड़ी और अब घरेलू कमी को पूरा करने के लिए 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री (शुल्क-मुक्त) आयात करने का फैसला लेना पड़ रहा है?</h5>
<h2>तीन महीने में 40% महंगी हुई चीनी का जिम्मेदार कौन?</h2>
<h5>तीसरे सवाल में खड़गे ने सीधे जनता की जेब पर पड़े असर का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों के भीतर देश में चीनी की कीमतों में करीब 40% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। त्योहारों के ठीक पहले भारतीय परिवारों पर लादे गए इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ का जिम्मेदार कौन है?</h5>
<h2>मल्लिकार्जुन खड़गे का मुख्य बयान</h2>
<h5>&#8220;त्योहारों से पहले चीनी की मिठास में मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट घुल गई है&#8230; एक तरफ देश में चीनी की भारी किल्लत है और सरकार विदेशी आयात पर निर्भर हो रही है, तो दूसरी तरफ गन्ने और अनाज को E20 नीति के तहत एथेनॉल बनाने में लगातार झोंका जा रहा है। सरकार इस जनविरोधी नीति की समीक्षा क्यों नहीं कर रही?&#8221;</h5>
<h2>बाजार का हाल: 96 घंटों में बेकाबू हुईं कीमतें</h2>
<h5>देश के खुदरा बाजारों से आ रही रिपोर्ट कांग्रेस के दावों को बल दे रही हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-NCR के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल देखा गया है।</h5>
<h5>दामों में अचानक उछाल: कई स्थानीय बाजारों में फुटकर भाव जो कुछ दिन पहले तक ₹44 से ₹48 प्रति किलो के बीच थे, वे अब बढ़कर ₹55 से ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।</h5>
<h5>त्योहारों पर सीधा असर: अगस्त से नवंबर के बीच रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहार आते हैं। हलवाइयों, बेकरी उद्योग और आम परिवारों के लिए चीनी सबसे आवश्यक सामग्री है। दामों में इस तेजी से त्योहारी मिठाइयों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।</h5>
<h2>क्या है विवाद की जड़? एथेनॉल नीति (E20) पर रार</h2>
<h5>विपक्ष के हमले का सबसे बड़ा केंद्र सरकार की E20 (पेट्रोल में 20% एथेनॉल सम्मिश्रण) नीति है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार पेट्रोल आयात बिल को कम करने की अपनी &#8216;जिद&#8217; में देश की खाद्य सुरक्षा को दांव पर लगा रही है। विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं का मानना है कि गन्ने के रस और शीरे (Molasses) का एक बहुत बड़ा हिस्सा चीनी उत्पादन के बजाय एथेनॉल बनाने वाली भट्टियों (Distilleries) में डायवर्ट कर दिया गया। इसके कारण मिलों में चीनी का वास्तविक उत्पादन उम्मीद से काफी कम हुआ, जिसका खामियाजा अब देश की आम जनता भुगत रही है। खड़गे ने मांग की है कि जब तक घरेलू बाजार सामान्य नहीं होता, तब तक एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल की नीति को तुरंत रोका जाए या इसकी गहन समीक्षा की जाए।</h5>
<h2>सरकार और उपभोक्ता मंत्रालय का पलटवार: एथेनॉल से इनकार</h2>
<h5>मल्लिकार्जुन खड़गे के हमले के बाद केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तुरंत बचाव में उतरा। मंत्रालय ने विपक्ष के इन आरोपों को पूरी तरह भ्रामक और राजनीति से प्रेरित करार दिया है कि एथेनॉल उत्पादन की वजह से चीनी महंगी हुई है।</h5>
<h2>कीमत मे गिरावट के मुख्य कारण</h2>
<h5>उत्पादन में भारी गिरावट: चालू सीजन में देश के भीतर चीनी का कुल उत्पादन 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है। जबकि सीजन की शुरुआत में इसके 343 LMT रहने का अनुमान लगाया गया था। यानी उत्पादन में करीब 37 लाख मीट्रिक टन की सीधी कमी आई है।</h5>
<h5>फसलों को प्राकृतिक बीमारी और मौसम की मार: मंत्रालय के अनुसार, इस साल अत्यधिक बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया। इसके साथ ही गन्ने की फसल में &#8216;रेड रॉट&#8217; (Red Rot) और &#8216;टॉप बोरर&#8217; (Top Borer) जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने से गन्ने की रिकवरी और उत्पादन दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।</h5>
<h5>एथेनॉल का बदला हुआ पैटर्न: सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन को 12% (2022-23) से घटाकर लगभग 9% (2025-26) कर दिया गया है। अब देश में बनने वाले कुल एथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई (75%) हिस्सा अनाज, विशेषकर मक्के (Maize) से आ रहा है, न कि गन्ने से। इसलिए चीनी की कमी के लिए एथेनॉल नीति को दोष देना गलत है।</h5>
<h2>वैश्विक संकट और अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी जिम्मेदार</h2>
<h5>भारत के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इस संकट के अंतर्राष्ट्रीय आयामों पर भी प्रकाश डाला है। वैश्विक स्तर पर भी मौसम की प्रतिकूलताओं के कारण चीनी उत्पादन में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।</h5>
<h5>वैश्विक घाटा: वर्ष 2026-27 के दौरान दुनिया भर में चीनी की कुल कमी करीब 33 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने की आशंका है।</h5>
<h5>अंतरराष्ट्रीय दामों में तेजी: इस वैश्विक कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चीनी के दाम महज दो महीनों के भीतर 16% से ज्यादा उछल गए हैं। बीती 30 जून को जो चीनी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 474 डॉलर प्रति टन थी, वह 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन पर पहुंच चुकी है। वैश्विक स्तर पर महंगी चीनी के कारण घरेलू बाजार में भी सट्टेबाजी और कीमतों पर दबाव बढ़ा है।</h5>
<h2>कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार के आपात कदम</h2>
<h5>हालांकि सरकार का दावा है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, फिर भी बढ़ती कीमतों और विपक्षी हमलों के दबाव के बीच केंद्र सरकार ने कुछ सख्त और आपातकालीन कदम उठाए हैं।</h5>
<h5>डीलरों पर स्टॉक लिमिट (30 नवंबर तक): देश भर के चीनी डीलरों के लिए किसी एक स्थान पर अधिकतम 400 टन (4000 क्विंटल) स्टॉक रखने की सीमा तय की गई है। यह नियम 30 नवंबर 2026 तक सख्ती से लागू रहेगा ताकि कृत्रिम कमी न पैदा की जा सके।</h5>
<h5>थोक उपभोक्ताओं के लिए नया 15-दिनी नियम (1 सितंबर से): सरकार ने थोक खरीदारों और बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं (जो प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करते हैं) के लिए होल्डिंग सीमा को 30 दिन से घटाकर केवल 15 दिन कर दिया है। यह नया नियम 1 सितंबर से प्रभावी होगा, जिससे इन बड़े उपभोक्ताओं को बाजार से बार-बार माल उठाना होगा और मिलें स्टॉक डंप नहीं कर पाएंगी।</h5>
<h5>मिलों का भौतिक सत्यापन: कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें देश की विभिन्न चीनी मिलों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर रही हैं।</h5>
<h5>शुल्क-मुक्त आयात पर विचार: कीमतों को पूरी तरह काबू में रखने के लिए सरकार सीमित मात्रा में (लगभग 10 लाख टन) शुल्क-मुक्त चीनी के आयात को हरी झंडी देने की प्रक्रिया पर अंतिम विचार कर रही है ताकि त्योहारों के दौरान बाजार में तरलता बनी रहे।</h5>
<h2>आम चुनाव के बाद महंगाई पर नया रण</h2>
<h5>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीनी का यह मुद्दा केवल रसोई के बजट तक सीमित नहीं रहने वाला है। हालिया चुनावों के बाद विपक्ष इस ताक में था कि वह सरकार को नीतिगत मोर्चे पर घेरे। चीनी एक ऐसी आवश्यक वस्तु है जो सीधे देश के करोड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से जुड़ी है।विपक्ष इस मुद्दे के जरिए ग्रामीण और शहरी दोनों ही मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीण इलाकों में वह किसानों को गन्ने के सही दाम न मिलने और मिलों की मनमानी का मुद्दा उठा रहा है, तो शहरी क्षेत्रों में आम उपभोक्ताओं की बढ़ती लागत को ढाल बना रहा है। दूसरी ओर, सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह एक तरफ कच्चे तेल के आयात को कम करने के अपने दीर्घकालिक &#8216;एथेनॉल ब्लेंडिंग&#8217; के लक्ष्य को भी बनाए रखे और दूसरी तरफ त्योहारों के इस संवेदनशील समय में देश के भीतर आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रण से बाहर न जाने दे।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/kharge-slams-modi-govt-over-rising-sugar-prices-questions-flawed-ethanol-policy-hindi">चीनी की मिठास में घुली नीतिगत कड़वाहट: खड़गे का मोदी सरकार पर तीखा हमला</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>Apple Layoffs: iPhone मेकर ने फिर की छंटनी, 200 लोगों की नौकरी पर खतरा</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/apple-layoffs-iphone-maker-cuts-200-jobs-across-siri-vision-pro-teams-amid-ai-shift-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 07:40:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Corporate News]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[World]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[AI]]></category>
		<category><![CDATA[Apple Layoffs]]></category>
		<category><![CDATA[siri]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Apple में बड़ी छंटनी: विज़न प्रो और Siri टीम से 200 से अधिक इंजीनियरों की छुट्टी, AI पर बढ़ा फोकस ऐपल (Apple Inc.) ने अपनी प्राथमिकताओं को बदलते हुए सिरी (Siri) और विज़न प्रो (Vision Pro) टीमों से 200 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस छंटनी का मुख्य उद्देश्य [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>Apple में बड़ी छंटनी: विज़न प्रो और Siri टीम से 200 से अधिक इंजीनियरों की छुट्टी, AI पर बढ़ा फोकस</h2>
<p><!--TgQPHd|||[]--></p>
<h5>ऐपल (Apple Inc.) ने अपनी प्राथमिकताओं को बदलते हुए सिरी (Siri) और विज़न प्रो (Vision Pro) टीमों से 200 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस छंटनी का मुख्य उद्देश्य कंपनी के संसाधनों को अगली पीढ़ी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आर्किटेक्चर और स्मार्ट ग्लासेस जैसे नए हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स की ओर मोड़ना है। इस पुनर्गठन में विज़न प्रो गेमिंग डिवीजन को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि Siri की टीम को नए जनरेटिव AI मॉडल के अनुरूप ढाला जा रहा है। प्रभावित कर्मचारियों को आंतरिक रूप से नए पदों के लिए आवेदन करने का विकल्प दिया गया है।</h5>
<h2>ऐपल का बड़ा फैसला: विज़न प्रो और सिरी टीम से 200 से अधिक इंजीनियरों की छुट्टी</h2>
<h5>सिलिकॉन वैली की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक, ऐपल इंक (Apple Inc.) ने अपने कॉर्पोरेट ढांचे में एक बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल किया है। दुनिया भर में आईफोन (iPhone) मेकर के नाम से मशहूर टेक दिग्गज ने अपनी दो सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं- वर्चुअल रियलिटी हेडसेट &#8216;विज़न प्रो&#8217; (Vision Pro) और डिजिटल वॉयस असिस्टेंट &#8216;सिरी&#8217; (Siri) की टीमों में काम करने वाले 200 से अधिक उच्च-कुशल कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। टेक उद्योग में इस छंटनी (Layoffs) को ऐपल की बदलती प्राथमिकताओं के एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी अब पुराने हार्डवेयर ढांचे और पारंपरिक सॉफ्टवेयर मॉडल से हटकर पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अगली पीढ़ी के कॉम्पैक्ट वियरेबल्स (जैसे स्मार्ट ग्लासेस) पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। इस रणनीतिक बदलाव का सीधा असर उन इंजीनियरों, डिजाइनरों और डेवलपर्स पर पड़ा है, जो पिछले कई सालों से ऐपल के सबसे महंगे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे।</h5>
<h2>छंटनी का गणित: कहां-कहां चली ऐपल की कैंची?</h2>
<h5>मीडिया रिपोर्ट्स और आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस छंटनी की रूपरेखा को बेहद सटीक तरीके से दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है।</h5>
<h5>विज़न प्रो (Vision Pro Group): इस ऑर्गेनाइजेशन से लगभग 100 से अधिक पदों को समाप्त कर दिया गया है। इनमें सबसे बड़ा झटका विज़न प्रो के लिए समर्पित गेमिंग टीम को लगा है, जिसे कंपनी ने लगभग पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है। इसके अलावा, विज़न ओएस (visionOS) के लिए 3D और इमर्सिव वीडियो कंटेंट तैयार करने वाली यूनिट के आकार में भी भारी कटौती की गई है।</h5>
<h5>सिरी और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग (Siri &amp; Software Teams): सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग विभाग के अंतर्गत आने वाली सिरी और &#8216;इंटेलिजेंट सिस्टम्स एक्सपीरियंस&#8217; (Intelligent Systems Experience) टीम से भी करीब 100 से अधिक कर्मचारियों को हटाया गया है। यह टीम आईफोन और मैक डिवाइसेज पर ऑन-डिवाइस AI फीचर्स को इंटीग्रेट करने के लिए जिम्मेदार थी।</h5>
<h2>विज़न प्रो पर संकट: महंगी लागत और कम मांग बनी काल</h2>
<h5>जब ऐपल ने फरवरी 2024 में अपना मिक्स्ड-रियलिटी हेडसेट &#8216;ऐपल विज़न प्रो&#8217; (Apple Vision Pro) लॉन्च किया था, तो इसे कंप्यूटिंग की दुनिया में एक क्रांतिकारी कदम (&#8216;स्पेशियल कंप्यूटिंग&#8217;) बताया गया था। हालांकि, दो साल बाद भी यह डिवाइस बाजार में वह जादुई पकड़ नहीं बना सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी। विज़न प्रो की नाकामी या धीमी रफ्तार के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण रहे हैं।</h5>
<h5>भारी-भरकम कीमत: वर्तमान में $3,699 (लगभग 3 लाख रुपये से अधिक) की भारी कीमत के कारण यह डिवाइस आम उपभोक्ताओं की पहुंच से कोसों दूर रही।</h5>
<h2>कंटेंट की अत्यधिक लागत</h2>
<h5>विज़न प्रो के लिए 3D &#8216;इमर्सिव वीडियो&#8217; (Immersive Video) बनाना बेहद खर्चीला सौदा साबित हो रहा था। ऐपल के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि इमर्सिव सीरीज के महज एक एपिसोड को फिल्माने में कई मिलियन डॉलर का खर्च आता था, जिसके लिए कई अलग-अलग क्रू और ठेकेदारों की जरूरत होती थी। सीमित एक्टिव यूजर्स होने के कारण कंपनी के लिए यह घाटे का सौदा बन गया था। गेमिंग के मोर्चे पर भी विज़न प्रो को कोई खास सफलता नहीं मिली। गेमर्स ने इस भारी-भरकम हेडसेट को अपनाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके कारण ऐपल ने इस हेडसेट के गेमिंग विंग पर ताला लगाना ही बेहतर समझा।</h5>
<h2>सिरी का पुनर्जन्म: LLM आर्किटेक्चर के लिए जरूरी था बदलाव</h2>
<h5>सिरी टीम में हुई छंटनी किसी विफलता का परिणाम नहीं, बल्कि तकनीक के अपग्रेडेशन का हिस्सा है। ऐपल अपने पारंपरिक वॉयस असिस्टेंट को पूरी तरह से विदा कर बड़े भाषाई मॉडल (Large Language Models) पर आधारित Siri AI को मुख्यधारा में ला रहा है। 9to5Mac की एक रिपोर्ट के अनुसार, नया सिरी एआई प्लेटफॉर्म पूरी तरह से नए तकनीकी आर्किटेक्चर पर तैयार किया गया है। इस नए सिस्टम को संभालने के लिए पुराने कौशल वाले इंजीनियरों की जगह गहरी एआई और मशीन लर्निंग विशेषज्ञता वाले पेशेवरों की आवश्यकता है। यही कारण है कि कंपनी ने पुराने ढांचे के कुछ पदों को समाप्त कर नई प्राथमिकताओं के हिसाब से एआई रोल्स (AI Roles) बनाने का निर्णय लिया है।</h5>
<h2>ऐपल का आधिकारिक बयान: &#8216;हम व्यवसाय को विकसित कर रहे हैं&#8217;</h2>
<h5>इस पूरे घटनाक्रम पर ऐपल के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। कंपनी ने इसे एक सामान्य व्यावसायिक प्रक्रिया बताते हुए कहा:&#8221;हम अपने उपयोगकर्ताओं को सर्वश्रेष्ठ अनुभव प्रदान करने के लिए अपने व्यवसाय को लगातार विकसित कर रहे हैं। इस बदलाव के तहत जहां एक तरफ कुछ नई भूमिकाएं (New Roles) सृजित की जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ मौजूदा पदों पर इसका सीमित असर पड़ेगा। हम इन कर्मचारियों द्वारा कंपनी में दिए गए अमूल्य योगदान के लिए उनके आभारी हैं। हम इस संक्रमण काल में उन्हें पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें ऐपल के भीतर ही अन्य पदों के लिए आवेदन करने के अवसर भी शामिल हैं।&#8221; कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं, उन्हें तुरंत बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया है, बल्कि उन्हें आंतरिक ट्रांसफर पोर्टल के जरिए कंपनी के भीतर चल रहे अन्य एआई या हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स में खाली पदों पर आवेदन करने के लिए प्राथमिकता दी जा रही है।</h5>
<h2>भविष्य की रणनीति: मेटा को टक्कर देने के लिए &#8216;स्मार्ट ग्लासेस&#8217; पर दांव</h2>
<h5>उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि विज़न प्रो से ध्यान हटाकर ऐपल अब मेटा (Meta) के स्मार्ट ग्लासेस की सफलता से सीख ले रहा है। भारी-भरकम और महंगे हेडसेट के बजाय लोग रोजमर्रा की जिंदगी में पहनने योग्य हल्के चश्मों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐपल की आगामी योजनाओं में निम्नलिखित बदलाव देखने को मिल सकते हैं।</h5>
<h5>स्मार्ट ग्लासेस पर फोकस: ऐपल का पूरा ध्यान अब हल्के वजन वाले स्मार्ट ग्लासेस के विकास पर है, जो एआई फीचर्स से लैस होंगे लेकिन उनमें विज़न प्रो जैसी जटिल इमर्सिव वीडियो या गेमिंग तकनीक नहीं होगी।</h5>
<h5>विज़न प्रो का भविष्य: कंपनी ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि विज़न प्रो प्रोजेक्ट और विज़न ओएस (visionOS) को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा है। हालांकि, अब किसी नए विज़न प्रो मॉडल के वर्ष 2028 से पहले आने की कोई उम्मीद नहीं है।</h5>
<h5>इन-हाउस के बजाय आउटसोर्सिंग: इमर्सिव वीडियो कंटेंट के लिए अब ऐपल खुद पैसा बहाने के बजाय बाहरी स्टूडियो और थर्ड-पार्टी कंपनियों को कंटेंट बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।</h5>
<h2>वैश्विक मंदी और टेक सेक्टर का हाल</h2>
<h5>देखा जाए तो ऐपल ने कोरोना महामारी के बाद से बड़े पैमाने पर छंटनी करने से खुद को काफी हद तक बचाए रखा था, जबकि उसकी प्रतिद्वंदी कंपनियों जैसे गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। लेकिन बदलते तकनीकी परिदृश्य (विशेषकर जेनरेटिव एआई के उभार) और वैश्विक बाजारों में हार्डवेयर उपकरणों की उत्पादन लागत बढ़ने के कारण अब ऐपल को भी कड़े फैसले लेने पड़ रहे हैं। हाल ही में <a href="https://thecsrjournal.in/apple-hikes-prices-macbooks-ipads-globally-blames-ai-rising-chip-costs-hindi">AI चिप्स की भारी मांग</a> के कारण मेमोरी शॉर्टेज की समस्या पैदा हुई है, जिससे आईफोन और मैकबुक बनाने की लागत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।</h5>
<h2>AI की ओर बढ़ती टेक्नॉलजी</h2>
<h5>ऐपल द्वारा की गई यह छंटनी संख्या के मामले में भले ही छोटी (200 लोग) दिखाई दे, लेकिन रणनीतिक रूप से यह बहुत बड़ी है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि ट्रिलियन-डॉलर क्लब की यह कंपनी अब केवल उन तकनीकों पर पैसा लगाएगी जो भविष्य में सीधे तौर पर एआई और उपभोक्ता अनुकूल हार्डवेयर से जुड़ी हों। विज़न प्रो जैसी अत्यधिक महंगी और &#8216;नीश&#8217; (Niche) तकनीकों के दिन फिलहाल लदते दिखाई दे रहे हैं और पूरी टेक इंडस्ट्री अब व्यावहारिक एआई (Practical AI) की ओर मुड़ चुकी है।</h5>
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<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/apple-layoffs-iphone-maker-cuts-200-jobs-across-siri-vision-pro-teams-amid-ai-shift-hindi">Apple Layoffs: iPhone मेकर ने फिर की छंटनी, 200 लोगों की नौकरी पर खतरा</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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		<item>
		<title>सिर्फ 1 साल की प्रैक्टिस से बन सकेंगे सिविल जज, सुप्रीम कोर्ट ने तय किया थ्री-टियर फॉर्मूला</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/supreme-court-cuts-civil-judge-practice-mandate-to-1-year-introduces-new-three-tier-entry-model-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 07:33:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[Law & Judiciary]]></category>
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		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Civil Judge Practice]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अब सिविल जज बनने के लिए 1 साल की प्रैक्टिस जरूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने देश में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की सीधी भर्ती प्रक्रिया में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए वकालत के अनिवार्य अनुभव को 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया है। 21 अगस्त 2026 को देश के मुख्य [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/supreme-court-cuts-civil-judge-practice-mandate-to-1-year-introduces-new-three-tier-entry-model-hindi">सिर्फ 1 साल की प्रैक्टिस से बन सकेंगे सिविल जज, सुप्रीम कोर्ट ने तय किया थ्री-टियर फॉर्मूला</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2>अब सिविल जज बनने के लिए 1 साल की प्रैक्टिस जरूरी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला</h2>
<h5>सुप्रीम कोर्ट ने देश में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की सीधी भर्ती प्रक्रिया में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए वकालत के अनिवार्य अनुभव को 3 साल से घटाकर 1 साल कर दिया है। 21 अगस्त 2026 को देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत से यह बड़ा फैसला सुनाया। न्यायालय ने मई 2025 के अपने ही पूर्व आदेश में संशोधन किया, जिसने नए विधि स्नातकों (लॉ ग्रेजुएट्स) के लिए बिना अदालती अनुभव के जज बनने के रास्ते बंद कर दिए थे। शीर्ष अदालत के इस नए फॉर्मूले के तहत अब सिविल जज बनने के लिए 1 वर्ष की वकालत (प्रैक्टिस) + 1 वर्ष की न्यायिक अकादमी ट्रेनिंग + 1 वर्ष की क्लर्कशिप का नया त्रिकोणीय ढांचा पूरे देश में लागू होगा।</h5>
<h2>सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला</h2>
<h5>देश की न्यायपालिका के सबसे निचले पायदान यानी अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक युगांतरकारी और संतुलित फैसला सुनाया है। न्यायालय ने देश भर के लाखों न्यायिक सेवा अभ्यर्थियों (Judiciary Aspirants) को बड़ी राहत देते हुए वकालत के अनिवार्य अनुभव की अवधि को 3 साल से घटाकर सिर्फ 1 साल करने का आदेश दिया है। <a href="https://thecsrjournal.in/appoint-judges-without-delay-cji-surya-kant-writes-to-high-courts-hindi">मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत</a>, जस्टिस ए. जी. मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की तीन सदस्यीय पीठ ने पुनर्विचार याचिकाओं (Review Petitions) पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय 2:1 के बहुमत से पारित किया। पीठ के बहुमत के फैसले में कहा गया कि बार (Bar) में तीन साल की पारंपरिक वकालत ही अदालती कामकाज का व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का एकमात्र जरिया नहीं है। युवा वकीलों को राहत देने के साथ ही कोर्ट ने न्यायिक गुणवत्ता और व्यावहारिक समझ सुनिश्चित करने के लिए चयन के बाद दो साल का एक नया व्यावहारिक ढांचा (ट्रेनिंग और क्लर्कशिप) भी अनिवार्य कर दिया है।</h5>
<h2>फैसले की मुख्य बातें और नया &#8216;थ्री-टियर&#8217; मॉडल</h2>
<h5>सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित संशोधित नियम के तहत अब एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा में नियमित नियुक्ति के लिए एक नया त्रि-स्तरीय फॉर्मूला तय किया गया है।</h5>
<h5>1 वर्ष की वकालत: परीक्षा में बैठने से पहले उम्मीदवार के पास बार काउंसिल में पंजीकृत वकील के रूप में कम से कम 1 वर्ष की सक्रिय और सत्यापित वकालत का अनुभव होना चाहिए।</h5>
<h5>1 वर्ष की सघन ट्रेनिंग: परीक्षा पास करने के बाद चयनित उम्मीदवार को सीधे जज की कुर्सी नहीं मिलेगी। उन्हें संबंधित राज्य की न्यायिक अकादमी (State Judicial Academy) में 1 वर्ष का कड़ा प्रशिक्षण लेना होगा।</h5>
<h5>1 वर्ष की क्लर्कशिप: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 1 वर्ष की &#8216;स्ट्रक्चर्ड लॉ क्लर्कशिप&#8217; करनी होगी, जिसमें 6 महीने किसी जिला एवं सत्र न्यायाधीश (District Judge) के अधीन और शेष 6 महीने हाई कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश (Sitting High Court Judge) के साथ रहकर काम की बारीकियां सीखनी होंगी।</h5>
<h2>31 मार्च 2027 तक &#8216;ट्रांजिशन पीरियड&#8217;: नए लॉ ग्रेजुएट्स को विशेष छूट</h2>
<h5>न्यायालय ने विधि स्नातकों के हितों की रक्षा के लिए एक &#8216;संक्रमणकालीन चरण&#8217; (Transitional Phase) या विशेष छूट अवधि की घोषणा की है। 20 मई 2025 (मूल फैसले की तारीख) से लेकर 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाले सभी भर्ती विज्ञापनों और परीक्षाओं के लिए उम्मीदवारों को वकालत के पूर्व अनुभव से पूरी तरह छूट दी गई है। अदालत ने कहा कि चूंकि मई 2025 के फैसले के बाद एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, इसलिए संक्रमण काल में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को &#8216;डीम्ड&#8217; (माना गया) रूप से 1 वर्ष की वकालत का अनुभव प्राप्त माना जाएगा और उन्हें कोई वकालत प्रमाण पत्र (Certificate of Practice) देने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, इस अवधि में बिना अनुभव के चयनित होने वाले उम्मीदवारों को सीधे नियमित जज नहीं बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें &#8216;प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी&#8217; (Trainee Judicial Officer) के रूप में नियुक्त कर उपर्युक्त दो वर्षीय प्रशिक्षण (एकेडमी ट्रेनिंग और क्लर्कशिप) से गुजरना होगा।</h5>
<h2>1 अप्रैल 2027 से पूर्ण रूप से लागू होगा नियम</h2>
<h5>सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद विज्ञापित होने वाली सभी सिविल जज भर्ती परीक्षाओं के लिए आवेदन करते समय उम्मीदवारों के पास कम से कम 1 वर्ष की वास्तविक और सत्यापित वकालत (Active Legal Practice) का होना अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य बार काउंसिल या संबंधित बार एसोसिएशन द्वारा जारी वकालत प्रमाण पत्र की जांच की जाएगी। परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी उन्हें 1 वर्ष की एकेडमी ट्रेनिंग और 1 वर्ष की क्लर्कशिप पूरी करनी होगी।</h5>
<h2>मानदेय और मूल्यांकन प्रक्रिया</h2>
<h5>ट्रेनिंग और क्लर्कशिप की दो वर्षीय अवधि के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को वित्तीय तंगी न हो, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष निर्देश दिए हैं।</h5>
<h5>50% मानदेय: दोनों वर्षों (ट्रेनिंग और क्लर्कशिप) के दौरान प्रशिक्षुओं को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) को मिलने वाले कुल पारिश्रमिक का 50 प्रतिशत मानदेय (Emoluments) और अकादमी की सभी सुविधाएं मिलेंगी।</h5>
<h5>हाई कोर्ट जज की रिपोर्ट: क्लर्कशिप के अंत में संबंधित हाई कोर्ट के पर्यवेक्षक न्यायाधीश अभ्यर्थी के कार्य और व्यवहार पर एक विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट सौंपेंगे। यदि यह रिपोर्ट संतोषजनक और अनुकूल पाई जाती है, तभी उम्मीदवार को पूर्ण वेतनमान और सेवा लाभों के साथ नियमित सिविल जज के रूप में नियुक्त किया जाएगा।</h5>
<h2>अपने ही पुराने फैसलों में क्यों करना पड़ा संशोधन?</h2>
<h5>भारतीय न्यायिक इतिहास में सिविल जज की पात्रता को लेकर लंबे समय से खींचतान चलती आ रही है-</h5>
<h5>1993 का फैसला: कोर्ट ने सबसे पहले जजों की अपरिपक्वता दूर करने के लिए 3 साल की वकालत अनिवार्य की थी।</h5>
<h5>2002 का ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन मामला: इस फैसले में कोर्ट ने 3 साल की शर्त हटा दी ताकि सबसे बेहतरीन युवा टैलेंट को सीधे न्यायपालिका की ओर आकर्षित किया जा सके। इसके बाद फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स सीधे परीक्षा देकर जज बनने लगे।</h5>
<h5>मई 2025 का आदेश: लगातार 20 वर्षों के अनुभव के बाद हाई कोर्ट्स की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने पाया कि बिना किसी अदालती अनुभव के सीधे जज की कुर्सी पर बैठने वाले युवाओं को व्यावहारिक कानून, गवाहों के परीक्षण और कोर्ट मैनेजमेंट में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति जैसे गंभीर विषयों पर अपरिपक्व फैसलों की शिकायतों के बाद मई 2025 में 3 साल की वकालत को दोबारा बहाल कर दिया गया।</h5>
<h5>अगस्त 2026 (मौजूदा संशोधन): मई 2025 के फैसले के खिलाफ छात्र संगठनों और महिला उम्मीदवारों ने कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। दलील दी गई कि 3 साल का अनिवार्य गैप मेधावी छात्रों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और विशेष रूप से महिला अभ्यर्थियों (जिन पर पारिवारिक व विवाह का दबाव होता है) को न्यायपालिका से दूर कर देगा। इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने &#8216;मध्यम मार्ग&#8217; निकाला और 3 साल की अवधि को घटाकर 1 साल कर दिया।</h5>
<h2>हाई कोर्ट्स को 3 महीने का अल्टीमेटम, 5 साल बाद होगी समीक्षा</h2>
<h5>सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) को आदेश दिया है कि वे इस फैसले के अनुरूप अगले तीन महीनों के भीतर अपनी संबंधित न्यायिक सेवा नियमावली (Judicial Service Rules) में आवश्यक संशोधन कर लें। शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया है कि यह नई व्यवस्था अगले 5 वर्षों के लिए प्रायोगिक तौर पर लागू रहेगी। पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद इस योजना के संचालन और इसके तहत नियुक्त हुए जजों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।</h5>
<h2>कानूनी विशेषज्ञों और अभ्यर्थियों की प्रतिक्रियाएं</h2>
<h5>सुप्रीम कोर्ट के इस संतुलित कदम की कानूनी गलियारों में व्यापक सराहना हो रही है। विधि विश्लेषकों का मानना है कि इससे जहां एक तरफ युवाओं को करियर की शुरुआत में ही जज बनने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ 2 साल की व्यावहारिक ट्रेनिंग से न्यायपालिका की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। महिला उम्मीदवारों ने इस फैसले का विशेष स्वागत किया है क्योंकि संक्रमण काल (मार्च 2027 तक) की छूट के कारण उनकी तैयारी प्रभावित नहीं होगी।</h5>
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		<item>
		<title>मार्क जुकरबर्ग ने आयरलैंड में खरीदा 19वीं सदी का आलीशान महल, कीमत जान उड़े होश</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/meta-ceo-mark-zuckerberg-acquires-30-million-euros-irish-castle-estate-near-dublin-headquarters-hindi</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 06:51:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[World]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Luxury Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Meta CEO Mark Zuckerberg]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मार्क जुकरबर्ग ने आयरलैंड में 336 करोड़ में खरीदा 200 साल पुराना ऐतिहासिक महल मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चान ने दक्षिण-पूर्वी आयरलैंड के काउंटी वॉटरफोर्ड में स्थित 19वीं सदी का ऐतिहासिक और बेहद आलीशान &#8216;स्ट्रैनकली कैसल&#8217; (Strancally Castle) खरीद लिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h2>मार्क जुकरबर्ग ने आयरलैंड में 336 करोड़ में खरीदा 200 साल पुराना ऐतिहासिक महल</h2>
<h5>मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग और उनकी पत्नी प्रिसिला चान ने दक्षिण-पूर्वी आयरलैंड के काउंटी वॉटरफोर्ड में स्थित 19वीं सदी का ऐतिहासिक और बेहद आलीशान &#8216;स्ट्रैनकली कैसल&#8217; (Strancally Castle) खरीद लिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑफ-मार्केट सौदे की अनुमानित कीमत 20 मिलियन यूरो से 30 मिलियन यूरो (लगभग ₹224 करोड़ से ₹336 करोड़ या 35 मिलियन डॉलर) के बीच आंकी गई है। यह भव्य महल ब्लैकवॉटर नदी (River Blackwater) के किनारे 440 एकड़ के विशाल और हरे-भरे एस्टेट में फैला हुआ है और मेटा के डबलिन स्थित अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर है।</h5>
<h2>अरबपतियों की कतार में जुकरबर्ग: आयरलैंड में खरीदा 200 साल पुराना गॉथिक साम्राज्य</h2>
<h5>मेटा के संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार मार्क जुकरबर्ग अब एक ऐतिहासिक किले के राजा बन गए हैं। तकनीक की आभासी दुनिया (Metaverse) पर राज करने वाले जुकरबर्ग ने अब वास्तविक दुनिया में यूरोपीय इतिहास के एक पन्ने को अपना ठिकाना बनाया है। उन्होंने अपनी पत्नी प्रिसिला चान के साथ मिलकर आयरलैंड के सुरम्य काउंटी वॉटरफोर्ड में स्थित ऐतिहासिक स्ट्रैनकली कैसल (Strancally Castle) का अधिग्रहण किया है। यद्यपि इस सौदे की आधिकारिक कीमत को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है और यह डील अभी तक आयरलैंड के आधिकारिक &#8216;प्रॉपर्टी प्राइस रजिस्टर&#8217; पर दर्ज नहीं हुई है, लेकिन रियल एस्टेट और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसकी कीमत 250 से 336 करोड़ रुपये के बीच होने का पुख्ता अनुमान है। जुकरबर्ग के प्रवक्ता ब्रायन बेकर ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा, &#8220;मार्क और उनका परिवार इस ऐतिहासिक धरोहर की देखभाल करने और इसे सहेजने के लिए बेहद उत्साहित हैं। वे भविष्य में आयरलैंड यात्रा के दौरान इस महल को अपने निवास के रूप में इस्तेमाल करेंगे।&#8221;</h5>
<h2>महल का इतिहास: टोरी सांसद के शाही ठाठ से टेक-विजेता के नाम</h2>
<h5>स्ट्रैनकली कैसल महज़ एक आलीशान बंगला नहीं, बल्कि जीवित इतिहास है। इस तीन मंजिला गॉथिक रिवाइवल (Gothic Revival style) शैली के महल का निर्माण साल 1827 से 1830 के बीच तत्कालीन टोरी सांसद (MP) जॉन कीली के लिए कराया गया था। इसे उस दौर के प्रसिद्ध वास्तुकार भाइयों जेम्स और जॉर्ज रिचर्ड पेन ने डिजाइन किया था।19वीं सदी के मध्य में इस महल की कीमत महज 61 पाउंड आंकी गई थी, जिसमें एक समृद्ध आर्ट गैलरी और एक विशाल पुस्तकालय शामिल था। पिछले 25 वर्षों से इस संपत्ति का स्वामित्व लंदन की प्रसिद्ध निजी निवेश फर्म &#8216;आरएबी कैपिटल&#8217; के सह-संस्थापक माइकल एलन-बकली और उनकी पत्नी जियानकार्ला के पास था। इस जोड़े ने खंडहर हो रहे किले को बचाने के लिए पिछले दो दशकों में इसका व्यापक आधुनिकीकरण और जीर्णोद्धार (Renovation) कराया है। संपत्ति बेचने के बाद भावुक बकली परिवार ने कहा कि उन्हें खुशी है कि जुकरबर्ग जैसा परिवार अब इस अद्वितीय और पवित्र स्थान की निरंतर देखभाल करेगा।</h5>
<h2>वास्तुकला और भव्यता: रसोई से डाइनिंग टेबल तक 5 मिनट का पैदल सफर</h2>
<h5>यह महल स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना है। सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) और चूना पत्थर की तराशी हुई नक्काशीदार दीवारों से निर्मित यह किला बाहर से जितना गंभीर और सुरक्षित दिखाई देता है, अंदर से उतना ही आलीशान है। मुख्य महल लगभग 16,000 वर्ग फुट के इनडोर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें तीन मंजिलों पर दर्जनों शाही कमरे, विशाल हॉलवे, और टावर रूम बने हैं। इस किले के विशाल आकार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके भीतर मुख्य रसोई (Kitchen) से लेकर डाइनिंग रूम (Dining Room) तक पहुँचने के लिए एक व्यक्ति को लगभग साढ़े चार से पांच मिनट तक पैदल चलना पड़ता है। किला केवल चारदीवारी तक सीमित नहीं है, इसके चारों तरफ 440 एकड़ की विशाल निजी भूमि है, जिसमें घने जंगल, निजी बगीचे, घुड़सवारी के ट्रैक और ब्लैकवॉटर नदी का लंबा खूबसूरत किनारा (Waterfront) शामिल है।</h5>
<h2>डबलिन मुख्यालय से रणनीतिक दूरी</h2>
<h5>जुकरबर्ग का यह फैसला केवल शौकिया नहीं, बल्कि व्यावसायिक रूप से भी बेहद व्यावहारिक माना जा रहा है। आयरलैंड की राजधानी डबलिन में मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप की मूल कंपनी) का अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय मुख्यालय स्थित है, जहां कंपनी करीब 1,500 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार देती है। इसके अलावा कॉर्क में कंपनी का वर्चुअल रियलिटी विंग और शहर के बाहर एक बड़ा डेटा सेंटर भी काम कर रहा है। यह नया महल मेटा के डबलिन हेडक्वार्टर से महज 200 किलोमीटर (लगभग 125 मील) दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। जब भी जुकरबर्ग अमेरिकी मुख्य भूमि से यूरोप में अपने कारोबार की समीक्षा करने या कॉर्पोरेट दौरों पर आएंगे, तो सुरक्षा और एकांत के लिहाज से यह महल उनका प्राथमिक बेस कैंप बनेगा।</h5>
<h2>आयरिश कैसल्स की तरफ क्यों आकर्षित हो रहे हैं दुनिया के अरबपति?</h2>
<h5>आयरलैंड में ऐतिहासिक किलों को खरीदने वाले जुकरबर्ग पहले रईस नहीं हैं। उनके इस कदम ने आयरलैंड में वैश्विक दिग्गजों द्वारा संपत्तियां खरीदने की होड़ को दोबारा चर्चा में ला दिया है।</h5>
<h5>जेम्स डायसन: प्रसिद्ध ब्रिटिश बिजनेसमैन और डायसन कंपनी के मालिक ने साल 2024 में इसी ब्लैकवॉटर घाटी में ऐतिहासिक &#8216;बैलीनाट्रे हाउस&#8217; खरीदा था।</h5>
<h5>जॉन कॉलिसन: प्रसिद्ध फिंटैक प्लेटफॉर्म &#8216;स्ट्राइप&#8217; (Stripe) के सह-संस्थापक ने साल 2021 में काउंटी लाओस में &#8216;एबी लीक्स&#8217; एस्टेट खरीदा था।</h5>
<h5>हॉलीवुड का क्रेज: ऑस्कर विजेता अभिनेता जेरेमी आयरन्स ने कॉर्क में 15वीं सदी का &#8216;किलकोए कैसल&#8217; खरीदा था, जबकि &#8216;द क्राउन&#8217; फेम डोमिनिक वेस्ट भी Limerick में &#8216;ग्लिन कैसल&#8217; को सहेज रहे हैं।</h5>
<h2>सुरक्षा और निजता की तलाश</h2>
<h5>विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्राचीन किलों को खरीदने के पीछे सबसे बड़ी वजह &#8216;परम गोपनीयता&#8217; (Ultimate Privacy) और सुरक्षा है। आज के दौर में जब वैश्विक टेक सिंडिकेट और उनकी नीतियों पर दुनिया भर में उंगलियां उठती हैं, तो ये अरबपति आधुनिक समाज की हलचल से दूर, अभेद्य दीवारों के पीछे अपना एकांत तलाशते हैं। हालांकि, कुछ स्थानीय निवासियों ने पूर्व में जुकरबर्ग द्वारा अन्य संपत्तियों (जैसे हवाई और पालो ऑल्टो बंकर प्रोजेक्ट) के पास सालों तक चलने वाले कंस्ट्रक्शन और शोर-शराबे को लेकर चिंता भी व्यक्त की है। बहरहाल, गॉथिक शैली का यह स्ट्रैनकली कैसल अब इतिहास के पन्नों से निकलकर सीधे आधुनिक तकनीकी साम्राज्य के राजा की गाथा का हिस्सा बन चुका है।</h5>
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